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कठुआ रेप मामला: कोर्ट ने छह अभियुक्तों को सजा दी

जम्मू-कश्मीर के कठुआ में जनवरी 2018 में आठ साल की एक बच्ची के साथ गैंग रेप, प्रताड़ना और हत्या मामले में छह दोषियों में से तीन को अदालत ने उम्र क़ैद की सज़ा दी है.

Jun 11, 2019 10:08 IST
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जम्मू-कश्मीर के कठुआ में जनवरी 2018 में आठ साल की एक बच्ची के साथ गैंग रेप, प्रताड़ना और हत्या मामले में छह दोषियों में से तीन को अदालत ने उम्र क़ैद की सज़ा दी है. पठानकोट की फास्ट ट्रैक अदालत ने राम को भी उम्र क़ैद की सज़ा सुनाई है. इसके साथ ही दो पुलिस वालों को भी पाँच-पाँच साल की क़ैद की सज़ा सुनाई है.

सांजी राम के अतिरिक्त परवेश कुमार, दो स्पेशल पुलिस ऑफिसर दीपक कुमार और सुरेंदर वर्मा, हेड कॉन्स्टेबल तिलक राज और सब-इंस्पेक्टर आनंद दत्ता को इस मामले में दोषी ठहराया गया है. पुलिसकर्मियों को सबूतों को मिटाने में दोषी ठहराया गया है. सांजी राम राजस्व विभाग के रिटायर्ड अधिकारी हैं, दीपक खजुरिया स्पेशल पुलिस ऑफिसर हैं. इन दोनों के अलावा सांजी राम के दोस्त परवेश कुमार को भी उम्र क़ैद की सज़ा दी गई है.

पंजाब के पठानकोट की एक विशेष अदालत ने कठुआ रेप मामले में फ़ैसला सुनाया था. कोर्ट ने मामले में सात में से छह अभियुक्तों को दोषी ठहराया था. कोर्ट से बाहर आए पीड़िता पक्ष के वकील मुबीन फ़ारूक़ी ने कहा कि विशाल जंगोत्रा को छोड़ कर सभी छह अभियुक्तों को दोषी ठहराया गया है.

मामले में आनंद दत्ता, दीपक खजुरिया, सांझी राम, तिलक राज, सुरिन्दर वर्मा और प्रवेश कुमार दोषी ठहराए गए हैं. कोर्ट ने विशाल जंगोत्रा को बरी कर दिया है. दीपक खजुरिया, प्रवेश कुमार और सांझी राम को 376डी, 302, 201, 363, 120बी, 343 और 376बी के तहत दोषी ठहराया गया है. वहीं तिलक राज, आनंद दत्ता और सुरिन्दर वर्मा को आईपीसी की धारा 201 के तहत दोषी ठहराया गया है.

कठुआ केस के बारे में:

जम्मू-कश्मीर पुलिस के आरोप पत्र के अनुसार, 10 जनवरी 2018 को अगवा की गई आठ साल की मासूम बच्ची को कठुआ जिले में एक गांव के मंदिर में बंधक बनाकर रखा गया और उससे सामूहिक दुष्कर्म किया गया. उसे जान से मारने से पहले उसे चार दिन तक बेहोश रखा गया. करीब एक हफ्ते बाद 17 जनवरी 2018 को जंगल में उस बच्ची की लाश मिली थी. मेडिकल रिपोर्ट में पता चला था कि बच्ची के साथ कई बार कई दिनों तक सामूहिक बलात्कार हुआ है. इस मामले को लेकर देशभर में प्रदर्शन हुए थे.

मामले की सुनवाई बंद कमरे में 03 जून 2019 को पूरी कर ली गई थी और फ़ैसला 10 जून 2019 को सुनाना तय हुआ था.

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मामले में कब क्या हुआ?

जम्मू और कश्मीर सरकार ने 23 जनवरी 2018 को मामले की जांच राज्य पुलिस की क्राइम ब्रांच को सौंपी थी. क्राइम ब्रांच ने 10 अप्रैल 2018 को इस मामले में कठुआ की एक अदालत में आरोप-पत्र दाख़िल किया था. अदालत ने आरोप-पत्र दाख़िल होने के बाद मामले की सुनवाई के लिए 18 अप्रैल 2018 की तारीख़ दी.

इस पूरी घटना के मुख्य अभियुक्त सांझी राम ने 05 अप्रैल 2018 को पुलिस के सामने आत्मसमर्पण कर दिया. सुप्रीम कोर्ट ने 16 अप्रैल 2018 को जम्मू और कश्मीर सरकार से इस बात का जवाब माँगा कि पीड़िता के परिवारवालों ने मामले के ट्रायल को राज्य से बाहर कराए जाने की मांग की है.

जम्मू से लगभग 100 किलोमीटर और कठुआ से 30 किलोमीटर दूर पड़ोसी राज्य पंजाब के पठानकोट में जिला एवं सत्र अदालत ने जून 2018 के पहले सप्ताह में इस मामले की रोजाना सुनवाई शुरू की थी. उच्चतम न्यायालय ने इस मामले की सुनवाई जम्मू कश्मीर से बाहर करने का आदेश दिया था.

उच्चतम न्यायालय ने मामले को 07 मई 2018 को कठुआ से पंजाब के पठानकोट में स्थानांतरित कर दिया था. मामले में 15 पन्नों की चार्जशीट दायर हुई थी. यहां सेशन जज तेजविंदर सिंह ने मामले की सुनवाई की जिनके नाम सबसे कम उम्र में सिविल जज बनने का रेकॉर्ड लिम्का बुक में दर्ज है.

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