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खादी को मिला एचएस कोड: जाने कैसे मिलेगा निर्यात को बढ़ावा?

वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय ने खादी उत्पादों के लिये अलग से एचएस कोड आबंटित किया है. केंद्र सरकार का यह कदम खादी निर्यात के क्षेत्र में एक नया अध्याय खोल सकता है. इससे पहले, भारत में खादी के पास अलग से एचएस कोड नहीं था.

Nov 8, 2019 09:37 IST
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केंद्र सरकार ने खादी उत्पादों के लिये निर्यात सुविधा को बेहतर करने हेतु अलग से एचएस (हार्मोनाइज्ड सिस्टम) कोड जारी किया है. केंद्र सरकार ने देश और विदेश में खादी की बिक्री, मांग, उत्पादन और खपत में बढ़ोतरी का स्तर बरकरार रखने हेतु विश्व में इसकी अलग पहचान के लिए जरूरी एचएस कोड दिलाने का फैसला किया था.

वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय ने खादी उत्पादों के लिये अलग से एचएस कोड आबंटित किया है. केंद्र सरकार का यह कदम खादी निर्यात के क्षेत्र में एक नया अध्याय खोल सकता है. इससे पहले, भारत में खादी के पास अलग से एचएस कोड नहीं था. खादी कपड़े के निर्यात के संबंध में संपूर्ण आंकड़े कपड़ा विभाग के तहत एक सामान्य कपड़े के रूप में आते थे.

एचएस कोड क्या है?

एचएस कोड (हार्मोनाइज्ड सिस्टम) एक अंतरराष्ट्रीय कोड होता है. इस कोड की स्वीकार्यता पूरी दुनिया में होती है. एचएस छह अंकों का एक पहचान कोड है. इसे विश्व सीमा शुल्क संगठन (डब्ल्यूसीओ) ने विकसित किया है. एचएस कोड से अब विदेशों में खपत को टेक्सटाइल से अलग चिन्हित किया जा सकेगा.

वर्तमान में, 200 से अधिक देश अंतरराष्ट्रीय व्यापार आंकड़ों के संग्रह के लिए एचएस कोड प्रणाली का उपयोग कर रहे हैं. अंतरराष्ट्रीय व्यापार में मौजूद 98 प्रतिशत से अधिक वस्तुओं को एचएस कोड के रूप में वर्गीकृत किया गया है.

एचएस कोड की प्रणाली न केवल सरकारों द्वारा उपयोग की जाती है, बल्कि इसका उपयोग अंतरराष्ट्रीय संगठन और निजी फर्म भी कर रहे हैं. एचएस कोड का उपयोग निगरानी, आंतरिक करों, व्यापार नीतियों, अद्यतन एवं अनुकूलित माल, माल टैरिफ, मूल्य की निगरानी, आर्थिक अनुसंधान और आर्थिक आंकड़ों की निगरानी हेतु किया जाता है.

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निर्यात को कैसे मिलेगा बढ़ावा?

अंतरराष्ट्रीय बाजार में खादी और ग्रामोद्योग उत्पादों की बड़ी मांग है क्योंकि इसका उत्पादन पर्यावरण के अनुकूल है. खादी एवं ग्रामोद्योग आयोग (केवीआईसी) सूक्ष्म, लघु एवं मझोले उद्यम (एमएसएमई) मंत्रालय के अधीन आता है. एचएस कोड अलग नहीं होने के कारण विदेशों में बिक्री की सटीक मात्रा का पता नहीं लग पाता था. अब, खादी उत्पादों को अलग से वर्गीकृत किया जा सकता है. इस कोड से अब न केवल निर्यात पर नजर रख सकेंगे बल्कि निर्यात रणनीति बनाने में भी सहायता मिलेगी.

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