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भारत में पशुधन की आबादी सात वर्षों में 4.6% की बढ़ोतरी

भारत में बीते पांच सालों में गायों की संख्या 18 प्रतिशत बढ़कर 14.51 करोड़ हो गई है. रिपोर्ट के अनुसार देश में भैंसों की संख्या इस दौरारन मात्र एक प्रतिशत बढ़ी है.

Oct 17, 2019 15:17 IST
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पशुपालन और डेयरी विभाग (DAHD) ने 16 अक्टूबर 2019 को पशुधन आबादी की जनगणना रिपोर्ट जारी की. आंकड़ों से पता चला कि भारत की पशुधन आबादी 2012 की तुलना में 4.6% से बढ़कर 53 करोड़ 57.8 लाख हो गई है. यह जानकारी केंद्रीय पशुपालन मंत्रालय द्वारा जारी 20वीं पशुगणना रिपोर्ट में दी गई. इस बार टैबलेट की सहायता से पशुगणना हुई है.

भारत में बीते पांच सालों में गायों की संख्या 18 प्रतिशत बढ़कर 14.51 करोड़ हो गई है. रिपोर्ट के अनुसार देश में भैंसों की संख्या इस दौरान मात्र एक प्रतिशत बढ़ी है. वहीं देश में मुर्गियों की कुल संख्या 85.18 करोड़ है. नवीनतम गणना के मुताबिक, बकरियों की संख्या 10 फीसदी बढ़कर 14.9 करोड़ हो गई है. रिपोर्ट के अनुसार, सुअर की संख्या 12 फीसदी घटकर 90.6 लाख है.

पशुधन जनसंख्या 2019

श्रेणी

जनसंख्या 2019

(मिलियन में)

जनसंख्या 2012

(मिलियन में)

वृद्धि %

मवेशी

192.49

190.90

0.83

भैंस

109.85

108.70

1.06

भेड़

74.26

65.07

14.13

बकरी

148.88

135.17

10.14

सुअर

9.06

10.29

-1203

मिथुन

0.38

0.30

26.66

याक

0.06

0.08

-25.00

घोड़े और टट्टू

0.34

0.63

-45.58

खच्चर

0.08

0.20

-57.09

गधा

0.12

0.32

-61.23

ऊंट

0.25

0.40

-37.05

कुल पशुधन

535.78

512.06

4.63

पशुधन जनगणना 2019

गोधन (गाय-बैल), भैंस, मिथुन और याक की संख्या साल 2012 की जनगणना की तुलना में 01 प्रतिशत बढ़कर 30 करोड़ 27.9 लाख हो गई. मिथुन अरुणाचल प्रदेश का राज्य पशु है.

रिपोर्ट के अनुसार देश में साल 2019 में गधों की संख्या 61 प्रतिशत घटकर 1,20,000 रह गई, जबकि ऊंटों की संख्या 37 प्रतिशत घटकर 2,50,000 रह गई है.

साल 2019 में कुक्कुट की संख्या करीब 17 प्रतिशत बढ़कर 85 करोड़ 18.1 लाख हो गई है.

पिछली गणना की तुलना में साल 2019 में स्वदेशी/गैर-विवरणी मादा मवेशियों की संख्या में 10 फीसदी की वृद्धि हुई है.

देश में साल 2019 में कुल घोड़े और टट्टू 3.4 लाख हैं, जो पिछली गणना के मुकाबले 45.6 फीसदी कम है.

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पशुधन की जनगणना विधि

पशुपालन और डेयरी विभाग ने कहा कि पशुधन की जनगणना हेतु 80,000 से अधिक लोगों को तैनात किया गया था. उन्होंने 27 करोड़ से अधिक घरों और गैर-परिवारों से डेटा एकत्र किया. टैब के माध्यम से इस बार पशुधन की जनगणना की गई थी.

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