इरोम शर्मिला ने सोलह वर्ष से जारी अनशन समाप्त किया

इरोम शर्मिला इम्फाल के जस्ट पीस फाउंडेशन नामक गैर सरकारी संगठन से जुड़कर भूख हड़ताल करती रहीं. इरोम मणिपुर में आफ़्सपा यानी सशस्त्र बल विशेषाधिकार अधिनियम के ख़िलाफ़ अनशन कर रही थीं जो राज्य में अभी भी जारी है.

Created On: Aug 10, 2016 10:17 ISTModified On: Aug 10, 2016 12:59 IST

मणिपुर की सामाजिक कार्यकर्ता इरोम शर्मिला ने बीते सोलह वर्षों से जारी अनशन 9 अगस्त 2016 को समाप्त कर दिया. इरोम ने करीब 4 बजकर 20 मिनट पर शहद पीकर समाप्त किया. इरोम मणिपुर में आफ़्सपा यानी सशस्त्र बल विशेषाधिकार अधिनियम के ख़िलाफ़ अनशन कर रही थीं जो राज्य में अभी भी जारी है.

  • शर्मिला इम्फाल के जस्ट पीस फाउंडेशन नामक गैर सरकारी संगठन से जुड़कर भूख हड़ताल करती रहीं.
  • अनशन समाप्त करने के बाद उन्होंने प्रदेश की राजनीति के हालात बदलने की इच्छा व्यक्त की और चुनाव लड़ने की घोषणा की.
  • इसके लिए उन्हें लगभग 20 निर्दलीय उम्मीदवारों की तलाश है.

इरोम शर्मिला के बारे में-

  • इरोम शर्मिला का पूरा नाम इरोम चानू शर्मिला है.
  • मणिपुर की मानवाधिकार कार्यकर्ता का जन्म 14 मार्च 1972 को हुआ.
  • वह पूर्वोत्तर राज्यों में लागू सशस्त्र बल विशेष शक्तियां अधिनियम, १९५८ को हटाने की मांग को लेकर लगभग १६ वर्षों से (4 नवम्बर 2000 से 9 अगस्त 2016) भूख हड़ताल पर रहीं.
  • नाक से लगी एक नली के जरिए उन्हें खाना दिया जाता था.
  • भूख हड़ताल के दौरान उनका ज्यादातर वक्त अस्पतालों में पुलिस की निगरानी में ही बीता.

शर्मिला की गिरफ्तारी-

  • भूख हड़ताल पर बैठने के तीन दिन बाद ही मणिपुर सरकार ने शर्मिला को आत्महत्या के प्रयास में गिरफ्तार कर लिया.
  • उन्हें सीजेएम कोर्ट से बेल भी मिली. इसके लिए 10 हजार रुपए का बॉन्ड भी भरना पड़ा.
  • नियमानुसार यह गिरफ्तारी एक साल से अधिक नहीं हो सकती अतः हर साल उन्हें रिहा करते ही दोबारा गिरफ्तार कर लिया जाता था.
  • पोरोपट के सरकारी अस्पताल के एक कमरे को उनके लिए अस्थायी जेल बना दिया गया था.
  • गिरफ्तारी के बाद उन्हें जबरन लिक्विड दिया जा रहा था.

पृष्ठभूमि-

  • इरोम ने अपनी भूख हड़ताल तब आरम्भ की थी जब 2 नवम्बर को मणिपुर की राजधानी इंफाल के मालोम में असम राइफल्स के जवानों के हाथों 10 बेगुनाह लोग मारे गए.
  • उन्होंने 4 नवम्बर 2000 को अपना अनशन शुरू किया था.
  • उन्होंने अनशन इस आशा के साथ आरम्भ किया था कि 1958 से अरुणाचल प्रदेश, मेघालय, मणिपुर, असम, नगालैंड, मिजोरम और त्रिपुरा में और 1990 से जम्मू-कश्मीर में लागू आर्म्ड फोर्स स्पेशल पावर एक्ट (एएफएसपीए) को हटवाने में वह सफल हो जाएंगी.
  • उन्होंने इसके लिए महात्मा गांधी की नीतियों का सहारा लिया.

एएफएसपीए के बारे में-

पूर्वोत्तर राज्यों के विभिन्न हिस्सों में लागू इस कानून के तहत सुरक्षा बलों को किसी को भी देखते ही गोली मारने या बिना वारंट के गिरफ्तार करने का अधिकार है.
 
अनशन का अंत-

  • जुलाई 2016 में उन्होंने अचानक घोषणा की कि वे शीघ्र ही अपना अनशन समाप्त कर देंगी.
  • उन्होंने अपने इस निर्णय का कारण आम जनता की उनके संघर्ष के प्रति बेरुखी बतायी.
  • इरोम ने कहा कि वे अभी अपनी मां से नहीं मिलेंगी क्योंकि उनका मकसद अभी पूरा नहीं हुआ है.
  • भूख हड़ताल समाप्ति के बाद इरोम के रहने के लिए 7 घरों और एक मेकशिफ्ट कैम्प का प्रस्ताव सरकार ने उनके समक्ष रखा है.

 

 

 

 

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