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समुद्री ऊर्जा को अक्षय ऊर्जा की श्रेणी में लाने के प्रस्ताव को मंजूरी

इस प्रस्ताव के बाद ज्वार भाटा, तरंगों जैसे समुद्री ऊर्जा के विभिन्न स्रोतों से उत्पादित बिजली अब अक्षय ऊर्जा की श्रेणी में आएगी. सरकार के इस महत्वपूर्ण कदम से देश में समुद्री ऊर्जा के उपयोग को गति मिलेगी. 

Aug 23, 2019 15:30 IST
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केंद्रीय विद्युत मंत्री आर के सिंह ने 22 अगस्त 2019 को समुद्री ऊर्जा को अक्षय ऊर्जा की श्रेणी में लाने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है. इस प्रस्ताव के बाद ज्वार भाटा, तरंगों जैसे समुद्री ऊर्जा के विभिन्न स्रोतों से उत्पादित बिजली अब अक्षय ऊर्जा की श्रेणी में आएगी.

यह जानकारी नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय (एमएनआरई) ने 22 अगस्त 2019 को जारी बयान में दी. सरकार के इस महत्वपूर्ण कदम से देश में समुद्री ऊर्जा के उपयोग को गति मिलेगी. हालांकि, फिलहाल देश में समुद्री ऊर्जा की कोई स्थापित क्षमता नहीं है.

मुख्य बिंदु:

• नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय के अनुसार ज्वारीय, तरंग, ओसिएन थर्मल एनर्जी कन्वर्जन (ओटीईसी) इत्यादि जैसे समुद्री ऊर्जा के विभिन्न स्रोतों से उत्पादित बिजली अक्षय ऊर्जा की श्रेणी में आएगी.

• यह गैर-सौर अक्षय ऊर्जा खरीद बाध्यता (आरपीओ) के तहत आएगा.

• केंद्र सरकार ने साल 2022 तक अक्षय ऊर्जा उत्पादन क्षमता बढ़ाकर 1,75,000 मेगावाट करने का लक्ष्य रखा है.

• नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय (एमएनआरई) की वेबसाइट के मुताबिक देश में ज्वारीय ऊर्जा के क्षेत्र में संभावित उत्पादन क्षमता लगभग 12,455 मेगावाट है. इसके लिये खंबात एवं कच्छ जैसे क्षेत्रों को चिन्हित किया गया है.

• देश के तटवर्ती क्षेत्रों में तरंग ऊर्जा की संभावित उत्पादन क्षमता लगभग 40,000 मेगावाट है जबकि ओटीईसी की संभावित क्षमता सैद्धांतिक तौर पर लगभग 180,000 मेगावाट आंकी गयी है.

• विशेषज्ञों के अनुसार समुद्री ऊर्जा के उपयोग के रास्ते में प्रौद्योगिकी एक महत्वपूर्ण समस्या है.

अक्षय ऊर्जा क्या है और इसका महत्व:

अक्षय उर्जा में वे सारी उर्जा शामिल हैं जो प्रदूषणकारक नहीं हैं. अक्षय उर्जा के स्रोत का क्षय नहीं होता. ये सौर ऊर्जा, पवन ऊर्जा, जलविद्युत उर्जा, ज्वार-भाटा से प्राप्त उर्जा, बायोमास, जैव इंधन आदि अक्षय उर्जा के कुछ उदाहरण हैं.

अक्षय ऊर्जा आधुनिक जीवन शैली का अविभाज्य अंग बन गयी है. अक्षय ऊर्जा स्रोत भारी मात्रा में उपलब्ध होने के साथ साथ सुरक्षित और भरोसेमंद हैं. भारत में अपार मात्रा में जैवीय पदार्थ, सौर ऊर्जा, पवन ऊर्जा, बायोगैस तथा लघु पनबिजली उत्पादक स्रोत हैं.

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