मानसिक स्वास्थ्य देखभाल विधेयक:एक नज़र

 

लोकसभा ने मानसिक स्वास्थ्य देखभाल बिल 2016 मार्च में पास किआ. यह बिल भारत में मानसिक रोगों के इलाज तथा देखभाल में  काफी महत्वपूर्ण बदलाव लायेगा. हमने इस लेख में इस पूरे बिल का विश्लेषण  किआ है.

Created On: Apr 11, 2017 16:08 ISTModified On: Apr 11, 2017 17:57 IST

मानसिक स्वास्थ्य देखभाल बिल हाल ही में संसद ने मानसिक स्वास्थ्य बिल 2016 पास किया. यह बिल मानसिक बीमारी से ग्रस्त लोगो को मानसिक स्वास्थ्य की देखभाल तथा सेवाएँ मुहैय्या कराने की गारंटी देता है.
यह बिल यह भी सुनिश्चित करता है कि किसी भी मानसिक रोगी के साथ कोई भेदभाव न हो तथा उसे प्रतिष्ठा के साथ जीने का अधिकार मिल सके. इसके अलावा यह बिल आत्महत्या को भी अपराध मुक्त करता है. यह बिल राज्यसभा द्वारा पिछले साल अगस्त में पास किया गया जबकि लोकसभा ने इसे इस साल मार्च में पास किआ.

भारत में मानसिक रोके की जनसँख्या

अभी तक भारत में मानसिक रोगियों की जनसँख्या के बारे में कोई आधिकारिक डाटा नहीं है.
यह अनुमानित है कि 2005 तक भारत में 6-7% जनसँख्या मानसिक विकार का शिकार थी तथा  1-2% जनसँख्या गंभीर मानसिक विकारों जैसे द्विध्रुवीय विकार तथा से ग्रस्त थी.
लगभग 5% जनसँख्या सामान्य मानसिक विकारों जैसे अवसाद तथा चिंता से ग्रस्त है. लेकिन यही भी हो सकता है कि मानसिक रोगियों कि संख्या इससे ज्यादा हो क्योकि भारत में मस्निक रोगों को सामाजिक कलंक की तरह देखा जाता है इसलिए यह बीमारिया अज्ञात ही रह जाती हैं.
विश्व स्वास्थ्य संगठन ने हाल ही में यह माना है कि चार में से हर एक इन्सान कभी न कभी अपने जीवन में मानसिक बीमारियों से गुजरता है.

इस बिल के प्रावधान

1.मानसिक बीमारी कि परिभाषा

मानसिक स्वास्थ्य बिल के अनुसार सोच, मनोदशा, अनुभूति, तथा  याददाश्त में उत्पन्न विकार जो जीवन के सामान्य कामो जैसे  निर्णय लेने, यथार्थ को पहचानने में में कठिनाई उत्पन्न करते हैं मानसिक रोगों के अंतर्गत आते हैं तथा मदिरा तथा  ड्रग्स  कि वजेह से उत्पन्न मानसिक विकार भी मानसिक रोगों कि श्रेणी में रखा गया है. बिल यह मानसिक बीमारियों कि पहचान के लिए राष्ट्रीय तथा अन्तराष्ट्रीय मानकों की सिफारिश करता है.

2. मानसिक रोग से ग्रस्त रोगियों के अधिकार

यह बिल यह सुनिश्चित करता है कि हर एक नागरिक को सरकार द्वारा मानसिक स्वास्थ्य सेवाओ तथा इसके उपचार की सुविधाए सरकार से मिलें. बिल गरीबी रेखा से नीचे जीवन यापन करने वाले  मानसिक रोगियों के लिए मुफ्त उपचार कि सुविधा को भी सुनिश्चित करता है.
यह बिल यह सुनिश्चित करता है कि किसी भी मानसिक रोगी के साथ किसी भी तरह का भेदभाव न हो तथा उन्हें प्रतिष्ठा के साथ जीवन जीने का माहौल मिल सके.
बिल यह भी सुनिश्चित करता है कि मानसिक रोगियों के साथ लिंग, जाति, सामाजिक श्रेणी , धर्म तथा सेक्सुअल रुझान के आधार पर कोई भेदभाव नहीं होगा.
यह बिल मानसिक स्वास्थ्य सेवाओ को हर जिले में पहुचाने कि पहल करता है.
यह बिल मानसिक रोगियों को रोग,उपचार तथा मानसिक स्वास्थ्य को ले कर के गोपनीयता रखने का अधिकार देता है.
. यह बिल बिना मनोरोगी  की इच्छा के उससे सम्बंधित किसी तरह कि सूचना तथा तस्वीर  मडिया में साझा करने को पाबंदित करता है.
यह बिल मानसिक रोगी को इलाज के लिए अस्पताल , तथा  उपचार से सम्बंधित निर्णय लेने का अधिकार देता है.
यह बिल मानसिक रोगी को अमानवीय तथा अपमानजनक उपचार से सुरक्षा का अधिकार देता है.

3. अग्रिम निर्देश

मानसिक स्वास्थ्य बिल मानसिक रोगी को अपने इलाज, इलाज  के लिए अस्पताल तथा अपने प्रतिनिधि का चुनाव करने हेतु अग्रिम निर्देश देने का अधिकार देता है. यह अग्रिम निर्देश किसी मानसिक चिकित्सक या मानसिक स्वस्थ बोर्ड द्वारा पंजीकृत किया जायेगा.
यह बिल मानसिक रोगी को यह अधिकार भी देता है कि वह अपना चिकित्सक, अपना देखभाल करने वाले प्रतिनिधि को जरूरत पड़ने पर  बदल सके.

4. मानसिक स्वास्थ्य सत्ता

यह बिल सरकार को यह अधिकार देता है कि वह हर राष्ट्रीय स्तर में केंट्रीय मासिक स्वास्थ्य  नियोग तथा राज्यीय स्तर में हर एक राज्य में राज्यीय मानसिक स्वास्थ्य नियोग कि स्थापना करे. हर एक मानसिक नर्स, मानसिक संस्थान, मनोविज्ञानी , मनोचिकित्सक तथा मनोचिकित्सा संबंधी सामाजिक कार्यकर्ताओं को इन नियोगो से अपना पंजीकरण करवाना अनिवार्य होगा.
इन निकायों कि जिम्मेदारियां निम्नलिखित हैं:

(i) ये  नियोग सभी मानसिक स्वास्थ्य केन्द्रों कि निगरानी तथा पञ्जीकरण करेंगे
(ii) ये नियोग मानसिक स्वास्थ्य से जुड़े प्रतिष्ठानों में सेवाओ से जुडी गुणवत्ता सम्बंधित मानको का विकास करेंगे
(iii) ये नियोग मानसिक स्वास्थ्य पेशेवरो का पंजीकरण करेंगे.
(iv) ये नियोग क़ानून स्थापित करने वाली संस्थाओं के ऑफिसर्स को इस अधिनियम के बारे में ट्रेनिंग देगी.
(v) ये नियोग सेवाओ में होने वाली त्रुटियों का ध्यान रखेंगे.

5. मानसिक स्वास्थ्य उपचार

यह बिल अस्पताल में दाखिले,उपचार,तथा अस्पताल से रिहाई कि प्रक्रिया कि उल्लिखित करता है.
यह बिल यह स्पष्ट करता है कि कोई भी मानसिक स्वस्थ्य पेशेवर, जायज निर्देशों का पालन करते हुए, किसी भी आकस्मिक घटना के लिए उत्तरदायी नहीं होगा.
यह बिल बिना निश्चेतना के मनोरोगियो पर की जाने वाली विद्युत् चिकित्सा पर पाबंदी लगाता है.यह बिल विद्युत् आक्षेपी चिकित्सा पर भी पाबंदी लगता है.
यह बिल यह स्पष्ट करता है कि किसी भी मनोरोगी कि नसबंदी नहीं की जाएगी,

यह बिल यह सुनिश्चित करता है कि मानसिक रोगी को किसी भी हालत में जंजीरों से नहीं बंधा जायेगा.
यह बिल यह भी सुनिश्चित करता है कि मानसिक रोगियों को किसी भी तरह का अकेलापन तथा एकांत कारावास ना हो.

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