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पेयजल में मौजूद माइक्रोप्लास्टिक मानव स्वास्थ्य के लिये हानिकारक नहीं: WHO रिपोर्ट

विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा इस रिपोर्ट में कहा गया है कि यदि वर्तमान संदर्भ में बात करें तो पेयजल में माइक्रोप्लास्टिक्स की उपस्थिति के आँकड़े काफी सीमित हैं.

Aug 25, 2019 12:25 IST

विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) द्वारा हाल ही में एक रिपोर्ट जारी की गई है जिसके अनुसार पेयजल में मौजूद माइक्रोप्लास्टिक मानव स्वास्थ्य के लिए खतरा उत्पन्न नहीं करते हैं. WHO की इस रिपोर्ट का कहना है कि माइक्रोप्लास्टिक का वर्तमान स्तर मानव स्वास्थ्य के लिये हानिकारक नहीं है परंतु भविष्य में इसके संभावित खतरों पर और अधिक अनुसंधान (Research) करने की आवश्यकता है.

विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा इस रिपोर्ट में कहा गया है कि यदि वर्तमान संदर्भ में बात करें तो पेयजल में माइक्रोप्लास्टिक्स की उपस्थिति के आँकड़े काफी सीमित हैं जिनके आधार पर सटीक विश्लेषण करना मुश्किल है. साथ ही. पेयजल में पाई गई माइक्रोप्लास्टिक को मानव स्वास्थ्य पर प्रभाव डालने की स्थिति से काफी छोटा पाया गया.

मुख्य बिंदु

• विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार मानव शरीर 150 माइक्रोमीटर से बड़े आकार के माइक्रोप्लास्टिक को अवशोषित नहीं कर सकता परंतु मानव शरीर सूक्ष्म आकार के प्लास्टिक सहित अति सूक्ष्म प्लास्टिक कणों को अवश्य अवशोषित कर सकता है. 
• WHO ने यह भी कहा है कि इस संदर्भ में भी बहुत सीमित आँकड़े ही उपलब्ध है और वर्तमान में प्लास्टिक प्रदूषण में जारी वृद्धि को रोकने पर अधिक ध्यान केंद्रित किया जाना चाहिये.
• इस रिपोर्ट के अनुसार यदि पर्यावरण में प्लास्टिक प्रसार की वर्तमान दर बनी रहती है तो अगली एक सदी में माइक्रोप्लास्टिक जलीय परितंत्र के लिये संकट उत्पन्न कर सकता है जिस कारण मानव तक माइक्रोप्लास्टिक की पहुँच की संभावना में वृद्धि होने की संभावना है.
• WHO की इस रिपोर्ट में अपशिष्ट जल उपचार का सुझाव दिया गया है जो निस्पंदन का उपयोग कर पानी मैं मौजूद 90% से अधिक माइक्रोप्लास्टिक्स को हटा सके.
• इससे डायरिया (Diarrhoeal Diseases) जैसे जल जनित रोगों के लिये उत्तरदायी सूक्ष्म रोगजनकों के साथ-साथ पानी से रसायनों को दूर कर दूषित पेयजल की समस्या का भी समाधान हो सकेगा.

माइक्रोप्लास्टिक क्या होता है?

माइक्रोप्लास्टिक्स पाँच मिलीमीटर से भी छोटे आकर के प्लास्टिक के टुकड़े होते हैं. जल निकायों में इनका प्रवेश अन्य प्रदूषकों के वाहक के रूप में कार्य करता है. ये खाद्य श्रृंखला में प्रवेश कर कैंसरजन्य रासायनिक यौगिकों के वाहक बनते हैं. प्रशांत, अटलांटिक और हिंद महासागर के पानी में काफी अधिक मात्रा में माइक्रोप्लास्टिक्स पाए गए हैं.

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