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मोदी-ट्रम्प वार्ता: सारगर्भित महत्व

ट्रम्प ने भारतीय प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी की मेजबानी करते हुए कहा कि अमेरिका दोनों देशों में रोजगार पैदा करने तथा एक 'निष्पक्ष और पारस्परिक' व्यापार संबंध बनाने की दिशा में काम कर रहा है. ट्रम्प ने भारत और अमेरिका को वैश्विक विकास का इंजन बताया, वहीं भारतीय प्रधान मंत्री मोदी ने कहा कि भारत अपने सामाजिक और आर्थिक परिवर्तन से जुड़े कार्यक्रमों के लिए अमेरिका को अपना प्राथमिक भागीदार मानता है.

Jul 14, 2017 12:25 IST
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26 जून को वाशिंगटन, डीसी में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड जे. ट्रम्प ने भारतीय प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी की मेजबानी करते हुए उनसे फेस टू फेस बात की.
प्रधान मंत्री बनने के बाद से यह मोदी का संयुक्त राज्य अमेरिका का पांचवां दौरा था.ट्रंप की भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ यह मुलाकात स्पेशल है क्योंकि ट्रंप अपने पहले के दो राष्टपतियों के पूर्वाग्रह से ऊपर उठकर इस बैठक में शामिल हुए .

Modi's Trump cardट्रम्प ने कहा कि संयुक्त राज्य अमेरिका दोनों देशों में रोजगार पैदा करने तथा एक 'निष्पक्ष और पारस्परिक' व्यापार संबंध बनाने की दिशा में काम कर रहा है. ट्रम्प ने भारत और अमेरिका को वैश्विक विकास का इंजन कहा. वहीं भारतीय प्रधान मंत्री मोदी ने कहा कि भारत अपने सामाजिक और आर्थिक परिवर्तन से जुड़े कार्यक्रमों के लिए अमेरिका को अपना प्राथमिक भागीदार मानता है.

इस बैठक के अन्य मुख्य मुद्दे आतंकवाद, उत्तर कोरिया, पाकिस्तान, आर्थिक सहयोग, रक्षा सौदा और भारत में निवेश आदि थे. अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रम्प ने व्हाईट हाउस में भारत से जुड़े अपने  "ट्रू फ्रेंड " अभियान को पूरा करने का वादा किया.

यहाँ हमने मोदी और ट्रंप के बीच हुए बैठक की कुछ महत्वपूर्ण बातों का वर्णन किया है -

1. आतंकवाद को समाप्त करने का संकल्प
भारत और अमेरिका दोनों ने संयुक्त प्रेस ब्रीफिंग पर सहमति व्यक्त की और दोनों नेताओं ने कहा कि दोनों देश आतंकवादी संगठनों को समाप्त करने के लिए प्रतिबद्ध हैं.
ट्रम्प ने यह स्वीकार किया कि भारत की तरह अमरीका भी आतंकवाद से प्रभावित हुआ है और दुनिया से आतंकवाद को जड़ से समाप्त करने हेतु प्रतिबद्ध है.
ट्रंप ने आतंकवाद के मुद्दे पर बात करते हुए बहुत कड़े शब्दों का इस्तेमाल करते हुए कहा "अमेरिका और भारत के मध्य सुरक्षा साझेदारी अविश्वसनीय रूप से महत्वपूर्ण है. ये दोनों राष्ट्र आतंकवाद से पीड़ित हैं और आतंकवादी संगठनों तथा कट्टरपंथी विचारधाराओं एवं कट्टरपंथी इस्लामी आतंकवाद को समाप्त करने हेतु प्रतिबद्ध हैं.

2. व्यापार और अर्थव्यवस्था
 संयुक्त प्रेस ब्रीफिंग में  राष्ट्रपति ट्रम्प ने कहा कि संयुक्त राज्य अमेरिका और भारत के बीच वर्तमान संबंध अब तक के अपने अपने सबसे अच्छे स्वरुप में है. उन्होंने कहा कि भारत और अमेरिका के बीच संबंध कभी भी इतने मजबूत और बेहतर नहीं रहे हैं. अब भारत का व्हाईट हाउस में एक सच्चा मित्र है." उन्होंने यह भी कहा "भारत दुनिया में सबसे तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था है. हम उम्मीद करते हैं कि हम भी जल्दी भारत की रफ़्तार पकड़ लेंगे  "
ट्रंप ने वार्ता के दौरान भारत-अमेरिका संबंधों को और मजबूत बानने के लिए भारतीय व्यापार बाधाओं को दूर करने की दिशा में सार्थक कदम उठाने की पहल की.
 डोनाल्ड ट्रम्प ने कहा कि वह दोनों देशों के बीच "निष्पक्ष और पारस्परिक" व्यापार संबंध बनाने के लिए प्रधान मंत्री मोदी के साथ काम करने के लिए उत्सुक हैं और भारतीय बाजारों तक अमेरिकी वस्तुओं के पहुँचने में आने वाली बाधा को समाप्त करने हेतु सार्थक कदम उठाएंगे.

भारतीय प्रधान मंत्री, मोदी ने कहा, "हम विकास के वैश्विक इंजन हैं. दोनों देशों का व्यापक आर्थिक और सामजिक विकास और संयुक्त प्रगति भारत और अमेरिका की प्राथमिकताओं में हैं. "
इस दौरान भारतीय एयरलाइंस द्वारा 100 नए अमेरिकी विमानों के हालिया ऑर्डर पर ट्रंप ने संतुष्टि जाहिर की तथा भारत द्वारा अमेरिकी प्राकृतिक गैस खरीदने तथा अधिक ऊर्जा निर्यात करने हेतु दीर्घकालिक अनुबंध की उम्मीद जताई.

3. नियम-आधारित आदेश, नेविगेशन की स्वतंत्रता  और बेल्ट और रोड
वैसे  पिछले साल की तरह इस बार  दक्षिण चीन सागर या चीन के लिए कोई भी प्रत्यक्ष संदर्भ नहीं मिला, उन्होंने "सभी देशों को शांतिपूर्ण और अंतर्राष्ट्रीय कानून के अनुसार क्षेत्रीय और समुद्री विवादों को हल करने के लिए कहा."
चीन के बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव के एक अंतर्निहित संदर्भ में भारत और अमेरिका द्वारा एक बयान दिया गया जिसमें कहा गया है कि " क्षेत्रीय संप्रभुता और अखंडता, कानूनी नियम और पर्यावरण के नियमों का सम्मान करते हुए हम बुनियादी ढांचे के पारदर्शी विकास और उत्तरदायी ऋण वित्तपोषण अभ्यास के जरिए क्षेत्रीय आर्थिक संपर्क को अपना समर्थन देते हैं.”

4. जलवायु परिवर्तन के कुछ अनसुलझे मुद्दे
भारतीय प्रधान मंत्री ने पेरिस जलवायु समझौते से संयुक्त राज्य अमेरिका के अलग होने के मुद्दे को जलवायु परिवर्तन और जलवायु न्याय से संबंधित ट्रंप का एकतरफा निर्णय समझकर उस पर कोई बातचित नहीं की.
अमरीका के पेरिस समझौते से अलग होने के निर्णय पर मोदी ने कहा- भारत इस दिशा में इस समझौता से आगे और परे जाकर कार्य करेगा.
संयुक्त बयान में कहा गया है कि पर्यावरण और जलवायु नीति, वैश्विक आर्थिक विकास और ऊर्जा सुरक्षा जरूरतों को संतुलित करने के लिए एक तर्कसंगत दृष्टिकोण की आवश्यक्ता है.

5. भारत का वैश्विक शासन और संस्थागत अपेक्षाएं
भारत के प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में स्थायी सदस्यता तथा परमाणु आपूर्तिकर्ता समूह के लिए भारत की अपेक्षा को उजागर नहीं किया.

श्री मोदी ने इस मुद्दे पर कहा कि अंतरराष्ट्रीय संस्थानों और शासनों में भारत की सदस्यता (जो हम दोनों देशों के हित में था) हेतु संयुक्त राज्य के निरंतर समर्थन के लिए हम बहुत आभारी है. संयुक्त वक्तब्य में इन संस्थानों और शासनों में नई दिल्ली के इंटरेस्ट को संबोधित किया गया. इसके अंतर्गत आपूर्तिकर्ता समूह, वासननर आरेंजमेंट, ऑस्ट्रेलिया समूह और संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के लिए भारत की प्रारम्भिक सदस्यता की अपेक्षाएं शामिल हैं.

इसके अतिरिक्त  इस संयुक्त वक्तव्य में एपेक के फोरम में भारत के शामिल होने के लिए अमेरिकी समर्थन का उल्लेख नहीं किया गया .

6. अफगानिस्तान और उत्तर कोरिया
अफगानिस्तान के मुद्दे पर दोनों नेताओं की टिप्पणी समान थी. ट्रंप ने कहा कि भारतीय लोगों द्वारा अफगानिस्तान में किये गए उनके प्रयास तथा योगदान की मैं सराहना करता हूँ तथा उन्हें धन्यवाद देता हूँ. ट्रंप ने कहा दोनों देशों द्वारा इस मुद्दे को एक विस्तृत नजरिये से देखने की जरुरत है तथा यह भी बताया कि इसे किस नजरिये से देखा जाना चाहिए.

अफगानिस्तान में आतंकवाद के कारण बढ़ती अस्थिरता चिंता का कारण है.भारत और अमेरिका दोनों ने अफगानिस्तान के पुनर्निर्माण और इसकी सुरक्षा सुनिश्चित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है. अफगानिस्तान में शांति और स्थिरता कायम करने के लिए ये दोनों देश आपस में परामर्श और संचार बनाए रखेंगे.

अपने इस बैठक में मोदी और ट्रंप ने वैश्विक मुद्दों के अतरिक्त क्षेत्रीय मुद्दों पर बात करते हुए ऊतर कोरिया का भी जिक्र किया. ट्रंप ने उत्तर कोरिया के मुद्दे पर भारत के सहयोग हेतु उसे धन्यवाद दिया.
मई 2017 में भारत द्वारा उत्तर कोरिया से अपने व्यापारिक सम्बन्ध समाप्त करने पर ट्रंप ने भारत का शुक्रिया अदा किया.  दोनों देशों ने कोरिया द्वारा परमाणु परीक्षण कर दुनिया को प्रत्युत्तर देने हेतु विवश करने वाले व्यवहार की निंदा की. इन दोनों नेताओं ने डीपीआरके को अपने अंतर्राष्ट्रीय दायित्वों और प्रतिबद्धताओं का कड़ाई से पालन करने के लिए कहा.नेताओं ने डीपीआरके के बड़े पैमाने पर विनाश कार्यक्रमों के हथियारों का मुकाबला करने के लिए मिलकर काम करने का वादा भी किया.

निष्कर्ष

दोनों देशों के संयुक्त बयान से यह स्पष्ट है कि भारत और अमेरिका की रणनीतिक साझेदारी का क्षेत्र काफी वृहद् रहा लेकिन इसमें जलवायु परिवर्तन के मुद्दे पर कोई विचार विमर्श नहीं किया गया.इस बैठक के दौरान भारतीय प्रधानमंत्री मोदी ने बार बार यह बताने का प्रयास किया कि वैश्विक समूह के अंतर्गत भारत और अमेरिका का सम्बन्ध किस प्रकार मायने रखता है ?आगे उन्होंने ने यह भी कहा कि भविष्य में हामारे समक्ष बहुत सारी चुनौतियाँ हैं जिनका समाधान हम दोनों को एक साथ मिलकर करना है.
इस प्रकार हम कह सकते हैं कि ट्रंप और मोदी की यह बैठक दोनों देशों के व्यवसायिक, आर्थिक,सामजिक और सामरिक रिश्तों को भविष्य में मजबूती प्रदान करेगी तथा दोनों देश विकास के वैश्विक इंजन के रूप में अपना महत्वपूर्ण योगदान देने में सक्षम हो पाएंगे.

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