राष्ट्रीय विज्ञान दिवस 28 फरवरी को मनाया गया

Mar 1, 2018 10:33 IST

भारत में 28 फरवरी 2018 को राष्ट्रीय विज्ञान दिवस मनाया गया. वर्ष 2018 के लिए राष्ट्रीय विज्ञान दिवस की थीम ‘एक स्थायी भविष्य के लिए विज्ञान और प्रौद्योगिकी’ (साइंस एंड टेक्नोलॉजी फॉर सस्टेनेबल फ्यूचर) है.

यह दिवस रमण प्रभाव की खोज के कारण मनाया जाता है. यह खोज भारतीय वैज्ञानिक सर चंद्रशेखर वेंकट रमन द्वारा 28 फरवरी 1928 को की गई थी.

सीवी रमन को इस खोज के कारण  वर्ष 1930 में नोबल पुरस्कार से सम्मानित किया गया था. यह किसी भी भारतीय एवं एशियन व्यक्ति द्वारा जीता गया पहला नोबल पुरस्कार था.

उद्देश्य:

राष्ट्रीय विज्ञान दिवस मनाये जाने का उद्देश्य देश में विज्ञान के प्रति लोगों की रुचि में बढ़ोतरी करना है. इस दिन सभी विज्ञान संस्थानों, जैसे राष्ट्रीय एवं अन्य विज्ञान प्रयोगशालाएं, विज्ञान अकादमियों, स्कूल और कॉलेज तथा प्रशिक्षण संस्थानों में विभिन्न वैज्ञानिक गतिविधियों से संबंधित कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं.


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परमाणु ऊर्जा को लेकर लोगों के मन में कायम भ्रातियों को दूर करना इसका मुख्य उद्देश्य है तथा इसके विकास के द्वारा ही हम समाज के लोगों का जीवन स्तर अधिक से अधिक खुशहाल बना सकते हैं.

 

राष्ट्रीय विज्ञान दिवस:

राष्ट्रीय विज्ञान एवं प्रौद्य़ोगिकी संचार परिषद (एनसीएसटीसी) ने वर्ष 1986 में 28 फरवरी को राष्ट्रीय विज्ञान दिवस के तौर पर मनाने के लिए केंद्र सरकार को कहा था. केंद्र सरकार ने यह प्रस्ताव स्वीकार किया और वर्ष 1986 में 28 फरवरी को राष्ट्रीय विज्ञान दिवस के तौर पर नामित किया गया. पहला राष्ट्रीय विज्ञान दिवस 28 फरवरी 1987 को मनाया गया था.

रमण प्रभाव के बारे में:

•    रमण प्रभाव एक ऐसी घटना है जिसमें प्रकाश की किरण को अणुओं द्वारा हटाए जाने पर वह प्रकाश अपने तरंगदैर्ध्य में परिवर्तित हो जाता है.

•    प्रकाश की किरण जब एक धूल–मुक्त, पारदर्शी रसायनिक मिश्रण से गुजरती है तो घटना (आनेवाली) बीम की दूसरी दिशा में प्रकाश का छोटा सा अंश उभरता है.

•    इस बिखरे हुए प्रकाश का ज्यादातर हिस्से का तरंगदैर्ध्य अपरिवर्तित रहता है.

•    हालांकि, छोटा सा अंश मूल प्रकाश की तरंगदैर्ध्य की तुलना में अलग तरंगदैर्ध्य वाला होता है और उसकी उपस्थिति रमण प्रभाव का परिणाम है.

•    सीवी रमण ने इसकी खोज इंडियन एसोसिएशन फॉर द कल्टिवेशन ऑफ साइंस, कोलकाता की प्रयोगशाला में काम करने के दौरान की थी.

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