गंदे पानी में कोविड-19 का पता लगाने के लिए सेंसर विकसित

कोरोना महामारी के खिलाफ जंग में अब भारत और ब्रिटेन दोनों देश साथ मिलकर लड़ाई लड़ रहे हैं. इसी क्रम में भारतीय और ब्रिटिश वैज्ञानिकों ने एक ऐसा सेंसर विकसित किया जो सीवेज के पानी में कोरोना वायरस की मौजूदगी का पता लगा सकता है

Created On: Jun 11, 2021 17:05 ISTModified On: Jun 11, 2021 16:49 IST

ब्रिटेन और भारत के वैज्ञानिकों ने हाल ही में संयुक्त रूप से एक कम लागत वाला सेंसर विकसित किया है, जो गंदे पानी में कोरोना वायरस के अंशों का पता लगा सकता है. इससे स्वास्थ्य अधिकारियों को यह समझने में सहायता मिलेगी कि यह बीमारी कितने हिस्से में फैल चुकी है.

कोरोना महामारी के खिलाफ जंग में अब भारत और ब्रिटेन दोनों देश साथ मिलकर लड़ाई लड़ रहे हैं. इसी क्रम में भारतीय और ब्रिटिश वैज्ञानिकों ने एक ऐसा सेंसर विकसित किया जो सीवेज के पानी में कोरोना वायरस की मौजूदगी का पता लगा सकता है. फिलहाल, इसका परीक्षण मुंबई में किया जा रहा है.

मध्यम आय वाले देशों में कोविड-19

स्ट्रैथसाइडल विश्वविद्यालय और भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी)-बॉम्बे द्वारा विकसित इस तकनीक का इस्तेमाल निम्न और मध्यम आय वाले देशों में कोविड-19 के व्यापक प्रसार पर नजर रखने में किया जा सकता है, जो बड़े पैमाने पर लोगों की जांच करने हेतु संघर्ष कर रहे हैं.

सेंसर की लागत भी कम

दोनों देशों के वैज्ञानिकों द्वारा संयुक्त तौर पर तैयार इस सेंसर की लागत भी कम है. इससे इसका उपयोग भारत जैसे विशाल आबादी वाले देश में आसानी से किया जा सकता है. शोधकर्ताओं ने पाया कि सेंसर 10 पिकोग्राम प्रति माइक्रोलीटर जितने सूक्ष्म स्तर पर भी वायरस की आनुवंशिक सामग्री का पता लगाने में सक्षम था.

सार्स-कोव-2 वायरस का पता

हाल ही में ''सेंसर्स एंड एक्चुएटर्स बी: कैमिकल'' नामक पत्रिका में प्रकाशित इस अनुसंधान के मुताबिक सेंसर का पोर्टेबल उपकरण के साथ इस्तेमाल किया जा सकता है. इसमें सार्स-कोव-2 वायरस का पता लगाने के लिये मानक पॉलीमरेज चेन रिएक्शन (पीसीआर) जांच का उपयोग किया जाता है.

अपशिष्ट जल में वायरस

इसमें समयबद्ध गुणवत्तापूर्ण पीसीआर जांच के लिये महंगे रसायनों और प्रयोगशाला की जरूरत नहीं होती. अपशिष्ट जल में वायरस के अंशों के बारे में पता चलने से सार्वजनिक स्वास्थ्य अधिकारियों को यह समझने में मदद मिलेगी कि यह बीमारी कितने बड़े क्षेत्र में कितनी फैली है.

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