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निर्भया केस: पटियाला हाउस कोर्ट ने दोषियों के खिलाफ नया डेथ वारंट किया जारी

सुनवाई के दौरान सरकारी वकील ने कहा कि तीन दोषियों अक्षय ठाकुर, विनय सिंह और मुकेश सिंह की दया याचिका खारिज हो चुकी है. एक दोषी पवन गुप्ता की ओर से इस मामले में दया याचिका और क्यूरेटिव पिटिशन दाखिल होनी बाकी है.

Feb 18, 2020 13:02 IST
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निर्भया केस (Nirbhaya Case) के दोषियों को फांसी दिए जाने के लिए नया डेथ वारंट जारी कर दिया गया है. पटियाला कोर्ट ने 17 फरवरी 2020 को लगभग एक घंटे तक चली सुनवाई के बाद निर्भया के दोषियों को फांसी पर लटकाने के लिए 03 मार्च की तारीख तय की है. तीसरी बार है जब निचली अदालत ने डेथ वारंट जारी किया है.

नए डेथ वारंट के मुताबिक 03 मार्च 2020 की सुबह 6 बजे निर्भया केस के दोषियों को फांसी दी जाएगी. सुनवाई के दौरान सरकारी वकील ने कहा कि तीन दोषियों अक्षय ठाकुर, विनय सिंह और मुकेश सिंह की दया याचिका खारिज हो चुकी है. एक दोषी पवन गुप्ता की ओर से इस मामले में दया याचिका और क्यूरेटिव पिटिशन दाखिल होनी बाकी है.

कोर्ट के फैसले पर निर्भया के पिता ने कहा कि वो कोर्ट के फैसले से ख़ुश हैं. निर्भया की मां ने कहा कि मैं सात साल से संघर्ष कर रही हूं और उम्मीद है कि अब 03 मार्च को निर्भया के दोषियों को फांसी की सजा मिल जाएगी.

पवन और अक्षय के वकील ने क्या कहा?

दोषी पवन गुप्ता के वकील ने कोर्ट को बताया कि वे सुप्रीम कोर्ट में क्यूरेटिव पिटीशन तथा राष्ट्रपति के समक्ष दया याचिका दाखिल करना चाहता है. अक्षय के वकील ने बताया कि वे राष्ट्रपति के समक्ष नई दया याचिका दाखिल करना चाहता है.

डेथ वारंट क्या है?

डेथ वारंट को ब्लैक वारंट भी कहा जाता है. इसमें फॉर्म नंबर-42 होता है, जिसमें निष्पादन के समय, स्थान तथा तारीख का जिक्र होता है. डेथ वारंट में उन सभी अपराधियों के नाम शामिल होता है, जिन्हें मौत की सजा मिलनी है. रिपोर्टों के मुताबिक, दोषियों को तब तक फांसी पर लटकाकर रखा जाता है, जब तक की वे मर नहीं जाते. एक बार डेथ वारंट जारी होने के बाद, दोषियों को इसके खिलाफ अपील करने के लिए 14 दिन का समय मिलता है.

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मामला क्या है?

दोषियों ने पैरा मेडिकल छात्रा ‘निर्भया’ के साथ 16 दिसंबर 2012 की रात को दक्षिण दिल्ली में चलती बस में सामूहिक दुष्कर्म किया था. दोषियों ने पीड़िता को चलती हुई बस से बाहर फेंक दिया था. पीड़िता ने जिंदगी की जंग लड़ते हुए 29 दिसंबर 2012 को सिंगापुर के एक अस्पताल में दम तोड़ दिया था. इस जघन्य घटना की देश और विश्व भर में व्यापक निंदा हुई थी. घटना के छह दोषियों में से एक ने तिहाड़ जेल में आत्महत्या कर ली थी. एक अन्य दोषी नाबालिग था जिसे तीन साल तक सुधार गृह में रखने के बाद रिहा कर दिया गया था.

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