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भारत-चीन तनाव के बीच अचानक लेह पहुँचे प्रधानमंत्री मोदी, CDS जनरल बिपिन रावत भी मौजूद

भारत-चीन (India China) तनाव के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी हालात का जायजा लेने स्वयं लेह पहुंचे हैं. उनके साथ CDS जनरल बिपिन रावत भी हैं.

Jul 3, 2020 14:48 IST
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 03 जुलाई 2020 को सुबह लद्दाख के लेह पहुंचे हैं. उनकी यह यात्रा पूर्वी लद्दाख की गलवान घाटी में चीनी सैनिकों के साथ भारतीय जवानों की हिंसक झड़प के बाद हो रही है. भारत-चीन (India China) तनाव के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी हालात का जायजा लेने स्वयं लेह पहुंचे हैं. उनके साथ CDS जनरल बिपिन रावत भी हैं.

जानकारी के अनुसार, पीएम मोदी सुरक्षा का जायजा भी लेंगे. प्रधानमंत्री मोदी घायल जवानों से भी मुलाकात करेंगे. लेह पहुंचते ही प्रधानमंत्री मोदी ने वायु सेना, थल सेना और ITBP के जवानों से मुलाकात की. प्रधानमंत्री मोदी के साथ इस दौरे पर चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ जनरल बिपिन रावत और आर्मी चीफ एम एम नरवणे भी मौजूद रहे.

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने ट्वीट किया

प्रधानमंत्री मोदी के लद्दाख दौर पर रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने ट्वीट कर कहा कि भारतीय सेना के रहते देश की सीमाएं हमेशा सुरक्षित रही हैं. प्रधानमंत्री मोदी का लद्दाख जाकर सेना के जवानों से भेंट करके उनका उत्साहवर्धन करने से सेना का मनोबल और ऊंचा हुआ है. मैं प्रधानमंत्री जी के इस कदम की सराहना करते हुए उन्हें धन्यवाद देता हूं.

दोनो तरफ से भारी संख्या में सैनिकों की तैनाती

दोनो तरफ से भारी संख्या में सैनिकों की तैनाती की जा रही है. भारतीय सेनाओं ने भी चौतरफा अग्रिम मोर्चे पर टैंकों के साथ हथियारों की तैनाती में इजाफा कर दिया है.

प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में क्या कहा

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 03 जुलाई को सुबह अचानक लेह पहुंचे और उन्होंने वहां सीमा पर तैनात सैनिकों को संबोधित किया. उन्होंने अपने संबोधन में कहा है कि 14 कोर की जांबाजी के किस्से हर तरफ़ हैं. दुनिया ने आपका अदम्य साहस देखा है. आपकी शौर्य गाथाएं घर-घर में गूंज रही है.

पृष्ठभूमि

इस क्षेत्र में वास्तविक सीमा रेखा पर भारत व चीन के बीच करीब सात हफ्तों से तनाव जारी है. दोनों देशों के बीच स्थिति 15 जून को इतनी बिगड़ गई थी कि गलवन घाटी में दोनों देशों के सैनिकों के बीच हिंसक झड़प हो गई थी, जिसमें 20 भारतीय सैनिक शहीद हो गए थे. इस दौरान चीन के भी 40 से अधिक सौनिक मारे गए थे.

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