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बिहार में कोसी रेल महासेतु समेत 12 परियोजनाओं का उद्घाटन

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ऐतिहासिक और शानदार कोसी रेल महासेतु को राष्ट्र को समर्पित किया और इस अवसर पर बिहार के रेल यात्रियों की सुविधाओं के लिए 12 रेल परियोजनाओं का शुभारंभ भी किया. 

Sep 18, 2020 15:01 IST
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 18 सितम्बर 2020 को बिहार में कोसी रेल महासेतु के साथ यात्री सुविधाओं से संबंधित रेल की 12 परियोजनाओं का उद्घाटन किया. प्रधानमंत्री मोदी ने जिन 12 रेल परियोजनाओं का उद्घाटन किया जिसमें किउल नदी पर एक रेल सेतु, दो नई रेल लाइनें, पांच विद्युतीकरण से संबंधित, एक इलेक्ट्रिक लोकोमोटिव शेड और बाढ़ और बख्तियारपुर में तीसरी लाइन परियोजना भी शामिल है.

यह कार्यक्रम वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए आयोजित किया गया. प्रधानमंत्री ने पिछले कुछ दिनों में बिहार में दर्जन भर से अधिक परियोजनाओं का सौगात दिया है. कोसी-मिथिलांचल को जोड़ने वाले इस महासेतु का लोग लंबे समय से इंतजार कर रहे थे. करीब 84 साल के बाद कोसी और मिथिला के लोगों का सपना साकार हुआ. उन्होंने उस सेतु का उद्घाटन किया जिसका शिलान्यास 2003 में पूर्व प्रधानमंत्री अटलबिहारी वाजपेयी ने किया था.

2003 में तत्कालीन प्रधानमंत्री वाजपेयी ने किया था शिलान्यास

सरायगढ़-निर्मली के बीच कोसी नदी पर रेल महासेतु का शिलान्यास तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने किया था. इसे साल 2003-04 में 323.41 करोड़ रुपये की लागत से स्वीकृत किया गया था. लेकिन समय गुजरने के साथ ही इस परियोजना पर 516 करोड़ रुपये खर्च हुए.

दूरी घटकर रह गई है 22 किमी

सरायगढ़-निर्मली के बीच पहले जाने के लिए सहरसा-मानसी-खगडिया- समस्तीपुर-दरभंगा होते हुए निर्मली जाना पड़ता था. जिसकी दूरी 298 किमी होती थी. इस रेल महासेतु के निर्माण होने से इसकी दूरी मात्र 22 किमी में सिमट गई है. प्रधानमंत्री द्वारा उद्घाटन के बाद सहरसा से चलने वाली पैसेंजर ट्रेन ही सुपौल-सरायगढ़ होते हुए आसनपुर कुपहा तक जाएगी और फिर वहीं से सरायगढ़ वापस होते हुए राघोपुर तक ट्रेन जाएगी.

इस ट्रेन के चलने से सुपौल-अररिया और सहरसा जिलों में रहने वालों को सीधा फायदा होगा. इस क्षेत्र के लोगों के लिए दिल्ली, मुंबई और कोलकाता तक जाने के लिए कनेक्टिंग ट्रेन लेना भी आसान हो जाएगा. इससे पहले पीएम मोदी ने बिहार में तीन पेट्रोलियम परियोजनाओं को राष्ट्र को समर्पित किया था.

कोसी रेल महासेतु का महत्व

रेल महासेतु के शुरू होने से आसपास के क्षेत्र के लोगों का उत्तरपूर्वी क्षेत्रों के साथ संपर्क काफी आसान हो जाएगा. बता दें कि 1887 में निरमाली और भापतियही (सरायगढ़) के बीच मीटर गेज का निर्माण किया गया था. भारी बाढ़ और 1934 में आए विनाशकारी भूंकप से यह रेल लिंक बह गया. सरकार ने साल 2003-04 को कोसी मेगा ब्रिज प्रोजेक्ट को मंजूरी दे दी थी. इस पुल से नेपाल सीमा पर भारत की स्थिति मजबूत होगी.

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