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लक्ष्मीकांत शांताराम कुदलकर और गायिका उषा टिमोथी 'मोहम्मद रफी अवार्ड' से सम्मानित

संगीतकार लक्ष्मीकांत शांताराम कुदलकर की ओर से उनकी बेटी ने यह पुरस्कार स्वीकार किया. उन्हें एक ट्राफी के साथ एक लाख रुपए दिए गए. वहीं उषा टिमोथी को ट्राफी के साथ 51,000 रुपए से सम्मानित किया गया.

Dec 27, 2018 09:48 IST
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दिवंगत संगीतकार लक्ष्मीकांत शांताराम कुदलकर और पार्श्व गायिका उषा टिमोथी को 24 दिसंबर 2018 को 'मोहम्मद रफी अवार्ड' से सम्मानित किया गया. लक्ष्मीकांत शांताराम कुदलकर को ‘मोहम्मद रफी लाइफटाइम अचीवमेंट' से सम्मानित किया गया.

इस समारोह का आयोजन उपनगर बांद्रा में किया गया था. मुंबई के भाजपा प्रमुख आशीष शेलर के एनजीओ ‘स्पंदन आर्ट्स' ने 'मोहम्मद रफी अवार्ड' की शुरुआत की थी.

पुरस्कार:

संगीतकार लक्ष्मीकांत शांताराम कुदलकर की ओर से उनकी बेटी ने यह पुरस्कार स्वीकार किया. उन्हें एक ट्राफी के साथ एक लाख रुपए दिए गए. वहीं उषा टिमोथी को ट्राफी के साथ 51,000 रुपए से सम्मानित किया गया.

लक्ष्मीकांत शांताराम कुदलकर:

लक्ष्मीकांत शांताराम कुदलकर का जन्म 03 नवंबर 1937 को मुम्बई में हुआ था. अपने परिवार की खराब वित्तीय हालत के कारण वे अपने शैक्षणिक शिक्षा भी पूरी नहीं कर सके. लक्ष्मीकांत ने अपनी फिल्म कैरियर की शुरुआत एक बाल अभिनेता के रूप में हिंदी फिल्म भक्त पुंडलिक (1949) और आंखें (1950) फिल्म से की. उन्होंन कुछ गुजराती फिल्मों में भी काम किया था.

लक्ष्मीकांत शांताराम कुदलकर बॉलीवुड में प्यारेलाल के साथ मिलकर काम करते थे. इनकी जोड़ी ने फिल्म इंडस्ट्री को एक से बढ़कर एक फिल्मों का म्यूजिक दिया. लक्ष्मीकांत-प्यारेलाल की जोड़ी ने “बिंदिया चमकेगी”,”मैं शायर तो नहीं”,”हँसता हुआ नूरानी चेहरा” जैसे प्रसिद्ध गीत तैयार किये. लक्ष्मीकांत-प्यारेलाल एक लोकप्रिय भारतीय संगीतकार की जोड़ी के रूप में प्रसिद्ध हैं.

लक्ष्मीकांत शांताराम कुदलकर वर्ष 1963 से वर्ष 1998 तक 635 हिंदी फिल्मों के लिए संगीत रचना की. उन्होंने इस समय के लगभग सभी उल्लेखनीय फिल्म निर्माताओं के लिए काम किया जिसमे राज कपूर, देव आनंद, बी.आर. चोपड़ा, शक्ति सामंत, मनमोहन देसाई, यश चोपड़ा, सुभाष घई और मनोज कुमार सम्मिलित थे. उनका निधन 25 मई 1998 को 60 वर्ष की आयु में हुआ था.

उषा टिमोथी:

उषा टिमोथी का जन्म नागपुर, महाराष्ट्र में हुआ था. उषा टिमोथी बॉलीवुड की पाशर्वगायिका हैं. उन्होंने हिंदी, मलयालम, पंजाबी, भोजपुरी तथा मराठी में हज़ार से अधिक गानों को अपनी आवाज़ दी. उन्होंने फिल्म हिमालय की गोदमेइन में अपना करियर शुरू किया. उन्होंने तीन साल की उम्र में क्लासिकल संगीत सीखना शुरू किया. उनके बड़े भाई आल इंडिया रेडियो में स्टॉफर हुआ करते थे. उन्होंने 11 साल की उम्र में ऑल इंडिया रेडियो पर ‘कैद में है बुलबुल’ गीत गाया.


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