राजस्थान दिवस 30 मार्च 2018 को मनाया गया

Mar 30, 2018 15:53 IST

राजस्थान राज्य ने 30 मार्च 2018 को अपना 68वां स्थापना दिवस मनाया रहा है. इस अवसर पर राज्य में अनेक कार्यक्रमों का आयोजन किया जा रहा हैं.

राजस्थान प्रदेश की पहचान यहां की लोक संस्कृति, धरोहरों और ऐतिहासिक स्मारकों की वजह से देश दुनिया में है. स्थापना दिवस से पहले ही प्रदेश भर में विभिन्न कार्यक्रमों और समारोह के ज़रिये जश्न मनाया जाता है.

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राज्य के स्थापना दिवस के अवसर पर 30 मार्च की शाम को जयपुर स्थित जनपथ पर राजस्थान दिवस समारोह के तहत कई तरह के रंगारंग कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं.

राजस्थान दिवस के अवसर पर यहां के पॉलो ग्राउंड में हुए आर्मी शो में सेना का अदम्य साहस, अनुशासन और रोमांच देखने को मिला.

 

वीडियो: इस सप्ताह के करेंट अफेयर्स घटनाक्रम जानने के लिए देखें


राजस्थान स्थापना दिवस के बारे में:

राजस्थान स्थापना दिवस प्रत्येक वर्ष 30 मार्च को मनाया जाता है. 30 मार्च 1949 में जोधपुर, जयपुर, जैसलमेर और बीकानेर रियासतों का विलय होकर 'वृहत्तर राजस्थान संघ' बना था. यही राजस्थान की स्थापना का दिन माना जाता है.

भारत जब अंग्रेजों से मुक्त हुआ तब राजस्थान कई छोटी-छोटी रियासतों में बटा हुआ था. जहॉं लगभग 22 देशी रियासतें थी. जो सर्वाधिक राजपूतों की रियासतें मानी जाती थी. इसमें एक रियासत अजमेर मारवाडा अंग्रेजो द्वारा शासित थी तथा 21 रियासतों पर देशी राजा राज्य करते थे जो आजादी के बाद विलय को तैयार थे. राजस्थान के कई छोटे-छोटे प्रान्तों का विलय करके राजस्थान राज्य की स्थापना की गई.

राजस्थान:

राजस्थान को मरू-भूमि कहा जाता है. राजस्थान भारत गणराज्य का क्षेत्रफल के आधार पर सबसे बड़ा राज्य है. राजस्थान की जलवायु शुष्क से उप-आर्द्र मानसूनी जलवायु है. प्राचीन समय में राजस्थान में क्षत्रिय राजपूत वंश के राजाओ का शासन था. जिनमे जालौर,मेवाड़ मुख्य थे, राजपूत जाति के विभिन्न वंशो ने इस राज्य के विविध भागों पर अपना कब्जा जमा लिया तो उन भागों का नामकरण अपने-अपने वंश, क्षेत्र की प्रमुख बोली अथवा स्थान के अनुरूप कर दिया.

सीमेन्ट उद्योग की दृष्टि से ‘राजस्थान’ का पूरे भारत में प्रथम स्थान है. यहां पर सर्वप्रथम वर्ष 1904 में समुद्री सीपियों से सीमेन्ट बनाने का प्रयास किया गया था. राजस्थान की आकृति लगभग पतंगाकार है.

राजस्थान बलिदान, शौर्य और साहस का साक्षी रहा है. राजस्थान धर्म-कर्म के लिहाज़ से भी पीछे नहीं है. ऐतिहासिक किले और स्मारकों के अलावा यहां के आध्यात्म स्थल भी हर किसी को अपनी ओर आकर्षित करने का काम कर रहे हैं.
राजस्थान को वीरों की धरती के तौर पर पहचाना जाता है. यहां के राजे- रजवाड़े और ऐतिहासिक किले प्रदेश की आन-बान-शान को बताने के लिए काफी है.

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