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बायोफ्यूल नीति को लागू करने वाला राजस्थान पहला राज्य बना

Aug 2, 2018 12:49 IST

राजस्थान भारत सरकार की राष्ट्रीय बायोफ्यूल नीति (जैव ईंधन नीति) 2018 को लागू करने वाला देश का पहला राज्य बन गया है. यह बात ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज मंत्री राजेंद्र राठौड़ ने कही है.

इंदिरा गांधी पंचायती राज प्रशिक्षण संस्थान में बायोफ्यूल प्राधिकरण उच्चाधिकार समिति की चतुर्थ बैठक में बायोफ्यूल नीति 2018 को प्रदेश में लागू करने को अनुमोदन किया.

मुख्य तथ्य:

  • भारत सरकार के पैट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय द्वारा 4 जून 2018 को राष्ट्रीय जैव ईंधन नीति-2018 घोषित की गई है. राष्ट्रीय जैव ईंधन नीति-2018 का उद्देश्य घरेलू स्तर पर जैव ईधन का उत्पादन को बढावा देना है.
  • बायोफ्यूल नीति के तहत इसके उपयोग के प्रति आमजन को जागरूक करने एवं तैलीय बीजों का उत्पादन बढाने के साथ उसके फायदों व मार्केटिग व्यवस्था के व्यापक प्रचार-प्रसार जोर दिया जाएगा.
  • राजस्थान में बायोडीजल उत्पादन हेतु भारतीय रेलवे के वित्तीय सहयोग से राज्य में 8 टन प्रतिदिन क्षमता वाले बायोडीजल उत्पादन सयंत्र की स्थापना की गई है.

                          उद्देश्य:

इस नीति का उद्देश्य आने वाले दशक के दौरान देश के ऊर्जा और परिवहन क्षेत्रों में जैव ईंधन के उपयोग को बढ़ावा देना है. नीति का उद्देश्य घरेलू फीडस्टॉक को बढ़ावा देना और जैव ईंधन के उत्पादन के लिए इसकी उपयोगिता के साथ-साथ एक स्थायी तरीके से नए रोजगार के अवसर पैदा करने के अलावा राष्ट्रीय ऊर्जा सुरक्षा, जलवायु परिवर्तन के अल्पीकरण में योगदान करते हुए जीवाश्म ईंधन का तेजी से विकल्प बनाना है. साथ ही, यह नीति जैव ईंधन बनाने के लिए अग्रिम तकनीकों के आवेदन को प्रोत्साहित करेगी.

 

राष्ट्रीय जैव ईंधन नीति-2018 की मुख्य विशेषताएं:

राष्ट्रीय जैव ईंधन नीति में जैव ईंधनों को आधारमुक्त जैव ईंधनों यानी पहली पीढ़ी (1जी) के बायोएथेनॉल और बायोडीजल तथा विकसित जैव ईंधनों यानी दूसरी पीढ़ी (2जी) के एथेनॉल, निगम के ठोस कचरे (एमएसडब्ल्यू) से लेकर ड्रॉप-इन ईंधन, तीसरी पीढ़ी (3जी) के जौव ईंधन, बायोसीएनजी आदि को श्रेणीबद्ध किया गया है, ताकि प्रत्येक श्रेणी के अंतर्गत उचित वित्तीय और आर्थिक प्रोत्साहन बढ़ाया जा सके.

इस नीति में गन्ने का रस, चीनी युक्त सामग्री, स्टार्च युक्त सामग्री तथा क्षतिग्रस्त अनाज, जैसे- गेहूं, टूटे चावल और सड़े हुए आलू का उपयोग करके एथेनॉल उत्पादन हेतु कच्चे माल के दायरे का विस्तार किया गया है.

अतिरिक्त उत्पादन के चरण के दौरान किसानों को उनके उत्पाद का उचित मूल्य नहीं मिलने का खतरा होता है. इसे ध्यान में रखते हुए इस नीति में राष्ट्रीय जैव ईंधन समन्वय समिति की मंजूरी से इथनॉल उत्पादन के लिए पेट्रोल के साथ उसे मिलाने के लिए अतिरिक्त अनाजों के इस्तेमाल की अनुमति दी गई है.

नीति गैर-खाद्य तिलहनों, इस्तेमाल किए जा चुके खाना पकाने के तेल, लघु गाभ फसलों से जैव डीजल उत्पादन के लिए आपूर्ति श्रृंखला तंत्र स्थापित करने को प्रोत्साहन दिया गया.

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