राजीव गांधी खेल रत्न पुरस्कार का नाम बदला, जानें क्या रखा गया?

हॉकी के 'जादूगर' कहे जाने वाले मेजर ध्यानचंद का हॉकी में अविश्वसनीय योगदान रहा है. उन्होंने अपने आखिरी ओलंपिक (बर्लिन 1936) में कुल 13 गोल दागे थे. 

Created On: Aug 6, 2021 15:49 IST
Rajiv Gandhi Khel Ratna Award renamed Major Dhyan Chand Khel Ratna Award
Rajiv Gandhi Khel Ratna Award renamed Major Dhyan Chand Khel Ratna Award

मोदी सरकार ने राजीव गांधी खेल रत्न पुरस्कार का नाम बदल दिया है. सरकार ने इसे हॉकी के 'जादूगर' कहे जाने वाले मेजर ध्यानचंद के नाम पर रखने का फैसला किया है. प्रधानमंत्री मोदी ने 06 अगस्त 2021 को ट्वीट कर इसकी जानकारी दी. खेल रत्न अवॉर्ड देश का सबसे बड़ा खेल सम्मान है.

प्रधानमंत्री मोदी ने ट्वीट में लिखा कि देश को गर्वित कर देने वाले पलों के बीच अनेक देशवासियों का ये आग्रह भी सामने आया है कि खेल रत्न पुरस्कार का नाम मेजर ध्यानचंद जी को समर्पित किया जाए. लोगों की भावनाओं को देखते हुए, इसका नाम अब मेजर ध्यानचंद खेल रत्न पुरस्कार किया जा रहा है. बता दें कि पहले खेल रत्न पुरस्कार राजीव गांधी खेल रत्न पुरस्कार के नाम से जाना जाता था.

प्रधानमंत्री मोदी ने क्या कहा?

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि टोक्यो ओलंपिक में भारतीय पुरुष और महिला हॉकी टीमों के प्रदर्शन ने पूरे देश को रोमांचित किया है. उन्होंने कहा कि अब हॉकी में लोगों की दिलचस्पी फिर से बढ़ी है जो आने वाले समय के लिए सकारात्मक संकेत है. खेल रत्न सम्मान के तहत 25 लाख रुपये नकद पुरस्कार दिया जाता है.

मेजर ध्यानचंद: एक नजर में

हॉकी के 'जादूगर' कहे जाने वाले मेजर ध्यानचंद का हॉकी में अविश्वसनीय योगदान रहा है. उन्होंने अपने आखिरी ओलंपिक (बर्लिन 1936) में कुल 13 गोल दागे थे. इस तरह एम्स्टर्डम, लॉस एंजेलिस और बर्लिन ओलंपिक को मिलाकर ध्यानचंद ने कुल 39 गोल किए, जिससे उनके बेहतरीन प्रदर्शन का पता चलता है.

मेजर ध्यानचंद का जन्म 29 अगस्त 1905 को प्रयागराज में हुआ था. उनके जन्मदिन (29 अगस्त) को भारत के राष्ट्रीय खेल दिवस के रूप में मनाया जाता है. इसी दिन हर साल खेल में उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए सर्वोच्च खेल सम्मान खेल रत्न के अलावा अर्जुन और द्रोणाचार्य पुरस्कार भी दिए जाते हैं.

ध्यानचंद को महानतम हॉकी खिलाड़ी माना जाता है. हॉकी के इस जादूगर ने अपने 1926 से 1949 तक के करियर के दौरान 1928, 1932 और 1936 में ओलंपिक का शीर्ष खिताब हासिल किया था. प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि मेजर ध्यानचंद भारत के उन अग्रणी खिलाड़ियों में से थे, जिन्होंने भारत को दुनियाभर में सम्मान और गौरव दिलाया.

खेल रत्न अवॉर्ड: एक नजर में

खेल रत्न अवॉर्ड देश का सबसे बड़ा खेल सम्मान है. यह पुरस्कार पहली बार 1991-92 में दिया गया था. तब इसका नाम देश के पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी के नाम पर रखा गया था. इस अवार्ड की स्थापना का मुख्य उद्देश्य खेल के क्षेत्र में सराहना और जागरूकता फैलाना है.

साथ ही खिलाड़ियों को सम्मानित कर उनकी प्रतिष्ठा बढ़ाना है, ताकि वह समाज में और ज्यादा सम्मान प्राप्त कर सकें. इसे अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर खेल क्षेत्र में शानदार और सबसे उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए दिया जाता है. सबसे पहला खेल रत्न पुरस्कार पहले भारतीय ग्रैंड मास्टर विश्वनाथन आनंद को दिया गया था. अब तक 45 लोगों को ये अवॉर्ड दिया जा चुका है.

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