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राजनाथ सिंह ने 51वीं K-9 वज्र तोप को दिखाई हरी झंडी, जानें इस तोप की खासियत

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने तोप के ऊपर स्‍वास्तिक का निशान भी बनाया. बता दें कि इस तोप का वजन 50 टन है और यह 47 किलोग्राम के गोले 43 किलोमीटर की दूरी तक दाग सकती है.

Jan 17, 2020 09:57 IST
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केंद्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने 16 जनवरी 2020 को गुजरात के सूरत में स्थित हजीरा लार्सन एंड टुब्रो आर्मर्ड सिस्टम कॉम्प्लेक्स में 51वीं के-9 वज्र-टी तोप को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया. रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह तोप के ऊपर सवार भी हुए तथा इसे हजीरा परिसर के आसपास चलाया.

रक्षा मंत्रालय राजनाथ सिंह ने केंद्र की ‘मेक इन इंडिया’ पहल के तहत भारतीय सेना हेतु एल ऐंड टी कंपनी को साल 2017 में के-9 वज्र-टी 155मिमी/52 कैलीबर तोपों की 100 यूनिट आपूर्ति के वास्ते 4,500 करोड़ रुपये का समझौता किया था. राजनाथ सिंह ने इस अवसर पर जोर देकर कहा कि भारत को एक वैश्विक रक्षा निर्यात केन्‍द्र बनाने हेतु अभी बहुत कुछ किया जाना बाकी है.

के-9 वज्र-टी तोप के बारे में

• के-9 वज्र स्व-चालित तोपखाने को नवंबर 2018 में सेना में शामिल किया गया था.

• के-9 वज्र दक्षिण कोरियाई सेना द्वारा उपयोग किए जा रहे के-9 थंडर का एक प्रकार हैं.

• इस तोप का वजन 50 टन है और यह 47 किलोग्राम के गोले 43 किलोमीटर की दूरी तक दाग सकती है.

• यह स्वचालित तोप शून्य त्रिज्या पर भी घूम सकती है. यह रक्षा मंत्रालय द्वारा एक निजी कंपनी को दिया गया सबसे बड़ा अनुबंध है.

• गौरतलब है कि एलएंडटी साउथ कोरिया की हान्वा टेकविन के साथ मिलकर इन तोपों को गुजरात के हजीरा प्लांट में बना रही है.

• इस तोप में कई ऐसी खूबियां हैं, जिसके चलते यह बोफोर्स तोप को भी पीछे छोड़ती है. बोफोर्स तोप जहां एक्शन में आने से पहले पीछे खिसकती है, तो वहीं के-9 वज्र तोप ऑटोमेटिक है.

• इस तोप की खास बात यह भी है कि यह 15 सेकेंड में 3 गोले दाग सकती है.

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क्या है मेक इन इंडिया?

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश की अर्थव्यवस्था को मजबूत करने और युवाओं को रोजगार प्रदान करने हेतु 25 सितंबर 2014 को ‘मेक इन इंडिया’ योजना की शुरुआत की थी. यह योजना देशी और विदेशी कंपनियों द्वारा भारत में ही वस्तुओं के निर्माण पर बल देने हेतु बनाया गया है. इसके माध्यम से सरकार भारत में अधिक पूंजी और तकनीकी निवेश पाना चाहती है. इसका मुख्य लक्ष्य 2020 तक 100 मिलियन नई नौकरियों का सृजन करना है. मोदी सरकार ने तय किया है कि साल 2022 तक देश की अर्थव्यवस्था में विनिर्माण क्षेत्र का योगदान 16 प्रतिशत से बढ़ाकर 25 प्रतिशत किया जाएगा. सरकार इस योजना के माध्यम से भारत में अधिक पूंजी और तकनीकी निवेश प्राप्त करना चाहती है.

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