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रूस ने विश्व का पहला पानी पर तैरता परमाणु संयत्र लॉन्च किया

एकेडेमिक लोमोनोसोव का उद्देश्य पूर्वी और उत्तरी साइबेरिया के दूरदराज के इलाकों में बिजली आपूर्ति करना और ऑयल रिफाइनिंग करना है. इसका निर्माण सरकारी परमाणु ऊर्जा कंपनी रोस्तम ने सेंट्स पीटरसबर्ग में किया है.

May 21, 2018 09:48 IST
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रूस ने 19 मई 2018 को विश्व का पहला तैरता हुआ परमाणु ऊर्जा संयंत्र लॉन्च किया. अब तक किसी भी देश के पास इस प्रकार की तकनीक नहीं थी. रूस ने इसे मुरमंस्क शहर के एक बंदरगाह से समुद्र में उतारा. इसका नाम ‘एकेडेमिक लोमोनोसोव’ (akademik lomonosov) है.

यह रूसी जहाज एक परमाणु रिएक्टर है. जो अगले एक साल तक समुंद्र के सफर पर रहेगा. अपने सफर के दौरान सबसे पहले यह पूर्वी रूस के शहर पेवेक जाएगा. इसको पूर्वी साइबेरिया ले जाने से पहले बंदरगाह पर सयंत्र में परमाणु ईंधन भरा जाएगा.

उद्देश्य

एकेडेमिक लोमोनोसोव का उद्देश्य पूर्वी और उत्तरी साइबेरिया के दूरदराज के इलाकों में बिजली आपूर्ति करना और ऑयल रिफाइनिंग करना है. इसका निर्माण सरकारी परमाणु ऊर्जा कंपनी रोस्तम ने सेंट्स पीटरसबर्ग में किया है. यह परमाणु सयंत्र दो लाख की आबादी की बिजली की जरूरतों को पूरा कर सकता है. इसका निर्माण वर्ष 2007 में शुरू हुआ था, लेकिन वित्तीय कमी से यह परियोजना लंबे समय तक लंबित रही.


एकेडेमिक लोमोनोसोव (akademik lomonosov) की विशेषताएं

•    इसका नाम रूस के अकदमीशियन मिखाइल लोमोनोसोव के नाम पर रखा गया है.

•    रूस के इस परमाणु ऊर्जा संयंत्र की लंबाई 144 मीटर, चौड़ाई 30 मीटर और वजन 21,000 टन है.

•    इसमें 35 मेगावाट के दो न्यूक्लियर रिएक्टर हैं, जो रिएक्टर बर्फ के पहाड़ों को काटने वाले आइसब्रेकर शिप के रिएक्टर की तरह हैं.

•    संयंत्र अपनी क्षमता से दो लाख की आबादी वाले शहर के लिए बिजली पैदा कर सकता है.

•    इस तैरते हुए संयंत्र से दूरदराज के इलाकों में गैस और तेल उत्खनन प्लेटफार्मों को बिजली मिल सकेगी.

•    रूस का दावा है कि इससे प्रतिवर्ष होने वाले 50 हजार टन कार्बन डाइ ऑक्साइड का उत्सर्जन रोका जा सकता है.

•    इस रिएक्टर में काम करने के लिए 69 सदस्य हैं जो इसे चलाते हैं. इस परमाणु संयंत्र की आयु लगभग 40 वर्ष बताई गई है.

•    इसके अतिरिक्त यह प्रतिदिन 2.4 लाख क्यूबिक मीटर पेयजल भी उत्पन्न करेगा.

akademik lomonosov

टिप्पणी

यह परियोजना रूस की सबसे महत्वकांक्षी परियोजनाओं में से एक है. इससे वह आर्कटिक क्षेत्र और उत्तरी गोलार्ध में मौजूद गैस व तेल के भंडार का संरक्षण कर सकेगा. इसका एक अन्य लाभ यह भी है कि रूस के उत्तर से होकर गुजरने वाले समुद्री रास्ते पर रूस का सुरक्षा कवच पहले की अपेक्षा अधिक मजबूत हो सकेगा. हालांकि कई पर्यावरण कार्यकर्ता इसे न्यूक्लियर टाइटैनिक बता चुके हैं जबकि ग्रीनपीस ने एकेडेमिक लोमोनोसोव को तैरता हुआ चेर्नोबिल बताया है.

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