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सऊदी अरब ने पाकिस्तान को कर्ज और तेल की आपूर्ति पर लगाई रोक

सऊदी अरब ने पाकिस्तान के लिए अपने ऋण और तेल की आपूर्ति को समाप्त कर दिया है, जिससे दोनों देशों के बीच दशकों पुरानी दोस्ती खत्म हो गई है.

Aug 13, 2020 14:33 IST
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सऊदी अरब ने पाकिस्तान के लिए अपने ऋण और तेल की आपूर्ति को समाप्त कर दिया है, जिससे दोनों देशों के बीच दशकों पुरानी दोस्ती खत्म हो गई है. यह जानकारी एक प्रमुख मीडिया संगठन द्वारा दी गई थी.

सऊदी अरब ने पाकिस्तान को 1 बिलियन अमरीकी डालर वापस करने के लिए भी कहा है, जोकि नवंबर, 2018 में सऊदी अरब द्वारा घोषित 6.2 बिलियन डॉलर के पैकेज के एक हिस्से के तौर पर दिया गया था. कुल मिलाकर, इस पैकेज में 3 बिलियन डॉलर का ऋण और तेल ऋण की सुविधा 3.2 बिलियन  डॉलर शामिल थी.

फरवरी, 2019 में सऊदी अरब के क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान की पाकिस्तान यात्रा के दौरान इस समझौते पर हस्ताक्षर किए गए थे.

सऊदी अरब ने पाकिस्तान के साथ अपने संबंध क्यों खत्म कर लिए हैं?

सऊदी अरब का यह कदम पाकिस्तान के विदेश मंत्री शाह महमूद कुरैशी द्वारा कश्मीर मुद्दे पर भारत-विरोधी रुख न अपनाने के लिए सऊदी अरब के नेतृत्व वाले इस्लामिक सहयोग संगठन (OIC) को जारी की गई कड़ी चेतावनी के जवाब में था.

कुरैशी ने कथित तौर पर OIC को विदेश मंत्रियों की परिषद की बैठक बुलाने के लिए कहा था. बाद में उन्होंने चेतावनी देते हुए यह कहा था कि, अगर यह बैठक नहीं बुलाई गई तो वह पाकिस्तानी प्रधानमंत्री  इमरान खान से उन इस्लामिक देशों की बैठक बुलाने के लिए कहने को मजबूर होंगे जो कश्मीर मामले पर उनका (पाकिस्तान का) समर्थन करने के लिए तैयार हैं.

पाकिस्तानी विदेश मंत्री ने यह कहा कि, पाकिस्तान सऊदी अरब के अनुरोध पर कुआलालंपुर शिखर सम्मेलन में शामिल नहीं हुआ और अब पाकिस्तान को यह उम्मीद है कि, राष्ट्र इस मुद्दे पर नेतृत्व करेगा.

मालदीव ने किया पाकिस्तान के इस्लामोफोबिया नैरेटिव को विफल

पाकिस्तान कथित तौर पर भारत में इस्लामोफोबिया के उदय की अपनी कहानी को आगे बढ़ाने के लिए कई प्रयास कर रहा है. हालांकि, भारत के सहयोगी देश मालदीव ने यह कहते हुए इस कदम का विरोध किया है कि, कुछ प्रेरित लोगों द्वारा अलगाव के बयानों और सोशल मीडिया पर दुष्प्रचार अभियान को 1.3 बिलियन की भावनाओं के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए.

संयुक्त राष्ट्र में मालदीव के स्थायी प्रतिनिधि थिल्मिजा हुसैन ने यह कहा कि, भारत के संदर्भ में इस्लामोफोबिया में वृद्धि होने का आरोप लगाना तथ्यात्मक रूप से गलत होगा. उन्होंने यह भी कहा कि, यह दक्षिण एशियाई क्षेत्र में धार्मिक सद्भाव के लिए हानिकारक होगा, क्योंकि इस्लाम भारत में सदियों से मौजूद है और देश की 14.2 प्रतिशत आबादी मुस्लिम होने के साथ भारत में इस्लाम दूसरा सबसे बड़ा धर्म है.

पृष्ठभूमि

पाकिस्तान कश्मीर मुद्दे पर इस्लामिक सहयोग संगठन (OIC) के विदेश मंत्रियों की बैठक बुलाना चाहता  था क्योंकि भारत ने जम्मू-कश्मीर में धारा 370 को रद्द कर दिया है, जिसमें जम्मू-कश्मीर राज्य को पहले विशेष दर्जा दिया गया था. हालाँकि, यह राष्ट्र अब तक इस मुद्दे पर सफल नहीं हो पाया है.

इस मामले पर OIC के सदस्य देशों का समर्थन हासिल करने में बार-बार असफल होने के बाद, पाकिस्तानी प्रधान मंत्री इमरान खान ने 22 मई को यह कहा था कि, इसका मुख्य कारण यह है कि उनके पास अपनी कोई आवाज नहीं है और उनके बीच आपसी एकता का पूर्ण अभाव है.