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यूरोप के सोशल फ्रिज स्कीम को अर्जेंटीना ने गरीबी बढ़ाने वाली योजना के तौर पर अपनाया

'सोशल फ्रिज' शब्द मई 2016 के दूसरे सप्ताह में तब सुर्खियों में आया जब अर्जेंटीना ने इसे देश में नौकरी में कटौती और मुद्रास्फिति में बढ़ोतरी की वजह से आई मुश्किलों का समाना करने वाले जरूरतमंदों के भरण–पोषण के लिए अपनाया.

May 16, 2016 06:05 IST

सोशल फ्रिज स्कीम : एक योजना जिसकी शुरुआत यूरोप के आर्थिक संकट के समय जरुरतमंदों को भोजन उपलब्ध कराने के लिए की गई थी.

'सोशल फ्रिज' शब्द मई 2016 के दूसरे सप्ताह में तब सुर्खियों में आया जब अर्जेंटीना ने इसे देश में नौकरी में कटौती और मुद्रास्फिति में बढ़ोतरी की वजह से आई मुश्किलों का समाना करने वाले जरूरतमंदों के भरण–पोषण के लिए अपनाया.

'सोशल फ्रिज' या 'सोलिडैरिटी फ्रिज' शब्द की उत्पत्ति यूरोप के हालिया आर्थिक संकट के दौरान हुई जिसमें स्पेन और जर्मनी जैसे देशों ने ऐसे फ्रिजों को कुकुरमुत्ते की तरह उगते देखा.  
ऐसा इसलिए कहा जाता है क्योंकि लोगों ने जरूरतमंदों के लिए "सोशल फ्रिजेज" के बाहर खाना छोड़ा. आमतौर पर फ्रिज रेस्त्रां के किनारे फुटपाथ पर रखा होता है. अब तक अर्जेंटीना में 57 "सोशल फ्रिजेज" काम करना शुरु कर चुके हैं.

अर्जेंटीना में यह प्रवृत्ति क्यों फैली?

अर्जेंटीना लैटिन अमेरिका के सबसे अमीर देशों में से एक है और अपने अत्यधिक खेतों और पशुधन के साथ यह दुनिया का सबसे बड़ा भोजन उत्पादकों में से भी एक है.

 

• 10 दिसंबर 2015 को कंजरवेटिव पार्टी के राष्ट्रपति मौरिसियो मैक्री के पदभार संभालने के बाद से मुद्रास्फीति करीब 40 फीसदी तक पहुंच गई है और घरेलू कीमतें बहुत बढ़ गई हैं. नतीजतन अर्जेंटीना के लोगों को अपने वेतन से खुद के लिए भोजन खरीदने में मुश्किल आ रही है.

• इसके अलावा बढ़ती मुद्रास्फीति ने अर्जेंटीना के अनुमानित 1.4 मिलियन लोगों को बीते पांच महीने में गरीबी जाल में डाल दिया है. देश के 40 मिलियन लोगों में से करीब 34.5 फीसदी लोग गरीबी रेखा से नीचे गुजर– बसर कर रहे हैं.

• मार्की सरकार द्वारा आर्थिक संकट को दूर करने के लिए विदेशी व्यापार और मुद्रा प्रतिबंध हटाने के साथ ही उपयोगी वस्तुओं की कीमतों में बढ़ोतरी और सार्वजनिक क्षेत्र की नौकरियों में कटौती की वजह से करीब 140000 लोग अपनी नौकरी गंवा चुके हैं.

• हालांकि 2001 में आर्थिक संकट के दौरान अर्जेंटीना ने राष्ट्रीय खाद्य बैंक की स्थापना की थी, कई दानकर्ताओं ने कहा है कि इन्हें अधिकृत करने वाले नियमों की कमी के कारण वे खाद्य परियोजनाओं का संचालन नहीं कर सकते.

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