श्रीलंका की संसद ने संशोधनों के साथ सूचना अधिकार विधेयक पारित किया

विधेयक का उद्देश्य भ्रष्टाचार एवं कुशासन से ग्रस्त देश में पारदर्शिता और सुशासन बहाल करना है. सूचना अधिकार आयोग की स्थापना व सम्बंधित अधिकारियों की नियुक्ति करना.

Created On: Jun 28, 2016 12:28 ISTModified On: Jun 28, 2016 15:50 IST

lankan Parliament

श्रीलंका की संसद ने दो दिन की चर्चा के बाद बिना मत विभाजन के सूचना अधिकार विधेयक 24 जून 2016 को सर्वसम्मति से पारित कर दिया. विपक्ष की ओर से लाए गए सभी संशोधनों को समिति ने स्वीकार कर शामिल कर लिया.

विधेयक का उद्देश्य-

  • विधेयक का उद्देश्य भ्रष्टाचार एवं कुशासन से ग्रस्त देश में पारदर्शिता और सुशासन बहाल करना है.
  • सूचना अधिकार आयोग की स्थापना व सम्बंधित अधिकारियों की नियुक्ति करना.
  • विषय सम्बन्धी प्रक्रिया व सम्बंधित विषयों का निर्धारण करना.
  • श्रीलंका का जन संचार मंत्रालय नए कानून को प्रभावी तरीके से लागू कराएगा.
  • नए कानून से श्रीलंका के नागरिकों की पहुंच सार्वजनिक सूचना तक हो जाएगी.
  • सूचना अधिकार विधेयक में निजी डेटा, राष्ट्रीय सुरक्षा सूचना, वित्तीय और वाणिज्यिक नीति निर्णय, बौद्धिक सम्पदा और चिकित्सकीय रिपोर्ट सम्बन्धी जानकारी शामिल नहीं हैं.
  • सूचना अधिकार सम्बन्धी पांच सदस्यीय आयोग इसकी निगरानी करेगा और सम्बंधित शिकायतों का निस्तारण करेगा.
  • संविधान सभा के अनुमोदन पर आयोग के सक्षम सदस्य सूचना अधिकार सम्बन्धी अपीलों का निस्तारण करेंगे.
  • सूचना अधिकार विधेयक के सेक्शन पांच के अनुसार देश का कोई भी नागरिक जन हित में सूचना अधिकार के तहत अपील कर सकता है.

कुछ हालातों में सूचना अधिकार के तहत सूचना न देने का प्रावधान भी विधेयक में किया गया है. जो निम्न है-

a) व्यक्तिगत जानकारी से संबंधित तथ्यों को सार्वजनिक हित से रहित माना गया है. इस सम्बन्ध में सूचना अधिकार विधेयक के तहत जानकारी नहीं दी जाएगी.
b) राज्य के रक्षा मामलों संबंधी तथ्यों की जानकारी सूचना अधिकार विधेयक के तहत जानकारी नहीं दी जाएगी.
c) अंतरराष्ट्रीय समझौतों पर गोपनीय जानकारी
d) श्रीलंका की अर्थव्यवस्था को नुकसान पहुंचाने वाले तथ्य
e) व्यापार रहस्य
f) मेडिकल रिकॉर्ड
g) सार्वजनिक प्राधिकरण और पेशेवर के बीच बातचीत और संचार का खुलासा किए जाने की अनुमति सूचना अधिकार विधेयक का हिस्सा नहीं है.
h) किसी भी अपराध का पता लगाने में जो तथ्य बाधा बने उन तथ्यों सम्बन्धी सूचना इस विधेयक के तहत प्रदान नहीं की जा सकती.
i) वह तथ्य जो अदालत की अवामानना का कारण बने, सम्बंधित सूचना का आदान प्रदान इस विधेयक के तहत प्रदान नहीं की जा सकती.
j) उन तथ्यों की जानकारी भी इस विधेयक के तहत प्रदान नहीं की जा सकती जिससे संसद के विशेषाधिकारों का उल्लंघन होता हो.
k) किसी विभाग द्वारा आयोजित परीक्षा आदि सम्बन्धी सूचना जिससे परीक्षा की अखंडता प्रभावित हो इस विधेयक के दायरे में नहीं है.

  • सूचना अधिकार विधेयक के अनुसार सभी मंत्रालयों, विभाग, सार्वजनिक निगम, स्थानीय अधिकारियों, गैर सरकारी संगठन, अदालत और अधिकरण, सरकार द्वारा वित्त पोषित उच्च शिक्षण संस्थान, आदि सभी विधेयक के दायरे में आते हैं. जानकारी प्रदान करने हेतु इन सभी को रिकॉर्ड रखना होगा.
  •  इलेक्ट्रॉनिक प्रारूप में भी सभी रिकॉर्ड को बना कर रखा जा सकता है.
  •  प्रत्येक लोक प्राधिकरण को सूचना अधिकारियों की नियुक्ति करनी चाहिए.
  • श्रीलंका का आधिकारिक गोपनीयता का लंबा इतिहास रहा है. पिछले वर्ष राष्ट्रपति चुनाव के दौरान राष्ट्रपति मैत्रिपाला सिरीसेना ने नये कानून का वादा किया था.
  • श्रीलंका के प्रधानमंत्री रानिल विक्रमसिंघे के अनुसार ऐसे कानून की कमी के चलते बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार और संदिग्ध सौदों के चलते देश को वित्तीय नुकसान हुआ.

पृष्ठभूमि-

  • संसदीय सुधार और मास मीडिया मंत्रालय द्वारा 24 मार्च 2016 को बिल संसद में पेश किया गया.
  • इससे पहले, बिल 1996 में पेश किया गया था, लेकिन, राष्ट्रीय सुरक्षा के मुद्दों का हवाला देते हुए सरकारों द्वारा इसे पारित करने में देरी की गयी, जबकि श्रीलंका 2009 तक तमिल विद्रोहियों के साथ युद्ध की स्थिति में था.

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