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जलवायु परिवर्तन के कारण समाप्त हुई थी हड़प्पा सभ्यता: अध्ययन

वैज्ञानिकों के एक अंतर्राष्ट्रीय समूह द्वारा किये गए इस अध्ययन का शीर्षक ‘नियोग्लेशियल क्लाइमेट एनॉमलीज़ एंड हड़प्पाई मेटामॉरफोसिस था.

Nov 20, 2018 12:36 IST
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हाल ही में किये गये अध्ययन में पाया गया कि जलवायु परिवर्तन के कारण ही सिंधु घाटी सभ्यता का विनाश हुआ था. इसे हड़प्पा सभ्यता के नाम से भी जाना जाता है. शोधकर्ताओं ने समुद्री जीवाश्म और इसके डीएनए का उपयोग करके यह निष्कर्ष निकाला है कि जलवायु परिवर्तन के प्रकोप के कारण ही हड़प्पा सभ्यता की समाप्ति हुई.

शोध के प्रमुख बिंदु

•    वैज्ञानिकों के एक अंतर्राष्ट्रीय समूह द्वारा किये गए इस अध्ययन का शीर्षक ‘नियोग्लेशियल क्लाइमेट एनॉमलीज़ एंड हड़प्पाई मेटामॉरफोसिस था.

•    सिंधु घाटी के तापमान तथा मौसम के पैटर्न में बदलाव की वज़ह से ग्रीष्मकालीन मानसूनी बारिश में धीरे-धीरे कमी आने लगी जिस वज़ह से हड़प्पाई शहरों के आस-पास कृषि कार्य किया जाना मुश्किल या असंभव हो गया.

•    1800 ईसा पूर्व तक इस उन्नत सभ्यता ने अपने-अपने शहर छोड़ दिए और हिमालय के निचले हिस्से में स्थित छोटे गांवों की तरफ जाने लगे थे.

•    शोधकर्ताओं ने कहा कि इसी तरह की मौसमी परेशानियों के चलते संभवत: सभ्यता का खात्मा हुआ. यह अध्ययन ‘क्लाइमेट ऑफ द पास्ट’ पत्रिका में प्रकाशित हुआ है.

 

अध्ययन का सार

मौसम परिवर्तन और सूखे को समझने के लिए शोधकर्ताओं ने सागर तल का अध्ययन किया. उन्होंने पाकिस्तान से कई स्थानों  पर अरब सागर के तल से कोर नमूने एकत्र किए फिर उन्होंने जीवों के जीवाश्मों की तलाश की जो वर्षा के प्रति संवेदनशील थे. इन फोरम्स का अध्ययन करके वे यह समझने में सक्षम हो गए थे कि सर्दी और गर्मी के लिए कौन संवेदनशील थे.  इस प्रकार वे मौसमों की पहचान करते थे और फिर डीएनए प्रमाण सामने आए.

जीवाश्म के संयोजन और समुद्री डीएनए का उपयोग करके शोधकर्ता यह निष्कर्ष निकालने में सक्षम हुए कि सर्दियों के दौरान मानसून लगातार बढ़ते हैं और गर्मियों के दौरान घटते हैं. अंततः गर्मियों में पूरी तरह सूखा पड़ता था. इन परिणामों के साथ वे घटती जनसंख्या और शहरों से गांवों के लोगों के आने-जाने का पता लगाने में भी सक्षम हुए.



सिंधु घाटी सभ्यता

सिंधु घाटी सभ्यता 3300 ईसापूर्व से 1700 ईसापूर्व तक विश्व की प्राचीन नदी घाटी सभ्यताओं में से एक प्रमुख सभ्यता है. यह हड़प्पा सभ्यता और ‘सिंधु-सरस्वती सभ्यता’ के नाम से भी जानी जाती है. इसका विकास सिंधु और हकड़ा (प्राचीन सरस्वती) के किनारे हुआ. मोहनजोदड़ो, कालीबंगा, लोथल, धोलावीरा, राखीगढ़ी और हड़प्पा इसके प्रमुख केन्द्र थे. दिसम्बर 2014 में भिर्दाना को सिंधु घाटी सभ्यता का अब तक का खोजा गया सबसे प्राचीन नगर माना गया है. हड़प्पा तथा मोहनजोदड़ो में असंख्य देवी-देवताओं की मूर्तियां प्राप्त हुई हैं. ये मूर्तियां मातृदेवी या प्रकृति देवी की हैं. यहां हुई खुदाई से प्राचीनकाल में सभ्यता की स्थिति का पता चलता है.

 

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