सर्जिंग सिल्क कार्यक्रम में 'बुनियाद' मशीनों का वितरण और मोबाइल एप्प 'ई-कोकून' लॉन्च

सेंट्रल सिल्क टेक्नोलॉजिकल रिसर्च इंस्टीट्यूट द्वारा विकसित की गई मशीन तसर सिल्क यार्न की गुणवत्ता और उत्पादकता में सुधार करेगी और महिलाओं के कठिन श्रम को कम करेगी.

Created On: Feb 11, 2019 17:33 ISTModified On: Feb 11, 2019 17:42 IST

कपड़ा मंत्रालय और केंद्रीय रेशम बोर्ड द्वारा हाल ही में सर्जिंग सिल्क कार्यक्रम के दौरान जनजातीय क्षेत्रों की महिला रीलरों को बुनियाद सिल्क रीलिंग मशीनें वितरित की गईं. मशीन का वितरण जांघों पर रीलिंग की पुरानी परंपरा के कुल उन्मूलन का हिस्सा है और तसर रेशम क्षेत्र में गरीब ग्रामीण और आदिवासी महिला रीलरों की सही कमाई सुनिश्चित करना इसका लक्ष्य है.

छत्तीसगढ़ के चंपा के एक उद्यमी के सहयोग से सेंट्रल सिल्क टेक्नोलॉजिकल रिसर्च इंस्टीट्यूट द्वारा विकसित की गई मशीन तसर सिल्क यार्न की गुणवत्ता और उत्पादकता में सुधार करेगी और महिलाओं के कठिन श्रम को कम करेगी. रीलिंग में जांघों के इस्तेमाल को समाप्त करने और मार्च 2020 का अंत तक इसे बुनियाद रीलिंग मशीन द्वारा बदलने की योजना है.

 

'बुनियाद' तसर सिल्क रीलिंग मशीन का लाभ

पारंपरिक विधि का उपयोग करने वाली महिला प्रतिदिन लगभग 125 रूपये कमाती हैं जबकि बुनियाद मशीन का उपयोग करने वाला एक तसर रीलर प्रतिदिन 350 रूपये कमा सकता है. कर और परिवहन शुल्क को छोड़कर मशीन की कीमत 8,475 रूपये प्रति यूनिट है. इससे निश्चित रूप से रेशम उत्पादन में लगे आदिवासी परिवारों की सामाजिक-आर्थिक स्थितियों को सुधारने में मदद मिलेगी.

चीन के बाद भारत रेशम का दूसरा सबसे बड़ा उत्पादक है और रेशम का सबसे बड़ा उपभोक्ता है. भारत की रेशम उत्पादन क्षमता 32,000 टन के वर्तमान स्तर से 2020 तक लगभग 38,500 टन तक पहुंचने की उम्मीद है.

 

सर्जिंग सिल्क कार्यक्रम के प्रमुख बिंदु

  • इस आयोजन के दौरान, रेशम उद्योग के विभिन्न क्षेत्रों में सर्वश्रेष्ठ उपलब्धियां पाने वाले को सम्मानित किया गया.
  • सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करने वाले राज्यों को भी पुरस्कृत किया गया.
  • रेशम कीट के बीज के क्षेत्र में गुणवत्ता प्रमाणन के लिए मोबाइल एप्लिकेशन ई-कोकून लॉन्च किया गया.
  • भारतीय रेशम उद्योग और राज्य सेरीकल्चर प्रोफाइल का संकलन भी इस अवसर पर जारी किया गया.
  • केंद्रीय वस्त्र मंत्री स्मृति जुबिन ईरानी ने अपने संबोधन में कहा कि 2013-14 के बाद रेशम उत्पादन में 41 प्रतिशत की वृद्धि हुई है.

 

ई-कोकून मोबाइल एप्प

  • रेशम कीट के बीज के क्षेत्र में गुणवत्ता प्रमाणन के लिए मोबाइल एप्लिकेशन ई-कोकून लॉन्च किया गया.
  • मोबाइल ऐप ई-कोकून रेशम कृमि क्षेत्र में गुणवत्ता प्रमाणन में मदद करेगा.
  • मोबाइल एप्लिकेशन का उपयोग रीयल टाइम रिपोर्टिंग के माध्यम से सिस्टम और उत्पाद प्रमाणन के लिए केंद्रीय बीज अधिनियम के तहत नामित बीज विश्लेषकों और बीज अधिकारियों द्वारा किया जाएगा.
  • बड़ी संख्या में हितधारकों - पंजीकृत बीज उत्पादकों (आरएसपी) और पंजीकृत चॉकीयरर्स (आरसीआर) को कवर करने के अलावा, आरएसपी, आरसीआर और रेशम के कीड़ों के अंडे के साथ अनिवार्य रूप से आवश्यक सिस्टम रेशम कीटपालन कीड़े पर प्रभावी निगरानी रखी जाएगी.

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