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तेलंगाना ऐसा पहला राज्य बन गया है जो किसानों को फसल उगाने के निर्देश देगा

तेलंगाना देश का ऐसा पहला राज्य बन गया है जो अपनी पायलट परियोजना के एक हिस्से के रूप में फसलों की खेती को विनियमित करने के लिए किसानों को फसल उगाने के संबंध में जरुरी निर्देश देगा.

May 14, 2020 15:55 IST
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तेलंगाना देश का ऐसा पहला राज्य बन गया है जो अपनी पायलट परियोजना के एक हिस्से के रूप में फसलों की खेती को विनियमित करने के लिए किसानों को फसल उगाने के संबंध में जरुरी निर्देश देगा. तेलंगाना के मुख्यमंत्री के. चंद्रशेखर राव ने 12 मई, 2020 को एक बयान जारी करके कहा कि राज्य धान की फ़सल उगाने को 50 लाख एकड़ भूमि तक सीमित कर देगा.

तेलंगाना सरकार ने एक अन्य फसल लाल चने की खेती को भी 10 लाख एकड़ तक सीमित कर दिया है. इसके अलावा, राज्य जल्दी ही इस संबंध में एक घोषणा करेगा कि, राज्य के किस क्षेत्र में किस फसल की खेती की जाएगी. राज्य सरकार ने किसानों के लिए अपने नए निर्देशों का पालन करना अनिवार्य बना दिया है. राज्य उन किसानों को न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) और ऋतु बंधु योजना का लाभ नहीं देगा जो इन निर्देशों का उल्लंघन करेंगे.

उद्देश्य

राज्य ने किसानों को लाभ पहुंचाने के उद्देश्य से फसलों की खेती को विनियमित करने का निर्णय लिया है, क्योंकि इससे किसानों की उपज की मांग सुनिश्चित करने में मदद मिलेगी.

मुख्य विशेषताएं 

• राज्य सरकार ने धान की उम्दा और अन्य किस्मों सहित धान की खेती को 50 लाख एकड़ तक सीमित करने का फैसला किया है.

• तेलंगाना सोना किस्म 10 लाख एकड़ में उगाई जाएगी, कपास 50 लाख एकड़ में और लाल चना 10 लाख एकड़ में उगाया जाएगा. 15 मई को राज्य के मुख्यमंत्री और कृषि क्षेत्र के अधिकारियों के बीच बातचीत के बाद जल्दी ही फसल की खेती की क्षेत्र-विशेष सिफारिशों की घोषणा की जाएगी.

• सरकार से यह भी उम्मीद की जा रही है कि वह जल्दी ही शहरी क्षेत्रों के पास के कृषि क्षेत्र में सब्जियों की खेती के बारे में निर्देश जारी करे. राज्य किसानों को सुझाव देगा कि फसलों की मांग के आधार पर किन क्षेत्रों में सब्जियां उगाई जानी चाहिए. 

• राज्य के मुख्यमंत्री ने कहा कि किसानों को ऐसी फसलें उगानी चाहिए जिनकी पिछले 20 वर्षों से मांग है. उन्होंने कहा कि सभी किसानों द्वारा समान फसल उगाने की परंपरा समाप्त होनी चाहिए और फसल का विविधीकरण होना चाहिए.

• सरकार के नियमों का पालन करने वाले किसानों को ऋतु बंधु योजना के तहत लाभ मिलेगा और सरकार उनकी उपज एमएसपी पर खरीदेगी.

• वर्तमान में, तेलंगाना राज्य सरकार प्रत्येक किसान को 10,000 रुपये प्रति एकड़, प्रति वर्ष देती है चाहे वह अपनी इस जमीन पर खेती करे या नहीं.

बीज नियामक प्राधिकरण

• तेलंगाना राज्य सरकार राज्य में नकली बीजों की जांच के लिए एक बीज नियामक प्राधिकरण की स्थापना भी करेगी.

• नया बीज नियामक प्राधिकरण यह सुनिश्चित करेगा कि केवल सरकार द्वारा निर्धारित की गई फसलों के बीज ही बेचे जाएं.

• सरकार आवश्यक बदलाव लाने के लिए बीज अधिनियम में भी जरूरत पड़ने पर संशोधन करेगी. राज्य ने यह भी घोषणा की है कि नकली बीज बेचने वाली कंपनियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी.

• सरकार ऐसी कंपनियों की पहचान करेगी और पीडी (प्रिवेंटिव डिटेंशन) अधिनियम के तहत उन कंपनियों पर कारवाई करेगी. यह घोषणा इसलिए की गई थी क्योंकि सरकार को लगता है कि कपास और लाल मिर्च के नकली बीज बहुत ज्यादा मात्रा में राज्य में बिक रहे हैं और इससे बचने के लिए राज्य ने ये सख्त उपाय लागू किए हैं.

• तेलंगाना के मुख्यमंत्री के साथ जल्दी ही बीज कंपनियों के प्रतिनिधियों की एक विशेष बैठक होने की संभावना है.

पृष्ठभूमि

तेलंगाना के मुख्यमंत्री के. चंद्रशेखर राव के अनुसार, वर्तमान में उगाई जाने वाली बहुत सारी फसलों का कोई खरीदार नहीं है और जिन फ़सलों की मांग अधिक है, उनकी कीमतें बहुत अधिक हैं. मुख्यमंत्री ने कहा कि यह स्थिति कई वर्षों से बनी हुई है और अब समय आ गया है कि इस स्थिति को बदल दिया जाये.

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