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केंद्रीय जनजातीय मंत्री ने सूक्ष्म वन उपज के लिए एमएसपी का शुभारंभ किया

मंत्रालय ने सूक्ष्म वन उपज योजना के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) की कवरेज के दायरे में 50 सूक्ष्म वन उत्पादों को शामिल किया है. प्रत्‍येक जींस के संदर्भ में एमएसपी में 30 प्रतिशत से 40 प्रतिशत तक की वृद्धि की गई है.

Mar 1, 2019 12:01 IST
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केंद्रीय जनजातीय मंत्री जुएल ओराम ने 28 फरवरी 2019 को 'सूक्ष्म वन उपज के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य एवं वन धन के मूल्य वर्धन संघटक' का शुभारंभ किये.

इसका शुभारंभ जनजातीय कार्य मंत्रालय के तहत ट्राइफेड द्वारा अंबेडकर इंटरनेशनल सेंटर में आयोजित कार्यशाला में किया गया. दिनभर चलने वाली इस कार्यशाला में 30 राज्यों की सरकारों और हितधारक संगठनों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया. इस कार्यशाला में इन प्रतिनिधियों के साथ इस योजना के प्रारंभ और उसके कार्यान्वयन के बारे में चर्चा की गई.

मुख्य बिंदु:

   प्रधानमंत्री ने 14 अप्रैल 2018 को छत्तीसगढ़ के बीजापुर जिले में वन धन योजना का शुभारंभ किया था.

   जनजातीय कार्य मंत्रालय अब “वन धन योजना” का विस्तार कर रहा है और उसे चरणबद्ध रूप से देश के सभी जनजातीय जिलों में लागू करने के लिए तैयार है. इसकी शुरूआत बड़ी जनजातीय आबादी वाले महत्वाकांक्षी जिलों के साथ की जाएगी.

   मंत्रालय ने सूक्ष्म वन उपज योजना के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) की कवरेज के दायरे में 50 सूक्ष्म वन उत्पादों को शामिल किया है.

   प्रत्‍येक जींस के संदर्भ में एमएसपी में 30 प्रतिशत से 40 प्रतिशत तक की वृद्धि की गई है.

   लघु वन उपजों की खरीददारी की शुरूआत हाट बाजारों में होगी, जहां जनजातीय लोग राज्य सरकार की एजेंसियों और संबंधित जिला कलेक्टरों की सहायता के जरिए अपनी उपज लाएंगे.

   देश में प्रति 300 जनजातीय संग्रहकर्ताओं वाले लगभग 6000 वन धन विकास केंद्र स्थापित करने का प्रस्ताव है. इस तरह लगभग 45 लाख जनजातीयों लोगों को रोजगार प्रदान किया जाएगा.

अन्य जानकारी:

•   खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्रालय और जनजातीय कार्य मंत्रालय ने लगभग 11 करोड़ रुपये की लागत से छत्तीसगढ़ के जगदलपुर और महाराष्ट्र के रायगढ़ में दो लघु वन उपज प्रसंस्करण इकाइयां स्थापित करने का निर्णय लिया है.

   ये इकाइयां जनजातीय संग्रहकर्ताओं और एमएसपी से लघु वन उपज प्राप्‍त करेंगी और उन्हें पूरे देश में जनजातीय संस्थाओं के माध्यम से विपणन के लिए संसाधित करेंगी.

•   इसका प्रमुख घटक पारंपरिक जनजातीय पेय हेरिटेज महुआ को मुख्यधारा में लाना होगा, जिसका उत्पादन और विपणन पूरे देश में किया जाएगा.

   ट्राइफेड ने सीएसआर निधियां एकत्र करने के लिए ‘फ्रेंडस ऑफ ट्राइब्स’ योजना भी प्रारंभ की है और सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों (पीएसयू) से अपने सीएसआर प्रयासों के माध्यम से जनजातीय उद्यमिता विकास कार्यक्रम का वित्त पोषण करने का अनुरोध किया गया है.

   इसके अलावा, बीपीसीएल, आईओसीएल और एसपीएमसीएल ने छत्तीसगढ़ और मध्य प्रदेश के बड़वानी, राजनांदगांव, देवास और होशंगाबाद जिलों में वन धन के लिए 10 करोड़ रुपये की राशि मंजूर की है.

 

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