मंत्रिमंडल ने पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय की व्यापक योजना ओ-स्मार्ट को मंजूरी दी

Aug 30, 2018 09:53 IST

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडल समिति ने व्यापक योजना ‘महासागरीय सेवाओं, प्रौद्योगिकी, निगरानी, संसाधन प्रतिरूपण और विज्ञान (ओ-स्मार्ट) को अपनी मंजूरी प्रदान की है. लगभग 1623 करोड़ रुपये की कुल लागत की यह योजना 2017-18 से 2019-20 की अवधि के दौरान लागू रहेगी.

इस येाजना में महासागर विकास से जुड़ी 16 उप-परियोजनाओं जैसे – सेवाएं, प्रौद्योगिकी, संसाधन, प्रेषण और विज्ञान को शामिल किया गया है.

महत्व

ओ स्‍मार्ट के अंतर्गत दी जाने वाली सेवाओं से तटीय और महासागरीय क्षेत्रों के अनेक क्षेत्रों जैसे मत्‍स्‍य पालन, समुद्र तटीय उद्योग, तटीय राज्‍यों, रक्षा, नौवहन, बंदरगाहों आदि को आर्थिक लाभ मिलेगा. वर्तमान में पांच लाख मछुआरों को मोबाइल के जरिए रोजाना सूचना मिलती है, जिसमें मछली मिलने की संभावनाएं और समुद्र तट में स्‍थानीय मौसम की स्थिति की जानकारी शामिल है. इससे मछुआरों का तलाशी वाला समय बचेगा जिसके परिणाम स्‍वरूप ईंधन की बचत होगी.


ओ-स्मार्ट से लाभ

•    ओ-स्मार्ट के कार्यान्वयन से सतत विकास लक्ष्य -14 से जुड़े मुद्दों के समाधान में मदद मिलेगी, जिनका उद्देश्य महासागरों के इस्तेमाल, निरंतर विकास के समुद्री संसाधनों का संरक्षण करना है.

•    यह योजना (ओ-स्मार्ट) नीली अर्थव्यतवस्था के विभिन्न पहलुओं के कार्यान्वयन के लिए आवश्यक वैज्ञानिक और तकनीकी पृष्ठभूमि प्रदान करेगी.

•    ओ-स्मार्ट योजना के अंतर्गत स्थापित आधुनिक पूर्व चेतावनी प्रणालियां, सुनामी, झंझावात जैसी समुद्री आपदाओं से प्रभावी तरीके से निपटने में मदद करेंगी.

•    इस योजना के अंतर्गत विकसित प्रौद्योगिकियां भारत के आस-पास के समुद्रों से विशाल समुद्री सजीव और निर्जीव संसाधनों को उपयोग में लाने में मदद करेंगी.

योजना का विवरण

महासागरीय क्षेत्र में राष्ट्रीय हितों और अंतर्राष्ट्रीय प्रतिबद्धताओं वाली बहु-विषयक योजनाओं के कार्यान्वयन के महत्व को पहचानते हुए मंत्रालय ने व्यापक योजना (ओ-स्मार्ट) के एक हिस्से के रूप में वर्तमान योजनाओं को केन्द्र में रखकर विशेष रूप से जारी रखने का प्रस्ताव रखा है.

योजना के अंतर्गत दी जाने वाली और विकसित महासागरीय परामर्श सेवाएं और प्रौद्योगिकियां दर्जनों क्षेत्रों की विकास गतिविधियों, भारत के तटवर्ती राज्यों सहित समुद्र तट के परिवेश के कामकाज में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने के साथ ही जीडीपी में महत्वपूर्ण योगदान देती हैं. इसके अलावा महासागरीय आपदाओं जैसे सुनामी, झंझावात आदि के लिए स्थापित आधुनिक पूर्व चेतावनी प्रणालियां भी भारत और हिंद महासागर के देशों को 24 घंटे सेवाएं प्रदान कर रही हैं, जिसे यूनेस्को द्वारा मान्यता दी गई है.

 

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