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भारतीय सेना की बढ़ी ताकत: अब 500 किलोमीटर तक की रेंज के साथ ब्रह्मोस मिसाइल तैयार

ब्रह्मोस एक कम दूरी की रैमजेट, सुपरसॉनिक क्रूज मिसाइल है. इसे पनडुब्बी से, पानी के जहाज से, विमान से या जमीन से भी छोड़ा जा सकता है.

Jul 8, 2019 11:59 IST
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केंद्र सरकार ने बालाकोट जैसे हवाई हमले के बाद देश की सुरक्षा को और भी मजबूत करने की दिशा में ब्रह्मोस मिसाइल की क्षमता को बढ़ाने पर ध्यान दिया है. ब्रह्मोस एरोस्पेस के सीईओ सुधीर कुमार मिश्रा के अनुसार, 500 किलोमीटर तक की बढ़ी हुई रेंज के साथ स्वदेशी ब्रह्मोस मिसाइल का उन्नत संस्करण तैयार है.

सीईओ सुधीर कुमार मिश्रा ने कहा कि इस मिसाइल की सीमा को बढ़ाना संभव है क्योंकि भारत अब मिसाइल प्रौद्योगिकी नियंत्रण व्यवस्था (एमटीसीआर) का एक हिस्सा है. यह अभी तक 290 किलोमीटर तक के लक्ष्य को ही भेद पाती थी.

ब्रह्मोस मिसाइल के बारे में:

ब्रह्मोस एक कम दूरी की रैमजेट, सुपरसॉनिक क्रूज मिसाइल है. इसे पनडुब्बी से, पानी के जहाज से, विमान से या जमीन से भी छोड़ा जा सकता है. रूस की एनपीओ मशीनोस्ट्रोयेनिया तथा भारत के रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) ने संयुक्त रूप से इसका विकास किया है. यह रूस की पी-800 ओंकिस क्रूज मिसाइल की प्रौद्योगिकी पर आधारित है.

ब्रह्मोस की मुख्य विशेषता यह है कि इसे जमीन से, हवा से, पनडुब्बी से, युद्धपोत से यानी कि लगभग कहीं से भी छोड़ा जा सकता है. ब्रह्मोस नाम भारत की ब्रह्मपुत्र और रूस की मस्कवा नदी पर रखा गया है. मिसाइल की गति ध्वनि की गति से लगभग तीन गुना अधिक है.

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मुख्य बिंदु:

•   भारत ने विश्व की सबसे तेज सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल ब्रह्मोस के 'वर्टिकल डीप डाइव' संस्करण का सफलतापूर्वक परीक्षण किया है और अब हम पारंपरिक युद्ध की गतिशीलता बदल सकते हैं.

•   ब्रह्मोस मिसाइल का भारतीय वायुसेना के सुखोई-30 विमान से परीक्षण किए जाने के बाद लड़ाकू विमानों पर लंबी दूरी की मिसाइलों को एकीकृत करने वाला भारत विश्व में एकमात्र देश है.

•   सरकारी प्रसारणकर्ता द्वारा जारी एक विज्ञप्ति के अनुसार ब्रह्मोस सेना, नौसेना और वायु सेना की पसंद बन गया है. यह 90 डिग्री का संस्करण लक्ष्य को भेदने वाला एक महत्वपूर्ण विमान वाहक है.

•   ब्रह्मोस एरोस्पेस द्वारा विकसित की गई तकनीकें इससे पहले भारत या रूस में मौजूद नहीं थीं.

•   ब्रह्मोस एरोस्पेस भारत और रूस सरकारों के स्वामित्व वाला एक संयुक्त उपक्रम है और इसकी मिसाइलों का निर्माण भारत में किया जाता है.

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