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अमेरिका ने भारत को सीहॉक हेलिकॉप्टर बेचने को मंजूरी दी, जानें खासियत

अमेरिकी विदेश मंत्रालय के मुताबिक-भारत को ये हेलीकॉप्टर 2.4 अरब डॉलर (लगभग 16 हजार करोड़ रुपए) में बेचे जाएंगे. हेलिकॉप्टर दुश्मन की पनडुब्बियों को नष्ट करने के अतिरिक्त जहाजों को खदेड़ने और समुद्र में तलाश एवं बचाव अभियान में कारगर साबित होंगे.

Apr 3, 2019 14:50 IST

अमेरिका ने भारत को 24 एमएच-60आर रोमियो सीहॉक हेलिकॉप्टरों को बेचे जाने को मंजूरी दे दी है. भारत को पिछले एक दशक से अधिक समय से इन हंटर हेलिकॉप्टर की आवश्यकता थी.

अमेरिकी विदेश मंत्रालय के मुताबिक-भारत को ये हेलीकॉप्टर 2.4 अरब डॉलर (लगभग 16 हजार करोड़ रुपए) में बेचे जाएंगे. हेलिकॉप्टर दुश्मन की पनडुब्बियों को नष्ट करने के अतिरिक्त जहाजों को खदेड़ने और समुद्र में तलाश एवं बचाव अभियान में कारगर साबित होंगे.

प्रभाव: गृह सुरक्षा मजबूत

इन हेलिकॉप्टरों की बिक्री से उस बड़े रक्षा साझीदार की सुरक्षा स्थिति सुधरेगी जो हिंद प्रशांत और दक्षिण एशिया क्षेत्र में राजनीतिक स्थिरता, शांति एवं आर्थिक प्रगति के लिए महत्वपूर्ण कारक रहा है.

अधिसूचना के मुताबिक, इस बढ़ी क्षमता से क्षेत्रीय खतरों से निपटने में भारत को मदद मिलेगी और उसकी गृह सुरक्षा मजबूत होगी. भारत को इन हेलिकॉप्टरों को अपने सशस्त्र बलों में शामिल करने में कोई दिक्कत नहीं होगी.

रोमियो सीहॉक हेलिकॉप्टर क्या है?

अमेरिका का मल्टी-रोल एमएच-60 ‘रोमियो’ सीहॉक एक हेलीकॉप्‍टर है. यह हेलीकॉप्‍टर अब भारतीय नौसेना के बेड़े में भी दिखेगा. अमेरिका ने भारत को बहु उद्देशयीय हेलिकॉप्‍टर की ब्रिकी को मंजूरी दी है. इससे भारतीय रक्षा बलों की सतह रोधी और पनड़ुब्‍बी रोधी मिशन में अभूतपूर्व क्षमता की वृद्धि होगी.

इस प्रस्‍तावित बिक्री से भारत की पनडुब्‍बी रोधी युद्ध अभियान की क्षमता में बड़ा इजाफा होगा. भारतीय नौसेना के बेड़े में इस हेलिकॉप्‍टर के शामिल होने से यह एक सैन्‍य संतुलन स्‍थापित होगा. ये ख़ास हेलिकॉप्टर न्यूयॉर्क स्थित लॉकहीड मार्टिन रोटरी और मिशन सिस्टम नाम की कंपनी ने बनाई है.

रोमियो सीहॉक हेलिकॉप्टर की खासियत:

•   इस हेलिकॉप्टर को खासकर समुद्री मिशन के लिए बनाया गया है.

•   रोमियो अमे‍रिका का सबसे एडवांस एंटी सबमरीन हेलिकॉप्‍टर है. पनडुब्बियों पर इसका निशाना अचूक होता है.

•   इस एंटी सबमरीन हेलिकॉप्‍टर को जहाज, युद्धपोत और विमान वाहक पोत आदि से ऑपरेट किया जा सकता है.

•   मौजूदा समय में यह अमेरिकी नेवी के बेड़े में शामिल है.

•   यह हेलिकॉप्टरों को दुनिया का सबसे उन्नत समुद्री हेलिकॉप्टर है. इस विमान की डिजाइन और क्षमता भारतीय सशस्‍त्र बलों के अनुरूप अनुरूप हैं.

•   हिंद महासागर में चीन के आक्रामक व्यवहार के मद्देनजर भारत के लिए ये हेलिकॉप्टर आवश्यक हैं.

•   इसके कॉकपिट में दो कंट्रोल हैं जिसका अर्थ है कि ज़रूरत पड़ने पर को-पायलट भी हेलिकॉप्टर का पूरा नियंत्रण संभाल सकता है.

•   इसमें इस्तेमाल की गई तकनीक से अंधेरे एवं तेज़ धूप में कॉकपिट में मौजूद सभी उपकरणों को आसानी से देखा जा सकता है.

•   ये हेलिकॉप्टर उड़ान भरते वक्त 8 मीटर प्रति सेकंड की रफ्तार से सीधे ऊपर उठ सकता है तथा अधिकतम 267 किलोमीटर प्रति घंटा की रफ्तार से उड़ सकता है.

•   ये हेलिकॉप्टर एक बार में दस टन तक सामान ले जा सकता है.

पृष्ठभूमि:

एयरफोर्स टेक्नोलॉजी के मुताबिक, ये हेलिकॉप्टर साल 2001 में बनाया गया था. अमेरिका ने पहली बार साल 2005 में इसका इस्तेमाल किया था. इसके बाद बड़ी तादाद में इसके उत्पादन को मंजूरी दी गई थी. ऑस्ट्रेलिया ने भारत से पहले अमरीका के साथ 24 एमएच-60आर सीहॉक हेलिकॉप्टर खरीदे थे, हालांकि अपनी स्वायत्तता बरकरार रखने के लिए उसने इसके डिज़ाइन में कुछ बदलाव किये थे.

इस प्रस्‍तावित बिक्री से भारत और अमेरिका रणनीतिक संबंधों को एक नई दिशा मिलेगी. इससे दोनों देशों के संबंध और मजबूत होंगे. यह सौदा अमेरिकी विदेश नीति और राष्‍ट्रीय सुरक्षा के अनुरूप है. इस सौदे से भारत प्रशांत और दक्षिण एशियाई क्षेत्र में राजनीतिक स्थिरता, शांति और आर्थिक प्रगति के लिए एक महत्‍वपूर्ण शक्ति बनेगा.

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