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अमेरिकी राष्ट्रपति ने अंतर्राष्ट्रीय छात्रों को निर्वासित करने का विवादास्पद निर्देश रद्द किया

ट्रम्प प्रशासन ने पिछले सप्ताह विदेशी छात्रों से यह कहा था कि, उन्हें अमेरिका में रहने की अनुमति नहीं दी जाएगी जब तक कि वे इन-पर्सन ट्यूशन के साथ कोई कोर्स ज्वाइन नहीं करते हैं.

Jul 16, 2020 15:58 IST
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अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने 14 जुलाई 2020 को ऐसे अंतर्राष्ट्रीय छात्रों को निर्वासित करने का अपना विवादास्पद निर्देश रद्द कर दिया है, जो कोरोना वायरस महामारी के दौरान ऑनलाइन कक्षाएं लेने का निर्णय लेते हैं. ट्रम्प प्रशासन ने पिछले सप्ताह विदेशी छात्रों से यह कहा था कि उन्हें संयुक्त राज्य में रहने की अनुमति नहीं दी जाएगी, जब तक कि वे इन-पर्सन ट्यूशन के साथ कोई कोर्स ज्वाइन नहीं करते हैं. 

हालांकि, हार्वर्ड विश्वविद्यालय और मैसाचुसेट्स इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (MIT) ने सरकार की इस नीति के कारण सरकार पर मुकदमा दायर किया था. कैलिफोर्निया के कई अन्य सार्वजनिक कॉलेजों ने भी ऐसा ही किया. मैसाचुसेट्स में जिला न्यायाधीश, एलीसन बरोज़ ने अंततः यह सूचित किया कि, दोनों पक्षों के बीच अब समझौता हो गया है. 

मुख्य विवरण

• यूएस डिपार्टमेंट ऑफ होमलैंड सिक्योरिटी (DHS) ने इससे पहले अंतर्राष्ट्रीय छात्रों को निर्वासित करने के लिए आव्रजन और सीमा शुल्क प्रवर्तन (ICE) को निर्देश दिया था कि यदि वे ऐसे अमेरिकी विश्वविद्यालयों में पढ़ते हैं जो कोविड स्वास्थ्य संकट के दौरान केवल ऑनलाइन कोर्सेज पेश करते हैं. यह निर्देश पूरे देश में फैलने वाले कोरोना वायरस के बढ़ते हुए मामलों के कारण दिया गया.

• इस नियम की कई राज्यों और शैक्षणिक संस्थानों ने आलोचना की थी, जिन्होंने इस नियम को मौजूदा महामारी के दौरान व्यक्तिगत कक्षाओं के लिए अपने परिसरों को फिर से खोलने के लिए कॉलेजों और विश्वविद्यालयों पर दबाव बनाने का एक तरीका बताया.

• 17 राज्यों के साथ कोलंबिया जिले ने 13 जुलाई, 2020 को ट्रम्प प्रशासन के नए अंतर्राष्ट्रीय छात्र प्रतिबंध के खिलाफ मुकदमा दायर कर दिया.

• मैसाचुसेट्स के अमेरिकी जिला न्यायालय में यह मुकदमा दायर किया गया था. इस मुकद्दमें ने कोविड महामारी के दौरान अंतर्राष्ट्रीय छात्रों को बाहर निकालने के लिए प्रशासन की इस नई नीति को चुनौती दी, इसे एक क्रूर, गैरकानूनी और अचानक की गई कार्रवाई कहा, जिससे पूरे संयुक्त राज्य में मौत और व्यवधान उत्पन्न हुआ है.

• हार्वर्ड विश्वविद्यालय और मैसाचुसेट्स इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी ने पहले ही 8 जुलाई को इस आदेश के विरोध में ट्रम्प प्रशासन पर मुकदमा दायर कर दिया था.

पृष्ठभूमि

अंतर्राष्ट्रीय विश्वविद्यालयों ने हजारों अंतर्राष्ट्रीय छात्रों की स्थिति की रक्षा करने के लिए एक-साथ मिलकर मुकदमा दायर किया. भारत ने भी पिछले सप्ताह दोनों देशों के बीच हुए आभासी विदेश कार्यालय परामर्श के दौरान अमेरिका में F1 छात्र वीजा के बारे में अपनी चिंता व्यक्त की थी. अमेरिकी पक्ष ने तब यह आश्वासन दिया था कि वह छात्रों के सर्वोत्तम हितों को ध्यान में रखेगा.

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