Search

WHO ने साल 2019 में सेहत के 10 संभावित खतरों की सूची जारी की

विश्व स्वास्थ्य संगठन का कहना है कि यदि इन संभावित खतरों से नहीं निपटा गया तो स्वास्थ्य संबंधित गंभीर खतरे उत्पन्न हो सकते हैं.

Jan 29, 2019 09:28 IST
facebook IconTwitter IconWhatsapp Icon

विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने हाल ही में 10 उन बीमारियों/खतरों की सूची जारी की है जो 2019 में दुनिया को संभावित स्वास्थ्य संकट में डाल सकती हैं. डब्ल्यूएचओ द्वारा सुझाए गये इन 10 खतरों के कारण विश्व स्वास्थ्य संगठन 2019 में नई पंच वर्षीय रणनीतिक योजना की शुरुआत करने जा रहा है.

विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा जारी 10 स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं डब्ल्यूएचओ तथा अन्य स्वास्थ्य सहयोगियों के लिये चुनौती साबित हो सकती हैं. डब्ल्यूएचओ का कहना है कि यदि इन संभावित खतरों से नहीं निपटा गया तो स्वास्थ्य संबंधित गंभीर खतरे उत्पन्न हो सकते हैं. WHO द्वारा घोषित 10 खतरे निम्नलिखित हैं:

वायु प्रदूषण, जलवायु परिवर्तन

  • डब्ल्यूएचओ ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि दुनिया भर में 10 में से 9 लोग प्रदूषित हवा में सांस ले रहे हैं.
  • वायु प्रदूषण और जलवायु परिवर्तन सबसे गंभीर जोखिम हैं. वायु प्रदूषण के कारण विश्व में समय से पहले होने वाली मौतों की तुलना में भारत में लगभग 26% अधिक मौतें होती हैं.
  • रिपोर्ट के अनुसार 2030 से 2050 के बीच जलवायु परिवर्तन के कारण सामान्य की तुलना में 2,50,000 अधिक लोगों की मृत्यु होगी.

गैर-संक्रामक रोग

  • दुनिया भर में 70% से अधिक मौतें (41 मिलियन) गैर-संक्रामक रोगों, जैसे- मधुमेह, कैंसर और हृदय रोग की वज़ह से होती है.
  • विश्व भर में 30 से 69 वर्ष के 15 मिलियन लोग प्रतिवर्ष गैर-संक्रामक रोगों के कारण अपनी जान गंवाते हैं.
  • भारत को ‘दुनिया की मधुमेह राजधानी’ के रूप में जाना जाता है.
  • भारत में वर्तमान में अनुमानित कैंसर रोगियों की संख्या आने वाले 20 वर्षों में लगभग दोगुनी हो जाएगी.

अंतरराष्ट्रीय इन्फ्लूएंजा महामारी

  • डब्ल्यूएचओ के अनुसार विश्व को एक और इन्फ्लूएंजा महामारी का सामना करना पड़ सकता है लेकिन इकसी समयावधि के बारे में अभी नहीं बताया जा सकता है.
  • गौरतलब है कि 13 जनवरी, 2019 तक भारत में स्वाइन फ्लू के कुल 1,694 मामले सामने आए, जिसमें 49 लोगों की मृत्यु हो गईं. वर्ष 2018 में कुल 14,992 मामले सामने आए, जबकि कुल 1,103 लोगों की मृत्यु हुईं.

खराब स्वास्थ्य सेवाएं

  • विश्व भर में 1.6 बिलियन से अधिक लोग, जो कि वैश्विक आबादी का 22% है, उन स्थानों पर निवास करते हैं जहाँ सूखे, अकाल, संघर्ष और जनसंख्या विस्थापन तथा खराब स्वास्थ्य सेवाओं जैसी चुनौतियों का सामना करना पड़ता है.
  • भारत के कृषि क्षेत्र में बड़े पैमाने पर आए हालिया संकटों ने कामकाज हेतु आंतरिक प्रवास बढ़ा दिया है. यह प्रवासी आबादी अक्सर बुनियादी देखभाल सुविधाओं की कमी का सामना करते हुए अस्वच्छ परिस्थितियों में रहती है.

रोगाणुरोधी प्रतिरोध (एएमआर)

  • बिना वजह अथवा डॉक्टर की सलाह के बिना एंटीबायोटिक दवाओं का सेवन करते रहने से शरीर पर इन दवाओं का असर लगना बंद हो जाता है.
  • वर्ष 2016 में एमडीआर-टीबी (मल्टीड्रग-रेज़िस्टेंट ट्यूबरकुलोसिस) की वैश्विक घटनाओं में भारत, चीन और रूस का 47% हिस्सा था. भारत में एक इसके लिए नीति बनाई गई है लेकिन इसका कार्यान्वयन उचित तरीके से नहीं किया जा रहा.

बदतर प्राथमिक स्वास्थ्य सेवा

  • कई देशों में पर्याप्त प्राथमिक स्वास्थ्य देखभाल की सुविधा नहीं है. यह उपेक्षा निम्न या मध्यम आय वाले देशों में संसाधनों की कमी के कारण हो सकती है और संभवतः पिछले कुछ दशकों में एकल रोग कार्यक्रमों पर ध्यान केंद्रित करने के कारण भी.
  • भारत में आयुष्मान भारत की प्राथमिक देखभाल शाखा पर प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना (आयुष्मान भारत का बीमा पहलू) की तुलना में कम ध्यान दिया गया है.

टीका लगवाने में संकोच

  • टीके की उपलब्धता के बावजूद टीका लगवाने में संकोच वैक्सीन से रोकी जा सकने वाली बीमारियों से निपटने में हुई प्रगति को पलट सकता है.
  • टीकाकरण प्रति वर्ष 2-3 मिलियन मौतों को रोकता है और यदि टीकाकरण के वैश्विक कवरेज में सुधार किया जाता है, तो आगे 1.5 मिलियन लोगों को बचाया जा सकता है.

डेंगू

  • डेंगू, मच्छर जनित बीमारी है जो फ्लू जैसे लक्षणों का कारण बनती है और घातक होती है. गंभीर डेंगू से पीड़ित 20% लोगों की मृत्यु हो जाती है.
  • डब्ल्यूएचओ के अनुसार विश्व की 40% आबादी पर डेंगू खतरा है जिससे प्रति वर्ष लगभग 390 मिलियन लोग संक्रमित होते हैं. भारत में डेंगू से पीड़ित लोगों की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है. 25 नवंबर, 2018 तक भारत में 89,974 डेंगू के मामले देखने को मिले, जबकि 144 लोगों की मृत्यु हो गई.

एचआईवी

डब्ल्यूएचओ की रिपोर्ट के अनुसार, प्रत्येक वर्ष एचआईवी के कारण 10 लाख लोगों की मौत हो जाती है. इस महामारी की शुरुआत के बाद से 70 मिलियन से अधिक लोग इस संक्रमण के शिकार हुए हैं, जबकि लगभग 35 मिलियन लोगों की मृत्यु हो चुकी है. वर्तमान समय में विश्व भर में लगभग 37 मिलियन लोग इससे ग्रस्त हैं.

 

इबोला एवं अन्य खतरे वाले रोग

विश्व स्वास्थ्य संगठन  ने उन बीमारियों और रोगजनकों की पहचान की है जिनमें सार्वजनिक स्वास्थ्य आपातकाल पैदा करने की क्षमता है लेकिन उनके प्रभावी उपचार और टीकों की कमी है. इस सूची में इबोला, ज़ीका, निपा, मध्य-पूर्व श्वसन सिंड्रोम कोरोनावायरस (MERS-CoV) और गंभीर एक्यूट रेस्पिरेटरी सिंड्रोम (SARS) तथा रोग X शामिल हैं, जो किसी अज्ञात महामारी हेतु तैयार रहने के लिये आगाह करते हैं. ऐसी बीमारियाँ किसी गंभीर महामारी का कारण बन सकती हैं.

 

यह भी पढ़ें: भारत के 1% लोगों के पास 50% आबादी के बराबर संपत्ति: ऑक्सफैम रिपोर्ट

Download our Current Affairs & GK app For exam preparation

डाउनलोड करें करेंट अफेयर्स ऐप एग्जाम की तैयारी के लिए

AndroidIOS