World Blood Donor Day 2021: जानें विश्व रक्तदाता दिवस का इतिहास और महत्व

विश्व रक्तदाता दिवस का उद्देश्य सुरक्षित रक्त उत्पादों की आवश्यकता के बारे में जागरूकता बढ़ाना और रक्तदाताओं के सुरक्षित जीवन रक्षक रक्त के दान करने हेतु उन्हें प्रोत्साहित करते हुए आभार व्यक्त करना है.

Created On: Jun 14, 2021 14:34 ISTModified On: Jun 14, 2021 14:43 IST

14 जून: विश्व रक्तदाता दिवस: पूरी दुनिया में 14 जून 2021 को विश्व रक्तदान दिवस मनाया जा रहा है. इस दिवस का उद्देश्य सुरक्षित रक्त उत्पादों की आवश्यकता के बारे में जागरूकता बढ़ाना और रक्तदाताओं के सुरक्षित जीवन रक्षक रक्त के दान करने हेतु उन्हें प्रोत्साहित करते हुए आभार व्यक्त करना है.

भारत विश्व की सबसे बड़ी आबादी वाला देश होने के बावजूद रक्तदान में काफी पीछे है. रक्त की कमी को खत्म करने के लिए विश्व भर में रक्तदान दिवस मनाया जा रहा है. इसका मुख्य उद्देश्य रक्तदान को प्रोत्साहित करना और उससे जुड़ी भ्रांतियों को दूर करना है.

भारत में रक्तदान की स्थिति

विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्लूएचओ) के मानक के तहत भारत में सालाना एक करोड़ यूनिट रक्त की जरूरत है लेकिन उपलब्ध 75 लाख यूनिट ही हो पाता है. अर्थात लगभग 25 लाख यूनिट रक्त के अभाव में हर साल सैंकड़ों मरीज़ दम तोड़ देते हैं.

हर तीसरे महीने रक्तदान करें

रक्तदान करने से शरीर में कोई कमी नहीं आती है. कोई भी स्वस्थ व्यक्ति हर तीसरे महीने रक्तदान कर सकता है.

उद्देश्य और थीम

इस दिन रक्त जागरूकता अभियान चलाया जाता है और लोगों को मुफ्त रक्तदान करने के लिए प्रेरित किया जाता है. विश्व रक्तदाता दिवस की थीम इस बार यानी 2021 में 'रक्त दान करके दुनिया को हराते रहो' (Give Blood And Keep The World Beating) विषय के साथ मनाया जा रहा है.

विश्व रक्तदान दिवस के बारे में

विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा वर्ष 1997 से प्रत्येक साल 14 जून को 'विश्व रक्तदान दिवस' मनाया जाता है. साल 1997 में विश्व स्वास्थ्य संगठन ने 100 प्रतिशत स्वैच्छिक रक्तदान नीति की नींव डाली थी. इसका उद्देश्य यह था कि रक्त की जरूरत पड़ने पर उसके लिए पैसे देने की जरूरत नहीं पड़े.

विश्व रक्तदाता दिवस क्यों मनाया जाता है?

पुरे विश्व भर में कहीं भी जरुरतमंद व्यक्ति के लिये रक्त की जरुरत को पूरा करने हेतु विश्व रक्त दाता दिवस मनाया जाता है. ये अभियान प्रत्येक साल लाखों लोगों की जान बचाता है और रक्त प्राप्त करने वाले व्यक्ति के चेहरे पर एक प्राकृतिक मुस्कुराहट देता है.

रक्तदान दिवस 14 जून को ही क्यों?

विश्व रक्तदान दिवस, शरीर विज्ञान में नोबल पुरस्कार प्राप्त कर चुके वैज्ञानिक कार्ल लैंडस्टाईन की याद में पूरी विश्व में मनाया जाता है. महान वैज्ञानिक कार्ल लैंडस्टाईन का जन्‍म 14 जून 1868 को हुआ था. उन्होंने मानव रक्‍त में उपस्थित एग्‍ल्‍युटिनि‍न की मौजूदगी के आधार पर रक्‍तकणों का ए, बी और ओ समूह की पहचान की थी. रक्त के इस वर्गीकरण ने चिकित्सा विज्ञान में महत्वपूर्ण योगदान दिया. इसी खोज के लिए महान वैज्ञानिक कार्ल लैंडस्टाईन को साल 1930 में नोबल पुरस्कार दिया गया था. उनकी इसी खोज से आज करोड़ों से ज्यादा रक्तदान रोजाना होते हैं और लाखों की जिंदगियां बचाई जाती हैं.

रक्तदान को लेकर क्या है ग़लतफहमी?

रक्त दान से कितने व्यक्तियों के जीवन को भी बचाया जा सकता है. विश्व के इस सबसे बड़े लोकतंत्र भारत में अभी भी बहुत से लोग यह समझते हैं कि रक्तदान से शरीर कमज़ोर हो जाता है. इतना ही नहीं यह ग़लतफहमी भी व्याप्त है कि नियमित रक्त देने से लोगों की रोग प्रतिकारक क्षमता कम होती है और उसे बीमारियां जल्दी जकड़ लेती हैं. यहाँ भ्रम इस तरह से फैला हुआ है कि लोग रक्तदान का नाम सुनकर ही कॉप उठते हैं.

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