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वर्ल्ड कप 2019: आईसीसी की बीसीसीआई से अपील, धोनी अपने ग्लव्स से सेना का चिन्ह हटाएं

आईसीसी विश्व कप-2019 में भारत के पहले मैच में महेंद्र सिंह धोनी को साउथ अफ्रीका के खिलाफ विकेटकीपिंग दस्तानों पर भारतीय पैरा स्पेशल फोर्स का चिन्ह का इस्तेमाल करते देखा गया था. आईसीसी ने बीसीसीआई से कहा है कि वह धोनी के ग्लव्स पर से यह चिन्ह हटवाए.

Jun 7, 2019 15:18 IST

अंतरराष्‍ट्रीय क्रिकेट परिषद (आईसीसी) ने बीसीसीआई से अपील करते हुए कहा है कि वह विकेटकीपर महेंद्र सिंह धोनी से उनके ग्लव्स पर बने सेना के चिन्ह को हटाने को कहे. आईसीसी ने धोनी के ग्लव्स पर बने 'बलिदान बैज' के चिन्ह से एतराज जताया है.

क्या है विवाद?

आईसीसी विश्व कप-2019 में भारत के पहले मैच में महेंद्र सिंह धोनी को साउथ अफ्रीका के खिलाफ विकेटकीपिंग दस्तानों पर भारतीय पैरा स्पेशल फोर्स का चिन्ह का इस्तेमाल करते देखा गया था. आईसीसी ने बीसीसीआई से कहा है कि वह धोनी के ग्लव्स पर से यह चिन्ह हटवाए.

भारतीय पैरा स्पेशल फोर्स के बारे में:

भारतीय सेना की पैराशूट यूनिट, दुनिया की सबसे पुरानी एयरबोर्न यूनिट में से एक हैं. 50वीं भारतीय पैराशूट ब्रिगेड का गठन 27 अक्टूबर 1941 में हुआ था. ये ब्रिटिश 151वीं पैराशूट बटालियन, ब्रिटिश इंडियन आर्मी 152वीं भारतीय पैराशूट बटालियन और 153वीं गोरखा पैराशूट बटालियन से मिलकर बनी थी. साल 1952 में पैराशूट रेजिमेंट का गठन इनसे और दूसरी कई इकाइयों से मिलकर किया गया था. पैराशूट रेजिमेंट में फिलहाल नौ स्पेशल फ़ोर्सेज़, पांच एयरबोर्न, दो टेरीटोरियल आर्मी और एक काउंटर इंसरजेंसी (राष्ट्रीय राइफ़ल्स) बटालियन है.

लेफ्टिनेंट कर्नल के मानद उपाधी:

महेंद्र सिंह धोनी को साल 2011 में पैराशूट रेजिमेंट में लेफ्टिनेंट कर्नल के मानद उपाधी मिली थी. ये सम्मान पाने वाले धोनी कपिलदेव के बाद दूसरे क्रिकेटर हैं. धोनी ने साल 2015 में पैरा ब्रिगेड की ट्रेनिंग भी ली है. धोनी ने पैराशूट से कूदने की स्पेशल ट्रेनिंग भी पूरी की जिसके बाद धोनी को पैरा रेजिमेंट में शामिल किया गया. हालांकि इस पर सोशल मीडिया पर महेंद्र सिंह धोनी की काफी तारीफ हो रही है.

आईसीसी के नियम क्या कहता है?

आईसीसी के नियम के मुताबिक, आईसीसी के कपड़ों या अन्य चीजों पर अंतरराष्‍ट्रीय मैच के दौरान राजनीति, धर्म या नस्लभेदी जैसी चीजों का संदेश नहीं होना चाहिए.

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बलिदान बैज क्या है?

बलिदान बैज कोई आम बैज नहीं होता, बलिदान बैज पैराशूट रेजिमेंट के विशेष बलों के पास होता है और इसलिए वही इसका इस्तेमाल कर सकते हैं. इस बैज का इस्तेमाल कोई दूसरा व्यक्ति नहीं कर सकता. इस बैज पर हिन्दी में बलिदान लिखा होता है. यह बैज चांदी की धातु से बना होता है. इस बैज के ऊपर की तरफ लाल प्लास्टिक का आयत होता है. इसे सिर्फ भारतीय सेना के पैरा कमांडो ही लगा सकते हैं. पैरा स्पेशल फोर्स को पैरा एसएफ भी कहा जाता है.

पाकिस्तान के मंत्री ने धोनी पर निशाना साधते हुए ट्वीट किया:

पाकिस्तान के विज्ञान और प्रौद्योगिकी मंत्री फवाद चौधरी ने महेंद्र सिंह धोनी पर निशाना साधते हुए ट्वीट किया. फवाद चौधरी ने कहा है कि धोनी इंग्लैंड में क्रिकेट खेलने गए हैं न कि महाभारत के लिए. पाक मंत्री चौधरी ने ट्विटर पर धोनी के द्वारा ग्लव्स पर ‘बलिदान बैज’ के इस्तेमाल किए जाने को लेकर एक टीवी चैनल की बहस के वीडियो पर अपनी राय व्यक्त की. उन्होंने ट्वीट किया, ‘धोनी इंग्लैंड में क्रिकेट खेलने गए हैं न कि महाभारत के लिए, भारतीय मीडिया में एक मूर्खतापूर्ण बहस है? भारतीय मीडिया का एक वर्ग युद्ध से इतना प्रभावित है कि उन्हें सीरिया, अफगानिस्तान या रावंडा में भाड़े के सैनिकों के रूप में भेजा जाना चाहिए.’

बीसीसीआई ने धोनी का समर्थन किया:

बीसीसीआई ने धोनी का समर्थन किया. बीसीसीआई की प्रशासनिक समिति के मुखिया विनोद राय ने कहा कि धोनी के दस्ताने पर जो निशान है, वह किसी धर्म का प्रतीक नहीं है और न ही यह कमर्शियल है. उन्होंने कहा की हम पहले ही आईसीसी को अनुमति के लिए चिट्ठी लिख चुके हैं कि वो धोनी को उनके दस्ताने पर 'बालिदान बैज' पहनने दें.

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