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अर्थव्यवस्था

General Knowledge for Competitive Exams

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वैश्विक गरीबी परिदृश्य

Mar 30, 2016
गरीबी की अंतरराष्ट्रीय मौद्रिक परिभाषा के तहत यदि एक व्यक्ति की आय एक डॉलर/ दिन से कम है तो उस व्यक्ति को गरीबी रेखा से नीचे माना जाता है। इसकी गणना करते समय प्रत्येक देश की गरीबी की सीमा को ध्यान में रखा जाता है । प्रत्येक देश में गरीबी रेखा की गणना का आधार, एक वयस्क व्यक्ति को जीवित रहने के लिए आवश्यक वस्तुओं की जरूरत के आधार पर की जाती है और इसकी गणना डॉलर में की जाती है।अंतरराष्ट्रीय गरीबी रेखा मूल रूप से 1 डॉलर प्रतिदिन विश्व बैंक द्वारा निर्धारित की गयी थी।

भारत के कृषि श्रमिकों का अवलोकन

Mar 25, 2016
कृषि मजदूर वह श्रमिक है, जो खेती से सम्बंधित कार्यों जैसे खेत जोतना ,फसल काटना, बागवानी करना, पशुओं को पालना, मधुमक्खियों और मुर्गी पालन के प्रबंधन और वन्य जीवन से जुडे कार्यों में लगा होता है। कृषि मजदूर असंगठित में क्षेत्र में आते हैं। भारत की लगभग 53% आबादी आज भी कृषि संबंधी गतिविधियों में शामिल है।

सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) का अवलोकन

Mar 23, 2016
सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) का अर्थ सस्ती कीमतों पर खाद्य और खाद्यान्न वितरण के प्रबंधन की व्यवस्था करना है। गेहूं, चावल, चीनी और मिट्टी के तेल जैसे प्रमुख खाद्यान्नों को इस योजना के माध्यम से सार्वजनिक वितरण की दुकानों द्वारा पूरे देश में पहुंचाया जाता है। इस योजना का संचालन उपभोक्ता मामलों, खाद्य और सार्वजनिक वितरण के मंत्रालय द्वारा किया जाता है। इस योजना का मुख्य मकसद सस्ती दरों पर देश के कमजोर वर्ग को खाद्यान्न उपलब्ध कराना है।

भारत की कृषि अर्थव्यवस्था का अवलोकन

Mar 23, 2016
जैसा कि हम जानते हैं कि भारत एक कृषि प्रधान अर्थव्यवस्था है। इसकी लगभग 55% जनसंख्या इस क्षेत्र में कार्यरत है। कृषि का भारतीय अर्थव्यस्था के सकल घरेलू उत्पाद में लगभग 14% योगदान है। लेकिन लगातार हमारी अर्थव्यवस्था में कृषि का योगदान घट रहा है। 1950 के दशक में हमारी अर्थव्यवस्था में कृषि का योगदान 53% प्रतिशत होता था जो वर्तमान में करीब 14% रह गया है। देश में निर्यात के क्षेत्र में कृषि का 10% हिस्सा है। देश की 1.26 अरब आबादी की खाद्य सुरक्षा कृषि पर निर्भर है।

1991 की नयी आर्थिक नीति

Mar 21, 2016
सारांश: जून 1991 में नरसिंह राव सरकार ने भारत की अर्थव्यवस्था को नयी दिशा प्रदान की । यह दिशा उदारीकरण, निजीकरण और वैश्वीकरण (एलपीजी मॉडल के रूप में जाना जाता है) के रूप में पूरे देश में आर्थिक सुधारों के रूप में लागू की गयी । इस नई औद्योगिक नीति के तहत सरकार ने कई ऐसे क्षेत्रों में निजी कंपनियों को प्रवेश करने की अनुमति दी, जो पहले केवल सरकारी क्षेत्रों के लिए आरक्षित थे। इस नई आर्थिक नीति को लागू करने के पीछे मुख्य कारण भुगतान संतुलन (BOP) का निरंतर नकारात्मक होना था।

उदारीकरण से पहले भारत की पंचवर्षीय योजनाएं

Mar 18, 2016
भारत में नियोजित आर्थिक विकास, पहली पंचवर्षीय योजना की स्थापना के साथ 1951 में शुरू हुआ था | पहली पंचवर्षीय योजना का मुख्य उद्देश्य देश में कृषि की हालत को सुधारना था क्योंकि कृषि पूरी अर्थव्यस्था का आधार है | दूसरी पंचवर्षीय योजना (महालनोबिस मॉडल पर आधारित) औद्योगिक विकास के लिए समर्पित थी | सन 1980 की अवधि तक भारतीय अर्थव्यवस्था की विकास दर 3.5% के आसपास थी (जिसे प्रोफेसर राज्कृष्णा द्वारा हिंदू विकास दर का नाम दिया गया था गया था) |

‘डिजिटल इंडिया कार्यक्रम’ भारत में क्या बदलाव लाएगा?

Mar 15, 2016
‘डिजिटल इंडिया कार्यक्रम’ भारत सरकार का फ़्लैगशिप कार्यक्रम है, जिसका उद्देश्य भारत को डिजिटल रूप से सशक्त समाज व ज्ञान अर्थव्यवस्था में बदलना है| ‘डिजिटल इंडिया कार्यक्रम’ की शुरुआत 1 जुलाई, 2015 को भारत के प्रधानमंत्री द्वारा की गयी थी| ‘डिजिटल इंडिया कार्यक्रम’ के तीन मुख्य घटक हैं- डिजिटल अवसंरचना का निर्माण करना, सेवाओं को डिजिटल रूप में प्रदान करना और डिजिटल साक्षरता |

वाणिज्यिक बैंकों का संचालन: एक आलोचनात्मक समीक्षा

Mar 11, 2016
वाणिज्यिक बैंक( वर्तमान में 27) देश की वित्तीय संस्थान प्रणाली का एक प्रमुख हिस्सा हैं । वाणिज्यिक बैंक वे लाभ कमाने वाले संस्थान हैं जो आम जनता से धन स्वीकार करते हैं और घरेलू, उद्यमियों, व्यवसायियों आदि जैसे व्यक्तियों को पैसे(ऋण) देते हैं | इन बैंकों का मुख्य उद्देश्य ब्याज, कमीशन आदि के रूप में लाभ कमाना है | इन सभी वाणिज्यिक बैंकों के कार्य भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) द्वारा नियंत्रित किये जाते है, जोकि एक केंद्रीय बैंक है तथा भारत में सर्वोच्च वित्तीय नियोग है |

उदारीकरण के बाद की पंचवर्षीय योजनायें

Mar 11, 2016
योजना आयोग की स्थापना भारत सरकार के एक संकल्प के द्वारा मार्च, 1950 में की गयी थी । भारत की अर्थव्यवस्था के विकास की जिम्मेदारी पंचवर्षीय योजनाओं पर आधारित थी, जिसे योजना आयोग (प्रधानमन्त्री इसका पदेन अध्यक्ष होता हैं) द्वारा विकसित, निष्पादित तथा जांचा जाता है | अब योजना आयोग को नीति आयोग (राष्ट्रीय भारत परिवर्तन संस्थान ) द्वारा प्रतिस्थापित किया जा रहा है। अब तक 12 पंचवर्षीय योजनाओं को योजना आयोग द्वारा आरम्भ किया गया है। किसी भी पंचवर्षीय योजना को अंतिम मंजूरी राष्ट्रीय विकास परिषद (NDC) द्वारा दी जाती है।

भारत में हरित क्रांति

Mar 8, 2016
सरकार ने 1960 में सात राज्यों से चयनित सात जिलों में एक गहन विकास कार्यक्रम आरम्भ किया और इस कार्यक्रम को गहन क्षेत्र विकास कार्यक्रम (IADP) का नाम दिया गया, जिसे बाद में भारत की हरित क्रांति के रूप में परिभाषित किया गया था | हरित क्रांति से गेहूं, चावल और ज्वार के उत्पादन में लगभग 2 से 3 गुना की वृद्धि हुई। एम.एस. स्वामीनाथन को भारत में हरित क्रांति के जनक के रूप में जाना जाता है।

मानव विकास सूचकांक क्या है

Mar 8, 2016
मानव विकास सूचकांक (HDI) जीवन प्रत्याशा, शिक्षा, और आय सूचकांकों का एक संयुक्त सांख्यिकी सूचकांक है जिसे मानव विकास के तीन आधारों द्वारा तैयार किया जाता है । इसे अर्थशास्त्री महबूब-उल-हक द्वारा बनाया गया था, जिसका 1990 में अर्थशास्त्री अमर्त्य सेन द्वारा समर्थन किया गया, और संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम (UNDP) द्वारा प्रकाशित किया गया । UNDP ने मानव विकास सूचकांक की गणना के लिए एक नई विधि की शुरुआत की है। निम्नलिखित तीन सूचकांक इस्तेमाल किये जा रहे हैं:1. जीवन प्रत्याशा सूचकांक (लम्बा व स्वस्थ जीवन)2. शिक्षा सूचकांक (शिक्षा का स्तर)3. आय सूचकांक (जीवन स्तर)

कृषि यन्त्र और हरित क्रांति

Mar 2, 2016
भारत में हरित क्रांति के परिणामस्वरूप विभिन्न फसलों की उत्पादकता में वृद्धि हुई है | इस वृद्धि के पीछे मुख्य कारण थे अच्छी उपज देने वाले किस्म के बीजों का प्रयोग करना, रासायनिक खाद और नई तकनीकों का प्रयोग करना जिसके कारण 1960 के मध्य दशक के दौरान कृषि उत्पादकता में तेजी से वृद्धि हुई | इस उन्नति का श्रेय नोबेल पुरस्कार विजेता डॉ नॉर्मन बोरलॉग और डॉ एमएस स्वामीनाथन को जाता है। इस क्रांति के कारण गेहूं की उत्पादकता में 2.5 गुना; चावल में 3 गुना , मक्का में 3.5 गुना, ज्वार में 5 गुना और बाजरा में 5.5 गुना की वृद्धि हुई |

कृषि विपणन को प्रोत्साहित करने के लिए सरकार के कदम

Mar 2, 2016
कृषि विपणन के अंतर्गत वनीय, बागानी और अन्य कृषि उत्पादों के भंडारण,प्रसंस्करण व विपणन के साथ-साथ कृषिगत मशीनरी का वितरण और अंतर-राज्यीय स्तर पर कृषि वस्तुओं का आवागमन भी शामिल है | इनके अलावा कृषि उत्पादन में वृद्धि हेतु तकनीकी सहायता प्रदान करना और भारत में सहकारी विपणन को प्रोत्साहित करना भी कृषि विपणन गतिविधियों के अंतर्गत आता है |

गार (GAAR) क्या है?

Mar 1, 2016
टैक्स की चोरी और काले धन पर रोकथाम के लिए बनाया गया 'गार यानी जनरल एंटी अवॉयइडेंस रूल्स (General Anti Avoidance Rules)' नियमों का एक ऐसा समूह है, जिन्हें लागू करने के पीछे सरकार का एक ही लक्ष्य है कि जो भी विदेशी कंपनियाँ भारत में निवेश करें, वे यहाँ के तय नियमों के मुताबिक कर अदा करें |

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