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अर्थव्यवस्था

General Knowledge for Competitive Exams

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भारत में विनिमय दर प्रबंधन: इतिहास और प्रकार

Jun 9, 2016
विदेशी मुद्रा बाजार वह बाजार है जिसमे विदेशी मुद्राओं को खरीदा व बेचा जाता है। सन 1971 तक IMF के एक सदस्य होने के नाते भारत में ‘निशिचित विनिमय दर प्रणाली' का पालन होता था । ब्रेटन वुड्स प्रणाली के 1971 में ध्वस्त होने के बाद रुपए का मूल्य चार साल तक पौंड के द्वारा निर्धारित होता रहा परन्तु बाद में यह व्यवस्था भी ख़त्म हो गयी I वर्तमान में भारत में प्रबंधित विनिमय दर प्रणाली चलन में है।

भारत की राजकोषीय नीति: उद्येश्य और प्रभाव

Jun 7, 2016
राजकोषीय नीति का संबंध सरकार के कराधान और व्यय के फैसलों से है। राजकोषीय नीति के कई भाग होते हैं, जैसे- कर नीति, व्यय नीति, निवेश या विनिवेश रणनीतियां और ऋण या अधिशेष प्रबंधन। राजकोषीय नीति किसी भी देश के समग्र आर्थिक ढांचे का एक महत्वपूर्ण घटक है I राजकोषीय नीति के कुछ प्रमुख घटक इस प्रकार है: बजट, कराधान, सार्वजनिक व्यय, सार्वजनिक ऋण, और राजकोषीय घाटा।

भारतीय वित्तीय प्रणाली के घटक

Jun 2, 2016
वित्तीय प्रणाली उस प्रणाली को कहते हैं जिसमें मुद्रा और वित्तीय परिसंपत्तियों का प्रवाह बचत करने वालों से निवेश करने वालों की तरफ होता है | वित्तीय प्रणाली के मुख्य घटक हैं : मुद्रा बाजार, पूंजी बाजार, विदेशी मुद्रा विनिमय बाजार, बैंक, सेबी और RBI हैं | ये वित्तीय घटक बचत कर्ता और निबेशकों के बीच एक कड़ी या मध्यस्थ का कार्य करते हैं |

आसियान शिखर सम्मेलनों की सूचि

May 31, 2016
आसियान (स्थापना अगस्त,1967) शिखर सम्मेलन, दक्षिण पूर्व एशियाई देशों के सांस्कृतिक, आर्थिक मामलों पर अर्ध वार्षिक स्तर पर होने वाला सम्मलेन है यह मीटिंग 3 दिन तक चलती है जिसमे इसके 10 सदस्य देश शामिल होते हैं | इसके सदस्य देश:- ब्रुनेई, कंबोडिया, इंडोनेशिया, लाओस, म्यांमार, मलेशिया, फिलीपींस, सिंगापुर, थाईलैंड और वियतनाम हैं |

ब्रिक्स (BRICS): ब्रिक्स शिखर सम्मेलन और सदस्य देश

May 30, 2016
ब्रिक्स (ब्राजील, रूस, भारत और चीन, दक्षिण अफ्रीका) नमक संस्था की शुरूआत 2001 में गोल्डमैन सैक्स के अर्थशास्त्री जिम ओ 'नील, द्वारा की गई थी। यह संगठन विश्व के पांच बड़े विकासशील देशों का प्रतिनिधित्व करती है । इस संगठन का विश्व की कुल जनसंख्या और आर्थिक उत्पादन में बहुत बड़ा योगदान है। शुरुआत में यह संगठन सिर्फ ब्रिक (BRIC) के नाम से जाना जाता था परन्तु 2011 में इसमें दक्षिण अफ्रीका के शामिल हो जाने पर यह ब्रिक्स बन गया ।

भारत में मुद्रा और वित्त बाजार के साधन

May 30, 2016
मुद्रा बाजार एक ऐसा सेंटर है जहाँ अल्प कालीन स्वभाव की मौद्रिक संपत्तियों या प्रतिभूतियों (सामान्यतः एक वर्ष से कम अवधि की) का व्यापार होता है, जबकि वित्त बाजार, मध्यम और दीर्घकालीन फण्ड का बाजार है जहाँ लम्बी अवधि के लिए बचत बिकती है।

दक्षिण एशियाई मुक्त व्यापार क्षेत्र (साफ्टा) और आसियान

May 23, 2016
दक्षिण एशियाई वरीयता व्यापार समझौता (साप्टा) को 1995 में लागू किया गया। जो कि 2004 से साफ्टा में बदल गया था । इन दोनों समझौते का लक्ष्य दक्षिण एशिया में व्यापार संबंधी बाधाओं को दूर करना है और सार्क देशों के बीच अधिक उदार व्यापार व्यवस्था कायम किए जाने का प्रावधान है।

G–20 क्या है: कार्य और सम्मलेन

May 20, 2016
G-20 का मतलब GROUP-20 से है। यह दुनिया के 19 शक्तिशाली देशों और यूरोपियन यूनियन (यूरोप के देशों का समूह) का समूह है। इसकी स्थापना 1999 में हई थी। यह समूह दुनिया की 85 प्रतिशत अर्थव्यवस्था और 75 वैश्विक व्यापार को नियंत्रित करता है। अमेरिका, कनाडा, ब्रिटेन, फ्रांस, ऑस्ट्रेलिया, जर्मनी, चीन, भारत, रूस जैसे देश हर साल G-20 समिट में मिलते हैं और दुनिया के आर्थिक हालात पर चर्चा करते हैं।

भारत सरकार के कल्याण कार्यक्रम

May 20, 2016
भारत मिश्रित अर्थव्यवस्था के साथ साथ एक लोकतांत्रिक व्यवस्था है। यहां सरकार सभी समाजों के हितों के लिए काम करती है। यही कारण है कि सरकार हर साल विभिन्न योजनाओं की शुरूआत करती है। ये योजनाएं गरीबी उन्मूलन, रोजगार सृजन, और सुरक्षित पीने के पानी की उपलब्धता, और बेहतर स्वास्थ्य और शिक्षा सुविधाओं से संबंधित हैं। कुछ योजनाएं इस तरह हैं: अंत्योदय अन्न योजना, राष्ट्रीय ग्रामीण आवास मिशन (पूर्व में इंदिरा आवास योजना), भारत निर्माण, आदि |

बौद्धिक संपदा अधिकार के व्यापार संबंधी पहलू (ट्रिप्स– TRIPS)

May 12, 2016
बौद्धिक संपदा अधिकारों पर बौद्धिक संपदा अधिकार के व्यापार संबंधी पहलू (ट्रिप्स–TRIPS) पर बना समझौता एक महत्वपूर्ण और व्यापक अंतरराष्ट्रीय समझौता है। विश्व व्यापार संगठन (WTO) के सदस्य देश स्वतः ही इस समझौते शामिल समझे जाते हैं। यह समझौता बौद्धिक संपदा के अधिकांश प्रावधानों को कवर करता है। इसमें पेटेंट, कॉपीराइट, ट्रेडमार्क, भौगोलिक संकेत, औद्योगिक डिजाइन, व्यापार गोपनीयता और पौधों की नई प्रजातियों पर अपवर्जन अधिकार (exclusionary rights) भी शामिल हैं। यह 1 जनवरी 1995 से यह लागू हुआ और विश्व व्यापार संगठन ((WTO) के सभी सदस्य देशों का इसे मानना अनिवार्य है।

भारत में मुद्रा की परिवर्तनीयता

May 11, 2016
प्रथम विश्व युद्ध से पहले पूरी दुनिया में स्वर्णमान (गोल्ड स्टैण्डर्ड) के मानक होते थे, जिसके तहत मुद्राओं का मूल्य सोने के रूप में एक स्थिर दर पर निश्चित किया जाता था । लेकिन 1971 में ब्रेटन वुड्स प्रणाली की विफलता के बाद इस प्रणाली को बदल दिया गया। मुद्रा की परिवर्तनीयता से तात्पर्य एक ऐसी प्रणाली से है जिसके अंतर्गत एक देश की मुद्रा विदेशी मुद्रा में परिवर्तित हो जाती है और विलोमशः भी। 1994 के बाद से भारतीय रुपया चालू खाते के लेन-देन में पूरी तरह से परिवर्तनीय बना दिया गया।

सार्वजनिक ऋण और घाटे की वित्त व्यवस्था

May 9, 2016
देश की सरकार द्वारा आम जनता और वित्तीय संस्थाओं से लिया गया कर्ज सार्वजनिक ऋण या पब्लिक डेट कहलाता है। इसे सरकारी ऋण अथवा राष्ट्रीय कर्ज भी कहा जाता है। यह कर्ज देश की वित्तीय स्थिति का सटीक पैमाना है। भारत का विदेशी ऋण मार्च 2014 के अंत तक 446.3 अरब अमेरिकी डॉलर से बढ़कर मार्च 2015 के अंत तक 475.8 अरब अमेरिकी डॉलर हो गया था। देश के विदेशी ऋण में दीर्घकालिक उधारी का बोलबाला हो रहा है।

भारत में कराधान: एक अवलोकन

May 9, 2016
भारत में कर प्रणाली के लिए एक अच्छी तरह से विकसित संरचना है। जो केन्द्र, राज्य सरकारों और स्थानीय निकायों के बीच स्पष्ट रूप से विभाजित है। केन्द्र सरकार व्यक्ति और संस्थाओं पर कुछ प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष कर लगाती और वसूलती है। प्रत्यक्ष कर में व्यक्तिगत आयकर, संपत्ति कर और निगम कर शामिल है जबकि अप्रत्यक्ष कर में बिक्री कर, उत्पाद शुल्क, कस्टम ड्यूटी और सर्विस टैक्स (सेवा कर) शामिल है। वर्तमान में निगम कर, (कुल कर संग्रह का 19%) केंद्र सरकार की आय का सबसे बड़ा स्रोत है।

भारत में वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी): एक समग्र अध्ययन

May 4, 2016
जीएसटी का अर्थ वस्तु एवं सेवा कर है। यह एक अप्रत्यक्ष कर है जिसे माल और सेवाओं की बिक्री पर लगाया जाता है। जीएसटी में कराधान के उद्देश्य के लिए वस्तु और सेवाओं के बीच कोई फर्क नहीं होगा। इस सिस्टम के लागू होने के बाद चुंगी, सेंट्रल सेल्स टैक्स (सीएसटी), राज्य स्तर के सेल्स टैक्स या वैट, एंट्री टैक्स, लॉटरी टैक्स, स्टैप ड्यूटी, टेलीकॉम लाइसेंस फीस, टर्नओवर टैक्स, बिजली के इस्तेमाल या बिक्री पर लगने वाले टैक्स, सामान के ट्रांसपोटेर्शन पर लगने वाले टैक्स खत्म हो जाएंगे।

कृषि और ग्रामीण विकास के लिए नीतियां: एक अवलोकन

May 4, 2016
कृषि उत्पादन और उत्पादकता को बढ़ाने हेतु राज्यों के प्रयासों में सुधार और दक्षता लाने के लिए 2008 में कृषि मैक्रो मैनेजमेंट (एमएमए) 2008 में संशोधन किया गया। किसानो को अधिक खाद्यान्न के उत्पादन के लिए प्रेरित करने हेतु केंद्र सरकार ने 1966-1967 से न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP Policy) नीति की शुरूआत की है । यह नीति प्रत्येक फसल के लिए किसानों को न्यूनतम मूल्य की गारंटी देती है। दूसरी ओर, सरकार ने ग्रामीण गरीबों के लिए महात्मा गांधी ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा), सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) जैसी योजनाओं की शुरूआत की है।

मौद्रिक नीति का अवलोकन

May 2, 2016
मौद्रिक नीति एक नियामक नीति है जिसके तहत केंद्रीय बैंक (भारत के मामले में आरबीआई) पैसे की आपूर्ति सामान्य आर्थिक लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए करता है। भारत में मुद्रा की आपूर्ति भारतीय रिजर्व बैंक करता है । सिक्के, वित्त मंत्रालय द्वारा ढालवाये जाते हैं लेकिन उनकी आपूर्ति भी भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा की जाती है। मौद्रिक नीति के मुख्य कारक हैं: नकद आरक्षित अनुपात, सांविधिक तरलता अनुपात, बैंक दर, रेपो दर, रिवर्स रेपो दर और खुले बाजार के परिचालन।

बीज की अधिक उपज वाली किस्में

Apr 29, 2016
बीज की अधिक उपज वाली किस्में (HYV बीज) सामान्य गुणवत्ता के बीज की तुलना में बेहतर होती हैं। इन बीजों से उत्पादन सामान्य बीजों की तुलना में अधिक होता है। इस प्रकार के बीज स्वस्थ और अधिक फसल प्राप्त करने के लिए बीजों का एक बेहतर विकल्प हैं। इन बीजों में कीड़ों और अन्य रोगों से लड़ने के लिए एक बेहतर प्रतिरक्षा प्रणाली होती है। इन बीजों की एक और विशेषता होती है वो यह है कि इन बीजों को सिंचाई की कम जरूरत होती है। इन बीजों का भारत की हरित क्रांति में एक बहुत महत्वपूर्ण योगदान रहा है।

मुद्रा की आपूर्ति और मुद्रास्फीति के बीच सम्बन्ध

Apr 28, 2016
बाजार में पैसे की आपूर्ति (भारत के मामले में रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया) किसी भी देश के केंद्रीय बैंक की जिम्मेदारी होती है । भारतीय रिजर्व बैंक, अर्थव्यवस्था में मुद्रा की आपूर्ति के लिए करेंसी छपवाती है। सिक्के, वित्त मंत्रालय द्वारा विभिन्न टकसालों में ढलवाए जाते है लेकिन पूरे देश में भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा ही वितरित किए जाते हैं। अर्थव्यवस्था में पैसे की आपूर्ति, मुद्रास्फीति की दर को निर्धारित करती है। पैसे की आपूर्ति अर्थव्यवस्था में जैसे- जैसे बढ़ती है उसी प्रकार मुद्रास्फीति भी बढ़ती जाती है।

राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा विधेयक

Apr 22, 2016
राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा विधेयक 2013 में संसद द्वारा पारित किया गया था। विधेयक के प्रावधानों के अनुसार, प्राथमिकता वाले परिवारों से संबंधित प्रत्येक व्यक्ति को हर माह में 7 किलो खाद्यान्न देने का प्रस्ताव है। जिसमें 3 रुपये प्रति किलो चावल, 2 रुपये किलो गेहूं और 1 रुपये किलो मोटा अनाज दिया जाता है। इस विधेयक के अनुसार सामान्य श्रेणी के परिवारों को 3 किलो खाद्यान्न प्रति व्यक्ति देने का प्रावधान है। इसका खाद्य सुरक्षा विधेयक का लाभ देश की 75 प्रतिशत ग्रामीण आबादी को होगा।

राष्ट्रीय विकास परिषद

Apr 22, 2016
योजना के निर्माण में राज्यों की भागीदारी होनी चाहिए, इस विचार को स्वीकार करते हुए सरकार के एक प्रस्ताव द्वारा 6 अगस्त, 1952 ई० को राष्ट्रीय विकास परिषद का गठन हुआ था । राष्ट्रीय विकास परिषद (एनडीसी) एक कार्यकारी निकाय है ।यह ना ही संवैधानिक है और न ही एक सांविधिक निकाय है। यह देश की पंचवर्षीय योजनाओं का अनुमोदन करती है। प्रधानमंत्री, परिषद का अध्यक्ष होता है । भारतीय संघ के सभी राज्यों के मुख्यमंत्री एवं योजना आयोग के सभी सदस्य इसके पदेन सदस्य होते हैं।

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