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आधुनिक भारत

General Knowledge for Competitive Exams

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भारत से एक दिन पहले पाकिस्तान स्वतंत्रता दिवस क्यों मनाता है और इसके पीछे मुख्य कारण क्या हैं?

Aug 13, 2020
15 अगस्त, 1947 को, भारत को ब्रिटिश राज से दो अलग-अलग राष्ट्रों - भारत और पाकिस्तान की कीमत पर अपनी स्वतंत्रता मिली. दोनों देशों ने एक साथ  स्वतंत्रता प्राप्त की लेकिन पाकिस्तान 14 अगस्त, 1947 को यानी भारत से एक दिन पहले अपना स्वतंत्रता दिवस मनाता है और भारत 15 अगस्त, 1947 को इस उत्सव को मनाता है. आइये इस लेख के माध्यम से इसके पीछे के कारणों के बारे में अध्ययन करते हैं.

Bal Gangadhar Tilak 164th birth anniversary: स्वराज मेरा जन्मसिद्ध अधिकार है, और मैं इसे लेकर रहूंगा, जानें उनके जीवन से जुड़े 10 अज्ञात तथ्य

Jul 23, 2020
बाल गंगाधर तिलक को लोकमान्य तिलक के नाम से भी जाना जाता है. उनका जन्म 23 जुलाई, 1856 को महाराष्ट्र के रत्नागिरी में हुआ था. उन्हें उनके प्रसिद्ध नारे के लिए जाना जाता है 'स्वराज मेरा जन्मसिद्ध अधिकार है, और मैं इसे लेकर रहूंगा'. आइए बाल गंगाधर तिलक, उनके बचपन, इतिहास, उपलब्धियों और कुछ अज्ञात तथ्यों के बारे में अध्ययन करते हैं.

जलियांवाला बाग नरसंहार के 101 साल: कारण और उसके प्रभाव

Apr 13, 2020
जलियांवाला बाग नरसंहार आज ही के दिन 101 साल पहले 1919 में हुआ था। भारतीय इतिहास में कुछ ऐसी तारीख हैं जिन्हें कभी नहीं भुलाया जा सकता। 13 अप्रैल 1919 उन तारीखों में से एक है जो ब्रिटिशों के अमानवीय चेहरे को सामने ला देती है। आइये इस लेख के माध्यम से जलियांवाला बाग हत्याकांड के कारण और उसके प्रभाव के बारे में अध्ययन करते हैं।

सुभाष चंद्र बोस जयंती 2020: उपलब्धियां और योगदान

Jan 23, 2020
सुभाष चंद्र बोस की 123rd जयंती सम्पूर्ण विश्व में 23 जनवरी को मनाई जाती है. इसी दिन इनका जन्म हुआ था. भारत के स्वतंत्रता संग्राम में उन्होंने अहम भूमिका निभाई थी. 1920 में उन्होंने ब्रिटिश सरकार की आईसीएस  परीक्षा को पास किया था परन्तु नौकरी नहीं की थी. आइये सुभाष चंद्र बोस और उनकी उपलब्धियों के बारे में अध्ययन करते हैं.    

जानें कोरेगांव भीमा युद्ध क्या है और दलित अधिकारों के लिए इसका क्या महत्व है?

Jan 2, 2020
भीमा कोरेगांव में दलित समुदाय हर साल 1 जनवरी को बड़ी संख्या में इकठ्ठा होकर उन दलित वीरों को श्रद्धांजलि देते हैं जिन्होंने 1 जनवरी 1818 में अंग्रेजों और पेशवाओं के बीच हुए युद्ध में जान गवायीं थी.इस युद्ध में दलितों ने अंग्रेजों का साथ दिया था क्योंकि पेशवाओं ने उनके साथ जानवरों से भी बदतर व्यवहार किया था. आइये इस लेख में भीमा कोरेगांव की पूरी लड़ाई के बार में जानते हैं.

पानीपत की लड़ाई किसके बीच और कब हुई?

Dec 27, 2019
पानीपत की लड़ाइयों का भारत में अपना ही इतिहास और महत्व है. क्या आप जानते हैं कि पानीपत की लड़ाईयां किसके बीच हुईं और कब? आइये इस लेख के माध्यम से अध्ययन करते हैं.

शहीद भगत सिंह ने क्यों कहा कि "मैं नास्तिक हूँ"

Aug 14, 2019
भगत सिंह का जन्म सितम्बर 1907 में पंजाब में हुआ था और सैंडर्स की हत्या के आरोप में दोषी पाये जाने के कारण 23 मार्च 1931 को उन्हें लाहौर के सेंट्रल जेल में फांसी दे दी गयी थी | उन्होंने 5,6 अक्टूबर 1931 को लाहौर के सेंट्रल जेल से एक धार्मिक आदमी को जवाब देने के लिये एक निबंध लिखा था जिसने उनके ऊपर नास्तिक होने का आरोप लगाया था |  भगत सिंह की उम्र उस समय 23 वर्ष की थी|

चन्द्रशेखर आज़ाद से सम्बंधित 9 अनजाने एवं रोचक तथ्य

Aug 14, 2019
चन्द्रशेखर आज़ाद को कौन नहीं जानता, वे किसी परिचय के मोहताज नहीं है लेकिन उनके जीवन के बारे में जानना अपने आप में रोचक तथा ज्ञानवर्धक जानकारी है| चन्द्रशेखर आज़ाद का जन्म 23 जुलाई 1906 को मध्य प्रदेश के झाबुआ जिले के भाबरा में हुआ था जबकि उनकी मृत्यु 27 फरवरी 1931 को इलाहबाद के अल्फ्रेड पार्क में हुई थी| इस लेख में हम चन्द्रशेखर आज़ाद की पुण्यतिथि के अवसर पर उनसे सम्बंधित 9 अनजाने एवं रोचक तथ्यों का विवरण दे रहें हैं|

भारत छोड़ो आंदोलन क्या है और क्यों महत्वपूर्ण है?

Aug 8, 2019
एक लम्बे समय तक भारतवर्ष अंग्रेजों के आधीन रहा है. भारत को आजाद कराने में कई क्रांतिकारियों ने अपनी जान गवाई है और इसके लिए कई प्रकार कि क्रांतियाँ भी हुई हैं। जिनमे से एक है "भारत छोड़ो आन्दोलन". आइये जानते हैं भारत छोड़ो आन्दोलन के बारे में। 

ईश्वरचंद विद्यासागर: विधवा पुनर्विवाह के प्रवर्तक

May 15, 2019
सामाजिक सुधार आन्दोलन, जो देश के सभी भागों और सभी धर्मों तक विस्तृत था, वास्तव में धार्मिक सुधार आन्दोलन भी था| महान विद्वान और सुधारक ईश्वर चंद विद्यासागर के विचारों में भारतीय और पश्चिमी मूल्यों का सुन्दर समन्वय था| वे उच्च नैतिक मूल्यों में विश्वास करते थे और निर्धनों के प्रति उदार भाव से सम्पन्न एक महान मानववादी विचारक थे| उनकी महान शिक्षाओं के लिए कलकत्ता के संस्कृत कॉलेज,जिसके वे कुछ वर्षों के लिए प्रिंसिपल रहे थे, ने उन्हें ‘विद्यासागर’ की उपाधि प्रदान की थी.

प्रसिद्ध भारतीय हस्तियाँ जिनके नाम पर उनके जीवनकाल में ही डाक टिकट जारी हुए हैं

Mar 15, 2019
दुनिया में कई ऐसे प्रसिद्ध व्यक्ति हुए हैं जो अपने जीवनकाल में ही वह प्रतिष्ठा और ख्याति प्राप्त कर लेते हैं, जो मरने के बाद भी कई व्यक्तियों को नसीब नहीं होती है। इन्हीं प्रसिद्धियों में से एक है- किसी जीवित व्यक्ति के नाम पर डाक टिकट जारी होना। भारत में भी कई ऐसे महान व्यक्तित्व हुए हैं जिनके नाम पर उनके जीवनकाल में ही डाक टिकट जारी किए गए हैं। इस लेख में हम उन प्रसिद्ध भारतीय हस्तियों का विवरण दे रहे हैं जिनके नाम पर उनके जीवनकाल में ही डाक टिकट जारी हुए हैं।

भारत में छात्र आंदोलनों का संक्षिप्त इतिहास

Feb 27, 2019
स्वतंत्रता पूर्व और स्वतंत्रता के बाद भारत में जितने भी परिवर्तनकारी सामाजिक आंदोलन हुए, उनमें छात्रों की भूमिका बहुत अहम रही है। इस लेख में हम भारत में छात्र आंदोलनों का संक्षिप्त इतिहास दे रहे हैं जो UPSC, SSC, State Services, NDA, CDS और Railways जैसी प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे छात्रों के लिए बहुत ही उपयोगी है।

मैसूर राज्य का इतिहास

Nov 9, 2018
विजयनगर साम्राज्य के पतन के बाद, 1565 ई। में हिन्दू वोडियार वंश द्वारा मैसूर राज्य को स्वतंत्र राज्य घोषित कर दिया गया। वोडियार वंश के अंतिम शासक चिक्का कृष्णराज द्वितीय के शासनकाल में वास्तविक सत्ता देवराज(दलवाई या सेनापति) और नंजराज (सर्वाधिकारी या वित्त एवं राजस्व नियंत्रक) के हाथों में आ गयी थी।ये क्षेत्र पेशवा और निज़ाम के बीच विवाद का विषय बन गया था।1761 ई. में हैदर अली ,जिसने अपने जीवन की शुरुआत एक सैनिक के रूप में की थी,ने मैसूर के राजवंश को हटाकर  राज्य पर अपना कब्ज़ा कायम कर लिया।

भारत की स्वतंत्रता तथा स्वतंत्रता पश्चात के प्रमुख वचनों और नारों की सूची

Sep 12, 2018
भारत की स्वतंत्रता तथा स्वतंत्रता पश्चात हुई परिस्थितयों से निपटने के लिए, भारत के रहनुमाओं ने समय-समय पर अपने आवाज़ बुलंद किया है और विभिन्न नारों तथा वचनों की मदद से भारतियों में आत्मविश्वास भरा है। इस लेख में हमने भारत की स्वतंत्रता तथा स्वतंत्रता पश्चात के प्रमुख वचनों और नारों को सूचीबद्ध किया है जो UPSC, SSC, State Services, NDA, CDS और Railways जैसी प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे छात्रों के लिए बहुत ही उपयोगी है।

स्वतंत्रता से पहले और बाद में भारतीय रेलवे का तुलनात्मक विवरण

Aug 30, 2018
भारतीय रेलवे सम्पूर्ण भारत में लगभग हर लोगों के जीवन को छू रहा है. यह दुनिया का चौथा सबसे बड़ा रेलवे नेटवर्क है जो करीब 7651 मिलियन यात्रियों का परिवहन कर रहा है. परन्तु क्या आपने कभी सोचा है कि भारत में रलवे की शुरुआत कब से हुई, कैसे हुई और स्वतंत्रता से पहले और बाद में भारतीय रेलवे का कितना विकास हुआ इत्यादि. आइये इस लेख के माध्यम से अध्ययन करते हैं.
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