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आधुनिक भारत

General Knowledge for Competitive Exams

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पश्चिमी भारत में सुधार आन्दोलन

सन1867 ई. में बम्बई में प्रार्थना समाज की स्थापना की गई| महादेव गोविन्द रानाडे और रामकृष्ण भंडारकर इसके मुख्य संस्थापक थे| प्रार्थना समाज के नेता ब्रहम समाज से प्रभावित थे| उन्होंने जाति-प्रथा और छुआछुत के व्यवहार का विरोध किया| रानाडे, जोकि भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के भी संस्थापकों में से एक थे,ने 1887 ई. में इंडियन नेशनल सोशल कांफ्रेंस  की स्थापना की जिसका उद्देश्य संपूर्ण भारत में सामाजिक सुधार के लिए प्रभावशाली तरीके से कार्य करना था|

सय्यद अहमद खान और अलीगढ़ आन्दोलन

सर सैय्यद अहमद खान भारत के महानतम मुस्लिम सुधारकों में से एक थे|उन्होंने आधुनिक तर्कवाद व विज्ञान के प्रकाश में कुरान की व्याख्या की| उन्होंने धर्मान्धता,संकीर्ण मानसिकता व कट्टरपन का विरोध किया और स्वतंत्र सोच को बढावा देने पर बल दिया| उनका सबसे बड़ा योगदान 1875 ई. में अलीगढ़ में मोहम्मडन एंग्लो ओरिएण्टल कॉलेज की स्थापना था| समय के साथ यह भारतीय मुस्लिमों के लिए सर्वाधिक महत्वपूर्ण शैक्षणिक संस्थान बन गया| यह मानविकी व विज्ञान के विषयों से सम्बंधित शिक्षा को पूरी तरह से अंग्रेजी माध्यम में प्रदान करता था और इसके कई अध्यापक इंग्लैंड से भी आये थे|

भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस

भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की स्थापना 28 से 30 दिसंबर 1885 के मध्य बम्बई में तब हुई जब भारत की विभिन्न प्रेसीडेंसियों और प्रान्तों के 72 सदस्य बम्बई में एकत्र हुए| भारत के सेवानिवृत्त ब्रिटिश अधिकारी एलेन ओक्टोवियन ह्युम ने कांग्रेस के गठन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी|

मुग़ल उत्तराधिकारी

औरंगजेब की मृत्यु ने मुग़ल साम्राज्य के पतन की नींव डाली क्योंकि उसकी मृत्यु के पश्चात उसके तीनों पुत्रों-मुअज्जम,आज़म और कामबक्श के मध्य लम्बे समय तक चलने वाले उत्तराधिकार के युद्ध ने शक्तिशाली मुग़ल साम्राज्य को कमजोर कर दिया. औरंगजेब ने अपने तीनों पुत्रों को प्रशासनिक उद्देश्य से अलग अलग क्षेत्रों का गवर्नर बना दिया था,जैसे-मुअज्ज़म काबुल का,आज़म गुजरात और कामबक्श बीजापुर का गवर्नर था .इसी कारण इन तीनों के मध्य मतभेद पैदा हुए,जिसने उत्तराधिकार को लेकर गुटबंदी को जन्म दिया.

आजादी के बाद भारत की 10 महत्वपूर्ण उपलब्धियां

Aug 17, 2016
हमने अभी– अभी अपना 70वां स्वतंत्रता दिवस मनाया है। सन् 1947 के बाद से अब तक भारत में बहुत कुछ घटित हुआ। यहां, स्वतंत्रता के बाद भारत द्वारा हासिल की गई 10 महत्वपूर्ण उपलब्धियां और स्वतंत्रता दिवस के उत्सव के कारण दिए जा रहे हैं।

राजगोपालाचारी फार्मूला (1944 ई.)

Aug 17, 2016
द्विराष्ट्र सिद्धांत और ब्रिटिशों से भारत की स्वतंत्रता को लेकर मुस्लिम लीग और भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के अलग अलग विचारों के कारण पैदा हुए मतभेदों को सुलझाने के उद्देश्य से राजगोपालाचारी फार्मूला लाया गया था| सी.राजगोपालाचारी, जोकि कांग्रेस के महत्वपूर्ण नेता थे, ने मुस्लिम लीग और कांग्रेस के बीच के राजनीतिक गतिरोध को दूर करने के लिए एक फार्मूला तैयार किया| यह फार्मूला, जिसे महात्मा गाँधी का समर्थन प्राप्त था, वास्तव में लीग की पाकिस्तान मांग की मौन स्वीकृति थी|

चार्टर अधिनियम,1793

Nov 16, 2015
1793 ई. में पारित चार्टर अधिनियम द्वारा कंपनी के भारत के साथ व्यापारिक एकाधिकार को अगले बीस वर्षों के लिए बढ़ा दिया गया और गवर्नर जनरल के अधिकार क्षेत्र में बम्बई और मद्रास के गवर्नर को भी शामिल कर दिया |सुप्रीम कोर्ट के अधिकार क्षेत्र को खुले सागर तक बढ़ा दिया |इस अधिनियम के द्वारा ब्रिटिशों ने भारत पर शासन करने के विस्तारवादी नीति पर कार्य करना प्रारंभ कर दिया और भारतीय लोगों के अधिकारों व संपत्ति को भी नियंत्रित करने लगे तथा न्यायालयों को अपने निर्णयों को स्वयं द्वारा निर्मित सामान्य संहिता के आधार पर नियंत्रित करने के लिए बाध्य किया|

आधुनिक भारत का इतिहास: सम्पूर्ण अध्ययन सामग्री

Jun 3, 2016
“आधुनिक भारत का इतिहास” की अध्ययन सामग्री के अंतर्गत हमने न केवल स्कूल जाने वाले विद्यार्थियों बल्कि ग्रेजुएशन की पढाई कर रहे विद्यार्थियों की जरूरतों को भी पूरा करने के साथ-साथ प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे प्रतिभागियों की आवश्यकता के अनुसार अध्ययन सामग्री देने का प्रयास किया है I

अगस्त प्रस्ताव

Jun 3, 2016
भारत के वायसराय लॉर्ड लिनलिथगो ने 8 अगस्त 1940 को शिमला से एक वक्तव्य जारी किया,जिसे अगस्त प्रस्ताव कहा गया|यह प्रस्ताव कांग्रेस द्वारा ब्रिटेन से भारत की स्वतंत्रता के लक्ष्य को लेकर पूछे गए सवाल के जबाव में लाया गया था| यह भारत के वायसराय लॉर्ड लिनलिथगो के द्वारा जारी किया गया औपचारिक वक्तव्य था, जिसने संविधान निर्माण प्रक्रिया की नींव रखी और कांग्रेस ने संविधान सभा के गठन को सहमति प्रदान की|

रामकृष्ण और विवेकानंद

Jun 3, 2016
19 वीं सदी के धार्मिक मानवों ने न तो किसी सम्प्रदाय का समर्थन किया और न ही मोक्ष का कोई नया रास्ता दिखलाया| उन्होंने ईश्वरीय चेतना का सन्देश दिया| उनके अनुसार ईश्वरीय चेतना के आभाव में परम्पराएँ रूढ़ और दमनात्मक हो जाती है और धार्मिक शिक्षाएं अपनी परिवर्तनकारी शक्ति को खोने लगती है| 19 वीं सदी में भारत के ईश मानव रामकृष्ण परमहंस और विवेकानंद थे| रामकृष्ण परमहंस और विवेकानंद का दर्शन धार्मिक सौहार्द्र पर आधारित था और इस सौहार्द्र का अनुभव व्यक्तिगत ईश्वरीय चेतना के आधार पर ही किया जा सकता है|

माउंटबेटन योजना और भारत के विभाजन

Dec 17, 2015
लॉर्ड माउंटबेटन, भारत के विभाजन और सत्ता के त्वरित हस्तांतरण के लिए भारत आये। प्रारम्भ में यह सत्ता हस्तांतरण विभाजित भारत की भारतीय सरकारों को डोमिनियन के दर्जे के रूप में दी जानी थीं। 3 जून 1947 को लॉर्ड माउंटबेटन ने अपनी योजना प्रस्तुत की जिसमे भारत की राजनीतिक समस्या को हल करने के विभिन्न चरणों की रुपरेखा प्रस्तुत की गयी थी। प्रारम्भ में यह सत्ता हस्तांतरण विभाजित भारत की भारतीय सरकारों को डोमिनियन के दर्जे के रूप में दी जानी थीं।

मुस्लिम सुधार आन्दोलन

Jun 3, 2016
19 वीं सदी के आरम्भ में मुस्लिम उद्बोधन के चिन्ह उत्तर प्रदेश में बरेली के सर सैय्यद अहमद खां और बंगाल के शरीयतुल्ला के नेतृत्व में उभरकर सामने आये, ऐसा ईसाई मिशनरियों,पश्चिमी विचारों के प्रभाव और आधुनिक शिक्षा के कारण संभव हो सका| उन्होंने स्वयं को इस्लाम के शुद्धिकरण व उसे मजबूत बनाने और इस्लामिक शिक्षाओं के प्रोत्साहन के लिए समर्पित कर दिया था| शरीयतुल्ला ने बंगाल के फरायजी आंदोलन की शुरुआत की,जिसने कृषकों के हित में कई कदम उठाये थे|उन्होंने मुस्लिम समाज में प्रचलित जाति-व्यवस्था का तीव्र विरोध किया था|

राजपूत

Jun 3, 2016
राजपूतों ने  औरंगजेब की नीतियों से नाखुश होकर अपनी स्वतंत्रता की घोषणा कर दी।मुग़ल साम्राज्य के टूटने से संपूर्ण भारत की राजनीतिक परिस्थितियाँ बदल गयीं ।इन बदलती परिस्थितियों के कारण पूरे भारत के राजनीतिक,आर्थिक और सैन्य गठबंधनों में आमूल-चूल बदलाव आ गया। जोधपुर और जयपुर के राजाओं ने उत्तरवर्ती मुगलों के काल में मुग़ल साम्राज्य के काफी बड़े हिस्से को अपने प्रभाव में ले लिया। औरंगजेब की मृत्यु के बाद जोधपुर और जयपुर के राजा दिल्ली की राजनीति में प्रमुख भूमिका निभाने लगे।

बटलर समिति (1927 ई.)

Jun 3, 2016
भारतीय राज्य समिति ने सर हार्टकोर्ट बटलर की अध्यक्षता में 1927 में एक समिति गठित की,जिसे बटलर समिति भी कहा जाता है| इस समिति का गठन परमसत्ता और देशी राजाओं के बीच के संबंधों की जांच और स्पष्टीकरण के लिया किया गया था| इसके गठन के उद्देश्य परमसत्ता और भारतीय राजाओं के मध्य के संबंधों की जाँच करना और उनके मध्य के इन संबंधों की बेहतरी के लिए सुझाव देना था ताकि ब्रिटिश भारत और देशी रियासतों के बीच संतोषजनक संबंधों की स्थापना की जा सके|

रौलट विरोधी सत्याग्रह

Jun 3, 2016
रौलट विरोधी सत्याग्रह के दौरान,महात्मा गाँधी ने कहा कि “यह मेरा दृढ़ विश्वास है कि हम मुक्ति केवल संघर्ष के द्वारा ही प्राप्त करेंगे न कि अंग्रेजों द्वारा हमें प्रदान किये जा रहे सुधारों से”|13अप्रैल,1919 को घटित जलियांवाला बाग हत्याकांड के बाद ,रौलट विरोधी सत्याग्रह ने अपनी गति खो दी|यह आन्दोलन प्रेस की स्वतंत्रता पर प्रतिबंधों और बिना ट्रायल के कैद में रखने के विरोध में था| रौलट एक्ट ब्रिटिशों को बंदी प्रत्यक्षीकरण के अधिकार को स्थगित करने सम्बन्धी शक्तियां प्रदान करता था| इसने राष्ट्रीय नेताओं को चिंतित कर दिया और उन्होंने इस दमनकारी एक्ट के विरुद्ध विरोध प्रदर्शन प्रारंभ कर दिए|
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