1. Home
  2.  |  
  3. GENERAL KNOWLEDGE
  4.  |  
  5. इतिहास
  6.  |  
  7. भारतीय इतिहास
  8.  |  
  9. आधुनिक भारत

आधुनिक भारत

General Knowledge for Competitive Exams

Read: General Knowledge | General Knowledge Lists | Overview of India | Countries of World

1861 का अधिनियम

Dec 3, 2015
भारतीय परिषद् अधिनियम-1861 का निर्माण देश के प्रशासन में भारतीयों को शामिल करने के उद्देश्य से बनाया गया था|इस अधिनियम ने सरकार की शक्तियों और कार्यकारी व विधायी उद्देश्य हेतु गवर्नर जनरल की परिषद् की संरचना में बदलाव किया| यह प्रथम अवसर था जब गवर्नर जनरल की परिषद् के सदस्यों को अलग-अलग विभाग सौंपकर विभागीय प्रणाली की शुरुआत की| इस अधिनियम ने सरकार की शक्तियों और कार्यकारी व विधायी उद्देश्य हेतु गवर्नर जनरल की परिषद् की संरचना में बदलाव किया|

उग्रपंथ और बंगाल विभाजन

Nov 30, 2015
उग्रपंथियों का राजनीतिक उदय कांग्रेस के अन्दर ही बंगाल विभाजन विरोधी प्रदर्शनों से हुआ था|जब ब्रिटिश सरकार ने बंगाल के लोगों द्वारा किये जा रहे जन प्रदर्शनों के बावजूद बंगाल के विभाजन को रद्द करने से मना कर दिया तो अनेक युवा नेताओं का सरकार से मोहभंग हो गया ,इन्हें ही नव-राष्ट्रवादी या उग्रपंथी कहा गया| लाला लाजपत राय,बाल गंगाधर तिलक,बिपिन चंद्र पाल और अरविन्द घोष प्रमुख उग्रपंथी नेता थे|उन्हें उग्रपंथी कहा गया क्योकि उनका मानना था कि सफलता केवल उग्र माध्यमों से ही प्राप्त की जा सकती है|

उदारवादी

Nov 30, 2015
उदारवादियों ने 1885-1905 तक भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस पर अपना प्रभुत्व बनाये रखा| वे थे तो भारतीय लेकिन वास्तव में अपनी पसंद,बुद्धि,विचार और नैतिकता के मामले में ब्रिटिश थे|वे धैर्य,संयम,समझौतों और सभाओं में विश्वास रखते थे| ए.ओ.ह्यूम,डब्लू.सी.बनर्जी,सुरेन्द्रनाथ बनर्जी,दादाभाई नैरोजी,फिरोजशाह मेहता,गोपालकृष्ण गोखले,पंडित मदन मोहन मालवीय,बदरुद्दीन तैय्यब जी,जस्टिस रानाडे,जी.सुब्रमण्यम अय्यर आदि राष्ट्रीय आन्दोलन के प्रथम चरण के नेता थे|

भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस

Nov 30, 2015
भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की स्थापना 28 से 30 दिसंबर 1885 के मध्य बम्बई में तब हुई जब भारत की विभिन्न प्रेसीडेंसियों और प्रान्तों के 72 सदस्य बम्बई में एकत्र हुए| भारत के सेवानिवृत्त ब्रिटिश अधिकारी एलेन ओक्टोवियन ह्युम ने कांग्रेस के गठन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी|

भारतीय प्रेस का विकास

Nov 30, 2015
1780 ई. में जेम्स ऑगस्टस हिक्की ने ‘बंगाल गजट’ या ‘कलकत्ता जनरल एडवरटाइजर’ पत्र शुरू किया जिसे 1872 ई. में सरकार की स्पष्ट आलोचना करने के कारण जब्त कर लिया गया| लेकिन हिक्की के इस प्रयास ने भारत में प्रेस की स्थापना की | बाद में अनेक समाचार पत्र और जर्नल प्रकाशित हुए,जैसे- बंगाल जर्नल,कलकत्ता क्रोनिकल,मद्रास कोरियर और बॉम्बे हेराल्ड|

1857 का विद्रोह (कारण और असफलताए)

Nov 26, 2015
1857 का विद्रोह उत्तरी और मध्य भारत में ब्रिटिश अधिग्रहण के विरुद्ध उभरे सैन्य असंतोष व जन-विद्रोह का परिणाम था| इस विद्रोह ने भारत में ब्रिटिश ईस्ट इंडिया के शासन को समाप्त कर दिया और अगले 90 वर्षों के लिए भारतीय उपमहाद्वीप के अधिकांश भाग को ब्रिटिश सरकार (ब्रिटिश राज) के प्रत्यक्ष शासन के अधीन लाने का रास्ता तैयार कर दिया| इस विद्रोह के – सामाजिक और धार्मिक, आर्थिक,सैन्य और राजनीतिक –चार मुख्य कारण थे|

ब्रिटिश शासन में सामाजिक अधिनियम

Nov 26, 2015
19वीं सदी की शुरुआत में ब्रिटिशों की नीतियों ने हालाँकि तत्कालीन सामाजिक समाज में व्याप्त बुराइयों के उन्मूलन में सहयोग दिया लेकिन धीरे-धीरे भारत की सामाजिक-धार्मिक बुनावट को कमजोर करने का कार्य भी किया क्योकि वे मुख्यतः अंग्रेजी सोच व समझ पर आधारित थीं| प्राच्यवाद के व्याख्याताओं ने कहा कि भारतीय समाज को आधुनिकीकरण और पश्चिमीकरण की आवश्यकता है| उन्हें (बुराइयों) अनेक विचारधाराओं की तीव्र आलोचना का सामना करना पड़ा| विलियम विल्बरफोर्स व चार्ल्स ग्रांट जैसे व्यक्तियों के अनुसार ‘भारतीय समाज अंधविश्वासों,मूर्ति पूजा व पुजारियों की तानाशाही से भरा पड़ा है|’

दक्षिण भारत में सुधार

Nov 26, 2015
बंगाल से शुरू होकर धार्मिक व सामाजिक सुधार आन्दोलन भारत के अन्य भागों में भी फैल गए| ब्रहम समाज से प्रेरित होकर 1864 ई. में मद्रास में वेद समाज की स्थापना की गयी| इसने जातिगत भेदभाव का विरोध किया और विधवा पुनर्विवाह व स्त्री शिक्षा को प्रोत्साहित किया| ब्रहम समाज के समान,वेद समाज ने भी अंधविश्वासों व हिन्दू धर्म के रूढ़िवादी रीति-रिवाजों का विरोध किया और एक परमसत्ता में विश्वास व्यक्त किया| वेद समाज के सबसे प्रमुख नेता चेम्बेती श्रीधरालू नायडू थे|

पश्चिमी भारत में सुधार आन्दोलन

Nov 26, 2015
सन1867 ई. में बम्बई में प्रार्थना समाज की स्थापना की गई| महादेव गोविन्द रानाडे और रामकृष्ण भंडारकर इसके मुख्य संस्थापक थे| प्रार्थना समाज के नेता ब्रहम समाज से प्रभावित थे| उन्होंने जाति-प्रथा और छुआछुत के व्यवहार का विरोध किया| रानाडे, जोकि भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के भी संस्थापकों में से एक थे,ने 1887 ई. में इंडियन नेशनल सोशल कांफ्रेंस  की स्थापना की जिसका उद्देश्य संपूर्ण भारत में सामाजिक सुधार के लिए प्रभावशाली तरीके से कार्य करना था|

थिओसोफिकल समाज

Nov 26, 2015
‘थिओसोफी’ सभी धर्मों में निहित आधारभूत ज्ञान है लेकिन यह प्रकट तभी होता है जब वे धर्म अपने-अपने अन्धविश्वासों से मुक्त हो| वास्तव में यह एक दर्शन है जो जीवन को बुद्धिमत्तापूर्वक प्रस्तुत करता है और हमें यह बताता है की ‘न्याय’ तथा ‘प्यार’ ही वे मूल्य है जो संपूर्ण विश्व को दिशा प्रदान करते है| इसकी शिक्षाएं,बिना किसी बाह्य परिघटना पर निर्भरता के, मानव के अन्दर छुपी हुई आध्यात्मिक प्रकृति को उद्घाटित करती हैं|

सय्यद अहमद खान और अलीगढ़ आन्दोलन

Nov 26, 2015
सर सैय्यद अहमद खान भारत के महानतम मुस्लिम सुधारकों में से एक थे|उन्होंने आधुनिक तर्कवाद व विज्ञान के प्रकाश में कुरान की व्याख्या की| उन्होंने धर्मान्धता,संकीर्ण मानसिकता व कट्टरपन का विरोध किया और स्वतंत्र सोच को बढावा देने पर बल दिया| उनका सबसे बड़ा योगदान 1875 ई. में अलीगढ़ में मोहम्मडन एंग्लो ओरिएण्टल कॉलेज की स्थापना था| समय के साथ यह भारतीय मुस्लिमों के लिए सर्वाधिक महत्वपूर्ण शैक्षणिक संस्थान बन गया| यह मानविकी व विज्ञान के विषयों से सम्बंधित शिक्षा को पूरी तरह से अंग्रेजी माध्यम में प्रदान करता था और इसके कई अध्यापक इंग्लैंड से भी आये थे|

मुस्लिम सुधार आन्दोलन

Nov 26, 2015
19 वीं सदी के आरम्भ में मुस्लिम उद्बोधन के चिन्ह उत्तर प्रदेश में बरेली के सर सैय्यद अहमद खां और बंगाल के शरीयतुल्ला के नेतृत्व में उभरकर सामने आये, ऐसा ईसाई मिशनरियों,पश्चिमी विचारों के प्रभाव और आधुनिक शिक्षा के कारण संभव हो सका| उन्होंने स्वयं को इस्लाम के शुद्धिकरण व उसे मजबूत बनाने और इस्लामिक शिक्षाओं के प्रोत्साहन के लिए समर्पित कर दिया था| शरीयतुल्ला ने बंगाल के फरायजी आंदोलन की शुरुआत की,जिसने कृषकों के हित में कई कदम उठाये थे|उन्होंने मुस्लिम समाज में प्रचलित जाति-व्यवस्था का तीव्र विरोध किया था|

रामकृष्ण और विवेकानंद

Nov 26, 2015
19 वीं सदी के धार्मिक मानवों ने न तो किसी सम्प्रदाय का समर्थन किया और न ही मोक्ष का कोई नया रास्ता दिखलाया| उन्होंने ईश्वरीय चेतना का सन्देश दिया| उनके अनुसार ईश्वरीय चेतना के आभाव में परम्पराएँ रूढ़ और दमनात्मक हो जाती है और धार्मिक शिक्षाएं अपनी परिवर्तनकारी शक्ति को खोने लगती है| 19 वीं सदी में भारत के ईश मानव रामकृष्ण परमहंस और विवेकानंद थे| रामकृष्ण परमहंस और विवेकानंद का दर्शन धार्मिक सौहार्द्र पर आधारित था और इस सौहार्द्र का अनुभव व्यक्तिगत ईश्वरीय चेतना के आधार पर ही किया जा सकता है|

डेजेरियो और यंग बंगाल

Nov 26, 2015
1820 के दशक अंतिम समय और 1830 के दशक प्रारंभ में बंगाल के युवाओं में एक उग्र/क्रांतिकारी,प्रबुद्ध और बुद्धिजीवी चलन का उदय हुआ जिसे ‘यंग बंगाल आन्दोलन’ के नाम से जाना गया| एक युवा आंग्ल-भारतीय,हेनरी विवियन डेरेजियो,जिन्होनें 1826 से लेकर 1831 तक हिन्दू कॉलेज में अध्यापन किया था,इस प्रगतिशील आन्दोलन के नेता और प्रेरक थे| डेरेजियो ने कलकत्ता के युवाओं को व्यवहारिक रूप से प्रभावित किया और उनके बीच एक बौद्धिक आन्दोलन की शुरुआत की|

भारत सरकार अधिनियम - 1935

Nov 16, 2015
भारत सरकार अधिनियम-1935  में यह अधिकथित था कि,यदि आधे भारतीय राज्य संघ में शामिल होने के लिए सहमत होते है तो, भारत को एक संघ बनाया जा सकता है| इस स्थिति में उन्हें केंद्रीय विधायिका के दोनों सदनों में अधिक प्रतिनिधित्व प्रदान किया जायेगा, लेकिन संघ से सम्बंधित प्रावधानों को लागू नहीं किया जा सका| इस अधिनियम में स्वतंत्रता की बात तो दूर , भारत को डोमिनियन का दर्जा देने की भी कोई चर्चा नहीं की गयी थी क्योकि  इस अधिनियम का प्रमुख उद्देश्य भारत सरकार को ब्रिटिश सम्राट के अधीन लाना था|

मोंटेंग्यु-चेम्सफोर्ड सुधार अर्थात भारत सरकार अधिनियम-1919

Nov 16, 2015
मोंटेंग्यु-चेम्सफोर्ड सुधार अर्थात भारत सरकार अधिनियम-1919  द्वारा भारत में प्रांतीय द्वैध शासन प्रणाली की स्थापना की गयी |यह एक ऐसी व्यवस्था थी जिसमें प्रांतीय विषयों को दो भागों- आरक्षित और हस्तांतरित में बांटा गया था,आरक्षित विषयों का प्रशासन गवर्नर अपने द्वारा मनोनीत पार्षदों के माध्यम से करता था और हस्तांतरित विषयों का प्रशासन निर्वाचित सदस्यों द्वारा किया जाता था|इन सुधारों द्वारा केंद्रीय विधान-मंडल को द्विसदनीय बना दिया गया |इनमें से एक सदन को राज्य परिषद् और दुसरे सदन को केंद्रीय विधान सभा कहा गया |दोनों सदनों में निर्वाचित सदस्यों का बहुमत था|

1909 ई. का भारतीय परिषद् अधिनियम

Nov 16, 2015
1909 ई. के भारत शासन अधिनियम को ,भारत सचिव और वायसराय के नाम पर, मॉर्ले-मिन्टो सुधार भी कहा जाता है|इसका निर्माण उदारवादियों को संतुष्ट करने के लिए किया गया था| लॉर्ड मिन्टो को ‘सांप्रदायिक निर्वाचन मंडल का पिता’ कहा जाता है क्योकि उन्होंने इन सुधारों के माध्यम से ‘प्रथक निर्वाचन मंडल ‘ के सिद्धांत का प्रारंभ किया | भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस ने 1909 ई. के अपने अधिवेशन में इस अधिनियम के अन्य सुधारों का तो स्वागत किया लेकिन धर्म के आधार पर प्रथक निर्वाचक मंडलों की स्थापना के प्रावधान का विरोध किया|

1892 ई. का अधिनियम

Nov 16, 2015
ब्रिटेन की संसद द्वारा 1892 ई. में पारित किये गए अधिनियम ने विधान परिषदों की सदस्य संख्या में वृद्धि कर उन्हें सशक्त बनाया, जिसने भारत में संसदीय प्रणाली की आधारशिला रखी| इस अधिनियम द्वारा परिषद् के सदस्यों को वार्षिक वित्तीय विवरण अर्थात बजट पर बहस करने का अधिकार प्रदान किया गया| गवर्नर जनरल की कार्यकारी परिषद् में अतिरिक्त सदस्यों की संख्या बढ़ाकर 16 तक कर दी गयी| इस अधिनियम द्वारा भारत में पहली बार चुनाव प्रणाली की शुरुआत की गयी|

रेग्युलेटिंग एक्ट, 1773

Nov 16, 2015
बंगाल के कुप्रशासन से उपजी परिस्थितियों ने ब्रिटिश संसद को ईस्ट इंडिया कंपनी के कार्यों की जाँच हेतु बाध्य कर दिया| ब्रिटिश संसद ने पाया कि भारत में कंपनी की गतिविधियों को नियंत्रित करने की जरुरत है और इसी जरुरत की पूर्ति के लिए 1773 ई. में रेग्युलेटिंग एक्ट पारित किया गया| यह एक्ट भारत के सम्बन्ध प्रत्यक्ष हस्तक्षेप हेतु ब्रिटिश सरकार द्वारा उठाया गया पहला कदम था |इस एक्ट का उद्देश्य व्यापारिक कंपनी के हाथों से राजनीतिक शक्ति छीनने की ओर एक कदम बढाना था|

चार्टर अधिनियम,1793

Nov 16, 2015
1793 ई. में पारित चार्टर अधिनियम द्वारा कंपनी के भारत के साथ व्यापारिक एकाधिकार को अगले बीस वर्षों के लिए बढ़ा दिया गया और गवर्नर जनरल के अधिकार क्षेत्र में बम्बई और मद्रास के गवर्नर को भी शामिल कर दिया |सुप्रीम कोर्ट के अधिकार क्षेत्र को खुले सागर तक बढ़ा दिया |इस अधिनियम के द्वारा ब्रिटिशों ने भारत पर शासन करने के विस्तारवादी नीति पर कार्य करना प्रारंभ कर दिया और भारतीय लोगों के अधिकारों व संपत्ति को भी नियंत्रित करने लगे तथा न्यायालयों को अपने निर्णयों को स्वयं द्वारा निर्मित सामान्य संहिता के आधार पर नियंत्रित करने के लिए बाध्य किया|

 «   Prev 34567 Next   

Register to get FREE updates

    All Fields Mandatory
  • (Ex:9123456789)
  • Please Select Your Interest
  • Please specify

  • ajax-loader
  • A verifcation code has been sent to
    your mobile number

    Please enter the verification code below

Loading...
Loading...