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इतिहास

General Knowledge for Competitive Exams

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जलियाँवाला बाग हत्याकांड

Apr 10, 2018
जलियाँवाला बाग हत्याकांड ने ब्रिटिशों के अमानवीय चेहरे को सामने ला दिया। ब्रिटिश सैनिकों ने एक लगभग बंद मैदान में हो रही जनसभा में एकत्रित निहत्थी भीड़ पर,बगैर किसी चेतावनी के, जनरल डायर के आदेश पर गोली चला दी क्योकि वे प्रतिबन्ध के बावजूद जनसभा कर रहे थे। 13 अप्रैल 1919 को यहाँ एकत्रित यह भीड़ दो राष्ट्रीय नेताओं –सत्यपाल और डॉ.सैफुद्दीन किचलू ,की गिरफ्तारी का विरोध कर रही थी। अचानक ब्रिटिश सैन्य अधिकारी जनरल डायर ने अपनी सेना को निहत्थी भीड़ पर, तितर-बितर होने का मौका दिए बगैर, गोली चलाने के आदेश दे दिए और 10 मिनट तक या तब तक गोलियां चलती रहीं जब तक वे ख़त्म नहीं हो गयीं।

बुद्ध की विभिन्न मुद्राएं एवं हस्त संकेत और उनके अर्थ

Mar 30, 2018
बुद्ध के अनुयायी, बौद्ध ध्यान या अनुष्ठान के दौरान शास्त्र के माध्यम से विशेष विचारों को पैदा करने के लिए बुद्ध की छवि को प्रतीकात्मक संकेत के रूप में इस्तेमाल करते हैं। भारतीय मूर्तिकला में, मूर्तियाँ देवत्व का प्रतीकात्मक प्रतिनिधित्व करती है, जिसका मूल और अंत धार्मिक और आध्यात्मिक मान्यताओं के माध्यम से व्यक्त किया जाता है।

विजयनगर साम्राज्य के स्रोतों की सूची

Mar 26, 2018
विजयनगर साम्राज्य की इतिहास के विषय में जानकारी मुख्यतः तीन स्रोतों से प्राप्त होती है- विदेशियों का विवरण, स्वदेशी साहित्यिक कार्य तथा पुरातत्व-संबंधी साक्ष्य। इस लेख में हमने विजयनगर साम्राज्य के स्रोतों की सूची दिया है जो UPSC, SSC, State Services, NDA, CDS और Railways जैसी प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे छात्रों के लिए बहुत ही उपयोगी है।

ताजमहल के बारे में 13 रोचक तथ्य

Mar 15, 2018
ताजमहल का निर्माण मुग़ल बादशाह शाहजहाँ ने अपनी बेगम मुमताज महल की याद में 32 मिलियन रुपये खर्च करके बनवाया था| इसका निर्माण 1632–53 के बीच हुआ था| इस लेख में ताजमहल के उन अनजाने तथ्यों के बारे में बताया गया है जो कि बहुत कम लोगों को पता हैं|

क्या आप जानते हैं पांडुलिपि और शिलालेख में क्या अंतर है?

Mar 1, 2018
इतिहास लेखन तीन तरह के स्रोत जैसे साहित्यिक साक्ष्य, विदेशी यात्रियों का विवरण और पुरातत्त्व सम्बन्धी साक्ष्य के आधार पर होता है। इस लेख में हमने पांडुलिपि और शिलालेख में अंतर बताया है जो UPSC, SSC, State Services, NDA, CDS और Railways जैसी प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे छात्रों के लिए बहुत ही उपयोगी है।

ब्रिटिशकालीन समितियों और आयोगों की सूची

Feb 28, 2018
समिति और आयोग एक विशेषज्ञ लोगों की समूह को कहते है जो किसी विशिष्ट कार्य के लिए सरकार द्वारा गठित किये जाते हैं। इस लेख में, हमने ब्रिटिशकालीन समितियों और आयोगों को सूचीबद्ध किया है, जो प्रशासकीय सुधारों, न्यायिक सुधारों या सामाजिक सुधारों के लिए बनाई गई थी।

मुगल सम्राट अकबर के महत्वपूर्ण कार्यों की सूची

Feb 28, 2018
जलाल उद्दीन मोहम्मद अकबर तैमूरी वंशावली के मुगल वंश का तीसरा शासक था। वह मुगल साम्राज्य के संस्थापक जहीरुद्दीन मुहम्मद बाबर का पौत्र और नासिरुद्दीन हुमायूं एवं हमीदा बानो का पुत्र था। इस लेख में हम मुगल सम्राट अकबर के महत्वपूर्ण कार्यों की सूची दे रहे हैं जो UPSC, SSC, State Services, NDA, CDS और Railways जैसी प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे छात्रों के लिए बहुत ही उपयोगी है।

सल्तनत काल से पहले और बाद के प्रांतीय राज्यों की सूची

Feb 28, 2018
मध्यकालीन भारतीय इतिहास की शुरुवात गुप्ता साम्राज्य के पतन से लेकर दिल्ली सल्तनत के उदय और पतन के साथ-साथ मुगल साम्राज्य के उदय तक माना जाता है। इस लेख में सल्तनत काल से पहले और बाद के प्रांतीय राज्यों की सूची दी गयी है जो UPSC-prelims, SSC, State Services, NDA, CDS, और Railways जैसी प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे छात्र-छात्राओं के लिए बहुत उपयोगी है।

सल्तनत काल से पहले और बाद के प्रांतीय राज्यों की सूची

Feb 27, 2018
मध्यकालीन भारतीय इतिहास की शुरुवात गुप्ता साम्राज्य के पतन से लेकर दिल्ली सल्तनत के उदय और पतन के साथ-साथ मुगल साम्राज्य के उदय तक माना जाता है। इस लेख में सल्तनत काल से पहले और बाद के प्रांतीय राज्यों की सूची दी गयी है जो UPSC-prelims, SSC, State Services, NDA, CDS, और Railways जैसी प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे छात्र-छात्राओं के लिए बहुत उपयोगी है।

आजादी से पहले भारत में दलित आंदोलनो की सूची

Feb 23, 2018
भारत में दलित आंदोलन की शुरूआत ज्योतिराव गोविंदराव फुले के नेतृत्व में हुई। इन्होने भारतीय समाज में दलितों को एक ऐसा पथ दिखाया था जिसपर आगे चलकर दलित समाज और अन्य समाज के लोगों ने चलकर दलितों के अधिकारों की कई लड़ाई लडी।

भारत में छात्र आंदोलनों का संक्षिप्त इतिहास

Feb 23, 2018
स्वतंत्रता पूर्व और स्वतंत्रता के बाद भारत में जितने भी परिवर्तनकारी सामाजिक आंदोलन हुए, उनमें छात्रों की भूमिका बहुत अहम रही है। इस लेख में हम भारत में छात्र आंदोलनों का संक्षिप्त इतिहास दे रहे हैं जो UPSC, SSC, State Services, NDA, CDS और Railways जैसी प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे छात्रों के लिए बहुत ही उपयोगी है।

अकबर द्वारा जीते गए प्रदेशो की सूची

Feb 15, 2018
अकबर तैमूरी वंशावली के मुगल वंश का तीसरा शासक था। जिसने एक ऐसा विशाल साम्राज्य की स्थापना की जहाँ विविध धर्मो के लोग बहुत ही सोहार्द से रहते थे। यहां, हम सामान्य जागरूकता के लिए अकबर द्वारा जीते गए प्रदेशो की सूची दे रहे हैं।

जैन धर्म, महावीर की शिक्षाएं और जैन धर्म के प्रसार के कारणों का संक्षिप्त विवरण

Feb 13, 2018
जैन धर्म ने गैर-धार्मिक विचारधारा के माध्यम से रूढ़िवादी धार्मिक प्रथाओं पर जबरदस्त प्रहार किया। जैन धर्म लोगों की सुविधा हेतु मोक्ष के एक सरल, लघु और सुगम रास्ते की वकालत करता है। यहाँ हम जैन धर्म, महावीर की शिक्षाएं और जैन धर्म के प्रसार के कारणों का संक्षिप्त विवरण प्रस्तुत कर रहे हैं जो UPSC, SSC, State Services, NDA, CDS और Railways जैसी प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे छात्रों के लिए बहुत ही उपयोगी है।

सिंधु घाटी सभ्यता की अर्थव्यवस्था का संक्षिप्त विवरण

Feb 8, 2018
सिंधु घाटी सभ्यता (हड़प्पा सभ्यता) की अर्थव्यवस्था कृषि और व्यापार पर आधारित थी| कृषि कार्य हड़प्पाकालीन शहरों के आसपास के दूरस्थ और अविकसित क्षेत्र में किया जाता था, जहाँ से शासक वर्ग भविष्य में उपयोग हेतु कृषि अधिशेष को लाकर धान्यकोठारों में जमा करते थे| यहाँ हम सिंधु घाटी सभ्यता की अर्थव्यवस्था का संक्षिप्त विवरण प्रस्तुत कर रहे हैं जो UPSC, SSC, State Services, NDA, CDS और Railways जैसी प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे छात्रों के लिए बहुत ही उपयोगी है|

1885 से 1947 तक भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन की घटनाओं का कालक्रम

Jan 8, 2018
इतिहास के अंतर्गत हम जिस विषय का अध्ययन करते हैं उसमें अब तक घटित घटनाओं या उससे संबंध रखनेवाली घटनाओं का कालक्रमानुसार वर्णन होता है। यहां, हम सामान्य जागरूकता के लिए 1885 से 1947 तक भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन की समयरेखा दे रहे हैं।

जाने कोरेगांव भीमा युद्ध क्या है और दलित अधिकारों के लिए इसका क्या महत्व है?

Jan 4, 2018
भारत में जातिवाद और अतिवाद की वजह से हमेशा भारतीय समुदायों में झड़प और कभी कभी हिंसक झड़प होती रहती है। वैसे ही कुछ झड़प महाराष्ट्र के कोरेगांव में भी दलितों और मराठा समुदाय के बीच में भी होता रहा है । आइये जानते हैं की क्या कारण है 200 साल पहले हुयी लड़ाई पर दलितों और मराठा समुदाय के बीच टकराव का।

गुप्तकालीन नाटको एवं नाटककारो की सूची

Dec 29, 2017
गुप्तकाल में धर्म, कला, साहित्य और ज्ञान-विज्ञान की अदभुत प्रगति हुई। इसलिए, अनेक विद्वानो ने गुप्तकाल को स्वर्णयुग का काल माना है। कवियों ने प्रशस्तिया लिखी. प्रयाग एवं मंदसौर की प्रशस्तिया क्रमशः हरिशेण और वसूल ने लिखी। इस समय के सबसे प्रख्यात कवि और नाटकार महाकवि कालिदास थे। इस लेख में हम पाठको के सामन्य ज्ञान के बढ़ोतरी के लिए गुप्तकालीन नाटको एवं नाटककारो की सूची दे रहे हैं।

ईस्वी (AD) और ईसा पूर्व (BC) में क्या अंतर होता है?

Dec 5, 2017
इस लेख में हमने AD और BC के बीच के अंतर को बताया है जो कि बहुत से लोगों को पता नही होता है. AD का मतलब ईसा मसीह के जन्म के बाद की तारीख से है जबकि BC का मतलब ईसा मसीह के जन्म के पहले से है. AD का फुल फॉर्म Anno Domini होता है जबकि BC का फुल फॉर्म Before Christ होता है. जहाँ पर AD लिखा होता है उसका मतलब “ईसा के जन्म के वर्ष” से होता है.

क्या आप जानते हैं कि लोकतंत्र का सिद्धांत ऋग्वेद की देन है

Nov 23, 2017
लोकतंत्र एक ऐसी व्यवस्था है जिसमें जनता अपना शासक खुद चुनती है. लोकतंत्र शब्द को डेमोक्रेसी कहते है जिसकी उत्पत्ति ग्रीक मूल शब्द ‘डेमोस’ से हुई है. डेमोस का अर्थ है ‘जन साधारण’ और क्रेसी का अर्थ है ‘शासन’. क्या प्राचीनकाल में यह व्यवस्था हुआ करती थी और कैसी थी. इस लेख के माध्यम से जानेंगे की कैसे ,लोकतंत्र का सिद्धांत ऋग्वेद की देन हैं.

प्रसिद्ध भारतीय हस्तियाँ जिनके नाम पर उनके जीवनकाल में ही डाक टिकट जारी हुए हैं

Nov 21, 2017
दुनिया में कई ऐसे प्रसिद्ध व्यक्ति हुए हैं जो अपने जीवनकाल में ही वह प्रतिष्ठा और ख्याति प्राप्त कर लेते हैं, जो मरने के बाद भी कई व्यक्तियों को नसीब नहीं होती है। इन्हीं प्रसिद्धियों में से एक है- किसी जीवित व्यक्ति के नाम पर डाक टिकट जारी होना। भारत में भी कई ऐसे महान व्यक्तित्व हुए हैं जिनके नाम पर उनके जीवनकाल में ही डाक टिकट जारी किए गए हैं। इस लेख में हम उन प्रसिद्ध भारतीय हस्तियों का विवरण दे रहे हैं जिनके नाम पर उनके जीवनकाल में ही डाक टिकट जारी हुए हैं।

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