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इतिहास

General Knowledge for Competitive Exams

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मुगल सम्राट अकबर के महत्वपूर्ण कार्यों की सूची

Feb 28, 2018
जलाल उद्दीन मोहम्मद अकबर तैमूरी वंशावली के मुगल वंश का तीसरा शासक था। वह मुगल साम्राज्य के संस्थापक जहीरुद्दीन मुहम्मद बाबर का पौत्र और नासिरुद्दीन हुमायूं एवं हमीदा बानो का पुत्र था। इस लेख में हम मुगल सम्राट अकबर के महत्वपूर्ण कार्यों की सूची दे रहे हैं जो UPSC, SSC, State Services, NDA, CDS और Railways जैसी प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे छात्रों के लिए बहुत ही उपयोगी है।

सल्तनत काल से पहले और बाद के प्रांतीय राज्यों की सूची

Feb 28, 2018
मध्यकालीन भारतीय इतिहास की शुरुवात गुप्ता साम्राज्य के पतन से लेकर दिल्ली सल्तनत के उदय और पतन के साथ-साथ मुगल साम्राज्य के उदय तक माना जाता है। इस लेख में सल्तनत काल से पहले और बाद के प्रांतीय राज्यों की सूची दी गयी है जो UPSC-prelims, SSC, State Services, NDA, CDS, और Railways जैसी प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे छात्र-छात्राओं के लिए बहुत उपयोगी है।

सल्तनत काल से पहले और बाद के प्रांतीय राज्यों की सूची

Feb 27, 2018
मध्यकालीन भारतीय इतिहास की शुरुवात गुप्ता साम्राज्य के पतन से लेकर दिल्ली सल्तनत के उदय और पतन के साथ-साथ मुगल साम्राज्य के उदय तक माना जाता है। इस लेख में सल्तनत काल से पहले और बाद के प्रांतीय राज्यों की सूची दी गयी है जो UPSC-prelims, SSC, State Services, NDA, CDS, और Railways जैसी प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे छात्र-छात्राओं के लिए बहुत उपयोगी है।

आजादी से पहले भारत में दलित आंदोलनो की सूची

Feb 23, 2018
भारत में दलित आंदोलन की शुरूआत ज्योतिराव गोविंदराव फुले के नेतृत्व में हुई। इन्होने भारतीय समाज में दलितों को एक ऐसा पथ दिखाया था जिसपर आगे चलकर दलित समाज और अन्य समाज के लोगों ने चलकर दलितों के अधिकारों की कई लड़ाई लडी।

भारत में छात्र आंदोलनों का संक्षिप्त इतिहास

Feb 23, 2018
स्वतंत्रता पूर्व और स्वतंत्रता के बाद भारत में जितने भी परिवर्तनकारी सामाजिक आंदोलन हुए, उनमें छात्रों की भूमिका बहुत अहम रही है। इस लेख में हम भारत में छात्र आंदोलनों का संक्षिप्त इतिहास दे रहे हैं जो UPSC, SSC, State Services, NDA, CDS और Railways जैसी प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे छात्रों के लिए बहुत ही उपयोगी है।

अकबर द्वारा जीते गए प्रदेशो की सूची

Feb 15, 2018
अकबर तैमूरी वंशावली के मुगल वंश का तीसरा शासक था। जिसने एक ऐसा विशाल साम्राज्य की स्थापना की जहाँ विविध धर्मो के लोग बहुत ही सोहार्द से रहते थे। यहां, हम सामान्य जागरूकता के लिए अकबर द्वारा जीते गए प्रदेशो की सूची दे रहे हैं।

जैन धर्म, महावीर की शिक्षाएं और जैन धर्म के प्रसार के कारणों का संक्षिप्त विवरण

Feb 13, 2018
जैन धर्म ने गैर-धार्मिक विचारधारा के माध्यम से रूढ़िवादी धार्मिक प्रथाओं पर जबरदस्त प्रहार किया। जैन धर्म लोगों की सुविधा हेतु मोक्ष के एक सरल, लघु और सुगम रास्ते की वकालत करता है। यहाँ हम जैन धर्म, महावीर की शिक्षाएं और जैन धर्म के प्रसार के कारणों का संक्षिप्त विवरण प्रस्तुत कर रहे हैं जो UPSC, SSC, State Services, NDA, CDS और Railways जैसी प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे छात्रों के लिए बहुत ही उपयोगी है।

सिंधु घाटी सभ्यता की अर्थव्यवस्था का संक्षिप्त विवरण

Feb 8, 2018
सिंधु घाटी सभ्यता (हड़प्पा सभ्यता) की अर्थव्यवस्था कृषि और व्यापार पर आधारित थी| कृषि कार्य हड़प्पाकालीन शहरों के आसपास के दूरस्थ और अविकसित क्षेत्र में किया जाता था, जहाँ से शासक वर्ग भविष्य में उपयोग हेतु कृषि अधिशेष को लाकर धान्यकोठारों में जमा करते थे| यहाँ हम सिंधु घाटी सभ्यता की अर्थव्यवस्था का संक्षिप्त विवरण प्रस्तुत कर रहे हैं जो UPSC, SSC, State Services, NDA, CDS और Railways जैसी प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे छात्रों के लिए बहुत ही उपयोगी है|

1885 से 1947 तक भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन की घटनाओं का कालक्रम

Jan 8, 2018
इतिहास के अंतर्गत हम जिस विषय का अध्ययन करते हैं उसमें अब तक घटित घटनाओं या उससे संबंध रखनेवाली घटनाओं का कालक्रमानुसार वर्णन होता है। यहां, हम सामान्य जागरूकता के लिए 1885 से 1947 तक भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन की समयरेखा दे रहे हैं।

जाने कोरेगांव भीमा युद्ध क्या है और दलित अधिकारों के लिए इसका क्या महत्व है?

Jan 4, 2018
भारत में जातिवाद और अतिवाद की वजह से हमेशा भारतीय समुदायों में झड़प और कभी कभी हिंसक झड़प होती रहती है। वैसे ही कुछ झड़प महाराष्ट्र के कोरेगांव में भी दलितों और मराठा समुदाय के बीच में भी होता रहा है । आइये जानते हैं की क्या कारण है 200 साल पहले हुयी लड़ाई पर दलितों और मराठा समुदाय के बीच टकराव का।

गुप्तकालीन नाटको एवं नाटककारो की सूची

Dec 29, 2017
गुप्तकाल में धर्म, कला, साहित्य और ज्ञान-विज्ञान की अदभुत प्रगति हुई। इसलिए, अनेक विद्वानो ने गुप्तकाल को स्वर्णयुग का काल माना है। कवियों ने प्रशस्तिया लिखी. प्रयाग एवं मंदसौर की प्रशस्तिया क्रमशः हरिशेण और वसूल ने लिखी। इस समय के सबसे प्रख्यात कवि और नाटकार महाकवि कालिदास थे। इस लेख में हम पाठको के सामन्य ज्ञान के बढ़ोतरी के लिए गुप्तकालीन नाटको एवं नाटककारो की सूची दे रहे हैं।

ईस्वी (AD) और ईसा पूर्व (BC) में क्या अंतर होता है?

Dec 5, 2017
इस लेख में हमने AD और BC के बीच के अंतर को बताया है जो कि बहुत से लोगों को पता नही होता है. AD का मतलब ईसा मसीह के जन्म के बाद की तारीख से है जबकि BC का मतलब ईसा मसीह के जन्म के पहले से है. AD का फुल फॉर्म Anno Domini होता है जबकि BC का फुल फॉर्म Before Christ होता है. जहाँ पर AD लिखा होता है उसका मतलब “ईसा के जन्म के वर्ष” से होता है.

क्या आप जानते हैं कि लोकतंत्र का सिद्धांत ऋग्वेद की देन है

Nov 23, 2017
लोकतंत्र एक ऐसी व्यवस्था है जिसमें जनता अपना शासक खुद चुनती है. लोकतंत्र शब्द को डेमोक्रेसी कहते है जिसकी उत्पत्ति ग्रीक मूल शब्द ‘डेमोस’ से हुई है. डेमोस का अर्थ है ‘जन साधारण’ और क्रेसी का अर्थ है ‘शासन’. क्या प्राचीनकाल में यह व्यवस्था हुआ करती थी और कैसी थी. इस लेख के माध्यम से जानेंगे की कैसे ,लोकतंत्र का सिद्धांत ऋग्वेद की देन हैं.

प्रसिद्ध भारतीय हस्तियाँ जिनके नाम पर उनके जीवनकाल में ही डाक टिकट जारी हुए हैं

Nov 21, 2017
दुनिया में कई ऐसे प्रसिद्ध व्यक्ति हुए हैं जो अपने जीवनकाल में ही वह प्रतिष्ठा और ख्याति प्राप्त कर लेते हैं, जो मरने के बाद भी कई व्यक्तियों को नसीब नहीं होती है। इन्हीं प्रसिद्धियों में से एक है- किसी जीवित व्यक्ति के नाम पर डाक टिकट जारी होना। भारत में भी कई ऐसे महान व्यक्तित्व हुए हैं जिनके नाम पर उनके जीवनकाल में ही डाक टिकट जारी किए गए हैं। इस लेख में हम उन प्रसिद्ध भारतीय हस्तियों का विवरण दे रहे हैं जिनके नाम पर उनके जीवनकाल में ही डाक टिकट जारी हुए हैं।

चेर शासकों की सूची और उनके योगदान

Nov 14, 2017
चेर राजवंश, तमिलकम के तीन प्रमुख राजवंशों में से एक थे, जिसके शासकों ने दक्षिण भारत में वर्तमान केरल राज्य तथा तमिलनाडु के कुछ हिस्सों पर शासन किया था. "चेर" शब्द शायद चेरल शब्द से उत्पन्न हुआ था, जिसका अर्थ प्राचीन तमिल में "एक पहाड़ की ढ़लान" है। यहां हम सामान्य जागरूकता के लिए चेर शासकों की सूची और उनके योगदान का विवरण दे रहे हैं।

मुगल साम्राज्य के अंतर्गत आने वाले प्रशासनिक विभागों की सूची

Nov 13, 2017
मुगल साम्राज्य की प्रशासनिक संरचना सैन्य शक्ति पर आधारित केंद्रीयकृत थी। मुगल सम्राटों ने अपने लिए दो प्राथमिक कर्तव्यों का निर्धारण किया था, जहानबानी (राज्य की सुरक्षा) और जहांगीरी (साम्राज्य का विस्तार)। इसलिए, किसी अधिकारी की नियुक्ति, पदोन्नति और हटाने का अधिकार सम्राट के पास था, उनके पास कोई संस्थागत दबाव नहीं था और साम्राज्य को सुचारु ढ़ंग से चलाने के लिए कुछ विभाग का गठन किया गया था। यहां, हम सामान्य जागरूकता के लिए मुगल साम्राज्य के अंतर्गत आने वाले प्रशासनिक विभागों की सूची दे रहे हैं।

विजयनगर साम्राज्य के दौरान निर्मित मंदिरों की सूची

Nov 9, 2017
1336 ईस्वी में विजयनगर साम्राज्य की स्थापना हरिहर प्रथम और बुक्का प्रथम (संगम के पुत्र) ने की थी। इस साम्राज्य पर चार राजवंशों संगम, सुलुव, तुलुव और अरविडु ने शासन किया था। इस साम्राज्य के अधिकांश राजा वैष्णव धर्म को मानने वाले थे। यहां, हम सामान्य जागरूकता के लिए विजयनगर साम्राज्य के दौरान निर्मित मंदिरों की सूची दे रहे हैं।

मुगलकालीन प्रशासनिक अधिकारियों की सूची

Nov 6, 2017
मुगलों ने लगभग 200 वर्षों तक शासन किया। मुगल शासकों ने एक साम्राज्य का निर्माण किया और प्रशासन की नींव रखी जिस अंग्रेजों ने आगे बढ़ाया। मुगल साम्राज्य को सूबों में तथा सूबों को सरकार, परगना और गांव में विभाजित किया गया था। हालांकि, मुगल साम्राज्य को अन्य क्षेत्रीय इकाइयों जैसे खलीसा (रॉयल भूमि), जागीर (स्वायत्त राज्य) और इनाम (तोहफे में दी गई भूमि या बेकार भूमि) में बांटा गया था। अकबर के शासनकाल के अंत में 15 सूबे थे, जो बाद में औरंगजेब के समय में बढ़कर 20 हो गए थे। यहां, हम सामान्य जागरूकता के लिए मुगलकालीन प्रशासनिक अधिकारियों की सूची दे रहे हैं।

चोल वंश के शासकों की सूची और उनके योगदान

Oct 30, 2017
चोल वंश सभी दक्षिण भारतीय राजवंशों में सबसे महान था। उन्होंने मालदीव और श्रीलंका जैसे समुद्री द्वीपों पर भी शासन किया जो दर्शाता है कि उनके पास बहुत ही कुशल और विशाल नौसैनिक शक्ति थी। यहां, हम आम जागरूकता के लिए चोल वंश के शासकों की सूची और उनके योगदान का विवरण दे रहे हैं।

सातवाहन शासकों की सूची और उनके योगदान

Oct 26, 2017
सातवाहन राजवंश ने मौर्य के पतन और गुप्त साम्राज्य के उदय के बीच की अवधि में भारतीय इतिहास में सबसे महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। उन्हें दक्कन में आंध्र भी कहा जाता था और उनकी राजधानी पैथान या प्रतिष्ठान थी। आंध्र प्राचीन लोग थे और उनका उल्लेख ऐतरेय ब्राह्मण में किया गया है। यहां हम आम जागरूकता के लिए सातवाहन शासकों की सूची और उनके योगदान का विवरण दे रहे हैं।

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