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जलवायु, मृदा एवं वनस्पति

General Knowledge for Competitive Exams

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भारत के पूर्वी घाट की तुलना में पश्चिमी घाट पर अधिक बारिश क्यों होती है?

May 9, 2018
वर्षा के वितरण में स्थलाकृति और हवा एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। घाट का अर्थ नदी किनारे बनी सीढ़ियाँ या पर्वतीय दर्रा होता है। भारत में प्रायद्वीप के दक्कन के पठार के दोनों किनारों पर बने पर्वतों को भी पूर्वी घाट और पश्चिमी घाट कहते हैं। इस लेख में हमने, सामान्य जागरूकता के लिए भारत के पूर्वी घाट की तुलना में पश्चिमी घाट पर अधिक बारिश होने के कारण बताया हैं जो UPSC, SSC, State Services, NDA, CDS और Railways जैसी प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे छात्रों के लिए बहुत ही उपयोगी है।

भारत में पायी जानी वाली मिट्टी की रूपरेखा का संक्षिप्त विवरण

Sep 6, 2017
मृदा खनिज और कार्बनिक घटकों का मिश्रण है जो पौधों के विकास का आधार है। इसका निर्माण इसके मूल चट्टानों के टूटने या उनमें होने वाली भौतिक और रासायनिक बदलावों के कारण होता है। इस लेख में हम भारत में पायी जानी वाली मिट्टी की रूपरेखा का संक्षिप्त विवरण दे रहे हैं जिसका प्रयोग विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी में अध्ययन सामग्री के रूप में किया जा सकता है।

भारत की प्रमुख फसलों और उनके लिए आवश्यक तापमान, वर्षा और मिट्टी की सूची

Sep 5, 2017
भारत ना केवल सांस्कृतिक रूप से बल्कि मिट्टी की रूपरेखा और जलवायु की दृष्टि से भी एक विविधतापूर्ण देश है। यही कारण है कि भारत में विभिन्न प्रकार की खाद्य और नकदी फसलें उगाई जाती हैं। इस लेख में हम भारत की प्रमुख फसलों और उनके लिए आवश्यक तापमान, वर्षा और मिट्टी की सूची दे रहे हैं दे रहे हैं जिसका प्रयोग विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी में अध्ययन सामग्री के रूप में किया जा सकता है।

भारत में बायोस्फीयर रिजर्व की सूची

Aug 28, 2017
यूनेस्को की अंतर्राष्ट्रीय सह-समन्वय परिषद (आईसीसी) ने नवम्बर 1971 में प्राकृतिक क्षेत्रों के लिए 'बायोस्फीयर रिजर्व' का नाम दिया। उनके पदनाम के बाद, बायोस्फीयर रिजर्व राष्ट्रीय सार्वभौम अधिकार क्षेत्र के अधीन है, लेकिन फिर भी वे अपने अनुभव और विचार राष्ट्रीय स्तर पर, क्षेत्रीय और अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर बायोस्फीयर रिजर्व (डब्ल्यूएनबीआर) के विश्व नेटवर्क के परिधि के अंदर ही काम करते हैं। इस लेख में हम भारत में बायोस्फीयर रिजर्व की सूची दे रहे हैं जिसका प्रयोग विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी में अध्ययन सामग्री के रूप में किया जा सकता है।

भारत में रामसर नामित आर्द्रभूमि की सूची

Aug 25, 2017
आर्द्रभूमि, वह भूमि है जो स्थलीय और जलीय पारिस्थितिकी प्रणालियों में जहां पानी का तल प्रायः जमीन की सतह पर या जमीन की सतह के पास है या जहां जमीन उथले पानी के द्वारा ढकी रहती है, के बीच संक्रमित होती रहती है।" इस लेख में हम भारत में रामसर नामित आर्द्रभूमि की सूची दे रहे हैं जिसका प्रयोग विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी में अध्ययन सामग्री के रूप में किया जा सकता है।

भारत के प्रोजेक्ट टाइगर रिजर्व की सूची

Aug 25, 2017
केंद्र प्रायोजित योजना बाघ परियोजना अप्रैल 1973 में शुरू की गयी थी इसका उद्धेश्य वैज्ञानिक, आर्थिक, कलात्मक, सांस्कृतिक और पारिस्थितिक मूल्यों के लिए बाघों की आबादी के रखरखाव को सुनिश्चित करना और लोगो के लाभ, शिक्षा और मनोरंजन के लिए इसकी जैविक महत्ता को देखते हुए एक राष्ट्रीय धरोहर के रूप में हर समय इसकी रक्षा करना है। इस लेख में हम भारत के प्रोजेक्ट टाइगर रिजर्व की सूची दे रहे हैं जिसका प्रयोग विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी में अध्ययन सामग्री के रूप में किया जा सकता है।

कैसे मानसून-पूर्व वर्षा भारत के किसानो तथा बाजारों के लिए वरदान है

May 23, 2017
भारत की जलवायु का सामान्यकरण करना बहुत ही मुस्किल है क्योंकि इसकी विविध भौगोलिक स्तर तथा मौसम विस्तृत श्रृंखला अपने आप में अतुलनीय हैl इसकी उष्णकटिबंधीय मानसून जलवायु की वजह से मानसून का जल प्रवाह होना प्राकृतिक है| मानसून पूर्व वर्षा को अप्रैल बारिश या ग्रीष्मकालीन बारिश के रूप में भी जाना जाता है, जिसका आगमन बंगाल की खाड़ी के ऊपर आंधी की वजह से होता हैl आइये जानते हैं मानसून पूर्व वर्षा कैसे भारतीय बाजार की शान को बढ़ाता हैl

भारत में प्राकृतिक वनस्पति

Aug 11, 2016
प्राकृतिक वनस्पति का मतलब है वह वनस्पति जो मनुष्य द्वारा विकसित नहीं की गयी है । यह मनुष्यों से मदद की जरूरत नहीं है और जो कुछ भी पोषक तत्व इन्हें चाहिए, प्राकृतिक वातावरण से ले लेते है। जमीन की ऊंचाई और वनस्पति की विशेषता के बीच एक करीबी रिश्ता है। ऊंचाई में परिवर्तन के साथ जलवायु परिवर्तन होता है और जिसके कारण प्राकृतिक वनस्पति का स्वरुप बदलता है।

भारतीय में वन्यजीव अभयारण्य और राष्ट्रीय पार्क

Aug 10, 2016
भारतीय उप-महाद्वीप न केवल अपनी सांस्कृतिक विविधता के लिए जाना जाता है बल्कि यहाँ पर वनस्पतियों और जीवों की विविध प्रजातियाँ भी पाई जाती हैं| इसलिए भारत में वन्यजीव अभयारण्यों और राष्ट्रीय उद्यानों का निर्माण लुप्तप्राय पक्षियों और जानवरों के संरक्षण के लिए बड़ी संख्या में किया गया है, ताकि इन पक्षियों और जानवरों के विलोपन को रोका जा सके|

भारत में बायोस्फीयर रिज़र्व: मानदंड और अंतर्राष्‍ट्रीय स्थिति

Aug 8, 2016
बायोस्फीयर रिजर्व, प्राकृतिक और सांस्कृतिक परिदृश्य का प्रतिनिधित्व करता है जिनका विस्तार स्थलीय या तटीय / समुद्री पारिस्थितिकी प्रणालियों या इनके मिश्रण वाले बड़े क्षेत्र में होता है| उदाहरण के रूप में: जैव-भौगोलिक क्षेत्र/प्रांत।

भारतीय वन्यजीवों से संबंधित महत्वपूर्ण तथ्य

Aug 8, 2016
वर्ष 1972 में स्टॉकहोम में आयोजित मानव पर्यावरण सम्मेलन के समझौते के तहत विश्व वन्य कोष (WWF) की मदद से 1973 में बाघ परियोजना की शुरूआत भारत में की गयी। भारतीय वन्यजीव संस्थान, देहरादून और केंद्रीय पर्यावरण एवं वन मंत्रालय के अनुसार 1973-74 के दौरान भारत में केवल 9 बाघ आरक्षित क्षेत्र थे, जबकि जनवरी 2013 तक बाघ आरक्षित क्षेत्रों की संख्या बढ़कर 41 हो गयी है।

रेड डाटा बुक की रिपोर्ट और भारत में लुप्तप्राय जानवर

Aug 5, 2016
आईयूसीएन (IUCN) की रेड लिस्ट में आनुवंशिक विविधता के पदाधिकारियों और पारिस्थितिकी प्रणालियों के निर्माण ब्लॉकों का, उनके संरक्षण की स्थिति पर और वितरण के लिए वैश्विक स्तर से स्थानीय तक जैव विविधता के संरक्षण के बारे में सूचित निर्णय करने के लिए जानकारी के लिए आधार प्रदान करता है ।

भूमि संसाधन

Aug 5, 2016
भूमि एक सीमित संसाधन है जिस पे शहरीकरण, बुनियादी सुविधाओं, भोजन में वृद्धि, दूध, फाइबर और ईंधन के उत्पादन और पारिस्थितिकी तंत्र के प्रवाधान से प्रतिस्पर्धा दबाव के अधीन है। लेकिन यह भी एक कम होता हुआ स्रोत है। यह एक वैश्विक समस्या है। रहने, भोजन और बायोमास बढ़ने के लिए दुनिया भर में क्षेत्रों की मांगे बढ़ रही है और जलवायु परिवर्तन के कारन भूमि की मांग, उपलब्धता और गिरावट पर असर होने की संभावना है।

भारत की मिट्टी की रूपरेखा

Aug 4, 2016
मिट्टी सबसे महत्वपूर्ण संसाधन है। गेहूं, चावल और मोटे अनाज, दलहन, तिलहन, पेय पदार्थ, सब्जिया और फल आदि सब मिट्टी से प्राप्त होते हैं। इसके अलावा खाद्य लकड़ी, फाइबर, रबर, जड़ी बूटियों और औषधीय पौधे भी मिट्टी से प्राप्त किये जाते हैं।

भारत में वन अनुसंधान संस्थान

Aug 4, 2016
वन अनुसंधान संस्थान भारतीय वानिकी अनुसंधान एवं शिक्षा परिषद का एक संस्थान है और भारत में वानिकी अनुसंधान के क्षेत्र में एक प्रमुख संस्थान है। यह उत्तराखंड में देहरादून में स्थित है और अपने समय का सबसे पुराने संस्थानों में से एक है । 1991 में यह विश्वविद्यालय अनुदान आयोग द्वारा एक डीम्ड विश्वविद्यालय घोषित किया गया था । यह 1906 में इंपीरियल वन अनुसंधान संस्थान के रूप में स्थापित हुआ था, वन अनुसंधान संस्थान (एफआरआई) देहरादून भारतीय वानिकी अनुसंधान एवं शिक्षा परिषद (आईसीएफआरई) के तहत एक प्रमुख संस्थान है।

एल निनो का सिद्धांत

Jul 15, 2016
पूर्वी प्रशांत महासागर में पेरू तट से लगभग 80 किलोमीटर की दूरी पर सामान्य दिनों में पेरू की ठंडी जलधारा बहती है। कालांतर में इसमें बदलाव हो जाता है।ठंडी के बदले उष्ण जलधारा का आविर्भाव हो जाता है जिसके कारण जलवायु में प्रतिकूल प्रभाव देखने को मिलता है जिसको एलनिनो कहा जाता है। इसमें समुद्री सतह का तापमान बहुत बड़ी भूमिका निभाता है जिसका प्रभाव पूरे विश्व की जलवायु पर पड़ता है।

भारत में वर्षा का वितरण

Jun 24, 2016
भारत में औसत वर्षा 125 सेंटीमीटर होती है। जिसमें 75 प्रतिशत दक्षिणी-पश्चमी मानसून (जून से सितंबर), 13 प्रतिशत उत्तरी-पूर्वी मानसून (अक्टूबर से दिसंबर), 10 प्रतिशत मानसून पूर्व स्थानीय चक्रवातों द्वारा (अप्रैल से मई) तथा 2 प्रतिशत पश्चिमी विक्षोभ (दिसंबर से फरवरी) के कारण होती है। पश्चिमी घाट व उत्तरी-पूर्वी भारत 400 सेंटीमीटर वर्षा प्राप्त करता है।जबकि राजस्थान का पश्चिमी भाग 60 सेंटीमीटर तथा इससे सटे गुजरात,हरियाणा व पंजाब भी कामों-बेस न्यून वर्षा ही प्राप्त करता है।

मानसून उत्पत्ति सम्बन्धी जेट-स्ट्रीम संकल्पना

Apr 25, 2016
ऊपरी वायुमंडल (9 से 18 किमी.) में प्रवाहित होने वाली तीव्र वायु-प्रणाली को ‘जेट स्ट्रीम’ कहा जाता है| गर्मियों के मौसम में पछुआ जेट स्ट्रीम के उत्तर की ओर खिसकने और भारत के ऊपर पूर्वी जेट स्ट्रीम के प्रवाहित होने का संबंध मानसून की उत्पत्ति से है|

मानसून का भूमध्यरेखीय पछुआ पवन सिद्धान्त

Apr 4, 2016
मानसून उत्पत्ति के भूमध्यरेखीय पछुआ पवन सिद्धान्त का प्रतिपादन फ्लोन महोदय ने किया था| उनका मानना था कि भूमध्यरेखीय पछुआ पवनें ही अत्यधिक ताप के कारण उत्तर-पश्चिमी भारत में निर्मित निम्न दाब की ओर आकर्षित होकर भारत में दक्षिण-पश्चिम मानसूनी पवनों के रूप में प्रवेश करती हैं

मानसून का आगमन और निवर्तन

Apr 1, 2016
भारत में मानसून के पहुँचने को ‘मानसून का आगमन’ और भारत से मानसून के वापस लौटने को ‘मानसून का निवर्तन’ कहा जाता है| मानसून जून के प्रथम सप्ताह में भारत में प्रवेश करता है और नवंबर के अंत तक तक यह सम्पूर्ण भारत से वापस लौट जाता है|

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