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जलवायु, मृदा एवं वनस्पति

General Knowledge for Competitive Exams

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भारत के पूर्वी घाट की तुलना में पश्चिमी घाट पर अधिक बारिश क्यों होती है?

May 9, 2018
वर्षा के वितरण में स्थलाकृति और हवा एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। घाट का अर्थ नदी किनारे बनी सीढ़ियाँ या पर्वतीय दर्रा होता है। भारत में प्रायद्वीप के दक्कन के पठार के दोनों किनारों पर बने पर्वतों को भी पूर्वी घाट और पश्चिमी घाट कहते हैं। इस लेख में हमने, सामान्य जागरूकता के लिए भारत के पूर्वी घाट की तुलना में पश्चिमी घाट पर अधिक बारिश होने के कारण बताया हैं जो UPSC, SSC, State Services, NDA, CDS और Railways जैसी प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे छात्रों के लिए बहुत ही उपयोगी है।

रेड डाटा बुक की रिपोर्ट और भारत में लुप्तप्राय जानवर

Aug 5, 2016
आईयूसीएन (IUCN) की रेड लिस्ट में आनुवंशिक विविधता के पदाधिकारियों और पारिस्थितिकी प्रणालियों के निर्माण ब्लॉकों का, उनके संरक्षण की स्थिति पर और वितरण के लिए वैश्विक स्तर से स्थानीय तक जैव विविधता के संरक्षण के बारे में सूचित निर्णय करने के लिए जानकारी के लिए आधार प्रदान करता है ।

भारत में बायोस्फीयर रिजर्व की सूची

Aug 28, 2017
यूनेस्को की अंतर्राष्ट्रीय सह-समन्वय परिषद (आईसीसी) ने नवम्बर 1971 में प्राकृतिक क्षेत्रों के लिए 'बायोस्फीयर रिजर्व' का नाम दिया। उनके पदनाम के बाद, बायोस्फीयर रिजर्व राष्ट्रीय सार्वभौम अधिकार क्षेत्र के अधीन है, लेकिन फिर भी वे अपने अनुभव और विचार राष्ट्रीय स्तर पर, क्षेत्रीय और अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर बायोस्फीयर रिजर्व (डब्ल्यूएनबीआर) के विश्व नेटवर्क के परिधि के अंदर ही काम करते हैं। इस लेख में हम भारत में बायोस्फीयर रिजर्व की सूची दे रहे हैं जिसका प्रयोग विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी में अध्ययन सामग्री के रूप में किया जा सकता है।

भारत में कितनी ऋतुएँ पायी जाती हैं?

Mar 2, 2016
भारत में मानसूनी प्रकार की जलवायु पायी जाती है। "मानसून" शब्द अरबी शब्द "मौसिम" से बना है, जिसका अर्थ होता है-‘हवा की दिशा में मौसमी परिवर्तन’। भारत का मौसम/ऋतु दो प्रकार की हवाओं से प्रभावित होता हैं– अरब सागर से आने वाली हवाओं से और बंगाल की खाड़ी से आने वाली हवाओं से । भारतीय मौसम विज्ञान विभाग ने भारत की जलवायु को निम्नलिखित चार ऋतुओं में बाँटा है– शीत, ग्रीष्म, वर्षा और शरद ऋतु ।

भूमि संसाधन

Aug 5, 2016
भूमि एक सीमित संसाधन है जिस पे शहरीकरण, बुनियादी सुविधाओं, भोजन में वृद्धि, दूध, फाइबर और ईंधन के उत्पादन और पारिस्थितिकी तंत्र के प्रवाधान से प्रतिस्पर्धा दबाव के अधीन है। लेकिन यह भी एक कम होता हुआ स्रोत है। यह एक वैश्विक समस्या है। रहने, भोजन और बायोमास बढ़ने के लिए दुनिया भर में क्षेत्रों की मांगे बढ़ रही है और जलवायु परिवर्तन के कारन भूमि की मांग, उपलब्धता और गिरावट पर असर होने की संभावना है।

भारत में प्राकृतिक वनस्पति

Aug 11, 2016
प्राकृतिक वनस्पति का मतलब है वह वनस्पति जो मनुष्य द्वारा विकसित नहीं की गयी है । यह मनुष्यों से मदद की जरूरत नहीं है और जो कुछ भी पोषक तत्व इन्हें चाहिए, प्राकृतिक वातावरण से ले लेते है। जमीन की ऊंचाई और वनस्पति की विशेषता के बीच एक करीबी रिश्ता है। ऊंचाई में परिवर्तन के साथ जलवायु परिवर्तन होता है और जिसके कारण प्राकृतिक वनस्पति का स्वरुप बदलता है।

भारत में वर्षा का वितरण

Jun 24, 2016
भारत में औसत वर्षा 125 सेंटीमीटर होती है। जिसमें 75 प्रतिशत दक्षिणी-पश्चमी मानसून (जून से सितंबर), 13 प्रतिशत उत्तरी-पूर्वी मानसून (अक्टूबर से दिसंबर), 10 प्रतिशत मानसून पूर्व स्थानीय चक्रवातों द्वारा (अप्रैल से मई) तथा 2 प्रतिशत पश्चिमी विक्षोभ (दिसंबर से फरवरी) के कारण होती है। पश्चिमी घाट व उत्तरी-पूर्वी भारत 400 सेंटीमीटर वर्षा प्राप्त करता है।जबकि राजस्थान का पश्चिमी भाग 60 सेंटीमीटर तथा इससे सटे गुजरात,हरियाणा व पंजाब भी कामों-बेस न्यून वर्षा ही प्राप्त करता है।

मानसून का भूमध्यरेखीय पछुआ पवन सिद्धान्त

Apr 4, 2016
मानसून उत्पत्ति के भूमध्यरेखीय पछुआ पवन सिद्धान्त का प्रतिपादन फ्लोन महोदय ने किया था| उनका मानना था कि भूमध्यरेखीय पछुआ पवनें ही अत्यधिक ताप के कारण उत्तर-पश्चिमी भारत में निर्मित निम्न दाब की ओर आकर्षित होकर भारत में दक्षिण-पश्चिम मानसूनी पवनों  के रूप में प्रवेश करती हैं

मानसून का आगमन और निवर्तन

Apr 1, 2016
भारत में मानसून के पहुँचने को ‘मानसून का आगमन’ और भारत से मानसून के वापस लौटने को ‘मानसून का निवर्तन’ कहा जाता है| मानसून जून के प्रथम सप्ताह में भारत में प्रवेश करता है और नवंबर के अंत तक तक यह सम्पूर्ण भारत से वापस लौट जाता है|

भारतीय मानसून को कौन से कारक प्रभावित करते हैं?

Mar 10, 2016
भारत में वायु प्रणाली के मौसमी उलट–फेर को अरब व्यापारियों ने 'मानसून' नाम दिया था। भारत के मानसून को प्रभावित करने वाले कारकों में स्थल व जल के गर्म व ठंडे होने की दर में अंतर, अंतरा उष्णकटिबंधीय अभिसरण क्षेत्र का विस्थापन, मेडागास्कर के पूर्व में उच्च दाब वाले क्षेत्र की उपस्थिति, तिब्बत के पठार का गर्म होना, पूर्वी जेट धारा का प्रवाह व एल-निनो की घटना आदि शामिल हैं |

भारत में पायी जानी वाली मिट्टी की रूपरेखा का संक्षिप्त विवरण

Sep 6, 2017
मृदा खनिज और कार्बनिक घटकों का मिश्रण है जो पौधों के विकास का आधार है। इसका निर्माण इसके मूल चट्टानों के टूटने या उनमें होने वाली भौतिक और रासायनिक बदलावों के कारण होता है। इस लेख में हम भारत में पायी जानी वाली मिट्टी की रूपरेखा का संक्षिप्त विवरण दे रहे हैं जिसका प्रयोग विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी में अध्ययन सामग्री के रूप में किया जा सकता है।

भारतीय वन्यजीवों से संबंधित महत्वपूर्ण तथ्य

Aug 8, 2016
वर्ष 1972 में स्टॉकहोम में आयोजित मानव पर्यावरण सम्मेलन के समझौते के तहत विश्व वन्य कोष (WWF) की मदद से 1973 में बाघ परियोजना की शुरूआत भारत में की गयी। भारतीय वन्यजीव संस्थान, देहरादून और केंद्रीय पर्यावरण एवं वन मंत्रालय के अनुसार 1973-74 के दौरान भारत में केवल 9 बाघ आरक्षित क्षेत्र थे, जबकि जनवरी 2013 तक बाघ आरक्षित क्षेत्रों की संख्या बढ़कर 41 हो गयी है।

भारत की प्रमुख फसलों और उनके लिए आवश्यक तापमान, वर्षा और मिट्टी की सूची

Sep 5, 2017
भारत ना केवल सांस्कृतिक रूप से बल्कि मिट्टी की रूपरेखा और जलवायु की दृष्टि से भी एक विविधतापूर्ण देश है। यही कारण है कि भारत में विभिन्न प्रकार की खाद्य और नकदी फसलें उगाई जाती हैं। इस लेख में हम भारत की प्रमुख फसलों और उनके लिए आवश्यक तापमान, वर्षा और मिट्टी की सूची दे रहे हैं दे रहे हैं जिसका प्रयोग विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी में अध्ययन सामग्री के रूप में किया जा सकता है।

भारत में बायोस्फीयर रिज़र्व: मानदंड और अंतर्राष्‍ट्रीय स्थिति

Aug 8, 2016
बायोस्फीयर रिजर्व, प्राकृतिक और सांस्कृतिक परिदृश्य का प्रतिनिधित्व करता है जिनका विस्तार स्थलीय या तटीय / समुद्री पारिस्थितिकी प्रणालियों या इनके मिश्रण वाले बड़े क्षेत्र में होता है| उदाहरण के रूप में: जैव-भौगोलिक क्षेत्र/प्रांत।

मानसून की तापीय संकल्पना

Apr 1, 2016
मानसून उत्पत्ति की तापीय संकल्पना का प्रतिपादन ब्रिटिश विद्वानों द्वारा किया गया था, जिसमें डडले स्टांप और बेकर की महत्वपूर्ण भूमिका थी| इस संकल्पना के अनुसार तापमान, मानसून की उत्पत्ति का मुख्य कारण है और दक्षिणी गोलार्द्ध में बहने वाली दक्षिण-पूर्वी व्यापारिक पवनें ही भारत में दक्षिण-पश्चिम मानसून के रूप में प्रवेश करती हैं|

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