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दिल्ली सल्तनत

General Knowledge for Competitive Exams

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सल्तनतकाल में इस्तेमाल होने वाले प्रशासनिक और कृषि से जुड़े शब्दों की सूची

Apr 17, 2017
सल्तनतकाल मुख्य रूप से सैन्यवादी और कुलीन था और सुल्तानों के अधिकार का वास्तविक स्रोत सैन्य शक्ति थीl दिल्ली सल्तनत के शासकों को कृषि की अहमियत और तकनीकी सहायता के माध्यम से उसे बढ़ावा देने के लिए जाना जाता था, क्योंकि अनाज आंतरिक व्यापार का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा था, जबकि उस समय दास, नील, अफीम, मसालों और कपास से बने सामान का निर्यात किया जाता थाl इस लेख में हम सल्तनतकाल में इस्तेमाल होने वाले प्रशासनिक और कृषि से जुड़े शब्दों की सूची दे रहे हैं, जो स्कूल-कॉलेजों में पढ़ने वाले छात्र-छात्राओं के साथ-साथ प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे विद्यार्थियों के लिए बहुत ही उपयोगी अध्ययन सामग्री हैl

सल्तनत काल के दौरान छोटे राज्य

Nov 6, 2015
सल्तनत काल के प्रारम्भ मे उत्तराधिकार का कोई निश्चित कानून नहीं था । आंतरिक नागरिक युद्ध देश को छोटे छोटे शहरो मे विभाजित कर रहा था। प्रत्येक सुल्तान की मृत्यु के बाद उत्पन्न परिस्थिति ने कई नागरिक युद्धो को जन्म दिया। श्रेष्ठ बनने की होड़ मे, तैमूर और बाबर के आक्रमण दिल्ली सल्तनत के पतन के मुख्य कारण बने। साम्राज्य के इस तरह से पतन होने की वजह से देश के विभिन्न भागो मे कई छोटे राज्यों का उदय हुआ।

भारत पर तैमूर का आक्रमण

Nov 3, 2015
तैमूर के एक पैर में जख्म हो गया था जिसके कारण वह लंगड़ा कर चलने को मजबूर था। यही वजह थी कि तैमूर को "तैमूर लंग" का खिताब दिया गया और दुनिया में वह इसी नाम से जाना गया। तैमूर मध्य एशिया का एक आक्रामक योद्धा था जिसने विश्व प्रसिद्ध विजेता बनने का ख्वाब देखा था। विदेशी भूमि को हड़पना और फिर उसे अपने शासन के अधीन कर लेना अब तैमूर का जुनून होता जा रहा था। यही जुनून अफगानिस्तान, फारस, सीरिया, कुर्दिस्तान, तुर्किस्तान और एशिया माइनर के क्षेत्रों पर उसके जीत की वजह बना।

रजिया सुल्तान (1236 ईश्वी-1240 ईश्वी)

Oct 24, 2015
रज़िया सुल्तान भारत की प्रथम महिला शासक थी जिसका जन्म 1205 मे हुआ था। उसने देश पर 1236 से 1240 तक शासन किया। वह एक साहसी सुल्तान थी और दिल्ली के सिंहासन पर नियंत्रण और हस्तक्षेप करने वाली पहली मुस्लिम महिला थी, उसने दिल्ली का शासन अपने पिता से उत्तराधिकार मे प्राप्त किया था और 1236 मे दिल्ली की सल्तनत बनी। उपनाम: रज़िया सुल्तान (1236-1240), भारात की प्रथम महिला शासक, शम्स-उद-दीन इल्ल्तुत्मिश की पुत्री ।

मोहम्मद बिन तुगलक (1351 ईश्वी-1388 ईश्वी)

Oct 24, 2015
तुगलक प्रशासन को तुगलक या तुगलक वंश के रूप में भी जाना जाता था जो तुर्की की एक मुस्लिम रेखा थी और ये मध्यकालीन भारत में दिल्ली सल्तनत पर सर्वाधिक कामयाब रहे थे। दिल्ली में इनका शासन 1320 से शुरू हुआ था। गयासुद्दीन तुगलक इस वंश का प्रथम शासक था। खिलजी प्रशासन के अंतिम शासक खुसरो खान की गजनी मलिक द्वारा हत्या कर दी गयी थी, जो सिंहासन पर आसीन था और गयासुद्दीन तुगलक की उपाधि हासिल कर रखी थी। एक दुर्घटना में उसकी मृत्यु हो गयी और उसका पुत्र जौना (उलूग खान) 1325 में मोहम्मद-बिन-तुगलक की उपाधि के साथ उसका उत्तराधिकारी बना था।

मोहम्मद बिन तुगलक (1351-1388)

Oct 24, 2015
तुगलक प्रशासन को तुगलक या तुगलक वंश के रूप में भी जाना जाता था जो तुर्की की एक मुस्लिम रेखा थी और ये मध्यकालीन भारत में दिल्ली सल्तनत पर सर्वाधिक कामयाब रहे थे। दिल्ली में इनका शासन 1320 से शुरू हुआ था। गयासुद्दीन तुगलक इस वंश का प्रथम शासक था। खिलजी प्रशासन के अंतिम शासक खुसरो खान की गजनी मलिक द्वारा हत्या कर दी गयी थी, जो सिंहासन पर आसीन था और गयासुद्दीन तुगलक की उपाधि हासिल कर रखी थी। एक दुर्घटना में उसकी मृत्यु हो गयी और उसका पुत्र जौना (उलूग खान) 1325 में मोहम्मद-बिन-तुगलक की उपाधि के साथ उसका उत्तराधिकारी बना था।

बहलुल लोधी

Oct 15, 2015
भारत में लोधी वंश की स्थापना 1451 में बहलुल लोधी ने की थी. लोधी साम्राज्य की स्थापना अफगानों की गिजाली जनजाति द्वारा की गई थी. उन्होंने 'बहलुल शाह गाजी' के खिताब के साथ 19 अप्रैल 1451 को दिल्ली की गद्दी संभाली थी. उनका राज्यारोहण सैय्यद वंश के दमन के तौर पर जाना जाता है.

लोधी वंश के पतन के कारण

Oct 15, 2015
तुगलक वंश के पतन और तैमूरों के आक्रमणों के बाद 15 वीं शताब्दी के दौरान दिल्ली पूरी तरह से शक्तिहीन रही। सैय्यदों के कम होते प्रभाव के साथ लोधी अफगान ही थे जिन्होंने अपनी बुद्धिमत्ता का प्रदर्शन किया और धीरे– धीरे ही सही लेकिन स्थिरता के साथ दिल्ली पर जीत हासिल की। भारत में लोधी वंश की स्थापना तत्कालीन सैय्यद वंश के अलाउद्दीन आलम के अधीन सरहिंद के शासक बहलुल लोधी ने 1451 में की थी।

खिलजी वंश के तहत आर्थिक नीति और प्रशासन

Oct 15, 2015
खिलजी शासकों ने मध्य एशिया में अपने वंश की छाप छोड़ी थी और ये तुर्की मूल के थे। भारत में दिल्ली आने से पहले वे वर्तमान के अफगानिस्तान में लंबे समय तक रहे थे। जलाल-उद-दीन फिरोज खिलजी, अलाउद्दीन खिलजी, मलिक काफूर, शिहाब-उद-दीन उमर, मुबारक शाह, खुसरो खान और गाजी मलिक कुछ महत्वपूर्ण खिलजी शासकों में से एक थे।

दिल्ली सल्तनत के दौरान आर्थिक स्थितियां

Oct 15, 2015
दिल्ली सल्तनत के दौरान भारत की आर्थिक स्थिति बहुत संपन्न थी। वास्तव में इसी भारी धन सपंदा के कारण महमूद गजनी ने 1006 से लेकर 1023 के दौरान भारत पर 17 बार आक्रमण किया था। हर बार वह खजाने के एक बडे हिस्से को अपने साथ ले गया था। अला-उद-दिन-खिलजी के शासनकाल के दौरान मलिक काफूर ने 1311 में दक्षिण भारत से इतना धन लूट लिया था कि उत्तर में मुद्रा के मूल्य में गिरावट होने लगी थी।

महमूद गजनवी (971 ईश्वी से 1030 ईश्वी)

Sep 2, 2015
महमूद गजनी जिसे गजनी के महमूद ( 2 नवम्बर 971 CE -30 अप्रैल 1030 CE ), महमूद-ए-ज़बूली के नाम से जाना गया, गजनाविद का प्रमुख शासक था जिसने 997 से 1030 में अपनी मृत्यु तक शासन किया | महमूद गजनवी, गजनी का शासक था जिसने 971 से 1030 AD तक शासन किया | वह सुबक्त्गीन का पुत्र था | भारत की धन-संपत्ति से आकर्षित होकर, गजनवी ने भारत पर कई बार आक्रमण किए | वास्तव में गजनवी ने भारत पर 17 बार आक्रमण किया | उसके आक्रमण का मुख्य मकसद भारत की संपत्ति को लूटना था |

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