1. Home
  2.  |  
  3. पर्यावरण और पारिस्थितिकीय

पर्यावरण और पारिस्थितिकीय

General Knowledge for Competitive Exams

Read: General Knowledge | General Knowledge Lists | Overview of India | Countries of World

ऊर्जा के गैर - अक्षय संसाधन

Dec 10, 2015
ऊर्जा प्रकृति में स्वतंत्र रूप से मौजूद है लेकिन उसमे से कुछ असीमित मात्रा में मौजूद है जो कभी समाप्त नहीं होती, उसे नवीकरणीय ऊर्जा कहा जाता है जबकि बाकी ऊर्जा सीमित मात्रा में उपलब्ध है,जिसे बनने में तो करोड़ों साल लग जाते हैं लेकिन समाप्त एक दिन में हो जाती है,इन्हें गैर- नवीकरणीय/अनवीकरणीय ऊर्जा संसाधन कहा जाता है। गैर- नवीकरणीय ऊर्जा जीवाश्म ईंधनों (कोयला, कच्चा तेल, प्राकृतिक गैस) और यूरेनियम से प्राप्त होने वाली ऊर्जा है। जीवाश्म ईंधन मुख्य रूप से कार्बन से बनता है।

अक्षय संसाधन

Dec 10, 2015
अधिकत्तर नवीकरणीय संसाधन जैविक प्रकार के होते है । नवीकरणीय संसाधनों की बृद्धि और पुरुत्थान क्षमता को आसानी से नियंत्रित किया जा सकता है, जिससे इन संसाधनों को लगातार जीवित रखा जा सके । यदि इन संसाधनों का उपभोग पुनरुत्थान की दर से लगातार बढ़ता रहता है तो इनकी गुणवत्ता पर विपरीत असर पड़ता है परन्तु ये कभी भी विलुप्त नहीं होते हैं। उदाहरण: जंगल संसाधन, जल संसाधन, खनिज संसाधन, वायु संसाधन आदि । उदाहरण: जंगल संसाधन, जल संसाधन, खनिज संसाधन, वायु संसाधन आदि ।

जैविक विविधता सम्मेलन (सीबीडी)

Dec 9, 2015
जैविकविविधता सम्मेलन (सीबीडी) की स्थापना विभिन्न सरकारों द्वारा 1992 रियो डी जनेरियो में पृथ्वी शिखर सम्मेलन के दौरान हुई थी। इसे उस समय अपनाया गया था जब वैश्विक नेताओं ने भविष्य की पीढ़ियों के लिए एक जीवित नक्षत्र सुनिश्चित करते हुए वर्तमान जरूरतों को पूरा करने के लिए "सतत विकास' की एक व्यापक रणनीति पर सहमति व्यक्त की थी। 193 सरकारों द्वारा इस पर हस्ताक्षर किए गए थे। सीबीडी ने वैश्विक जैविकविविधता को कायम रखने के लिए प्रतिबद्धता व्यक्त की थी जो सीधे-सीधे अरबों लोगों की आजीविका का समर्थन करता है और वैश्विक आर्थिक विकास की नींव रखता है।

आईयूसीएन रेड डाटा बुक

Dec 9, 2015
संकटग्रस्त प्रजातियों की आईयूसीएन लाल डेटा सूची (रेड लिस्ट) को पौधों और पशु प्रजातियों के संरक्षण की स्थिति का मूल्यांकन करने के व्यापक उद्देश्य के वैश्विक दृष्टिकोण के रूप में मान्यता दी गयी है। अपनी छोटी सी शुरुआत से, आईयूसीएन की लाल डेटा सूची (रेड लिस्ट) के आकार और जटिलता में वृद्धि हुई है और यह वर्तमान में सरकारों, गैर सरकारी संगठनों और वैज्ञानिक संस्थाओं की संरक्षण गतिविधियों के मार्गदर्शन में तेजी से एक प्रमुख भूमिका निभा रही है। विलुप्त होने के जोखिमों का निर्धारण करने के लिए एक वैज्ञानिक दृष्टिकोण की शुरूआत 1994 में हुयी। जो सभी प्रजातियों पर लागू है और एक वैश्विक मानक बन गया है।

भारत में जैव विविधता का संरक्षण

Dec 9, 2015
भारत, संरक्षण और वन्य जीवन प्रबंधन से संबंधित कई प्रमुख अंतरराष्ट्रीय सम्मेलनों का हस्ताक्षरी रहा है। इनमें से कुछ जैव विविधता सम्मेलन, वन्य जीव और वनस्पति की लुप्तप्राय प्रजातियों के अंतरराष्ट्रीय व्यापार पर आधारित सम्मेलन (सीआईटीईएस) आदि रहे हैं। भारत दुनिया के 17 बिशाल विविधतापूर्ण देशों में से एक है। लेकिन कई पौधों और जानवरों पर विलुप्त होने का खतरा मंडरा रहा है। गंभीर खतरे और अन्य विलुप्तप्राय पौधों तथा पशु प्रजातियों की रक्षा करने के लिए भारत सरकार ने कई कदम, कानून और नीतिगत पहलों को अपनाया है।

पारिस्थितिकी तंत्र के अवयव या घटक

Dec 9, 2015
एक पारिस्थितिकी तंत्र जिसमें एक दिए गए क्षेत्र में रहने वाली सभी वस्तुएं (पौधे, जानवर और जीव) शामिल रहती हैं तथा एक दूसरे के साथ मिलकर निर्जीव वातावरण (मौसम, पृथ्वी, सूर्य, मिट्टी, जलवायु, वातावरण) को प्रभावित करती हैं। पारिस्थितिकी प्रणालियों के अध्ययन में मुख्य रूप से कुछ प्रक्रियाओं का अध्ययन शामिल होता है जो सजीव, या जैविक, निर्जीव घटकों, या अजैव घटकों को जोड़ता है। ऊर्जा परिवर्तन और जैव-भू-रासायनिक चक्र वे मुख्य प्रक्रियाएं हैं जो पारिस्थितिकी तंत्र पर्यावरण के क्षेत्र में शामिल हैं।

भारत का जैव-भौगोलिक वर्गीकरण

Dec 9, 2015
भारत एक बहुत बडा विविधता वाला देश है जहां दुनिया की लगभग 10% प्रजातियां रहती हैं। लाखों वर्षों तक भारत की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत रही थी। अधिकतर भारतीय जैव विविधता जटिल रूप से देश के सामाजिक-सांस्कृतिक प्रथाओं से संबंधित है। भारत के पूर्वी और उत्तर पूर्वी भागों में जैव विविधता के बडे़ स्रोत हैं। इससे भारत को दवा, जंगल, वनस्पति और जीव जैसे कई प्रकार की वस्तुएं प्राप्त होती हैं।

यूएनईपी की पहली अनुकूलन अंतराल (गैप) रिपोर्ट

Dec 9, 2015
संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम (यूएनईपी) द्वारा पहली यूएनईपी की पहली अनुकूलन अंतराल (गैप) रिपोर्ट 5 दिसंबर, 2014 को जारी की गयी थी। रिपोर्ट में कहा गया है कि कार्बन उत्सर्जन में कटौती के बावजूद भी जलवायु परिवर्तन की वर्तमान अनुमानित अनुकूलन लागत 70-100 बिलियन डालर प्रतिवर्ष से 2050 तक दो या तीन गुना तक पहुंच जाएगी। हरित जलवायु कोष भविष्य में अनुकूलन के वित्त पोषण के अंतर को पूरा करने में एक केंद्रीय भूमिका निभा सकता है।

मध्य पूर्वी श्वसन (रेस्पिरेटरी) सिंड्रोम (एमईआरएस)

Dec 9, 2015
एक अनूठे कोरोनावायरस को "मध्य पूर्व रेस्पिरेटरी सिंड्रोम कोरोनावायरस" (MERS-CoV) कहा जाता है जिसे पहली बार 2012 में सऊदी अरब में पाया गया तत्पश्चात् यह संयुक्त राज्य अमेरिका सहित कई अन्य देशों में फैल गया था। मेर्स- कॉव (Mers-cov) से संक्रमित अधिकांश लोगों को बुखार, खांसी, और सांस की तकलीफ सहित गंभीर श्वसन बीमारी तेजी से होती है। कुछ समय पहले यह वायरस दक्षिण कोरिया में सक्रिय था।

पर्यावरण और उसके घटक

Dec 9, 2015
हमारा वातावरण हमें रोजमर्रा के जीवन के लिए आवश्यक वस्तुओं और सेवाओं की एक किस्म प्रदान करता है। इन प्राकृतिक संसाधनों में हवा, पानी, मिट्टी, खनिज के साथ-साथ जलवायु और सौर ऊर्जा शामिल हैं जो प्रकृति के निर्जीव या "अजैविक" भाग का निर्माण करते हैं। 'जैविक' या प्रकृति के सजीव भाग पौधों, जानवरों और रोगाणुओं से मिलकर बनते हैं। भौतिक भूगोल की दृष्टि से, पृथ्वी चार प्रमुख घटकों से बनती है: वायुमंडल, जीवमंडल, स्थलमंडल, और जलमण्डल।

जलवायु कार्रवाई पर लीमा आह्वान

Dec 9, 2015
लीमा, पेरू में 1 दिसबंर 2014 से 14 दिसबंर 2014 तक आयोजित पक्षकार सम्मेलन (सीओपी) के 20वें सत्र और क्योटो प्रोटोकॉल (सीएमपी) के दलों के रूप में सेवारत दलों के 10वें सत्र के समापन अवसर पर लीमा समझौता जारी किया गया था। लीमा जलवायु सम्मेलन में भाग लेने वाले सदस्य देशों में पहली बार इस बात पर सहमति बनी कि प्रत्येक बड़े और छोटे, विकसित तथा विकासशील राष्ट्रों को वैश्विक ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन में कटौती करने के उद्देश्य के लिए दृढ़ संकल्प लेना होगा।

ई-अपशिष्ट (ई-कचरे) के प्रकार

Dec 9, 2015
"ई-अपशिष्ट" एक सामान्य शब्द के रूप में प्रयोग किया जाता है जो विद्युत् चालित घटकों से युक्त सभी प्रकार के कचरे से जुडा होता है। संक्षिप्त रूप में ई-अपशिष्ट या अपशिष्ट इलेक्ट्रिकल और इलेक्ट्रॉनिक उपकरण (WEEE) वह शब्द है जिसका प्रयोग पुराने, खत्म हो चुके या बिजली को उपयोग कर रहे उपयोगहीन उपकरणों का वर्णन करने के लिए किया जाता है। इसमें कंप्यूटर, उपभोक्ता इलेक्ट्रॉनिक्स, फ्रिज आदि शामिल हैं जिसे उनके मूल प्रयोगकर्ताओं द्वारा त्याग दिया जाता है। बहुमूल्य सामग्री के साथ- साथ खतरनाक सामग्री दोनों में ई-अपशिष्ट शामिल है जिसे विशेष निगरानी और पुनर्चक्रण के तरीकों की आवश्यकता होती है।

भारत की सामान्य पादप प्रजातियां

Nov 17, 2015
एक समृद्ध जैव विविधता के साथ भारत प्रकृति से संपन्न वह देश है जहां पौधों की 40,000 से अधिक प्रजातियां और जानवरों की 75000 प्रजातियों पायी जाती हैं। करीब 3,000 प्रजातियों के पादपों के बीच वैश्विक वनस्पति की 12% संपत्ति भारत के पास है। भारत में लगभग 15,000 फूल पौधों की प्रजातियां पायी जाती हैं। भारत में 3000 से अधिक औषधीय पौधे हैं। यह सूची करीब 100 अद्धभुत पौधों का प्रतिनितिधत्व करती है जिसे एनविस डेटाबेस के अनुसार कारोबारी औषधीय पौधों के रूप में वर्गीकृत किया गया है।

बॉन सम्मेलन, वाशिंगटन और रामसर सम्मेलन

Nov 17, 2015
जंगली जानवरों की प्रवासी प्रजातियों के संरक्षण पर आधारित सम्मेलन (यह सीएमएस या बॉन सम्मेलन के रूप में भी जाना जाता है, बॉन समझौते के साथ भ्रमित होने की आवश्यकता नहीं है) का लक्ष्य स्थलीय, समुद्री और एवियन (उड़ने वाली) प्रजातियों का संरक्षण करना है।सीआईटीईएस (वन्य जीव और वनस्पति की लुप्तप्राय प्रजातियों में अंतरराष्ट्रीय व्यापार पर आधारित सम्मेलन) को वाशिंगटन सम्मेलन के रूप में भी जाना जाता है जिसकी शुरूआत 1963 में की गयी थी। रामसर सम्मेलन अंतर्राष्ट्रीय महत्व की झीलों पर आधारित सम्मेलन है।

जल प्रदूषण

Nov 17, 2015
जल प्रदूषण जल निकायों के प्रदूषित (जैसे झीलों, नदियों, समुद्रों, जलवाही स्तर और भूजल) हो जाने को कहते हैं | पर्यावरण की दुर्दशा का ये रूप तब होता है जब प्रदूषकों को प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से हानिकारक यौगिकों का शोधन किए बिना जल निकायों में छोड़ दिया जाता है |

पर्यावरण लोकतंत्र सूचकांक 2015

Nov 17, 2015
वाशिंगटन स्थित विश्व संसाधन संस्थान (WRI) द्वारा 20 मई 2015 को वर्ष 2015 का प्रथम पर्यावरण लोकतन्त्र सूचकांक जारी किया | सूचकांक में मान्यता प्राप्त अंतरराष्ट्रीय मानकों के आधार पर 70 देशों में पर्यावरण लोकतंत्र का मूल्यांकन किया गया है |सूचकांक मूल्यांकन करता है कि क्या सरकारें पर्यावरण निर्णय लेने में पारदर्शिता, जवाबदेही, और नागरिक भागीदारी को बढ़ावा देने के लिए राष्ट्रीय कानूनों का पालन कर रहे हैं । पहले पर्यावरण लोकतंत्र सूचकांक में 70 देशों की सूची में भारत को 24 वां स्थान मिला है |

वायुमंडल का ऊर्जा चक्र

Nov 17, 2015
पारिस्थितिक तंत्र ऊर्जा चक्र और बाहरी स्रोतों से प्राप्त पोषक तत्वों द्वारा खुद को बनाए रखता है । पहले पौष्टिकता स्तर पर, प्राथमिक उत्पादक(पौधों, शैवाल, और कुछ बैक्टीरिया) संश्लेषण के माध्यम से जैविक संयंत्र सामग्री के उत्पादन के लिए सौर ऊर्जा का उपयोग करते हैं । शाकाहारी जानवर जो सिर्फ पौधे खाते हैं, द्वितीय पौष्टिक स्तर को बनाते हैं । शिकारी जानवर जो शाकाहारी जानवरों को खाते हैं तीसरा पौष्टिकता स्तर बनाते हैं ।

जलवायु परिवर्तन

Oct 15, 2015
जलवायु परिवर्तन हजारों लाखों सालों से मौसम के स्वरूप के सांख्यिकीय वितरण में एक महत्वपूर्ण और स्थायी परिवर्तन है | यह औसत मौसम की स्थिति में एक बदलाव हो सकता है, या औसत स्थिति (यानी, अधिक या कम चरम मौसम की घटनाओं) में आसपास के मौसम के वितरण के बारे बताता है।

प्रदूषण का वर्गीकरण

Oct 15, 2015
प्रदूषण की प्रकृति और सघनता मानव स्वास्थ्य पर इसके हानिकारक प्रभाव की गंभीरता को निर्धारित करता है | वे अशुद्धियाँ जिनकी उत्पत्ति सीधे स्त्रोतों से होती है, उन्हे प्राथमिक प्रदूषण कहा जाता है , उदाहरण के लिए CO 2, SO 2, NO | जब कोई संदूषित पदार्थ जैसे HC, NO, O 2वातावरण(नमी, धूप)के साथ मिल कर नया उत्पाद बनाता है जैसे PAN( पेरोक्सीसाइटल नाइट्रेट ), पेट्रोकेमिकल धुंध, फॉर्मल डिहाइड उन्हें माध्यमिक प्रदूषण कहते हैं |

भारत के जानवरों की प्रजातियाँ

Oct 15, 2015
भारत का वन्यजीवन विभिन्न प्रकार की प्रजातियों के जीवों के मेल से बना है | गाय, भैंस, बकरी, मुर्गी तथा ऊंटों जैसे कुछ अल्प संख्यक पशुओं के अलावा, भारत में देसी जानवरों की आश्चर्यजनक रूप से व्यापक विविधता है | भारत विभिन्न जीवों जैसे बंगाल टाइगर, भारतीय शेरों, हिरण, अजगर, भेड़िये, भालू, मगरमच्छ, जंगली कुत्ते, वानर, साँप, मृग की विभिन्न प्रजाति, जंगली भैंसों की विभिन्न क़िस्मों तथा एशियाई घोड़ों का आवास स्थान है |

Latest Videos

Register to get FREE updates

    All Fields Mandatory
  • (Ex:9123456789)
  • Please Select Your Interest
  • Please specify

  • ajax-loader
  • A verifcation code has been sent to
    your mobile number

    Please enter the verification code below

This website uses cookie or similar technologies, to enhance your browsing experience and provide personalised recommendations. By continuing to use our website, you agree to our Privacy Policy and Cookie Policy. OK