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पारिस्थितिकी तंत्र

General Knowledge for Competitive Exams

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विश्व ओजोन दिवस: मॉन्ट्रियल प्रोटोकॉल

Sep 16, 2019
विश्व ओजोन दिवस (when world ozone) की शुरुआत 1987 में मॉन्ट्रियल प्रोटोकॉल पर हस्ताक्षर करने साथ ही हुई थी. मॉन्ट्रियल प्रोटोकॉल पर हस्ताक्षर 16 सितम्बर 1987 को हुए थे लेकिन 16 सितम्बर को विश्व ओजोन दिवस के रूप में मनाने कीई शुरुआत संयुक्त राष्ट्र जनरल असेंबली के द्वारा 1994-95 में की गयी थी. विश्व ओजोन दिवस 2019 की थीम है;'32 years and Healing'.

भारत में जैव विविधता का संरक्षण

Dec 9, 2015
भारत, संरक्षण और वन्य जीवन प्रबंधन से संबंधित कई प्रमुख अंतरराष्ट्रीय सम्मेलनों का हस्ताक्षरी रहा है। इनमें से कुछ जैव विविधता सम्मेलन, वन्य जीव और वनस्पति की लुप्तप्राय प्रजातियों के अंतरराष्ट्रीय व्यापार पर आधारित सम्मेलन (सीआईटीईएस) आदि रहे हैं। भारत दुनिया के 17 बिशाल विविधतापूर्ण देशों में से एक है। लेकिन कई पौधों और जानवरों पर विलुप्त होने का खतरा मंडरा रहा है। गंभीर खतरे और अन्य विलुप्तप्राय पौधों तथा पशु प्रजातियों की रक्षा करने के लिए भारत सरकार ने कई कदम, कानून और नीतिगत पहलों को अपनाया है।

पारिस्थितिकी तंत्र के अवयव या घटक

Dec 9, 2015
एक पारिस्थितिकी तंत्र जिसमें एक दिए गए क्षेत्र में रहने वाली सभी वस्तुएं (पौधे, जानवर और जीव) शामिल रहती हैं तथा एक दूसरे के साथ मिलकर निर्जीव वातावरण (मौसम, पृथ्वी, सूर्य, मिट्टी, जलवायु, वातावरण) को प्रभावित करती हैं। पारिस्थितिकी प्रणालियों के अध्ययन में मुख्य रूप से कुछ प्रक्रियाओं का अध्ययन शामिल होता है जो सजीव, या जैविक, निर्जीव घटकों, या अजैव घटकों को जोड़ता है। ऊर्जा परिवर्तन और जैव-भू-रासायनिक चक्र वे मुख्य प्रक्रियाएं हैं जो पारिस्थितिकी तंत्र पर्यावरण के क्षेत्र में शामिल हैं।

जलीय विभंजन (हाइड्रोलिक फ्रेक्चरिंग)

Dec 23, 2015
एक “दबाव वाले द्रव्य (pressurized fluid.)” द्वारा एक चट्टानी परत में दरार को चौड़ा करना या फैलाना जलीय विभंजन है। निश्चित छेद और बांध कुछ प्राकृतिक जलीय विभंजन के कुछ उदाहरण हैं और ये नलिका का निर्माण कर सकते हैं जिसके साथ चट्टानों के स्त्रोतों से गैस ,पेट्रोलियम और जल चट्टानों में चला जाता हैं। सामान्यत: जल विभंजन को फ्रेकिंग के रूप में जाना जाता है, जो एक तकनीक है जिसमे पेट्रोलियम, प्राकृतिक गैस का प्रय़ोग (शेल गैस, तंग गैस और कोयले की सतही गैस सहित) फ्रेकिंग के लिए किया जाता है।

कृत्रिम वर्षा क्या होती है और कैसे करायी जाती है?

Nov 16, 2017
भारत में कई बार पर्याप्त वर्षा ना होने के कारण फसलें अक्सर चौपट हो जाती है इसलिए यहाँ के किसान कर्ज के तले दबे हुए हैं. वैज्ञानिकों ने बारिश की अनिश्चिता या कम बारिश की समस्या से निपटने के लिए कृत्रिम वर्षा का उपाय खोजा है. कृत्रिम वर्षा कराने के लिए कृत्रिम बादल बनाये जाते हैं जिन पर सिल्वर आयोडाइड और सूखी बर्फ़ जैसे ठंठा करने वाले रसायनों का प्रयोग किया जाता है जिससे कृत्रिम वर्षा होती है.

भारत की सामान्य पादप प्रजातियां

Nov 15, 2017
एक समृद्ध जैव विविधता के साथ भारत प्रकृति से संपन्न वह देश है जहां पौधों की 40,000 से अधिक प्रजातियां और जानवरों की 75000 प्रजातियों पायी जाती हैं। करीब 3,000 प्रजातियों के पादपों के बीच वैश्विक वनस्पति की 12% संपत्ति भारत के पास है। भारत में लगभग 15,000 फूल पौधों की प्रजातियां पायी जाती हैं। भारत में 3000 से अधिक औषधीय पौधे हैं। यह सूची करीब 100 अद्धभुत पौधों का प्रतिनितिधत्व करती है जिसे एनविस डेटाबेस के अनुसार कारोबारी औषधीय पौधों के रूप में वर्गीकृत किया गया है।

भारत का जैव-भौगोलिक वर्गीकरण

Nov 15, 2017
भारत एक बहुत बडा विविधता वाला देश है जहां दुनिया की लगभग 10% प्रजातियां रहती हैं। लाखों वर्षों तक भारत की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत रही थी। अधिकतर भारतीय जैव विविधता जटिल रूप से देश के सामाजिक-सांस्कृतिक प्रथाओं से संबंधित है। भारत के पूर्वी और उत्तर पूर्वी भागों में जैव विविधता के बडे़ स्रोत हैं। इससे भारत को दवा, जंगल, वनस्पति और जीव जैसे कई प्रकार की वस्तुएं प्राप्त होती हैं।

जैवविविधता के लाभ

Nov 15, 2017
कृषि, वन तथा मत्स्यिकी उत्पाद, स्थायी प्राकृतिक जलीय चक्र, उपजाऊ मृदा, संतुलित जलवायु तथा अनेक अन्य विस्तृत पारिस्थितिक तंत्र जैव विविधता के संरक्षण पर निर्भर करते हैं। खाद्य पदार्थों का उत्पादन जैव विविधता के लिए विभिन्न प्रकार के खाद्य पौधों, परागण की प्रक्रिया, कीट नाशक, पौषक तत्वों, तथा बीमारियों से सुरक्षा एवं बचाव पर निर्भर करता है। औषधीय पौधों तथा उत्पादित औषधियाँ दोनों ही जैव-विविधता पर निर्भर करती हैं।

क्या आप दुनिया के 10 सबसे पुराने पेड़ों के बारे में जानते हैं?

Nov 15, 2017
इस दुनिया में पेड़ों का अस्तित्व मानव सभ्यता के अस्तित्व से भी पहले का है | वर्तमान में भी पेड़ों के बिना मानव सभ्यता के अस्तित्व की कल्पना भी नही की जा सकती है | इन पेड़ों ने कई सभ्यताओं की उत्पत्ति और विनाश को देखा है | इस दुनिया में कुछ पेड़ ऐसे भी हैं जो 10000 सालों से अपने अस्तित्व को बनाये हुए हैं | आइये हम ऐसे ही 10 सबसे पुराने पेड़ों के बारे में कुछ जानकारी अर्जित करते हैं |

भारत के जानवरों की प्रजातियाँ

Nov 17, 2015
भारत का वन्यजीवन विभिन्न प्रकार की प्रजातियों के जीवों के मेल से बना है | गाय, भैंस, बकरी, मुर्गी तथा ऊंटों जैसे कुछ अल्प संख्यक पशुओं के अलावा, भारत में देसी जानवरों की आश्चर्यजनक रूप से व्यापक विविधता है | भारत विभिन्न जीवों जैसे बंगाल टाइगर, भारतीय शेरों, हिरण, अजगर, भेड़िये, भालू, मगरमच्छ, जंगली कुत्ते, वानर, साँप, मृग की विभिन्न प्रजाति, जंगली भैंसों की विभिन्न क़िस्मों तथा एशियाई घोड़ों का आवास स्थान है |
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