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ब्रिटिश सर्वोच्चता और अधिनियम

General Knowledge for Competitive Exams

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1861 का अधिनियम

Dec 3, 2015
भारतीय परिषद् अधिनियम-1861 का निर्माण देश के प्रशासन में भारतीयों को शामिल करने के उद्देश्य से बनाया गया था|इस अधिनियम ने सरकार की शक्तियों और कार्यकारी व विधायी उद्देश्य हेतु गवर्नर जनरल की परिषद् की संरचना में बदलाव किया| यह प्रथम अवसर था जब गवर्नर जनरल की परिषद् के सदस्यों को अलग-अलग विभाग सौंपकर विभागीय प्रणाली की शुरुआत की| इस अधिनियम ने सरकार की शक्तियों और कार्यकारी व विधायी उद्देश्य हेतु गवर्नर जनरल की परिषद् की संरचना में बदलाव किया|

भारत सरकार अधिनियम - 1935

Nov 16, 2015
भारत सरकार अधिनियम-1935 में यह अधिकथित था कि,यदि आधे भारतीय राज्य संघ में शामिल होने के लिए सहमत होते है तो, भारत को एक संघ बनाया जा सकता है| इस स्थिति में उन्हें केंद्रीय विधायिका के दोनों सदनों में अधिक प्रतिनिधित्व प्रदान किया जायेगा, लेकिन संघ से सम्बंधित प्रावधानों को लागू नहीं किया जा सका| इस अधिनियम में स्वतंत्रता की बात तो दूर , भारत को डोमिनियन का दर्जा देने की भी कोई चर्चा नहीं की गयी थी क्योकि इस अधिनियम का प्रमुख उद्देश्य भारत सरकार को ब्रिटिश सम्राट के अधीन लाना था|

मोंटेंग्यु-चेम्सफोर्ड सुधार अर्थात भारत सरकार अधिनियम-1919

Nov 16, 2015
मोंटेंग्यु-चेम्सफोर्ड सुधार अर्थात भारत सरकार अधिनियम-1919 द्वारा भारत में प्रांतीय द्वैध शासन प्रणाली की स्थापना की गयी |यह एक ऐसी व्यवस्था थी जिसमें प्रांतीय विषयों को दो भागों- आरक्षित और हस्तांतरित में बांटा गया था,आरक्षित विषयों का प्रशासन गवर्नर अपने द्वारा मनोनीत पार्षदों के माध्यम से करता था और हस्तांतरित विषयों का प्रशासन निर्वाचित सदस्यों द्वारा किया जाता था|इन सुधारों द्वारा केंद्रीय विधान-मंडल को द्विसदनीय बना दिया गया |इनमें से एक सदन को राज्य परिषद् और दुसरे सदन को केंद्रीय विधान सभा कहा गया |दोनों सदनों में निर्वाचित सदस्यों का बहुमत था|

1909 ई. का भारतीय परिषद् अधिनियम

Nov 16, 2015
1909 ई. के भारत शासन अधिनियम को ,भारत सचिव और वायसराय के नाम पर, मॉर्ले-मिन्टो सुधार भी कहा जाता है|इसका निर्माण उदारवादियों को संतुष्ट करने के लिए किया गया था| लॉर्ड मिन्टो को ‘सांप्रदायिक निर्वाचन मंडल का पिता’ कहा जाता है क्योकि उन्होंने इन सुधारों के माध्यम से ‘प्रथक निर्वाचन मंडल ‘ के सिद्धांत का प्रारंभ किया | भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस ने 1909 ई. के अपने अधिवेशन में इस अधिनियम के अन्य सुधारों का तो स्वागत किया लेकिन धर्म के आधार पर प्रथक निर्वाचक मंडलों की स्थापना के प्रावधान का विरोध किया|

1892 ई. का अधिनियम

Nov 16, 2015
ब्रिटेन की संसद द्वारा 1892 ई. में पारित किये गए अधिनियम ने विधान परिषदों की सदस्य संख्या में वृद्धि कर उन्हें सशक्त बनाया, जिसने भारत में संसदीय प्रणाली की आधारशिला रखी| इस अधिनियम द्वारा परिषद् के सदस्यों को वार्षिक वित्तीय विवरण अर्थात बजट पर बहस करने का अधिकार प्रदान किया गया| गवर्नर जनरल की कार्यकारी परिषद् में अतिरिक्त सदस्यों की संख्या बढ़ाकर 16 तक कर दी गयी| इस अधिनियम द्वारा भारत में पहली बार चुनाव प्रणाली की शुरुआत की गयी|

रेग्युलेटिंग एक्ट, 1773

Nov 16, 2015
बंगाल के कुप्रशासन से उपजी परिस्थितियों ने ब्रिटिश संसद को ईस्ट इंडिया कंपनी के कार्यों की जाँच हेतु बाध्य कर दिया| ब्रिटिश संसद ने पाया कि भारत में कंपनी की गतिविधियों को नियंत्रित करने की जरुरत है और इसी जरुरत की पूर्ति के लिए 1773 ई. में रेग्युलेटिंग एक्ट पारित किया गया| यह एक्ट भारत के सम्बन्ध प्रत्यक्ष हस्तक्षेप हेतु ब्रिटिश सरकार द्वारा उठाया गया पहला कदम था |इस एक्ट का उद्देश्य व्यापारिक कंपनी के हाथों से राजनीतिक शक्ति छीनने की ओर एक कदम बढाना था|

चार्टर अधिनियम,1793

Nov 16, 2015
1793 ई. में पारित चार्टर अधिनियम द्वारा कंपनी के भारत के साथ व्यापारिक एकाधिकार को अगले बीस वर्षों के लिए बढ़ा दिया गया और गवर्नर जनरल के अधिकार क्षेत्र में बम्बई और मद्रास के गवर्नर को भी शामिल कर दिया |सुप्रीम कोर्ट के अधिकार क्षेत्र को खुले सागर तक बढ़ा दिया |इस अधिनियम के द्वारा ब्रिटिशों ने भारत पर शासन करने के विस्तारवादी नीति पर कार्य करना प्रारंभ कर दिया और भारतीय लोगों के अधिकारों व संपत्ति को भी नियंत्रित करने लगे तथा न्यायालयों को अपने निर्णयों को स्वयं द्वारा निर्मित सामान्य संहिता के आधार पर नियंत्रित करने के लिए बाध्य किया|

1853 ई. का चार्टर अधिनियम

Nov 16, 2015
1853 ई. का चार्टर एक्ट, 1852 ई. की सेलेक्ट कमेटी की जाँच रिपोर्ट के आधार पर तैयार किया गया था| राजा राममोहन राय की इंलैंड यात्रा और बॉम्बे एसोसिएशन व मद्रास नेटिव एसोसिएशन की याचिकाओं का परिणाम 1853 ई. का चार्टर एक्ट था| इस अधिनियम द्वारा भारतीय (केंद्रीय) विधान परिषद् में सर्वप्रथम क्षेत्रीय प्रतिनिधित्व के सिद्धांत को प्रतिपादित किया गया|गवर्नर जनरल की परिषद् में मद्रास,बॉम्बे, बंगाल और आगरा की स्थानीय (प्रांतीय) सरकारों द्वारा छह नए विधान परिषद् के सदस्य नियुक्त किये गए|

1858 ई. का भारत सरकार अधिनियम

Nov 16, 2015
अगस्त 1858 ई. में ब्रिटिश संसद ने एक अधिनियम पारित कर भारत में कंपनी के शासन को समाप्त कर दिया| इस अधिनियम द्वारा भारत के शासन का नियंत्रण ब्रिटिश सम्राट को सौंप दिया गया| यह 1857 के विद्रोह का परिणाम था | इस उद्घोषणा द्वारा भारत के लोगों को यह आश्वासन दिया गया कि जाति,रंग व प्रजाति आदि के आधार पर किसी के साथ कोई भेदभाव नहीं किया जायेगा| इस अधिनियम द्वारा भारत के गवर्नर जनरल को वायसराय, जिसका अर्थ था-सम्राट का प्रतिनिधि, कहा जाने लगा|

1833 ई. का चार्टर अधिनियम

Nov 16, 2015
1833 ई. का चार्टर अधिनियम इंग्लैंड में हुई औद्योगिक क्रांति का परिणाम था ताकि इंग्लैंड में मुक्त व्यापार नीति के आधार पर बड़ी मात्रा में उत्पादित माल हेतु बाज़ार के रूप में भारत का उपयोग किया जा सके| अतः 1833 का चार्टर अधिनियम उदारवादी संकल्पना के आधार पर तैयार किया गया था| इस अधिनियम द्वारा बंगाल के गवर्नर जनरल को भारत का गवर्नर जनरल कहा जाने लगा| लॉर्ड विलियम बेंटिक को “ब्रिटिश भारत का प्रथम गवर्नर जनरल” बनाया गया|

1813 का चार्टर अधिनियम

Nov 16, 2015
लम्बे समय तक चले नैपोलियन युद्ध और महाद्वीपीय प्रणाली के क्रियान्वयन के कारण .ब्रिटिश व्यापार में उल्लेखनीय कमी दर्ज की गयी| दूसरी ओर, ब्रिटिश व्यापारी लगातार कंपनी-व्यापार को सभी निजी व्यापारियों हेतु खोलने की मांग कर रहे थे| अतः उनकी मांगों को पूरा करने के लिए 1813 का चार्टर अधिनियम (1813 ई. का ईस्ट इंडिया कंपनी अधिनियम) पारित किया गया | यह ब्रिटिश संसद द्वारा पारित एक ऐसा अधिनियम था जिसने भारत में ईस्ट इंडिया कंपनी के शासन को जारी रखा|

पिट्स इंडिया एक्ट 1784

Nov 16, 2015
1773 ई. के रेग्युलेटिंग एक्ट की कमियों को दूर करने और कंपनी के भारतीय क्षेत्रों के प्रशासन को अधिक सक्षम और उत्तरदायित्वपूर्ण बनाने के लिये अगले एक दशक के दौरान जाँच के कई दौर चले और ब्रिटिश संसद द्वारा अनेक कदम उठाये गए| इनमें सबसे महत्पूर्ण कदम 1784 ई. में पिट्स इंडिया एक्ट को पारित किया जाना था| यह एक्ट इस दृष्टि से बहुत महत्वपूर्ण है कि इसने कंपनी की गतिविधियों और प्रशासन के सम्बन्ध में ब्रिटिश सरकार को सर्वोच्च नियंत्रण शक्ति प्रदान कर दी | यह पहला अवसर था जब कंपनी के अधीन क्षेत्रों को ब्रिटेन के अधीन क्षेत्र कहा गया|

व्यपगत का सिद्धांत

Nov 16, 2015
व्यपगत का सिद्धांत एक साम्राज्यवाद समर्थक उपागम था जिसका उद्देश्य भारत में ब्रिटिश राज्यक्षेत्र का विस्तार करना था| इस सिद्धांत का प्रारंभ लॉर्ड डलहौजी द्वारा किया गया था| इस सिद्धांत के अनुसार वे राज्य, जिनका कोई उत्तराधिकारी नहीं था, अपने शासन करने के अधिकार खो देते थे |साथ ही उत्तराधिकारी को गोद लेने पर भी उनके राज्य वापस प्राप्त नहीं किया जा सकता था| सतारा(1848 ई.) जयपुर(1849 ई.) संभलपुर(1849 ई.) बाहत(1850 ई.) उदयपुर(1852 झाँसी(1853 ई.) नागपुर(1854 ई.) ऐसे भारतीय राज्य थे जिनका डलहौजी द्वारा व्यपगत के सिद्धांत के आधार पर ब्रिटिश साम्राज्य में विलय कर लिया गया था|

सहायक संधि

Nov 16, 2015
ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी ने हस्तक्षेप की नीति को प्रारंभ किया और और पूर्व में अपने अधीन किये गये शासकों के क्षेत्रों का प्रयोग अपनी राजनीतिक महत्वाकांक्षाओं अर्थात भारतीय राज्यों को ब्रिटिश शक्ति के अधीन लाने के लिए किया| सहायक संधि हस्तक्षेप की नीति थी जिसका प्रयोग भारत के गवर्नर जनरल लॉर्ड वेलेजली (1798-1805 ई.) द्वारा भारत में ब्रिटिश साम्राज्य की स्थापना के लिए किया गया| इस प्रणाली में यह कहा गया की प्रत्येक भारतीय शासक को अपने राज्य में ब्रिटिश सेना के रख-रखाव और अपने विरोधियों से सुरक्षा के बदले में धन का भुगतान करना होगा|

बक्सर की लड़ाई

Nov 16, 2015
बक्सर का युद्ध बंगाल के नवाब मीर कासिम,अवध के नवाब सुजाउद्दौला व मुग़ल शासक शाह आलम द्वितीय की संयुक्त सेना और अंग्रेजों के मध्य लड़ा गया था | यही वह निर्णायक युद्ध था जिसने अंग्रेजों को अगले दो सौ वर्षों के लिए भारत के शासक के रूप में स्थापित कर दिया| यह युद्ध अंग्रेजों द्वारा फरमान और दस्तक के दुरुपयोग और उनकी विस्तारवादी व्यापारिक आकांक्षाओं का परिणाम था| अंग्रेजों व फ्रांसीसियों के बीच लड़े गए कर्नाटक युद्ध ,प्लासी के युद्ध और बक्सर के युद्ध ने भारत में ब्रिटिश सफलता के दौर को प्रारंभ कर दिया|

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