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भारतीय राजव्यवस्था

General Knowledge for Competitive Exams

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हिन्दी भाषा में संविधान की विषय वस्तु

Dec 21, 2015
हिन्दी भाषा में संविधान के प्राधिकृत विषय वस्तु के साथ अनुच्छेद 394 कार्यवाही करता है।हिन्दी भाषा में संविधान के प्राधिकृत विषय वस्तु के साथ अनुच्छेद 394 कार्यवाही करता है। संविधान में हिंदी भाषा की कोई भी प्राधिकृत विषय वस्तु प्रदान नहीं की गयी है। 58 वें संविधान संशोधन अधिनियम, 1987 ने संविधान के XXII भाग में अनुच्छेद 394-ए को शामिल किया है।

राज्य के नीति निर्देशक तत्व

Dec 21, 2015
राज्य के नीति निर्देशक तत्वों को संविधान के भाग-4 में अनुच्छेद 36 से 51 तक में शामिल किया गया है| राज्य के नीति निर्देशक तत्वों का उद्देश्य नीति निर्माताओं के सामने कुछ सामाजिक व आर्थिक लक्ष्यों को प्रस्तुत करना था ताकि वृहत्तर सामाजिक आर्थिक समानता की दिशा में देश में सामाजिक बदलाव लाये जा सकें| सर्वोच्च न्यायालय ने भी राज्य के नीति निर्देशक तत्वों से सम्बंधित कुछ निर्णय दिए है|

संविधान का बुनियादी ढांचा (सिद्धांत)

Dec 21, 2015
भारतीय संविधान की मूल संरचना (या सिद्धांत), केवल संवैधानिक संशोधनों पर लागू होती है जो यह बताती है कि संसद, भारतीय संविधानके बुनियादी ढांचे को नष्ट या बदल नहीं सकती है। संविधान की मूल संरचना (सिद्धांत) के सम्बन्ध में उच्चतम न्यायालय के कई महत्वपूर्ण निर्णय रहे हैं। संविधान, संसद और राज्य विधान मंडलों या विधानसभाओं को उनके संबंधित क्षेत्राधिकार के भीतर कानून बनाने का अधिकार देता है।

भारतीय निर्वाचन आयोग

Dec 21, 2015
चुनाव, भारतीय लोकतंत्र के मुख्य आधार का निर्माण करते हैं| भारतीय संविधान के अनुच्छेद 324 में निर्वाचन आयोग का प्रावधान किया गया है जो भारत में स्वतंत्र और निष्पक्ष तरीके से चुनाव सम्पन्न कराने वाली शीर्ष संस्था है ताकि चुनाव प्रक्रिया में जनता की भागीदारी को सुनिश्चित किया जा सके| भारतीय संविधान के अनुच्छेद 324 में संसद, राज्य विधानमंडल के साथ साथ राष्ट्रपति,उपराष्ट्रपति पद के लिए होने वाले चुनावों के अधीक्षण,निर्देशन और निर्वाचन नामावलियों की तैयारी पर नियंत्रण रखने के लिए निर्वाचन आयोग का प्रावधान किया गया है |

दलबदल विरोधी कानून

Dec 21, 2015
संविधान के दलबदल विरोधी कानून के संशोधित अनुच्छेद 101, 102, 190 और 191 का संबंध संसद तथा राज्य विधानसभाओं में दल परिवर्तन के आधार पर सीटों से छुट्टी और अयोग्यता के कुछ प्रावधानों के बारे में है। दलबदल विरोधी कानून भारतीय संविधान की दसवीं अनुसूची जोड़ा गया है जिसे संविधान के 52वें संशोधन के माध्यम से वर्ष 1985 में पारित किया गया था। इस कानून में विभिन्न संवैधानिक प्रावधान थे और इसकी विभिन्न आधारों पर आलोचना भी हुयी थी।

केंद्रीय प्रशासनिक अधिकरण

Dec 21, 2015
संविधान का भाग XIV-क अधिकरण प्रदान करता है। प्रावधान को 1976 के 42 वें संशोधन अधिनियम के माध्यम से जोड़ा गया। अनुच्छेद 323 क और 323 ख क्रमश: अन्य मामलों से संबंधित प्रशासनिक न्यायाधिकरण अथवा अधिकरण और अधिकरण प्रदान करते हैं। संसद द्वारा 1985 में पारित प्रशासनिक न्यायाधिकरण अधिनियम, केंद्रीय प्रशासनिक न्यायाधिकरण और राज्य प्रशासनिक न्यायाधिकरण की स्थापना के लिए केंद्र सरकार को अधिकृत करता है।

जिला कलेक्टर/मजिस्ट्रेट

Dec 21, 2015
जिला मजिस्ट्रेट या कलेक्टर जिले का मुख्य कार्यकारी,प्रशासनिक और राजस्व अधिकारी है।वह जिले में कार्य कर रहीं विभिन्न सरकारी एजेंसियों के मध्य आवश्यक समन्वय की स्थापना करता है। इस पद का सृजन 1772 में वारेनहेस्टिंग्स ने किया था। जिला मजिस्ट्रेट का मुख्य सामान्य प्रशासन का निरीक्षण करना, भूमि राजस्व वसूलना और जिले में कानून-व्यवस्था को बनाये रखना है। वह राजस्व संगठनों का प्रमुख होता था। वह भूमि के पंजीकरण,जोतों के के विभाजन ,विवादों के निपटारे दिवालिया जागीरों के प्रबंधन ,कृषकों को ऋण देने और सूखा राहत के लिए भी जिम्मेदार था।

भारत का सर्वोच्च न्यायालय

Dec 18, 2015
अनुच्छेद 124 (1) के तहत भारतीय संविधान निर्दिष्ट करता है कि भारत में सर्वोच्च न्यायालय में भारत का मुख्य न्यायधीश तथा भारत के मुख्य न्यायाधीश को मिलाकर 31 न्यायाधीश होने चाहिए| उच्चतम न्यायलय की स्थापना, गठन, अधिकारिता, शक्तियों के विनिमय से सम्बंधित विधि निर्माण की शक्ति भारतीय संसद को प्राप्त है| इसके न्यायधीशों की नियुक्ति राष्ट्रपति के द्वारा होती है| उच्चतम न्यायालय का न्यायाधीश बनने के लिए न्यूनतम आयु सीमा निर्धारित नहीं की गयी है परन्तु अवकाश ग्रहण की आयु सीमा 65 वर्ष है|

संघ लोक सेवा आयोग

Dec 18, 2015
भारतीय संविधान का अनुच्छेद 315 संघों व राज्यों के लिए प्रतियोगी परीक्षाओं के आधार पर लोक सेवकों की नियुक्ति करता है| संघ लोक सेवा आयोग एक संवैधानिक निकाय है। संघ लोक सेवा आयोग में एक अध्यक्ष और राष्ट्रपति द्वारा नियुक्त अन्य सदस्य शामिल होते हैं। आयोग का अध्यक्ष व सदस्य छह साल की अवधि के लिए (राष्ट्रपति द्वारा चयनित) या 65 वर्ष की आयु पाने तक, जो भी पहले हो, कार्यरत रहते हैं|

राज्य लोक सेवा आयोग

Dec 18, 2015
भारत सरकार अधिनियम, 1935 ने प्रांतीय स्तर पर लोक सेवा आयोग की स्थापना की जिसे राज्य लोक सेवा आयोग के रूप में जाना जाता है तथा भारत के संविधान ने इसे स्वायत्त निकायों के रूप में संवैधानिक दर्जा दिया है| एक राज्य लोक सेवा आयोग (SPSC) में एक अध्यक्ष और राज्य के राज्यपाल द्वारा नियुक्त किए गए अन्य सदस्य शामिल होते हैं। नियुक्त सदस्यों में से आधे सदस्यों को भारत सरकार के अधीन या किसी राज्य की सरकार के तहत कार्यालय में कम से कम दस साल के लिए कार्यरत होना चाहिए|

राज्य मानवाधिकार आयोग

Dec 18, 2015
मानव संरक्षण अधिकार अधिनियम (1993), के आधार पर राज्य स्तर पर राज्य मानवाधिकार आयोग बना है। एक राज्य मानवाधिकार आयोग भारतीय संविधान की सातवीं अनुसूची में राज्य सूची और समवर्ती सूची के अंतर्गत शामिल विषयों से संबंधित मानव अधिकारों के उल्लंघन की जांच कर सकता है। मानव अधिकार (संशोधन) अधिनियम, 2006 में एक अध्यक्ष के साथ तीन सदस्य शामिल होते हैं। अध्यक्ष, उच्च न्यायालय का एक सेवानिवृत्त मुख्य न्यायाधीश होना चाहिए। आयोग के अध्यक्ष और सदस्यों का कार्यकाल पांच वर्ष का होता है।

राज्यपाल

Dec 18, 2015
अनुच्छेद 153 के तहत प्रत्येक राज्य का राज्यपाल होना चाहिए / राज्य के कार्यकारी के तहत राज्यपाल, मंत्रियों की परिषद और राज्य के महाधिवक्ता होते हैं। राज्यपाल भी राज्य का मुख्य कार्यकारी अधिकारी होता है जो अपने कार्य संबंधित राज्य के मंत्रियों की परिषद की सलाह के अनुसार करता है| इस के अलावा, राज्यपाल केंद्र सरकार के प्रतिनिधि के तौर पर दोहरी भूमिका निभाता है| इसकी नियुक्ति राष्ट्रपति के आदेश पर पांच वर्षों के लिए की जाती है परन्तु वह राष्ट्रपति के प्रसाद पर्यन्त ही पाने पद पर रह सकता है|

भारत में नागरिकता

Dec 18, 2015
नागरिकता राज्य के एक सदस्य होने के रूप में कानून के तहत मान्यता प्राप्त एक व्यक्ति की स्थिति है| हालांकि, 1955 का नागरिकता अधिनियम तथा इसके संशोधन संविधान के प्रारम्भ होंने के बाद नागरिकता के अधिग्रहण और समाप्ति के साथ संबंध रखते हैं| इसके अलावा, संविधान ने विदेशों में रेह रहे भारतियों (OCI’s) तथा अनिवासी भारतीय नागरिक (NRI’s) और भारतीय मूल के लोगों (PIO’s) को नागरिकता के अधिकार प्रदान किए हैं|

भारत का महान्यायवादी

Dec 18, 2015
अनुच्छेद 76 और 78 भारत के महान्यायवादी के साथ संबन्धित है| भारत के महान्यायवादी देश का सर्वोच्च कानून अधिकारी होता है। वह सभी कानूनी मामलों में सरकार की सहायता के लिए जिम्मेदार होता है। राष्ट्रपति, महान्यायवादी की नियुक्त करता है| जो व्यक्ति (महान्यायवादी) नियुक्त किया जाता है उसकी योग्यता सर्वोच्च न्यायालय के एक न्यायाधीश होने लायक होनी चाहिए। वह भारत का नागरिक होना चाहिए और दस साल के लिए उच्च न्यायलय में वकील के रूप में कार्य करने का अनुभव होना चाहिए|

संविधान संशोधन

Dec 18, 2015
संशोधन एक राष्ट्र या राज्य के लिखित संविधान के पाठ में औपचारिक परिवर्तन को दर्शाता है। संविधान के संशोधन अत्यधिक जीवन की वास्तविकता को प्रतिबिंबित करने के लिए संविधान को संशोधित करने और मार्गदर्शन करने के लिए आवश्यक है। संविधान में संशोधन कई प्रकार से किया जाता है नामतः साधारण बहुमत, विशेष बहुमत तथा बहाली कम से कम आधे राज्यों द्वारा| अनुच्छेद 368 के तहत संवैधानिक संशोधन, भारतीय संविधान की एक मूल संशोधन प्रक्रिया है।

राज्य के महाधिवक्ता

Dec 17, 2015
अनुच्छेद 165 राज्य के महाधिवक्ता और अनुच्छेद 177 सदनो के सम्मान में मंत्रियों तथा महाधिवक्ता के अधिकारों के साथ संबंध रखता है। महाधिवक्ता राज्य का सर्वोच्च कानून अधिकारी होता है। वह सभी कानूनी मामलों में राज्य सरकार की सहायता के लिए जिम्मेदार है। वह राज्य सरकार के हितों का बचाव और रक्षा करता है| राज्य के महाधिवक्ता का कार्यालय भारत के अटॉर्नी जनरल के कार्यालय से समान होता है |

संविधान के महत्वपूर्ण अनुच्छेदों की सूची

Dec 16, 2015
भारत ने अपना संविधान 26 नवम्बर 1949 में अपनाया था । जब यह संविधान अपनाया गया था उस समय इसमें 395 अनुच्छेद 22 भाग और 8 अनुसूचियां थीं। वर्तमान में भारत के संविधान में 465 अनुच्छेद 25 भाग और 12 अनुसूचियां हैं । संविधान के कुल अनुच्छेदों में से 15 अर्थात 5,6,7,8, 9, 60, 324, 366, 367, 372, 380, 388, 391, 392 तथा 393 को 26 नवम्बर 1949 को ही लागू कर दिया था, जबकि शेष अनुच्छेदों को 26 जनवरी 1950 को लागू किया गया था ।

संघ-राज्य संबंध / केंद्र-राज्य संबंध

Dec 16, 2015
भारत, राज्यों का एक संघ है। भारत के संविधान को विधायपालिका, कार्यपालिका और केंद्र तथा राज्यों के बीच वित्तीय शक्तियों में विभाजित किया गया है, जो संविधान को संघीय विशेषता प्रदान करता है जबकि न्यायपालिका एक श्रेणीबद्ध संरचना में एकीकृत है। भाग XI में अनुच्छेद 245-255 केंद्र और राज्यों के बीच विधायी संबंधों के विभिन्न पहलुओं का आदान-प्रदान करता है। संविधान में केंद्र और राज्यों के बीच सहयोग और समन्वय को सुरक्षित करने के लिए विभिन्न प्रावधान तय किए गए हैं।

मुख्यमंत्री

Dec 16, 2015
मुख्यमंत्री वास्तविक कार्यकारी होता है, राज्यपाल के अधीनस्थ अधिकारियों के बीच में वह सरकार का एक मुखिया होता है। उसकी स्थित/पद एक राज्य में वही होता है जो देश में प्रधानमंत्री का होता है। हमारे संविधान में एक मुख्यमंत्री के रूप में नियुक्त होने वाली विशेषताओं का स्पष्ट रूप से वर्णन नहीं किया गया है। हमारे संविधान के अनुच्छेद 167 के तहत राज्यों के मुख्यमंत्री, राज्यपाल और मंत्रियों की राज्य परिषद के बीच एक कड़ी के रूप में कार्य करता है।

मंत्रिमंडलीय समितियां

Dec 16, 2015
मंत्रिमंडल की स्थायी समितियों जिनका पुनर्गठन प्रधानमंत्री द्वारा किया जाता है । इन समितियों में, मंत्रिमंडल की समिति (एसीसी, आवास पर मंत्रिमंडलीय समिति (सीसीए), आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति (सीसीईए), संसदीय मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति, राजनीतिक मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति (सीसीपीए), और सुरक्षा मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति (सीसीएस) इत्यादि आते हैं। इन समितियों की अध्यक्षता प्रधानमंत्री करते हैं। गृह मंत्री और मंत्री के प्रभारी संबंधित मंत्रालय इस समिति के सदस्य होते हैं।

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