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भारतीय राजव्यवस्था

General Knowledge for Competitive Exams

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राज्य मानवाधिकार आयोग

Dec 18, 2015
मानव संरक्षण अधिकार अधिनियम (1993), के आधार पर राज्य स्तर पर राज्य मानवाधिकार आयोग बना है। एक राज्य मानवाधिकार आयोग भारतीय संविधान की सातवीं अनुसूची में राज्य सूची और समवर्ती सूची के अंतर्गत शामिल विषयों से संबंधित मानव अधिकारों के उल्लंघन की जांच कर सकता है। मानव अधिकार (संशोधन) अधिनियम, 2006 में एक अध्यक्ष के साथ तीन सदस्य शामिल होते हैं। अध्यक्ष, उच्च न्यायालय का एक सेवानिवृत्त मुख्य न्यायाधीश होना चाहिए। आयोग के अध्यक्ष और सदस्यों का कार्यकाल पांच वर्ष का होता है।

राज्यपाल

Dec 18, 2015
अनुच्छेद 153 के तहत प्रत्येक राज्य का राज्यपाल होना चाहिए / राज्य के कार्यकारी के तहत राज्यपाल, मंत्रियों की परिषद और राज्य के महाधिवक्ता होते हैं। राज्यपाल भी राज्य का मुख्य कार्यकारी अधिकारी होता है जो अपने कार्य संबंधित राज्य के मंत्रियों की परिषद की सलाह के अनुसार करता है| इस के अलावा, राज्यपाल केंद्र सरकार के प्रतिनिधि के तौर पर दोहरी भूमिका निभाता है| इसकी नियुक्ति राष्ट्रपति के आदेश पर पांच वर्षों के लिए की जाती है परन्तु वह राष्ट्रपति के प्रसाद पर्यन्त ही पाने पद पर रह सकता है|

भारत में नागरिकता

Dec 18, 2015
नागरिकता राज्य के एक सदस्य होने के रूप में कानून के तहत मान्यता प्राप्त एक व्यक्ति की स्थिति है| हालांकि, 1955 का नागरिकता अधिनियम तथा इसके संशोधन संविधान के प्रारम्भ होंने के बाद नागरिकता के अधिग्रहण और समाप्ति के साथ संबंध रखते हैं| इसके अलावा, संविधान ने विदेशों में रेह रहे भारतियों (OCI’s) तथा अनिवासी भारतीय नागरिक (NRI’s) और भारतीय मूल के लोगों (PIO’s) को नागरिकता के अधिकार प्रदान किए हैं|

भारत का महान्यायवादी

Dec 18, 2015
अनुच्छेद 76 और 78 भारत के महान्यायवादी के साथ संबन्धित है| भारत के महान्यायवादी देश का सर्वोच्च कानून अधिकारी होता है। वह सभी कानूनी मामलों में सरकार की सहायता के लिए जिम्मेदार होता है। राष्ट्रपति, महान्यायवादी की नियुक्त करता है| जो व्यक्ति (महान्यायवादी) नियुक्त किया जाता है उसकी योग्यता सर्वोच्च न्यायालय के एक न्यायाधीश होने लायक होनी चाहिए। वह भारत का नागरिक होना चाहिए और दस साल के लिए उच्च न्यायलय में वकील के रूप में कार्य करने का अनुभव होना चाहिए|

संविधान संशोधन

Dec 18, 2015
संशोधन एक राष्ट्र या राज्य के लिखित संविधान के पाठ में औपचारिक परिवर्तन को दर्शाता है। संविधान के संशोधन अत्यधिक जीवन की वास्तविकता को प्रतिबिंबित करने के लिए संविधान को संशोधित करने और मार्गदर्शन करने के लिए आवश्यक है। संविधान में संशोधन कई प्रकार से किया जाता है नामतः साधारण बहुमत, विशेष बहुमत तथा बहाली कम से कम आधे राज्यों द्वारा| अनुच्छेद 368 के तहत संवैधानिक संशोधन, भारतीय संविधान की एक मूल संशोधन प्रक्रिया है।

राज्य के महाधिवक्ता

Dec 17, 2015
अनुच्छेद 165 राज्य के महाधिवक्ता और अनुच्छेद 177 सदनो के सम्मान में मंत्रियों तथा महाधिवक्ता के अधिकारों के साथ संबंध रखता है। महाधिवक्ता राज्य का सर्वोच्च कानून अधिकारी होता है। वह सभी कानूनी मामलों में राज्य सरकार की सहायता के लिए जिम्मेदार है। वह राज्य सरकार के हितों का बचाव और रक्षा करता है| राज्य के महाधिवक्ता का कार्यालय भारत के अटॉर्नी जनरल के कार्यालय से समान होता है |

संविधान के महत्वपूर्ण अनुच्छेदों की सूची

Dec 16, 2015
भारत ने अपना संविधान 26 नवम्बर 1949 में अपनाया था । जब यह संविधान अपनाया गया था उस समय इसमें 395 अनुच्छेद 22 भाग और 8 अनुसूचियां थीं। वर्तमान में भारत के संविधान में 465 अनुच्छेद 25 भाग और 12 अनुसूचियां हैं । संविधान के कुल अनुच्छेदों में से 15 अर्थात 5,6,7,8, 9, 60, 324, 366, 367, 372, 380, 388, 391, 392 तथा 393 को 26 नवम्बर 1949 को ही लागू कर दिया था, जबकि शेष अनुच्छेदों को 26 जनवरी 1950 को लागू किया गया था ।

संघ-राज्य संबंध / केंद्र-राज्य संबंध

Dec 16, 2015
भारत, राज्यों का एक संघ है। भारत के संविधान को विधायपालिका, कार्यपालिका और केंद्र तथा राज्यों के बीच वित्तीय शक्तियों में विभाजित किया गया है, जो संविधान को संघीय विशेषता प्रदान करता है जबकि न्यायपालिका एक श्रेणीबद्ध संरचना में एकीकृत है। भाग XI में अनुच्छेद 245-255 केंद्र और राज्यों के बीच विधायी संबंधों के विभिन्न पहलुओं का आदान-प्रदान करता है। संविधान में केंद्र और राज्यों के बीच सहयोग और समन्वय को सुरक्षित करने के लिए विभिन्न प्रावधान तय किए गए हैं।

मुख्यमंत्री

Dec 16, 2015
मुख्यमंत्री वास्तविक कार्यकारी होता है, राज्यपाल के अधीनस्थ अधिकारियों के बीच में वह सरकार का एक मुखिया होता है। उसकी स्थित/पद एक राज्य में वही होता है जो देश में प्रधानमंत्री का होता है। हमारे संविधान में एक मुख्यमंत्री के रूप में नियुक्त होने वाली विशेषताओं का स्पष्ट रूप से वर्णन नहीं किया गया है। हमारे संविधान के अनुच्छेद 167 के तहत राज्यों के मुख्यमंत्री, राज्यपाल और मंत्रियों की राज्य परिषद के बीच एक कड़ी के रूप में कार्य करता है।

मंत्रिमंडलीय समितियां

Dec 16, 2015
मंत्रिमंडल की स्थायी समितियों जिनका पुनर्गठन प्रधानमंत्री द्वारा किया जाता है । इन समितियों में, मंत्रिमंडल की समिति (एसीसी, आवास पर मंत्रिमंडलीय समिति (सीसीए), आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति (सीसीईए), संसदीय मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति, राजनीतिक मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति (सीसीपीए), और सुरक्षा मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति (सीसीएस) इत्यादि आते हैं। इन समितियों की अध्यक्षता प्रधानमंत्री करते हैं। गृह मंत्री और मंत्री के प्रभारी संबंधित मंत्रालय इस समिति के सदस्य होते हैं।

भारतीय संविधान सभा

Dec 16, 2015
भारतीय संविधान सभा एक संप्रभु ढांचा था जिसका गठन कैबिनेट मिशन की सिफारिश पर किया गया था जिसने देश के लिए एक संविधान का मसौदा तैयार करने के लिए 1946 में भारत का दौरा किया था। भारत के लिए एक संवैधानिक मसौदा तैयार करने के लिए डॉ. बी. आर. अम्बेडकर की अध्यक्षता में एक मसौदा समिति का गठन किया गया था। हालांकि, बाद में संविधान सभा को अपने गठन के बाद कुछ आलोचनाओं का सामना भी करना पड़ा था।

भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक

Dec 16, 2015
अनुच्छेद 148 भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक से संबंधित है जो केंद्र और राज्य स्तर पर पूरे देश की वित्तीय व्यवस्था प्रणाली को नियंत्रित/समीक्षा करता है। भारत के नियंत्रक और महालेखा परीक्षक की नियुक्ति राष्ट्रपति द्वारा स्वयं अपने हाथों मुहर युक्त अधिपत्र द्वारा 6 वर्ष के लिए की जाती है। अपना पद ग्रहण करने से पहले कैग (सीएजी) तीसरी अनुसूची में अपने प्रयोजन के लिए निर्धारित प्रपत्र के अनुसार, राष्ट्रपति के समक्ष शपथ या प्रतिज्ञा लेते हैं।

न्यायिक समीक्षा और न्यायिक सक्रियता

Dec 16, 2015
न्यायिक समीक्षा का अर्थ है- एक कानून या आदेश की समीक्षा और वैधता निर्धारित करने के लिए न्यायपालिका की शक्ति को प्रर्दशित करना। दूसरी ओर, न्यायिक सक्रियता इस बात को संदर्भित करती है कि न्यायिक शक्ति का उपयोग मुखर और लागू होने से क्या इसका लाभ बडे पैमाने पर सामान्य लोगों और समाज को मिला पा रहा है कि नहीं। विधायिका और कार्यपालिका के कार्यों के व्यापक अधिकार क्षेत्र के साथ भारत की एक स्वतंत्र न्यायपालिका है।

केंद्रीय सूचना आयोग

Dec 16, 2015
केंद्रीय सूचना आयोग एक संवैधानिक संस्था नहीं है, लेकिन एक स्वतंत्र निकाय है जो सरकार और केंद्र शासित प्रदेशों के तहत आने वाले कार्यालयों, सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों, वित्तीय संस्थाओं आदि से संबंधित शिकायतों और अपीलों पर गौर करती है या देख-रेख करती है। सूचना के अधिकार अधिनियम (2005) के प्रावधानों के तहत केंद्रीय सूचना आयोग की स्थापना 2005 में भारत सरकार द्वारा की गयी थी। केंद्रीय सूचना आयोग शासन की प्रणाली में पारदर्शिता बनाए रखने में अपनी एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

केंद्रीय सतर्कता आयोग

Dec 16, 2015
केंद्रीय सतर्कता आयोग (सीवीसी) एक शीर्ष भारतीय निकाय है जिसकी स्थापना 1964 में केंद्र सरकार के तहत सरकारी भ्रष्टाचार की पहचान व सतर्कता निगरानी करने के लिए और केंद्र सरकार की संस्थाओं में योजना बनाने, क्रियान्वित करने तथा उनकी सतर्कता की समीक्षा करने में विभिन्न अधिकारियों को सलाह देने के लिए की गयी थी। इसे एक स्वायत्त निकाय का दर्जा प्राप्त है। केंद्रीय सतर्कता आयुक्त को भारत के राष्ट्रपति द्वारा नियुक्त किया जाता है। इस पद का कार्यकाल तीन वर्ष का होता है।

केंद्रीय जांच (अन्वेषण) ब्यूरो

Dec 16, 2015
केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) भारत सरकार के अधिकार क्षेत्र में कार्य करती है। यह भारत में सबसे अग्रणी जांच करने वाली पुलिस एजेंसी है और राष्ट्रीय अर्थव्यवस्था के स्वास्थ्य को सुनिश्चित करने के लिए प्रमुख आपराधिक जांचों में शामिल रहती है। हालांकि, सीबीआई को कुछ आलोचनाओं का भी सामना करना पड़ा है। सीबीआई का एक निदेशक होता है जो एक आईपीएस अधिकारी होता है जिसका रैंक पुलिस महानिदेशक या पुलिस आयुक्त (राज्य) के समकक्ष होता है। निदेशक की नियुक्ति दो वर्ष की अवधि के लिए की जाती है।

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