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भारतीय राष्ट्रीय आन्दोलन

General Knowledge for Competitive Exams

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भारत छोड़ो आंदोलन क्या है और क्यों महत्वपूर्ण है?

Aug 8, 2019
एक लम्बे समय तक भारतवर्ष अंग्रेजों के आधीन रहा है. भारत को आजाद कराने में कई क्रांतिकारियों ने अपनी जान गवाई है और इसके लिए कई प्रकार कि क्रांतियाँ भी हुई हैं। जिनमे से एक है "भारत छोड़ो आन्दोलन". आइये जानते हैं भारत छोड़ो आन्दोलन के बारे में।

जलियाँवाला बाग हत्याकांड

Apr 11, 2019
जलियाँवाला बाग हत्याकांड ने ब्रिटिशों के अमानवीय चेहरे को सामने ला दिया। ब्रिटिश सैनिकों ने एक लगभग बंद मैदान में हो रही जनसभा में एकत्रित निहत्थी भीड़ पर,बगैर किसी चेतावनी के, जनरल डायर के आदेश पर गोली चला दी क्योकि वे प्रतिबन्ध के बावजूद जनसभा कर रहे थे। 13 अप्रैल 1919 को यहाँ एकत्रित यह भीड़ दो राष्ट्रीय नेताओं –सत्यपाल और डॉ.सैफुद्दीन किचलू ,की गिरफ्तारी का विरोध कर रही थी। अचानक ब्रिटिश सैन्य अधिकारी जनरल डायर ने अपनी सेना को निहत्थी भीड़ पर, तितर-बितर होने का मौका दिए बगैर, गोली चलाने के आदेश दे दिए और 10 मिनट तक या तब तक गोलियां चलती रहीं जब तक वे ख़त्म नहीं हो गयीं।

सुभास चंद्र बोस: जयंती, उपलब्धियां और योगदान

Jan 23, 2019
सुभाष चंद्र बोस भारत के युवाओं के सबसे प्रसिद्ध स्वतंत्रता सेनानी और करिश्माई प्रभावकों में से एक हैं। उनकी देशभक्ति, स्वतंत्रता के लिए आह्वान और वांछित लक्ष्य हासिल करने से पहले रुकने से इनकार करने के कारण वे युवाओं के लिए हीरो के समान हैं। अपने राष्ट्रवादी स्वभाव और नेतृत्व की विशेषता के कारण, महात्मा गांधी पहले व्यक्ति थे जिन्होंने उन्हें नेताजी के रूप में संबोधित किया। इस लेख में हमने सुभास चंद्र बोस का जीवन-परिचय दिया है।

माउंटबेटन योजना और भारत के विभाजन

Dec 16, 2015
लॉर्ड माउंटबेटन, भारत के विभाजन और सत्ता के त्वरित हस्तांतरण के लिए भारत आये। प्रारम्भ में यह सत्ता हस्तांतरण विभाजित भारत की भारतीय सरकारों को डोमिनियन के दर्जे के रूप में दी जानी थीं। 3 जून 1947 को लॉर्ड माउंटबेटन ने अपनी योजना प्रस्तुत की जिसमे भारत की राजनीतिक समस्या को हल करने के विभिन्न चरणों की रुपरेखा प्रस्तुत की गयी थी। प्रारम्भ में यह सत्ता हस्तांतरण विभाजित भारत की भारतीय सरकारों को डोमिनियन के दर्जे के रूप में दी जानी थीं।

कैबिनेट मिशन प्लान

Dec 16, 2015
22 जनवरी को कैबिनेट मिशन को भेजने का निर्णय लिया गया था और 19 फरवरी, 1946 को ब्रिटिश प्रधानमंत्री सी.आर.एटली की सरकार ने हाउस ऑफ़ लॉर्ड्स में कैबिनेट मिशन के गठन और भारत छोड़ने की योजना की घोषणा की| तीन ब्रिटिश कैबिनेट सदस्यों का उच्च शक्ति सम्पन्न मिशन,जिसमे भारत सचिव लॉर्ड पैथिक लारेंस, बोर्ड ऑफ़ ट्रेड के अध्यक्ष सर स्टैफोर्ड क्रिप्स और नौसेना प्रमुख ए.वी.अलेक्जेंडर शामिल थे, 24 मार्च,1946 को दिल्ली पहुँचा|

अराजक और रिवोल्यूशनरी अपराध अधिनियम, 1919

Dec 16, 2015
गवर्नर जनरल चेम्सफोर्ड ने 1917 में जस्टिस सिडनी रौलट की अध्यक्षता में एक समिति गठित की| इस समिति का गठन विद्रोह की प्रकृति को समझने और सुझाव देने के लिए किया गया था| इसे ‘रौलट समिति’ के नाम से भी जाना जाता है| इस अधिनियम, जोकि किसी भी क्षेत्र/भाग पर लागू किया जा सकता था, में किसी भी व्यक्ति को कार्यपालिका के नियंत्रण में लाने के लिए दो तरह के उपाय शामिल थे- दंडात्मक और प्रतिबंधात्मक| इस अधिनियम के तहत सरकार किसी भी व्यक्ति को बिना वारंट के गिरफ्तार कर सकती थी और बिना सुनवाई के दो साल तक कैद में रख सकती थी|

संवैधानिक सभा

Dec 16, 2015
कैबिनेट मिशन योजना के तहत 16 मई 1946 को संविधान सभा का गठन किया गया|इसके सदस्यों का चुनाव आनुपातिक प्रतिनिधित्व पद्धति के तहत एकल हस्तान्तरणीय मत प्रणाली द्वारा किया गया था| संविधान सभा की प्रथम बैठक 9 दिसंबर 1946 को दिल्ली कौंसिल चैंबर के पुस्तकालय में हुई थी जिसमे 205 सदस्यों ने भाग लिया था|लीग के प्रतिनिधि और रियासतों द्वारा नामित सदस्य इसमें शामिल नहीं हुए| 11 दिसंबर को सभा ने डॉ. राजेंद्र प्रसाद को इसके स्थायी अध्यक्ष के रूप में चुना|

अंतरिम सरकार

Dec 16, 2015
2 सितम्बर 1946, को नवनिर्वाचित संविधान सभा ने भारत की अंतरिम सरकार का गठन किया जोकि 15 अगस्त 1947 तक अस्तित्व में बनी रही|अंतरिम सरकार की कार्यकारी शाखा का कार्य वायसराय की कार्यकारी परिषद करती थी जिसकी अध्यक्षता वायसराय द्वारा की जाती थी| अगस्त 1946 में कांग्रेस ने अंतरिम सरकार में शामिल होने का निर्णय लिया ताकि ब्रिटिश सरकार के लिए सत्ता हस्तांतरण की प्रक्रिया को सरल बनाया जा सके| अंतरिम सरकार ने 2 सितम्बर 1946 से कार्य करना आरम्भ किया|

बेवल योजना और शिमला सम्मलेन

Dec 16, 2015
लॉर्ड लिनलिथगो के स्थान पर अक्टूबर,1943 में लॉर्ड वेबेल को गवर्नर जनरल के रूप में नियुक्त किया गया| लॉर्ड वेबेल ने उस समय के भारत में उपस्थित गतिरोध को दूर करने के लिए प्रयास किया| उन्होंने 14 जून को भारतीय राजनीतिक गतिरोध को दूर करने के लिए ब्रिटिश सरकार के एक प्रस्ताव, जिसे वेबेल योजना कहा गया, को भारतीय जनता के लिए जारी किया|यह उस समय भारत में उपस्थित राजनीतिक गतिरोध को दूर करने के लिए तैयार किया गया था लेकिन मुस्लिम लीग और कांग्रेस के नेताओं के बीच समझौता न हो पाने के कारण उन्होंने प्रस्ताव का बहिष्कार कर दिया और अंततः शिमला सम्मलेन में प्रस्ताव समाप्त हो गया|

देसाई-लियाकत प्रस्ताव (AD 1945)

Dec 15, 2015
महात्मा गाँधी ये मान चुके थे कि जब तक कांग्रेस और मुस्लिम लीग देश के भविष्य या अंतरिम सरकार के गठन को लेकर किसी निष्कर्ष तक नहीं पहुँच जाती तब तक ब्रिटिश शासक देश को स्वतंत्रता प्रदान नहीं करेंगे। केंद्रीय सभा में कांग्रेस के नेता देसाई और लियाकत अली ने बैठककर केंद्र में अंतरिम सरकार के गठन हेतु प्रस्ताव तैयार किया। देसाई-लियाकत प्रस्ताव मुस्लिम लीग के नेताओं को संतुष्ट करने और 1942-1945 के राजनीतिक गतिरोध को दूर करने का एक प्रयास था।

राजगोपालाचारी फार्मूला (1944 ई.)

Dec 15, 2015
द्विराष्ट्र सिद्धांत और ब्रिटिशों से भारत की स्वतंत्रता को लेकर मुस्लिम लीग और भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के अलग अलग विचारों के कारण पैदा हुए मतभेदों को सुलझाने के उद्देश्य से राजगोपालाचारी फार्मूला लाया गया था| सी.राजगोपालाचारी, जोकि कांग्रेस के महत्वपूर्ण नेता थे, ने मुस्लिम लीग और कांग्रेस के बीच के राजनीतिक गतिरोध को दूर करने के लिए एक फार्मूला तैयार किया| यह फार्मूला, जिसे महात्मा गाँधी का समर्थन प्राप्त था, वास्तव में लीग की पाकिस्तान मांग की मौन स्वीकृति थी|

क्रिप्स मिशन

Dec 15, 2015
सर स्टैफोर्ड क्रिप्स,जो वामपंथी लेबर दल के सदस्य थे और जिन्होंने भारतीय राष्ट्रीय आन्दोलन का सक्रिय समर्थन किया था,ने क्रिप्स मिशन की अध्यक्षता की थी|यह मिशन द्वितीय विश्व युद्ध में भारत की ओर से ब्रिटिशों को पूर्ण समर्थन पाने के लिए लाया गया गया था| ब्रिटिश, भारत में वास्तविक राष्ट्रीय सरकार की स्थापना करने के इच्छुक नहीं थे| उन्होंने रजवाड़ों के हितों को बढावा देने का भी प्रयास किया| हालाँकि उन्होंने संविधान सभा की मांग स्वीकार ली थी लेकिन इस बात पर जोर दिया कि सभा में भारतीय राज्यों का प्रतिनिधित्व रजवाड़ों द्वारा नामित सदस्यों के द्वारा किया जाये और राज्यों की जनता का इसमें कोई प्रतिनिधितित्व न हो|

व्यक्तिगत सत्याग्रह

Dec 15, 2015
व्यक्तिगत सत्याग्रह अगस्त प्रस्ताव का परिणाम था| इसका प्रारंभ जन सविनय अवज्ञा आन्दोलन के रूप में हुआ था लेकिन महात्मा गाँधी ने इसे व्यक्तिगत सत्याग्रह में बदल दिया| यह आन्दोलन केवल स्वतंत्रता प्राप्त करने के लिए ही नहीं था बल्कि इसमें अभिव्यक्ति के अधिकार को भी दृढ़तापूर्वक प्रस्तुत किया गया|इसमें सत्याग्रही की मांग युद्ध-विरोधी घोषणा के माध्यम से युद्ध का विरोध करने के लिए अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का प्रयोग करने की थी|यदि सत्याग्रही को सरकार द्वारा गिरफ्तार नहीं किया जाता है तो वह गांवों से होते हुए दिल्ली की ओर मार्च करेगा (“दिल्ली चलो आन्दोलन)|

अगस्त प्रस्ताव

Dec 15, 2015
भारत के वायसराय लॉर्ड लिनलिथगो ने 8 अगस्त 1940 को शिमला से एक वक्तव्य जारी किया,जिसे अगस्त प्रस्ताव कहा गया|यह प्रस्ताव कांग्रेस द्वारा ब्रिटेन से भारत की स्वतंत्रता के लक्ष्य को लेकर पूछे गए सवाल के जबाव में लाया गया था| यह भारत के वायसराय लॉर्ड लिनलिथगो के द्वारा जारी किया गया औपचारिक वक्तव्य था, जिसने संविधान निर्माण प्रक्रिया की नींव रखी और कांग्रेस ने संविधान सभा के गठन को सहमति प्रदान की|

साम्प्रदायिक अधिनिर्णय और पूना समझौता

Dec 15, 2015
सांप्रदायिक अधिनिर्णय ब्रिटिश भारत में उच्च जातियों,निम्न जातियों,मुस्लिमों,बौद्धों,सिखों,भारतीय ईसाईयों,आंग्ल-भारतियों,यूरोपियों,और अछूतों (जिन्हें अब दलितों के रूप में जाना जाता है) के लिए पृथक निर्वाचक मंडल की व्यवस्था प्रदान करने के लिए लाया गया था| इसे ‘मैकडोनाल्ड अवार्ड’ के रूप में भी जाना जाता है| देश में लगभग सभी जगह जनसभाएं आयोजित की गयीं ,मदनमोहन मालवीय,बी.आर.अम्बेडकर और एम.सी.रजा जैसे विभिन्न धडों के नेता सक्रिय हो गए| इसका अंत एक समझौते के रूप में हुआ जिसे ‘पूना समझौता’ के रूप में जाना गया|

सविनय अवज्ञा आन्दोलन

Dec 15, 2015
1930 में स्वतंत्रता दिवस के पालन के लीय, गाँधी के नेतृत्व में सविनय अवज्ञा आन्दोलन की शुरुआत की गयी जिसकी प्रारंभ गाँधी जी के प्रसिद्ध दांडी मार्च से हुआ|12 मार्च 1930 को साबरमती आश्रम से गाँधी जी और आश्रम के 78 अन्य सदस्यों ने दांडी, अहमदाबाद से 385 किमी. दूर स्थित भारत के पश्चिमी तट पर स्थित एक गाँव, के लिए पैदल यात्रा आरम्भ की|

नेहरू रिपोर्ट

Dec 8, 2015
नेहरु रिपोर्ट में कहा गया कि भारत के लोगों के मौलिक अधिकारों का हनन नहीं किया जा सकता है| इस रिपोर्ट ने अमेरिका के अधिकार पत्र से प्रेरणा ग्रहण की,जिसने भारत के संविधान में मूल अधिकारों सम्बन्धी प्रावधानों की आधारशिला रखी थी|12फरवरी,1928 को डॉ.एम.ए.अंसारी की अध्यक्षता में दिल्ली में सर्वदलीय सम्मलेन बुलाया गया जिसमे 29 संगठनों के प्रतिनिधि शामिल हुए थे|इस सम्मलेन का आयोजन भारत सचिव लॉर्ड बिर्केन्हेड की चुनौती और साइमन आयोग के प्रत्युत्तर में किया गया था|

साइमन कमीशन

Dec 8, 2015
साइमन आयोग का गठन सर जॉन साइमन के नेतृत्व में भारत में संवैधानिक प्रणाली की कार्यप्रणाली की जांच करने और उसमे बदलाव हेतु सुझाव देने के लिए किया गया था|इसका औपचारिक नाम ‘भारतीय संविधायी आयोग’ था और इसमें ब्रिटिश संसद के दो कंजरवेटिव,दो लेबर और एक लिबरल सदस्य शामिल थे|आयोग का कोई भी सदस्य भारतीय नहीं था|इसीलिए उनके भारत आगमन का स्वागत ‘साइमन वापस जाओ’ के नारे के साथ किया गया था|विरोध प्रदर्शन को शांत करने के लिए वायसराय लॉर्ड इरविन ने अक्टूबर 1929 में भारत को ‘डोमिनियन’ का दर्जा देने की घोषणा की|

बटलर समिति (1927 ई.)

Dec 8, 2015
भारतीय राज्य समिति ने सर हार्टकोर्ट बटलर की अध्यक्षता में 1927 में एक समिति गठित की,जिसे बटलर समिति भी कहा जाता है| इस समिति का गठन परमसत्ता और देशी राजाओं के बीच के संबंधों की जांच और स्पष्टीकरण के लिया किया गया था| इसके गठन के उद्देश्य परमसत्ता और भारतीय राजाओं के मध्य के संबंधों की जाँच करना और उनके मध्य के इन संबंधों की बेहतरी के लिए सुझाव देना था ताकि ब्रिटिश भारत और देशी रियासतों के बीच संतोषजनक संबंधों की स्थापना की जा सके|

मुडीमैन समिति (1924)

Dec 3, 2015
भारतीय नेताओं की मांगों को पूरा करने और 1920 के दशक के आरंभिक वर्षों में स्वराज पार्टी द्वारा स्वीकृत किये गए प्रस्ताव को ध्यान में रखते हुए ब्रिटिश सरकार ने सर अलेक्जेंडर मुडीनमैन की अध्यक्षता में एक समिति गठित की| समिति में ब्रिटिशों के अतिरिक्त चार भारतीय सदस्य भी शामिल थे| भारतीय सदस्यों में सर शिवास्वामी अय्यर,डॉ.आर.पी.परांजपे,सर तेज बहादुर सप्रे और मोहम्मद अली जिन्ना शामिल थे| इस समिति ने शाही आयोग/रॉयल कमीशन की नियुक्ति की सिफारिश की| भारत सचिव लॉर्ड बिर्केनहेड ने कहा कि बहुमत/बहुसंख्यक की रिपोर्ट के आधार पर कदम उठाये जायेंगे|

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