मौर्य शासन

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मौर्य राजवंश

Sep 2, 2015
चौथी सदी BC में नन्दा के राजाओं ने मगध राजवंश पर शासन किया और यह राजवंश उत्तर का सबसे ताकतवर राज्य था | एक ब्राह्मण मंत्री चाणक्य जिसे कौटिल्य / विष्णुगुप्त ने नाम से  भी जाना गया ने मौर्य परिवार से चन्द्रगुप्त नामक नवयुवक को प्रशिक्षण दिया | चन्द्रगुप्त ने अपने सेना का अपने आप संगठन किया और 322 BC  में नन्दा का तख़्ता पलट दिया |

मौर्य साम्राज्य: इसका पतन और महत्व

Sep 4, 2015
232 ईसा पूर्व में अशोक की मौत के बाद मौर्य साम्राज्य के पतन की शुरूआत हो गयी थी। 185 ई.पू.-183ई.पू. में अंतिम राजा बृहद्रथ की हत्या उसके सेनापति पुष्यमित्र शुंग ने कर दी थी जो एक ब्राह्मण था। अशोक/अशोका की मृत्यु के बाद मौर्य वंश के पतन के में तेजी आ गयी थी। इसका एक स्पष्ट कारण कमजोर राजाओं का उत्तराधिकार था।

अशोक द ग्रेट( 268- 232 B .C.)

Aug 19, 2015
अशोक बिंदुसार का बेटा था | अपने पिता के शासन के दौरान वह तक्षिला और उज्जैन का राज्यपाल था | अपने भाइयों को सफलतापूर्वक हराने के बाद अशोक 268 B . C . के लगभग सिंहासन पर बैठा | अशोक के राजगद्दी पर पद ग्रहण(273 B . C .) तथा उसके वास्तविक राज्याभिषेक( 268 B .C.) में चार साल का अन्तराल था | अतः, उपलब्ध साक्ष्यों से यह पता चलता है कि बिंदुसार की मृत्यु के बाद राजगद्दी के लिए संघर्ष हुआ था |

मौर्य इतिहास के स्त्रोत

Sep 2, 2015
मौर्य साम्राज्य की नींव ने भारत के इतिहास में एक नए  युग का प्रारम्भ किया | पहली बार भारत ने  राजनीतिक समानता  को प्राप्त किया | इसके अलावा, इस युग से  इतिहास लिखना  अब और भी ज्यादा आसान हो गया क्यूंकि अब घटना क्रम व स्त्रोत बिलकुल सटीक थे | स्वदेशी और विदेशी स्त्रोतों के अलावा, इस युग का इतिहास लिखने के लिए कई शिलालेखों के दस्तावेज़ भी उपलबद्ध हैं | समकालीन साहित्य और पुरातात्विक खोज इसकी जानकारी के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण हैं |

मौर्य साम्राज्य: प्रशासन

Aug 31, 2015
शाही राजधानी पाटलिपुत्र के साथ मौर्य साम्राज्य चार प्रांतों में विभाजित था। अशोक के शिलालेखों से प्राप्त चार प्रांतीय राजधानियों के नाम, तोसली (पूर्व में), उज्जैन (पश्चिम में), स्वर्णागिरी (दक्षिण में) और तक्षशिला (उत्तर में) थे। संरचना के केंद्र में कानून बनाने की शक्ति राजा के पास होती थी। जब वर्णों और आश्रमों पर आधारित सामाजिक व्यवस्था (जीवन चक्र) समाप्त होती थी तो तब कौटिल्य राजा को धर्म का प्रचार करने की सलाह देता था।
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