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वन्य जीव और उनका संरक्षण

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डायनासोर की 3 प्रजातियों के पैरों के निशान भारत में कहां पाए गए हैं?

Sep 14, 2021
हाल ही की खोज में डायनासोर की तीन प्रजातियों के पैरों के निशान मिले हैं. आइये जानते हैं कि ये निशान कहां पाए गए हैं और साथ ही कुछ महत्वपूर्ण तथ्य.

जिम कॉर्बेट राष्ट्रीय उद्यान, बाघों का स्वर्गः तथ्य एक नजर में

May 3, 2019
जिम कॉर्बेट राष्ट्रीय उद्यान भारत का सबसे पुराना राष्ट्रीय उद्यान है | इसकी स्थापना विलुप्तप्राय बंगाल टाइगरों की रक्षा के लिए 1936 में की गई थी। यह उत्तराखंड के नैनीताल जिले में स्थित है और इसका नाम इसकी स्थापना में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले जिम कॉर्बेट के नाम पर रखा गया है। प्रोजेक्ट टाइगर पहल के तहत आने वाला यह पहला उद्यान था। इसका क्षेत्रफल 520.82 वर्ग मील है।

दक्षिण एशियाई नदियों में पाई जाने वाली डॉल्फिनः तथ्यों पर एक नजर

May 3, 2019
दक्षिण एशियाई नदियों में पाई जाने वाली डॉल्फिन, मीठे पानी या नदियों में पाई जाने वाली डॉल्फिन होती है जो भारत, बांग्लादेश, नेपाल और पाकिस्तान में पाई जाती है। इसकी दो प्रजातियां होती हैं– गंगा नदी डॉल्फिन और सिंधु नदी डॉल्फिन | गंगा नदी डॉल्फिन मुख्य रूप से गंगा और ब्रह्मपुत्र नदियों एवं इनकी सहायक नदियों में बांग्लादेश, भारत और नेपाल में पाई जाती हैं |

बुक्सा टाइगर रिजर्व (बी.टी.आर.): तथ्यों पर एक नजर

May 3, 2019
बुक्सा टाइगर रिजर्व (बी.टी.आर.) पश्चिम बंगाल के जलपाईगुड़ी जिले के अलीपुरद्वार उप–डिवीजन में स्थित है। इसमें बुक्सा वन प्रभाग (702.44 वर्ग किमी) का पूरा और कूच– बिहार वन विभाग (58.43 वर्ग किमी) का कुछ हिस्सा आता है। बुक्सा टाइगर रिजर्व 1983 में भारत के 15वें टाइगर रिजर्व के तौर पर बनाया गया था।

भारतीय गिद्ध विलुप्त क्यों हो रहे हैं– एक संपूर्ण विश्लेषण

May 3, 2019
1980 के दशक में भारत में सफेद पूंछ वाले गिद्धों की संख्या करीब 80 मिलियन (800 लाख) थी। आज (2016) इनकी संख्या 40 हजार से भी कम हो चुकी है। यह दुनिया में किसी भी पक्षी प्रजाति की सबसे तेजी से हुई कमी है। गिद्धों की संख्या में हुई कमी की वजह से वर्ष 2015 तक पर्यावरण स्वच्छता के लिए करीब 25 बिलियन अमेरिकी डॉलर खर्च हुआ है।

एशियाई चीताः तथ्यों पर एक नजर

May 3, 2019
एशियाई चीता (Acinonyx jubatus venaticus) ( हिन्दी के 'चीता' से “cheetah”, जो संस्कृत शब्द चित्रक से बना है जिसका अर्थ है "धब्बेदार") को आजकल ईरानी चीता भी कहा जाने लगा है। फिलहाल यह सिर्फ ईरान में पाया जाता है। कभी– कभी इसे बलूचिस्तान (पाकिस्तान) में भी देखा गया है। भारत में इसे भारतीय चीता कहते हैं हालांकि अब यह भारत में नहीं पाया जाता।

गिर राष्ट्रीय उद्यानः एशियाई शेरों का घर

Jul 18, 2016
गिर राष्ट्रीय उद्यान एवं वन्यजीव अभयारण्य एशियाई शेरों की जीवित आबादी का अंतिम आश्रय स्थल है। यह उद्यान गुजरात के 1412 वर्ग किमी क्षेत्र में फैला है। मई 2015 में एशियाई शेरों की गई 14वीं जनगणना के अनुसार इनकी आबादी बढ़ कर 523 हो गई थी (वर्ष 2010 में की गई पिछली जनगणना की तुलना में 27% अधिक)। वर्तमान में गिर राष्ट्रीय उद्यान एवं वन्यजीव अभयारण्य में 109 नर, 201 मादा और 213 युवा/ शिशु/ शेर हैं।

शेर, जंगल का राजाः तथ्यों पर एक नजर

Jul 18, 2016
अफ्रीकी शेर सभी बड़ी बिल्लियों में सबसे अधिक सामाजिक होते हैं। ये समूहों या झुंड में रहते हैं। एक झुंड में करीब 15 शेर होते हैं। नर शेर समूह की सीमा की रक्षा करते हैं जबकि शिकार करने का ज्यादातर काम मादा शेर करती हैं। शेर 81 प्रति घंटा की रफ्तार से दौड़ सकता है और 36 फीट की छलांग लगा सकता है। एशियाई शेरों की सबसे बडी संख्या सिर्फ गिर राष्ट्रीय उद्यान, गुजरात में पाई जाती है। इसका वैज्ञानिक नाम पेन्थेरा लियो पर्सिका है।

क्या आप ब्लू ह्वेल्स के बारे में ये बातें जानते हैं?

Jul 18, 2016
ब्लू ह्वेल पृथ्वी ग्रह पर पाया जाने वाला सबसे बड़ा पशु है। यह दुनिया के सभी महासागरों में पाया जाता है। आमतौर पर ये गर्मियों का महीना आर्कटिक सागर और सर्दियों में दक्षिणी (गर्म) सागरों में बितातीं हैं। ब्लू ह्वेल बहुत ही पुराने जीवों में से है– ये पृथ्वी पर 540 लाख वर्षों से मौजूद हैं। 20 शताब्दी के पूर्वार्द्ध में जब मछुआरों ने बड़े पैमाने पर ब्लू ह्वेलों का शिकार करना शुरु किया था तो विलुत्प्राय होने की कगार पर पहुंच गईं थीं। आज करीब 20000 ह्वेल जीवित हैं।

साइबेरियन क्रेन या स्नो क्रेनः तथ्यों पर एक नजर

Jul 26, 2019
साइबेरियन क्रेन (Leucogeranus leucogeranus) साइबेरियन ह्वाइट क्रेन या स्नो क्रेन (हिम सारस) के नाम से भी जाने जाते हैं। साइबेरियन क्रेन करीब– करीब बर्फ जैसे सफेद होते हैं, सिवाए उनके काले प्राथमिक पंख जो उड़ने के दौरान दिखाई देते हैं | इनकी आबादी पश्चिमी एवं पूर्वी रूस के आर्कटिक टुंड्रा में मिलती है।

क्या आप ह्वेल मछलियों के बारे में ये बातें जानते हैं?

Jul 26, 2019
ह्वेल सीटेशीअ (cetacean) प्रजाति से ताल्लुक रखती हैं। इसमें ह्वेल, डॉल्फिन और पॉर्पस आते हैं। ह्वेल को दो उप–वर्गों में विभाजित किया जाता हैः बलीन और दांत वाली ह्वेल। बलीन ह्वेल में उसके उपरी जबड़े पर कंधी के जैसे झालर होते हैं, जिसे बलीन कहा जाता है। ह्वेल अपने आस–पास के माहौल का पता प्रतिध्वनि के वापस आने में लगने वाले समय (echolocation) के आधार पर लगाती हैं।

भारत में वन्यजीव संरक्षण के लिए कौन-कौन से कदम उठाए गए हैं?

Jul 26, 2019
प्रकृति और अन्य वन्यजीव प्रजातियों के महत्व को पहचानने के लिए वन्यजीवों का संरक्षण आवश्यक है। लुप्तप्राय पौधों और जानवरों की प्रजातियों को उनके प्राकृतिक निवास स्थान के साथ रक्षा करना भी ज़रूरी है।सबसे प्रमुख चिंता का विषय यह है कि वन्यजीवों के निवासस्थान की सुरक्षा किस प्रकार की जाए ताकि भविष्य में वन्यजीवों की पीढ़ियां और यहां तक की इंसान भी इसका आनंद ले सकें. यह लेख वन्यजीवों के संरक्षण के लिए आवश्यक चरणों से संबंधित है।

कान्हा राष्ट्रीय उद्यान: मध्य प्रदेश में सबसे बड़ा टाइगर रिजर्व

Jul 26, 2019
कान्हा राष्ट्रीय उद्यान मध्य प्रदेश में सतपुड़ा के मैकाल रेंज में स्थित है। यह राष्ट्रीय उद्यान टाइगर रिजर्व के रूप में लोकप्रिय है। यह मंडला और कालाघाट के दो जिलों में फैला हुआ है। कान्हा राष्ट्रीय उद्यान को 1879 में एक आरक्षित वन घोषित कर दिया गया था और इसके बाद 1933 में एक वन्यजीव अभयारण्य के रूप में इसका पुनर्मूल्यांकन किया गया। 1955 में आगे चलकर एक राष्ट्रीय पार्क बना।

सुंदरबन राष्ट्रीय उद्यान लोकप्रिय क्यों: तथ्यात्मक विश्लेषण

Jul 26, 2019
सुंदरबन, विश्व का सबसे बड़ा डेल्टा, 10,200 वर्ग किमी में है जो भारत और बांग्लादेश में फैला है। भारतीय सीमा के भीतर आने वाले वन का हिस्सा सुंदरबन राष्ट्रीय उद्यान कहलाता है। यह पश्चिम बंगाल के दक्षिणी हिस्से में है। सुंदरबन 38,500 वर्ग किमी इलाके को कवर करता है। इसका एक–तिहाई भाग पानी/ दलदल से बना है। इस वन में बड़ी संख्या में सुंदरी पेड़ हैं। सुंदरबन रॉयल बंगाल टाइगर के लिए विश्व प्रसिद्ध है।

दुधवा राष्ट्रीय उद्यान, 'द गार्डन ऑफ ईडन': तथ्यों पर एक नजर

Jul 26, 2019
दुधवा राष्ट्रीय उद्यान उत्तर प्रदेश के लखिमपुर खीरी और बहराइच जिलों में संरक्षित क्षेत्र है। यह 1,284.3 किमी (495.9 वर्ग मील) में फैला है समुद्र तल से इसकी ऊंचाई 110 से 185 मी (361 से 607 फीट) है। इसकी उत्तर– पूर्वी सीमा नेपाल से लगी है। यह राष्ट्रीय उद्यान विभिन्न प्रकार के पक्षियों का आवास स्थान है। इनमें जंगली तीतर, चरस (Bengal Florican) और ग्रेट स्लेटी कठफोड़वा (Great Slaty Woodpecker) शामिल हैं।

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