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विज्ञान

General Knowledge for Competitive Exams

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साबुन और डिटर्जेंट: निर्माण व रासायनिक संरचना

Feb 4, 2016
साबुन व डिटर्जेंट रासायनिक यौगिक या यौगिकों का मिश्रण हैं जिनका प्रयोग शोधन/धुलाई के लिए किया जाता है | साबुन सोडियम या पौटेशियम लवण तथा वसीय अम्लों का मिश्रण होता है जो पानी में शोधन क्रिया (Cleansing Action) करता है जबकि डिटर्जेंट भी यही काम करता है लेकिन धुलाई /शोधन के लिए वह साबुन की तुलना में बेहतर होता है क्योंकि पानी की कठोरता का उस पर कोई प्रभाव नहीं पड़ता है |

जीवों का पाँच जगत वर्गीकरण

Feb 4, 2016
अध्ययन की दृष्टि से जीवों को उनकी शारीरिक रचना,रूप व कार्य के आधार पर अलग-अलग वर्गों में बाँटा गया है | लीनियस को ‘आधुनिक वर्गीकरण प्रणाली का पिता’ कहा जाता है क्योंकि उनके द्वारा की गयी वर्गीकरण प्रणाली के आधार पर ही आधुनिक वर्गीकरण प्रणाली की नींव पड़ी है| जीवों का ये वर्गीकरण एक निश्चित पदानुक्रमिक दृष्टि से किया जाता है |

कोशिका : संरचना एवं कार्य

Feb 3, 2016
कोशिका जीवों की संरचनात्मक एवं कार्यात्मक इकाई है, जिसकी खोज रॉबर्ट हुक ने 1665 ई. में की थी | एक ही कोशिका वाले जीवों, जैसे- जीवाणु, प्रोटोज़ोआ और यीस्ट्स, आदि को एककोशिकीय प्राणी (Unicellular Organisms) और एक से अधिक कोशिका वाले जटिल जीवों को बहुकोशिकीय जीव (Multicellular Organisms) कहा जाता है |

पादप व जंतु कोशिका का वर्गीकरण

Feb 2, 2016
कोशिका जीवन की सबसे छोटी कार्यात्मक व संरचनात्मक इकाई है, जिसके अध्ययन को ‘साइटोलॉजी (Cytology)’ कहा जाता है | किसी भी जीव, चाहे वह पादप हो या जंतु, के जीव विज्ञान (Biology) को समझने के लिए कोशिका की संरचना व उसकी कार्यप्रणाली का अध्ययन आवश्यक है | पादप व जंतुओं की कोशिकाओं की संरचना अलग- अलग होती है, जो पादपों को जंतुओं से भिन्न करती है |

कम्प्यूटर का क्रमिक विकास

Jul 20, 2011
कम्प्यूटर का क्रमिक विकास

ब्रह्मांड

Jul 20, 2011
आज से 14 अरब वर्ष पूर्व ब्रह्मांड का कोई अस्तित्व नहीं था। पूरा ब्रह्मांड एक छोटे से अति सघन बिंदु में सिमटा हुआ था। अचानक एक जबर्दस्त विस्फोट - बिग बैंग (Big Bang) हुआ और ब्रह्मांड अस्तित्व में आया। महाविस्फोट के प्रारंभिक क्षणों में आदि पदार्थ (Proto matter) व प्रकाश का मिला-जुला गर्म लावा तेजी से चारों तरफ बिखरने लगा।

विद्युत

Jul 20, 2011
आज से हजारों वर्ष पूर्व करीब 600 ई. पू. में यूनान के वैज्ञानिक थेल्स ने पाया कि जब अम्बर नामक पदार्थ को ऊन के किसी कपड़े से रगड़ा जाता है तो उसमें छोटी-छोटी वस्तुओं को अपनी ओर आकर्षित करने का गुण आ जाता है। वह गुण जिसके कारण पदार्थ विद्युतमय होते हैं, 'विद्युत' (electricty) कहलाता है। जब आवेश किसी तार या चालक पदार्थ में बहता है तो उसे धारा विद्युत (current electricity) कहते हैं। आवेश दो प्रकार के - धनात्मक आवेश (+ve charge) व ऋणात्मक आवेश (-ve charge) होते हैं।

प्रकाश

Jul 20, 2011
प्रकाश, ऊर्जा का ही एक रूप है जो हमारी दृष्टिï के संवेदन का कारण है। प्रकाश द्वारा अपनाए गए सरल पथ को किरण (ray) कहते हैं। अनेक किरणों से किरण पुंज (beam) बनता है जो अपसारी (diverging) व अभिसारी (converging) हो सकते हैं।

तत्वों की सूची

Jul 20, 2011
जागरण जोश, रसायन की दुनिया में अब तक खोजे गए तत्वों की सूची प्रस्तुत कर रहा है| इस सूची में अब तक ज्ञात 118 तत्वों को शामिल किया गया है| इस सूची से सम्बंधित प्रश्न विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए लाभकारी हैं|

जीवन का रासायनिक आधार

Jul 20, 2011
जीवन के सभी आधारभूत रसायन (प्रोटीन, न्यूक्लिक अम्ल, कार्बोहाइड्रेट, विटामिन, हार्मोन इत्यादि) कुछ गिने-चुने मूल तत्वों जैसे कार्बन, हाइड्रोजन, ऑक्सीजन, नाइट्रोजन, सल्फर एवं फॉस्फोरस से बने होते हैं । इनमें सबसे प्रमुख कार्बन है। शरीर के लिए सबसे महत्वपूर्ण कार्बनिक यौगिक कार्बोहाइड्रेट, वसा एवं प्रोटीन हैं।

तरंग

Jul 20, 2011
प्रकाश व ध्वनि दोनों ही तरंग रूप में गमन करते हैं। पदार्थ के अंतरण के बिना ही ऊर्जा के अंतरण (गमन) को तरंग गति कहते हैं। तरंग के इस रूप को जिसमें कणों की गति तरंग गति के लम्बवत् हो अनुप्रस्थ तरंग (Transverse wave) कहलाते हैं,। प्रकाश की तरंग अनुप्रस्थ तरंग होती है। जब किसी माध्यम में यांत्रिक तरंगें इस प्रकार चलती हैं कि माध्यम के कण तरंग के संचरण की दिशा में समांतर कंपन करते हैं तो ऐसी तरंगों को अनुदैध्र्य (longitudinal) तरंगें कहते हैं।

भौतिक राशियाँ, मानक एवं मात्रक

Jul 20, 2011
भौतिकी के नियमों को जिन राशियों के पदों में व्यक्त किया जाता है, उन्हें भौतिक राशियाँ कहते हैं| भौतिक राशियों को दो वर्गों, अदिश राशि और सदिश राशि में बाँटा जा सकता है| भौतिक राशियों के मापन के लिए चार पद्धतियां प्रचलित हैं-(i) CGS पद्धति, (ii) FPS पद्धति, (iii) MKS पद्धति और (IV) अंतर्राष्ट्रीय मात्रक पद्धति| इस लेख में भौतिक राशि एवं उनके मात्रकों के बारे में विस्तृत विवरण दिया जा रहा है|

ऑक्सीकरण - अपचयन तथा विलेय, विलयन व विलायक

Jul 20, 2011
ऑक्सीकरण वह रासायनिक प्रक्रिया है, जिसके फलस्वरूप किसी तत्व या यौगिक में विद्युत् ऋणात्मक परमाणुओं का अनुपात बढ़ जाता है अथवा किसी यौगिक में विद्युत् धनात्मक परमाणुओं का अनुपात कम हो जाता है| अवकरण वह रासायनिक प्रक्रिया है, जिसके फलस्वरूप किसी तत्व या यौगिक में विद्युत् धनात्मक परमाणुओं का अनुपात बढ़ जाता है अथवा किसी यौगिक में विद्युत् ऋणात्मक परमाणुओं का अनुपात कम हो जाता है|

द्रव्य व उसकी प्रकृति

Jul 20, 2011
हर वह वस्तु जिसमें भार होता है और जगह घेरती है, उसे द्रव्य कहते हैं। किसी भी वस्तु में द्रव्य की मात्रा को द्रव्यमान (mass) कहते हैं। वर्गीकरण हम द्रव्य को शुद्ध पदार्थ तथा मिश्रण में वर्गीकृत कर सकते हैं। द्रव्य का वर्गीकरण तत्व, यौगिक और मिश्रण में भी किया जाता है।

बायोतकनीक व बायोइन्फोर्मेटिक के क्षेत्र में भविष्य की तकनीक

Jul 20, 2011
जेनेटिक इंजीनियरिंग , सिंथेटिक जीवविज्ञान व सिंथेटिक जीनावली, कृत्रिम फोटो संश्लेषण, विट्रीफिकेशन, हाइबरनेशन या सस्पेंडेड एनीमेशन,स्टेम सेल चिकित्सा,पर्सनलाइज्ड दवाएं

भिन्न प्रकार के रोग एवं उनके लक्षण

Jul 20, 2011
डिजीज (रोग) का शाब्दिक अर्थ है अ–स्वस्थ अर्थात सहज नहीं होना| दूसरे शब्दों में कहें तो शरीर के अलग– अलग हिस्सों का सही से काम नहीं करना| आंतरिक स्रोतों द्वारा होने वाले रोग जैविक या उपापचयी रोग कहलाते हैं, जैसे– हृदयाघात, गुर्दे का खराब होना आदि और बाहरी कारकों द्वारा होने वाले रोगों में क्वाशियोरकोर, मोटापा आदि | कुछ रोग असंतुलित आहार की वजह से सूक्ष्म–जीवों जैसे - विषाणु, जीवाणु, कवक आदि द्वारा भी होते हैं। इस आर्टिकल में विभिन्न प्रकार के मानव रोगों की सूची के बारे में जानेंगे |

औषधियाँ

Jul 20, 2011
औषधियाँ रोगों के इलाज में काम आती हैं। प्रारंभ में औषधियाँ पेड़-पौधों, जीव जंतुओं से प्राप्त की जाती थीं, लेकिन जैसे-जैसे रसायन विज्ञान का विस्तार होता गया, नए-नए तत्वों की खोज हुई तथा उनसे नई-नई औषधियाँ कृत्रिम विधि से तैयार की गईं।

शरीर के तंत्र

Jul 20, 2011
इन अंगों के अलग अलग कार्य होते हैं लेकिन ये एक दूसरे से अलग होकर स्वतंत्र रूप से काम नहीं कर सकते हैं| ये मानव शरीर में एक दूसरे से संपर्क में रहते हैं और अपने काम जैसे शरीर में हार्मोन्स के उत्पादन को विनियमित करने, शरीर की रक्षा और गतिशीलता प्रदान करने, शरीर के तापमान को नियंत्रित करने आदि के लिए एक दूसरे पर निर्भर रहते हैं।

पोषण (Nutrition)

Jul 20, 2011
पादप अपने कार्बनिक खाद्यों के लिए (कार्बोहाइड्रेट, वसा, प्रोटीन और विटामिन) केवल वायुमंडल पर ही निर्भर नहीं रहते हैं, इसलिए इन्हें स्वपोषी (Autotrophs) कहते हैं। कुछ जीवाणु भी सौर ऊर्जा या रासायनिक ऊर्जा का इस्तेमाल कर अपना भोजन स्वयं बना लेते हैं। उन्हें क्रमश: फोटोऑटोट्रॉफ या कीमोऑटोट्रॉफ कहते हैं। दूसरी तरफ जीव, कवक और अधिकांश जीवाणु, अपना भोजन निर्माण करने में सक्षम नहीं हैं और वे इसे वायुमंडल से प्राप्त करते हैं। ऐसे सभी जीवों को परपोषी (heterotroph) कहते हैं।

कोशिका (Cell)

Jul 20, 2011
1665 में सर्वप्रथम रॉबर्ट हुक ने कोशिका (Cell) का वर्णन किया था। दो जर्मन जीव वैज्ञानिकों - एम. श्लाइडन और टी. श्वान ने 1838-39 में कोशिका सिद्धान्त (Cell Theory) प्रतिपादित किया, जिसके अनुसार सभी जीवों का निर्माण कोशिकाओं से होता है।

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