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विज्ञान

General Knowledge for Competitive Exams

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तरंग

Jul 20, 2011
प्रकाश व ध्वनि दोनों ही तरंग रूप में गमन करते हैं। पदार्थ के अंतरण के बिना ही ऊर्जा के अंतरण (गमन) को तरंग गति कहते हैं। तरंग के इस रूप को जिसमें कणों की गति तरंग गति के लम्बवत् हो अनुप्रस्थ तरंग (Transverse wave) कहलाते हैं,। प्रकाश की तरंग अनुप्रस्थ तरंग होती है। जब किसी माध्यम में यांत्रिक तरंगें इस प्रकार चलती हैं कि माध्यम के कण तरंग के संचरण की दिशा में समांतर कंपन करते हैं तो ऐसी तरंगों को अनुदैध्र्य (longitudinal) तरंगें कहते हैं।

भौतिक राशियाँ, मानक एवं मात्रक

Jul 20, 2011
भौतिकी के नियमों को जिन राशियों के पदों में व्यक्त किया जाता है, उन्हें भौतिक राशियाँ कहते हैं| भौतिक राशियों को दो वर्गों, अदिश राशि और सदिश राशि में बाँटा जा सकता है| भौतिक राशियों के मापन के लिए चार पद्धतियां प्रचलित हैं-(i) CGS पद्धति, (ii) FPS पद्धति, (iii) MKS पद्धति और (IV) अंतर्राष्ट्रीय मात्रक पद्धति| इस लेख में भौतिक राशि एवं उनके मात्रकों के बारे में विस्तृत विवरण दिया जा रहा है|

ऑक्सीकरण - अपचयन तथा विलेय, विलयन व विलायक

Jul 20, 2011
ऑक्सीकरण वह रासायनिक प्रक्रिया है, जिसके फलस्वरूप किसी तत्व या यौगिक में विद्युत् ऋणात्मक परमाणुओं का अनुपात बढ़ जाता है अथवा किसी यौगिक में विद्युत् धनात्मक परमाणुओं का अनुपात कम हो जाता है| अवकरण वह रासायनिक प्रक्रिया है, जिसके फलस्वरूप किसी तत्व या यौगिक में विद्युत् धनात्मक परमाणुओं का अनुपात बढ़ जाता है अथवा किसी यौगिक में विद्युत् ऋणात्मक परमाणुओं का अनुपात कम हो जाता है|

द्रव्य व उसकी प्रकृति

Jul 20, 2011
हर वह वस्तु जिसमें भार होता है और जगह घेरती है, उसे द्रव्य कहते हैं। किसी भी वस्तु में द्रव्य की मात्रा को द्रव्यमान (mass) कहते हैं। वर्गीकरण हम द्रव्य को शुद्ध पदार्थ तथा मिश्रण में वर्गीकृत कर सकते हैं। द्रव्य का वर्गीकरण तत्व, यौगिक और मिश्रण में भी किया जाता है।

बायोतकनीक व बायोइन्फोर्मेटिक के क्षेत्र में भविष्य की तकनीक

Jul 20, 2011
जेनेटिक इंजीनियरिंग , सिंथेटिक जीवविज्ञान व सिंथेटिक जीनावली, कृत्रिम फोटो संश्लेषण, विट्रीफिकेशन, हाइबरनेशन या सस्पेंडेड एनीमेशन,स्टेम सेल चिकित्सा,पर्सनलाइज्ड दवाएं

भिन्न प्रकार के रोग एवं उनके लक्षण

Jul 20, 2011
डिजीज (रोग) का शाब्दिक अर्थ है अ–स्वस्थ अर्थात सहज नहीं होना| दूसरे शब्दों में कहें तो शरीर के अलग– अलग हिस्सों का सही से काम नहीं करना| आंतरिक स्रोतों द्वारा होने वाले रोग जैविक या उपापचयी रोग कहलाते हैं, जैसे– हृदयाघात, गुर्दे का खराब होना आदि और बाहरी कारकों द्वारा होने वाले रोगों में क्वाशियोरकोर, मोटापा आदि | कुछ रोग असंतुलित आहार की वजह से सूक्ष्म–जीवों जैसे - विषाणु, जीवाणु, कवक आदि द्वारा भी होते हैं। इस आर्टिकल में विभिन्न प्रकार के मानव रोगों की सूची के बारे में जानेंगे |

औषधियाँ

Jul 20, 2011
औषधियाँ रोगों के इलाज में काम आती हैं। प्रारंभ में औषधियाँ पेड़-पौधों, जीव जंतुओं से प्राप्त की जाती थीं, लेकिन जैसे-जैसे रसायन विज्ञान का विस्तार होता गया, नए-नए तत्वों की खोज हुई तथा उनसे नई-नई औषधियाँ कृत्रिम विधि से तैयार की गईं।

शरीर के तंत्र

Jul 20, 2011
इन अंगों के अलग अलग कार्य होते हैं लेकिन ये एक दूसरे से अलग होकर स्वतंत्र रूप से काम नहीं कर सकते हैं| ये मानव शरीर में एक दूसरे से संपर्क में रहते हैं और अपने काम जैसे शरीर में हार्मोन्स के उत्पादन को विनियमित करने, शरीर की रक्षा और गतिशीलता प्रदान करने, शरीर के तापमान को नियंत्रित करने आदि के लिए एक दूसरे पर निर्भर रहते हैं।

पोषण (Nutrition)

Jul 20, 2011
पादप अपने कार्बनिक खाद्यों के लिए (कार्बोहाइड्रेट, वसा, प्रोटीन और विटामिन) केवल वायुमंडल पर ही निर्भर नहीं रहते हैं, इसलिए इन्हें स्वपोषी (Autotrophs) कहते हैं। कुछ जीवाणु भी सौर ऊर्जा या रासायनिक ऊर्जा का इस्तेमाल कर अपना भोजन स्वयं बना लेते हैं। उन्हें क्रमश: फोटोऑटोट्रॉफ या कीमोऑटोट्रॉफ कहते हैं। दूसरी तरफ जीव, कवक और अधिकांश जीवाणु, अपना भोजन निर्माण करने में सक्षम नहीं हैं और वे इसे वायुमंडल से प्राप्त करते हैं। ऐसे सभी जीवों को परपोषी (heterotroph) कहते हैं।

कोशिका (Cell)

Jul 20, 2011
1665 में सर्वप्रथम रॉबर्ट हुक ने कोशिका (Cell) का वर्णन किया था। दो जर्मन जीव वैज्ञानिकों - एम. श्लाइडन और टी. श्वान ने 1838-39 में कोशिका सिद्धान्त (Cell Theory) प्रतिपादित किया, जिसके अनुसार सभी जीवों का निर्माण कोशिकाओं से होता है।

जीवधारी : लक्षण एवं वर्गीकरण

Jul 20, 2011
जीव विज्ञान जीवधारियों का अध्ययन है, जिसमें सभी पादप और जीव-जंतु शामिल हैं। विज्ञान के रूप में जीव विज्ञान का अध्ययन अरस्तू के पौधों और पशुओं के अध्ययन से शुरू हुआ, जिसकी वजह से उन्हें जीव विज्ञान का जनक कहा जाता हैै। लेकिन बायोलॉजी शब्द का प्रथम बार प्रयोग फ्रांसीसी प्रकृति विज्ञानी जीन लैमार्क ने किया।

क्वांटम कम्प्यूटर

Jul 16, 2011
भविष्य के कम्प्यूटरसन् 2030 अथवा उसके आसपास आपके डेस्क पर रखा हुआ कम्प्यूटर ट्रांजिस्टरों और चिपों के स्थान पर द्रव से भरा हो सकता है। यह क्वांटम कम्प्यूटर होगा। यह भौतिक नियमों के द्वारा संचालित नहीं होगा।

सुपर कम्प्यूटर

Jul 16, 2011
आधुनिक परिभाषा के अनुसार वे कम्प्यूटर जिनकी मेमोरी स्टोरेज (स्मृति भंडार) 52 मेगाबाइट से अधिक हो एवं जिनके कार्य करने की क्षमता 500 मेगा फ्लॉफ्स (Floating Point operations per second - Flops) हो, उन्हें सुपर कम्प्यूटर कहा जाता है। सुपर कम्प्यूटर में सामान्यतया समांतर प्रोसेसिंग (Parallel Processing) तकनीक का प्रयोग किया जाता है।

नेटवर्किंग

Jul 15, 2011
नेटवर्किंग एक ऐसी व्यवस्था है जिसमें कम्प्यूटर सूचनाओं और उससे स्रोतों का आदान-प्रदान करते हैं।

प्रोग्रामिंग भाषाएं

Jul 15, 2011
कम्प्यूटर के दो भाग होते हैं- हार्डवेयर और सॉफ्टवेयर। इलेक्ट्रॉनिक सर्किटों और इलेक्ट्रोमैकेनिकल साधनों से बनी पाँच कार्य यूनिटें कम्प्यूटर हार्डवेयर बनाती हैं। जबकि हार्डवेयर पर इस्तेमाल होने वाले प्रोग्राम या रूटीन, जिनसे विभिन्न कार्य किए जाते हों, सॉफ्टवेयर कहलाती हैं। प्रोग्राम लिखने की कला प्रोग्रामिंग कहलाती है। प्रत्येक कम्प्यूटर में अपने हार्डवेयर के अनुसार एक अद्वितीय निम्नस्तरीय भाषा या मशीन लैंग्वेज होती है।

कम्प्यूटरों का परिचय

Jul 15, 2011
कम्प्यूटर एक डाटा प्रोसेसिंग उपकरण होता है जो पढ़ व लिख सकता है, गणना और तुलना कर सकता है, डाटा की भारी मात्रा को उच्च गति, सटीकता और विश्वसनीयता के साथ स्टोर व प्रोसेस कर सकता है।

इंटरनेट का क्रमिक विकास

Jul 15, 2011
अमेरिकी रक्षा विभाग के एडवांस्ड रिसर्च प्रोजेक्ट्स एजेंसी (APRA) ने सं.रा.अमेरिका के चार विश्वविद्यालयों के कम्प्यूटरों की नेटवर्किंग करके इंटरनेट 'अप्रानेट' (APRANET) की शुरुआत की।

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