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विश्व विरासत स्थल

General Knowledge for Competitive Exams

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रानी की वाव (रानी की बावड़ी): विश्व धरोहर स्थल के बारे में तथ्य

रानी– की– वाव (रानी की बावड़ी) गुजरात राज्य के पाटण में स्थित है। इसका निर्माण 11वीं सदी में एक राजा की याद के तौर पर करवाया गया था। भारतीय उपमहाद्वीप में बावड़ियों को पानी के भंडारण की प्रणाली माना जाता है। रानी– की– वाव 'वास्तुशिल्पियों' की क्षमता को दर्शाता है। यह कुंआ संपत्ति के पश्चिमी किनारे पर बना है और इसमें शाफ्ट बने हैं, इसका व्यास 10 मीटर और गहराई 30 मीटर है।

एलोरा की गुफाएँ: हिन्दू, जैन व बौद्ध धर्म से संबन्धित गुफाएँ

एलोरा की गुफाएँ महाराष्ट्र के औरंगाबाद शहर के उत्तर-पश्चिम में 29 किमी. (18 मील) की दूरी पर स्थित है| इन गुफाओं का निर्माण छठी से बारहवीं सदी के बीच कलचूरी, चालुक्य और राष्ट्रकूट वंशों द्वारा कराया गया था| वर्ष 1983 में युनेस्को ने एलोरा की गुफाओं को ‘विश्व विरासत स्थल’ का दर्जा प्रदान किया | ये गुफाएँ हिन्दू, बौद्ध और जैन धर्म से संबन्धित हैं|

फ़तेहपुर सीकरी:मुगलकालीन स्थापत्य का नमूना

फ़तेहपुर सीकरी  का निर्माण सोलहवीं सदी के उत्तरार्द्ध में मुगल बादशाह अकबर ने कराया था| फ़तेहपुर सीकरी  मात्र दस वर्षों तक मुगल साम्राज्य की राजधानी रही थी| अकबर ने फ़तेहपुर सीकरी में रहने वाले सूफी संत शेख सलीम चिश्ती के सम्मान में अपनी राजधानी को आगरा से फ़तेहपुर सीकरी स्थानांतरित कर दिया था| युनेस्को ने इसे ‘विश्व विरासत स्थल’ का दर्जा प्रदान किया है|

कोणार्क का सूर्य मंदिर: भारत का ‘ब्लैक पैगोडा’

Mar 23, 2016
'कोणार्क का सूर्य मंदिर' सूर्य देवता को समर्पित एक मंदिर है,जो भारत में पुरी (ओडिशा राज्य) के पास स्थित है। ऐसा माना जाता है कि इस मंदिर का निर्माण पूर्वी गंग वंश के राजा नरसिंहदेव प्रथम ने 1250 ई. में कराया था| यूनेस्को ने वर्ष 1984 में इसे 'विश्व विरासत स्थल' का दर्जा प्रदान किया था| समुद्री यात्रा करने वाले लोग एक समय में इसे 'ब्लैक पगोडा' कहते थे|

महाबलीपुरम के स्मारकों का समूहः विश्व धरोहर स्थल के बारे में तथ्य

Aug 11, 2016
महाबलीपुरम के स्मारक भारत के तमिलनाडु राज्य के कांचीपुरम जिले में बंगाल की खाड़ी के कोरोमंडल तट पर स्थित हैं। यहां करीब 40 अभयारण्य हैं जिनमें दुनिया का सबसे बड़ा खुली– हवा वाला चट्टानी आश्रय स्थल भी है। इन स्मारकों में शामिल हैं– धर्मराज रथ, अर्जुन रथ, भीम रथ, द्रौपदी रथ, नकुल सहदेव रथ के पांच रथ और गणेश रथ भी है। वर्ष 1984 में इसे विश्व धरोहर स्थल घोषित किया गया था।

अजंता की गुफाएँ : भारतीय चित्रकला का विश्व विरासत स्थल

Mar 15, 2016
अजंता की गुफाएँ औरंगाबाद के उत्तर में 107 किलोमीटर की दूरी पर स्थित हैं। इन गुफाओं की खोज 1819 में ब्रिटिश सेना की मद्रास रेजीमेंट के एक सैन्य अधिकारी द्वारा शिकार खेलते समय की गई थी। ये गुफाएँ अपनी भित्ति-चित्रकला के लिए प्रसिद्ध हैं | अजंता की गुफाएँ घोड़े की नाल के आकार वाली एक चट्टान की सतह पर खोदी गई हैं। अजंता की गुफाओं को वर्ष 1983 में यूनेस्को ने 'विश्व विरासत स्थल' की सूची में शामिल किया था |

खजुराहो मंदिर : नागर शैली के हिन्दू व जैन मंदिर

Mar 15, 2016
मध्य प्रदेश में स्थित खजुराहो के मंदिरों का निर्माण चंदेल वंश के शासकों द्वारा 900 से 1130 ई. के मध्य किया गया था | ये मंदिर अपनी नागर स्थापत्य शैली और कामुक मूर्तियों के लिए प्रसिद्ध हैं | यहाँ के मंदिर हिन्दू व जैन धर्म से संबन्धित हैं और यहाँ का सबसे प्रसिद्ध मंदिर ‘कंदारिया महादेव मंदिर’ है | खजुराहो के मंदिरों को 1986 ई. में युनेस्को ने ‘विश्व विरासत स्थल’ का दर्जा प्रदान किया था |

छत्रपति शिवाजी टर्मिनस ( भूतपूर्व विक्टोरिया टर्मिनस): तथ्यों पर एक नजर

Aug 9, 2016
छत्रपति शिवाजी टर्मिनस (इसे पहले विक्टोरिया टर्मिनस स्टेशन के नाम से जाना जाता था) मुंबई में है और भारत में विक्टोरियन वास्तुकला का उत्कृष्ट उदारहण है। इस भवन का डिजाइन ब्रिटिश शिल्पकार एफ. डब्ल्यू. स्टीवेंस ने बनाया था| वर्ष 1878 में इसका निर्माण कार्य शुरु हुआ था और दस वर्षों के बाद यह बनकर तैयार हुआ। यह इस उपमहाद्वीप का पहला टर्मिनस स्टेशन था।

हुमायूँ का मकबरा (1993), दिल्ली: तथ्यों पर एक नजर

Aug 25, 2016
हुमायूं की मृत्यु 1556 में हुई थी, और उसकी विधवा हमीदा बानो बेगम जिसे हाजी बेगम के रूप में भी जाना जाता है, उसने हूमांयू की मृ्त्यु के चौदह वर्षों के बाद 1569 में इस मकबरे (दिल्ली) का निर्माण कार्य शुरू किया था। मकबरे का निर्माण 15 लाख रुपये (1.5 मिलियन) की लागत से किया गया था। इस मकबरे का वास्तुकार मिरक मिर्जा घियाथ (Mirak Mirza Ghiyath) नामक एक फारसी था।

जंतर मंतर, जयपुरः विश्व धरोहर स्थल के तथ्यों पर एक नजर

Aug 25, 2016
जयपुर, राजस्थान का जंतर मंतर स्मारक उन्नीस वास्तु खगोलीय उपकरणों का संकलन है। इसका निर्माण राजपूत राजा सवाई जय सिंह द्वितीय द्वारा करवाया गया था। यह 1738 ई. में बन कर पूरा हुआ था। राजा सवाई जय सिंह द्वितीय ने पूरे भारत में 5 जंतर–मंतर बनवाई थी | ये हैं:- दिल्ली, जयपुर, उज्जैन, वाराणसी और मथुरा हैं।

यूनेस्को द्वारा घोषित भारत के 32 विश्व धरोहर स्थल

Jul 26, 2016
यूनेस्को का विश्व धरोहर स्थल विशेष भौतिक या सांस्कृतिक महत्व का कोई भी स्थान जैसे जंगल, झील, भवन, द्वीप, पहाड़, स्मारक, रेगिस्तान, परिसर या शहर, हो सकता है। पूरी दुनिया में फिलहाल 981 विश्व धरोहर स्थल हैं। हालांकि इनमें से 32 विश्व विरासत संपत्तियां भारत में हैं। इन 32 में से 25 सांस्कृतिक संपत्तियां और 7 प्राकृतिक स्थल हैं।

भीमबेटका पाषाण आश्रयः तथ्यों पर एक नजर

Jul 28, 2016
भीमबेटका की गुफाएं मध्य प्रदेश के रायसेन जिले में हैं। ये पाषाणी आश्रय मध्य भारतीय पठार के दक्षिणी छोर पर विंध्य पर्वतमाला के तलहटी में हैं। डॉ. वी.एस. वाकाणकर (प्रख्यात पुरातत्वविदों में से एक), ने 1958 में इन गुफाओं की खोज की थी। 'भीमबेटका' शब्द, 'भीम बाटिका' से बना है। इन गुफाओं का नाम महाभारत के पांच पांडवों में से एक 'भीम' के नाम पर रखा गया है। भीमबेटका का अर्थ है– भीम के बैठने का स्थान।

यूनेस्को की विश्व धरोहर सूची के लिए 15 भारतीय स्थलों की दावेदारी

Jul 28, 2016
यूनेस्को विश्व भर में मानवता के लिए उत्कृष्ट माने जाने वाले सांस्कृतिक एवं प्राकृतिक विरासतों की पहचान, संरक्षण और सुरक्षा को प्रोत्साहित करता है। विश्व विरासत समिति ने भारत में विश्व सांस्कृतिक एवं प्राकृतिक विरासत स्थलों की सूची में समावेशन के योग्य बिशनुपुर मंदिर, स्वर्ण मंदिर, लोटस टेम्पल , मुगल गार्डन और माजुली नदी द्वीप आदि शामिल हैं।

बोधगया में महाबोधि मंदिर परिसर (एक विश्व विरासत स्थल): एक नज़र तथ्यों पर

Aug 23, 2016
महाबोधि मंदिर परिसर भगवान बुद्ध के जीवन से संबंधित चार पवित्र स्थानों में से एक है और विशेष रूप से इसे आत्मज्ञान की प्राप्ति के लिए जाना जाता है। पहले मंदिर का निर्माण स्रमाट अशोक ने तीसरी शताब्दी ई.पू किया था और वर्तमान मंदिरों को 5वीं या 6ठीं  शताब्दी ईसा पूर्व के दौरान निर्मित किया गया था। यह वह स्थान है जिसके बारे में कहा जाता है कि भगवान बुद्ध ने यहां ज्ञान प्राप्त किया था।

चंपानेर– पावागढ़ पुरातात्विक उद्यानः तथ्यों पर एक नजर

Jul 28, 2016
यूनेस्को का विश्व धरोहर स्थल चंपानेर– पावागढ़ पुरातत्व उद्यान, भारत के गुजरात राज्य के पंचमहल जिले में स्थित है। यह उद्यान गुजरात के सुल्तान महमूद बेगदा द्वारा बनाए गए ऐतिहासिक शहर चंपानेर के पास है। पावागढ़ की पहाड़ी लाल–पीले रंग के चट्टानों से बनी है जो भारत की सबसे पुरानी चट्टानों में से एक है। यह पहाड़ समुद्र तल से करीब 800 मीटर ऊंचा है।

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