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परीक्षापयोगी सामान्य ज्ञान

General Knowledge for Competitive Exams

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मराठा के अधीन पेशवा

Oct 24, 2015
मराठा एक अत्यधिक लड़ाकू/हिंसक जाति थी जिसने दक्कन क्षेत्र में शक्तिशाली संघ की स्थापना की.मुग़ल शासक औरंगजेब की मृत्यु के बाद वे राजनीति और सत्ता के केंद्र में आ गए .स्थानीय नेता शिवाजी ने 1674 ई. में स्वतंत्र मराठा राज्य की स्थापना की. उनकी प्रशासनिक प्रणाली हिन्दू और मुस्लिम संस्थाओं का मिश्रण थी. पेशवा राज की स्थापना के बाद मराठों की प्रशासनिक प्रणाली में कई परिवर्तन किये गए. मराठा संघ के उदय में राजाराम द्वारा मराठा सरदारों को जागीरें प्रदान करने के कदम का महत्वपूर्ण योगदान था.

मराठा प्रशासन

Oct 24, 2015
मराठा राज्य ने हिन्दुओं को उच्च पदों पर नियुक्त किया और फारसी की जगह मराठी को राजभाषा का दर्जा दिया.उन्होंने राजकीय प्रयोग हेतु ‘राज व्याकरण कोश’ नाम से स्वयं का एक शब्दकोश निर्मित किया. मराठा साम्राज्य का अध्ययन निम्नलिखित तीन शीर्षकों के तहत किया जा सकता है-केंद्रीय प्रशासन,राजस्व प्रशासन और सैन्य प्रशासन. मराठों की प्रशासनिक प्रणाली बहुत हद तक दक्कन राज्यों के प्रशासनिक व्यवहारों से प्रभावित थी.फिर भी मराठों का अपने समकालीन राज्यों ,विशेष रूप से बीजापुर और अहमदनगर, के संदर्भ में प्रशासनिक एवं सैन्य प्रणाली की दृष्टि से महत्वपूर्ण स्थान था

शिवाजी

Oct 24, 2015
सत्रहवी सदी के प्रारंभिक वर्षों में जब पूना जिले के भोंसले परिवार ने स्थानीय निवासी होने का लाभ उठाते हुए अहमदनगर राज्य से सैनिक व राजनीतिक लाभ प्राप्त किये तो एक नई लड़ाकू जाति का उदय हुआ जिसे ‘मराठा’ कहा गया. उन्होंनें बड़ी संख्या में मराठा सरदारों और सैनिकों को अपनी सेनाओं में भर्ती किया.शिवाजी शाह जी भोंसले और जीजा बाई के पुत्र थे. शिवाजी का पालन-पोषण पूना में उनकी माता और एक योग्य ब्राह्मण दादाजी कोंडदेव के देख-रेख में हुआ था.

मुग़ल उत्तराधिकारी

Oct 24, 2015
औरंगजेब की मृत्यु ने मुग़ल साम्राज्य के पतन की नींव डाली क्योंकि उसकी मृत्यु के पश्चात उसके तीनों पुत्रों-मुअज्जम,आज़म और कामबक्श के मध्य लम्बे समय तक चलने वाले उत्तराधिकार के युद्ध ने शक्तिशाली मुग़ल साम्राज्य को कमजोर कर दिया. औरंगजेब ने अपने तीनों पुत्रों को प्रशासनिक उद्देश्य से अलग अलग क्षेत्रों का गवर्नर बना दिया था,जैसे-मुअज्ज़म काबुल का,आज़म गुजरात और कामबक्श बीजापुर का गवर्नर था .इसी कारण इन तीनों के मध्य मतभेद पैदा हुए,जिसने उत्तराधिकार को लेकर गुटबंदी को जन्म दिया.

खिलजी वंश के तहत आर्थिक नीति और प्रशासन

Oct 15, 2015
खिलजी शासकों ने मध्य एशिया में अपने वंश की छाप छोड़ी थी और ये तुर्की मूल के थे। भारत में दिल्ली आने से पहले वे वर्तमान के अफगानिस्तान में लंबे समय तक रहे थे। जलाल-उद-दीन फिरोज खिलजी, अलाउद्दीन खिलजी, मलिक काफूर, शिहाब-उद-दीन उमर, मुबारक शाह, खुसरो खान और गाजी मलिक कुछ महत्वपूर्ण खिलजी शासकों में से एक थे।

दिल्ली सल्तनत के दौरान आर्थिक स्थितियां

Oct 15, 2015
दिल्ली सल्तनत के दौरान भारत की आर्थिक स्थिति बहुत संपन्न थी। वास्तव में इसी भारी धन सपंदा के कारण महमूद गजनी ने 1006 से लेकर 1023 के दौरान भारत पर 17 बार आक्रमण किया था। हर बार वह खजाने के एक बडे हिस्से को अपने साथ ले गया था। अला-उद-दिन-खिलजी के शासनकाल के दौरान मलिक काफूर ने 1311 में दक्षिण भारत से इतना धन लूट लिया था कि उत्तर में मुद्रा के मूल्य में गिरावट होने लगी थी।

बौद्ध संगीतियाँ

Sep 25, 2015
पूर्वकालीन बौद्ध धर्म के वृतांत में छह बौद्ध संगीतियो का वर्णन किया गया है। यह वृतांत पहली सहस्राब्दी ई.पू. के आरम्भ से 5 वीं शताब्दी ईसा पूर्व में ऐतिहासिक बुद्ध के परिनिर्वाण के बाद की अवधि के दौरान विस्तारित हुआ था। यह एक सांप्रदायिक संघर्ष और संभावित फूट की भी कहानी है जिसके परिणामस्वरूप दो प्रमुख सम्प्रदायों, थेरवाद और महायान की उत्पत्ति हुई.

महाजनपद

Sep 25, 2015
छठी शताब्दी ईसा पूर्व में कुछ साम्राज्यों के विकास में वृद्धि हुयी थी जो बाद में प्रमुख साम्राज्य बन गये और इन्हें महाजनपद या महान देश के नाम से जाना जाने लगा था। आर्य यहां की सबसे प्रभावशाली जनजाति थी जिसे 'जन' कहा जाता था जिससे जनपद शब्द की उत्पत्ति हुयी थी। जहां जन का अर्थ "लोग" और पद का अर्थ "पैर" होता था। जनपद वैदिक भारत के प्रमुख साम्राज्य थे। महाजनपदों में एक नये प्रकार का सामाजिक-राजनीतिक विकास हुआ था। महाजनपद विशिष्ट भौगोलिक क्षेत्रों में स्थित थे। यहां इस प्रकार के सोलह महाजनपद थे।

विजयनगर साम्राज्य के सम्राट या शासक

Sep 25, 2015
दक्षिण भारत में मुस्लिम वर्चस्व को निशाना बनाकर विजयनगर एक ऐसे शक्तिशाली साम्राज्य के रूप में उभर कर सामने आया जिसमें कई महान शासकों ने शासन किया था। 15 वीं शताब्दी के आसपास साम्राज्य में आयी गिरावट को कृष्णदेव राय के नेतृत्व में कंमाडर सलुव नरसिंह देव राय और जनरल तुलुव नरस नायक द्वारा फिर से संगठित किया गया। साम्राज्य का पतन तब शुरू हुआ जब उसे उत्तरी गठबंधन के क्रोध का सामना करना पड़ा था। साम्राज्य के अंतिम शासक, श्रीरंग प्रथम और वेंकट द्वितीय थे जिनके उत्तराधिकारी राम देव राय और वेंकट तृतीय तब तक बने रहे जब तक सामंतों ने अपनी स्वतंत्रता की घोषणा नहीं की थी।

बुद्ध की शिक्षाएं

Sep 25, 2015
बुद्ध की ज्ञान प्राप्ति के 49 दिनों के बाद उनसे पढ़ाने के लिए अनुरोध किया गया था। इस अनुरोध के परिणामस्वरूप योग द्वारा बुद्ध ने धर्म के पहले चक्र को पढ़ाया था। इन शिक्षणों में चार आर्य सत्य और अन्य प्रवचन सूत्र शामिल थे जो हीनयान और महायान के प्रमुख श्रोत थे।

हर्षवर्धन काल

Sep 4, 2015
हर्षवर्धन के साम्राज्य की राजधानी कन्नौज थी। उसने 606 ईस्वी से 647 ईस्वी तक शासन किया था। उसका साम्राज्य पंजाब से उत्तरी उड़ीसा तथा हिमालय से नर्मदा नदी के तट तक फैला हुआ था। हर्षवर्धन पुष्यभूति राजवंश से संबंध रखता था जिसकी स्थापना नरवर्धन ने 5वीं या छठी शताब्दी ईस्वी के आरम्भ में की थी। यह केवल थानेश्वर के राजा प्रभाकर वर्धन (हर्षवर्धन के पिता) के अधीन था। पुष्यभूति समृद्ध राजवंश था और इसने महाराजाधिराज का खिताब प्राप्त किया था। हर्षवर्धन 606 ईस्वी में सिंहासन का उत्तराधिकारी बना था।

सातवाहन का युग

Sep 4, 2015
सातवाहन राजवंश भारत में 230 BC के लगभग अस्तित्व में आया और आंध्रा प्रदेश में धरानिकोटा और अमरावती से महाराष्ट्र में जुन्नार और प्रतिष्ठान तक फैला | यह साम्राज्य 450 साल तक रहा जोकि लगभग 220 AD है | वास्तव में सातवाहन ने मौर्य साम्राज्य के दास के तौर पर शुरुआत की और इनके पतन के बाद दक्षिण भारत में स्वाधीन साम्राज्य के रूप में उभरे |

शुंग, कनव और छेदि राजवंश

Sep 4, 2015
शुंग राजवंश ने 185BC से 73 BC तक और कनव राजवंश ने 73 BC से 28 BC की अवधि तक शासन किया | शुंग राजवंश की राजधानी विदिषा (मध्य प्रदेश) और कनव राजवंश की राजधानी पाटलीपुत्र थी | प्राचीन भारत में एक प्रसिद्ध क्षत्रिय जाति थी जिसे छेदि के नाम से जाना जाता था | छेदि लोगों का ब्राह्मणो, बौद्धों और जैन साहित्य में विशिष्टता से उल्लेख किया गया है | छेदि राजवंश 16 महाजनपद में से एक है जिसका अस्तित्व छठी सदी BC में हुआ था |

भारतीय प्रायद्वीप में गुप्त के बाद के राजवंश

Sep 4, 2015
5वीं शताब्दी के अंत के दौरान गुप्त साम्राज्य का बिखराव शुरू हो गया था। शाही गुप्तों के समाप्त होने के साथ-साथ मगध और इसकी राजधानी पाटलिपुत्र ने भी अपना महत्व खो दिया था। इसलिए, गुप्त काल के बाद की अवधि प्राकृतिक लिहाज से बहुत अशांत थी। गुप्तों के पतन के बाद उत्तर भारत में पांच प्रमुख शक्तियां फैल गयी थी। ये शक्तियां थी: हूण, मौखरि, मैत्रक, पुष्यभूति, गौड।

मौर्य साम्राज्य: इसका पतन और महत्व

Sep 4, 2015
232 ईसा पूर्व में अशोक की मौत के बाद मौर्य साम्राज्य के पतन की शुरूआत हो गयी थी। 185 ई.पू.-183ई.पू. में अंतिम राजा बृहद्रथ की हत्या उसके सेनापति पुष्यमित्र शुंग ने कर दी थी जो एक ब्राह्मण था। अशोक/अशोका की मृत्यु के बाद मौर्य वंश के पतन के में तेजी आ गयी थी। इसका एक स्पष्ट कारण कमजोर राजाओं का उत्तराधिकार था।

मौर्य इतिहास के स्त्रोत

Sep 2, 2015
मौर्य साम्राज्य की नींव ने भारत के इतिहास में एक नए युग का प्रारम्भ किया | पहली बार भारत ने राजनीतिक समानता को प्राप्त किया | इसके अलावा, इस युग से इतिहास लिखना अब और भी ज्यादा आसान हो गया क्यूंकि अब घटना क्रम व स्त्रोत बिलकुल सटीक थे | स्वदेशी और विदेशी स्त्रोतों के अलावा, इस युग का इतिहास लिखने के लिए कई शिलालेखों के दस्तावेज़ भी उपलबद्ध हैं | समकालीन साहित्य और पुरातात्विक खोज इसकी जानकारी के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण हैं |

मौर्य राजवंश

Sep 2, 2015
चौथी सदी BC में नन्दा के राजाओं ने मगध राजवंश पर शासन किया और यह राजवंश उत्तर का सबसे ताकतवर राज्य था | एक ब्राह्मण मंत्री चाणक्य जिसे कौटिल्य / विष्णुगुप्त ने नाम से भी जाना गया ने मौर्य परिवार से चन्द्रगुप्त नामक नवयुवक को प्रशिक्षण दिया | चन्द्रगुप्त ने अपने सेना का अपने आप संगठन किया और 322 BC में नन्दा का तख़्ता पलट दिया |

भारत में आर्यों का भौतिक और सामाजिक जीवन

Sep 2, 2015
यह माना गया है कि आर्य भारत के मूल निवासी नहीं थे | कुछ इतिहासविद कहते हैं कि आर्यों का वास्तविक घर मध्य एशिया में था | दूसरे इतिहासविदों का मत था कि इनका वास्तविक घर दक्षिणी रूस ( कैस्पियन समुद्र के पास ) या दक्षिण-पूर्व यूरोप (ऑस्ट्रिया और हंगरी) में था | वे आर्य जो भारत में बस गए थे, इंडो-आर्यन कहलाए |

मगध का साम्राज्य

Sep 2, 2015
मगध साम्राज्य ने भारत में 684 BC – 320 BC तक शासन किया | मगध साम्राज्य का दो महान काव्य रामायण और महाभारत में उल्लेख किया गया है | मगध साम्राज्य पर 544 BC से 322 BC तक शासन करने वाले तीन राजवंश थे | पहला था हर्यंका राजवंश (544 BC से 412 BC ), दूसरा था शिशुनाग राजवंश (412 BC से 344 BC ) और तीसरा था नन्दा राजवंश (344 BC से 322 BC )|

जनपद और महाजनपद

Sep 2, 2015
जनपद वैदिक भारत के प्रमुख राज्य थे | 6ठी सदी BC तक लगभग 22 विभिन्न जनपद थे | उत्तर प्रदेश और बिहार के भागों में लोहे के विकास के साथ, जनपद ओर ज़्यादा ताकतवर हो गए और महाजनपद में तब्दील हो गए | 600 BC से 325 BC के दौरान भारत के उपमहाद्वीपों में इस तरह के 16 महाजनपद थे |

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